देश के कई शहरों में वायु गुणवत्ता न केवल इंसानों बल्कि दूसरे जीवों के लिए भी सुरक्षित नहीं है; फोटो: सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई)  
वायु

हवा में जहर: बल्लभगढ़ में बढ़कर 344 पर पहुंचा एक्यूआई, दिल्ली में भी खराब हुई वायु गुणवत्ता

22 अप्रैल 2026 को 248 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 10.9 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं दूसरी तरफ 41.5 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं

Lalit Maurya

  • देश में वायु प्रदूषण की स्थिति एक बार फिर चिंताजनक स्तर पर पहुंचती दिख रही है। 22 अप्रैल 2026 को 248 शहरों के सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से साफ है कि जहां महज 10.9 फीसदी शहरों में ही हवा साफ है, वहीं 41.5 फीसदी शहरों में हालात गंभीर बने हुए हैं।

  • इस बीच हरियाणा का बल्लभगढ़ देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 344 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। महज 24 घंटों में यहां प्रदूषण में 60 अंकों का तेज उछाल दर्ज हुआ है, और स्थिति विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 650 फीसदी अधिक पहुंच गई है।

  • प्रदूषण के इस बढ़ते संकट में ओडिशा का अंगुल (308), गाजियाबाद (304) और ब्यासनगर (302) जैसे शहर भी ‘बेहद खराब’ श्रेणी में शामिल हैं, जबकि कटक और ग्रेटर नोएडा में भी हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। दूसरी ओर, राजधानी दिल्ली में भी हवा की गुणवत्ता तेजी से बिगड़ी है, जहां एक्यूआई 177 से बढ़कर 216 पर पहुंच गया, जिससे हवा ‘मध्यम’ से ‘खराब’ श्रेणी में आ गई है।

  • हालांकि फरीदाबाद में थोड़ी राहत देखने को मिली है, जहां एक्यूआई घटकर 86 पर आ गया।

  • रुझान यह भी दिखाते हैं कि देशभर में प्रदूषण का स्वरूप जटिल होता जा रहा है, कई शहरों में पीएम2.5 और पीएम10 जैसे महीन कण हवा में हावी हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में कार्बन और ओजोन का स्तर भी खतरनाक हो रहा है। चिंताजनक बात यह है कि ‘खराब’ श्रेणी वाले शहरों की संख्या में एक दिन में 58 फीसदी से ज्यादा का उछाल आया है, जो तेजी से बिगड़ते हालात का संकेत है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 22 अप्रैल 2026 को देश में बल्लभगढ़ सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 344 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि कल बल्लभगढ़ में वायु गुणवत्ता सूचकांक 284 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 60 अंकों का भारी उछाल आया है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि बल्लभगढ़ की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। बल्लभगढ़ में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 650 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में पुदुचेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 21 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर बल्लभगढ़ की तुलना पुदुचेरी से करें तो वहां स्थिति 16 गुणा खराब है।

इससे पहले कल देश में अंगुल की स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 301 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज 7 अंकों के उछाल के साथ वहां सूचकांक 308 पर पहुंच गया है। 

राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 177 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 216 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 39 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।

बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 93 पर पहुंच गया था। इसके बाद 01 अप्रैल को सूचकांक 113 दर्ज क्या गया। वहीं आज सूचकांक 114 रिकॉर्ड किया गया है। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 130 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 86 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वायु गुणवत्ता आज मध्यम से संतोषजनक हो गई है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 22 अप्रैल 2026 को 248 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 10.9 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 47.6 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 41.5 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 22.7 फीसदी का इजाफा हुआ है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 4.1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से करीब 12.2 फीसदी की कमी आई है। दूसरी तरफ खराब हवा वाले शहरों की गिनती में करीब 58.3 फीसदी का उछाल आया है, जोकि चिंता का विषय है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में अंगुल (308) दूसरे जबकि गाजियाबाद (304) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह ब्यासनगर (302) चौथे स्थान पर है। कटक-ग्रेटर नोएडा में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 302 और 289 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

मेरठ (284) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में रोहतक (279), चरखी दादरी (276) और सिंगरौली (265) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में ओडिशा के तीन शहर (अंगुल, कटक, ब्यासनगर) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि रोहतक, चरखी दादरी, जींद, बहादुरगढ़, मानेसर, धारूहेड़ा, पंचगांव, मुजफ्फरपुर, यमुना नगर, करनाल, चंद्रपुर, वातवा, नारनौल, नंदेसरी, वडोदरा, बर्नीहाट (असम), ग्वालियर, पंचकुला, परभनी, भोपाल, मुरादाबाद, मोतिहारी, आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं बल्लभगढ़, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, मेरठ, सिंगरौली, बागपत, बर्नीहाट (मेघालय), हापुड़, बुलंदशहर, बद्दी, दिल्ली, नोएडा, कुरुक्षेत्र, बिलीपाड़ा, हाजीपुर, गुरुग्राम, खुर्जा, भिवाड़ी, मुजफ्फरनगर, मंडी गोबिंदगढ़, पटना, भागलपुर, नयागढ़, पानीपत, लखनऊ, जोरापोखर, धनबाद, सीकर, हनुमानगढ़, मेहसाणा, पलवल, अंकलेश्वर, चूरू, आगरा, बेलापुर, जयपुर, विशाखापत्तनम, तालचेर, सोनीपत, झुंझुनू, बारां, कुंजेमुरा, टोंक, पिंपरी-चिंचवाड़, पटियाला, बीकानेर, नवी मुंबई, दमोह, गोरखपुर, नांदेड़, चामराजनगर, गांधीनगर, गया, अहमदाबाद, कानपुर, बेगूसराय, धुले, सहरसा, अलवर, नागपुर, बारीपाड़ा, चंडीगढ़ आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 10.9 फीसदी यानी महज 27 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में चेन्नई, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, देहरादून, गुवाहाटी, कडप्पा, कलबुर्गी, कोहिमा, लातूर, मदिकेरी, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नेल्लोर, पेरुंदुरई, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, रामनाथपुरम, रूपनगर, सिलचर, तिरुवनंतपुरम, विजयपुरा शामिल हैं।

इसी तरह देश के 118 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बांसवाड़ा, बरेली, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बेंगलुरु, भीलवाड़ा, भिवंडी, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, बक्सर, छपरा, कोयंबटूर, दौसा, देवास, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फरीदाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जालोर, झांसी, जोधपुर, कैथल, कल्याण, कन्नूर, करौली, कटिहार, क्योंझर, खन्ना, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, कोरबा, कोटा, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाद, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुंगेर, नागांव, नागौर, नासिक, पाली, पंपोर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, राजकोट, राजसमंद आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 79 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अलवर, अमृतसर, अंकलेश्वर, औरंगाबाद (बिहार), बारां, बारीपाड़ा, बेगूसराय, बेलापुर, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भिवाड़ी, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, बर्नीहाट (असम), चामराजनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चित्तौड़गढ़, चूरू, दमोह, धनबाद, धारूहेड़ा, धुले, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुरुग्राम, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हिसार, जयपुर, झालावाड़, झुंझुनू, जोरापोखर, कानपुर, करनाल, कटनी, खुर्जा, कुंजेमुरा, लखनऊ, मंडी गोबिंदगढ़, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नागपुर, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नवी मुंबई, नयागढ़, पलवल, पंचगांव, पंचकुला, पानीपत, परभनी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, सागर, सहरसा, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरसा, सोनीपत, तालचेर, टोंक, वडोदरा, वातवा, विशाखापत्तनम, वृंदावन, यमुना नगर आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश में बद्दी, बागपत, बहादुरगढ़, बारबिल, बिलीपाड़ा, बुलंदशहर, बर्नीहाट (मेघालय), चरखी दादरी, दिल्ली, ग्रेटर नोएडा, हापुड़, जींद, कुरुक्षेत्र, मानेसर, मेरठ, नोएडा, रोहतक, सिंगरौली, श्री गंगानगर में स्थिति ‘खराब’ है।

वहीं अंगुल (308), बल्लभगढ़ (344), ब्यासनगर (302), कटक (302) और गाजियाबाद (304) में स्थिति बेहद खराब है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 248 में से महज 27 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 118 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 21 अप्रैल को यह आंकड़ा 123 दर्ज किया गया था।

79 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज बल्लभगढ़ में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 344 दर्ज किया गया। गौरतलब है कि कल बल्लभगढ़ में वायु गुणवत्ता सूचकांक 284 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 60 अंकों का भारी उछाल आया है। यहां वायु गुणवत्ता ‘खराब’ से ‘बेहद खराब’ हो गई है।

इससे पहले कल देश में अंगुल की स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 301 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज 7 अंकों के उछाल के साथ वहां सूचकांक 308 पर पहुंच गया है।   

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 177 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 216 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 39 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 130 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 86 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वायु गुणवत्ता आज मध्यम से संतोषजनक हो गई है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 22 अप्रैल को ब्यासनगर चौथे स्थान पर है, वहीं अंगुल (308) दूसरे, जबकि गाजियाबाद (304) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 114, गाजियाबाद में 304, गुवाहाटी में 47, गुरूग्राम में 184, नोएडा में 215, ग्रेटर नोएडा में 289 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 79 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 155, चेन्नई में 47, चंडीगढ़ में 102, हैदराबाद में 73, जयपुर में 128 और पटना में 164 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 27 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अंबाला, बेतिया, भिलाई, भिवानी, चेन्नई, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, देहरादून, गुवाहाटी, कडप्पा, कलबुर्गी, कोहिमा, लातूर, मदिकेरी, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नेल्लोर, पेरुंदुरई, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, रामनाथपुरम, रूपनगर, सिलचर, तिरुवनंतपुरम, विजयपुरा, विरार, यादगीर शामिल हैं।

वहीं अगरतला, अहमदनगर, आइजोल, अजमेर, अकोला, अमरावती (आंधप्रदेश), अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अनंतपुर, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद महाराष्ट्र), बदलापुर, बागलकोट, बालासोर, बांसवाड़ा, बरेली, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बेंगलुरु, भीलवाड़ा, भिवंडी, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, बक्सर, छपरा, कोयंबटूर, दौसा, देवास, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फरीदाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जालोर, झांसी, जोधपुर, कैथल, कल्याण, कन्नूर, करौली, कटिहार, क्योंझर, खन्ना, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, कोरबा, कोटा, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाद, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुंगेर, नागांव, नागौर, नासिक, पाली, पंपोर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, समस्तीपुर, सांगली, सासाराम, सतना, शिलांग, शिवमोगा, सिलीगुड़ी, सिरोही, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, श्रीनगर, सूरत, टेन्सा, ठाणे, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वाराणसी, विजयवाड़ा आदि 118 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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