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वायु

पलवल में अचानक बिगड़ी हवा, 24 घंटे में 100 अंक बढ़ा एक्यूआई; दिल्ली-एनसीआर में भी प्रदूषण में इजाफा

30 सितम्बर को 255 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 12.5 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 52.2 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि 35.3 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं।

Lalit Maurya

  • 30 सितम्बर 2026 को देश के 255 शहरों की हवा के आंकड़ों ने प्रदूषण में अचानक आए उछाल की तस्वीर सामने रखी है।

  • पलवल देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा, जहां 24 घंटे में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 159 से बढ़कर 259 पर पहुंच गया। यानी महज एक दिन में एक्यूआई में 100 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज हुई और शहर की हवा ‘मध्यम’ से ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गई। यहां प्रदूषण में पीएम10 की प्रमुख भूमिका रही और वायु गुणवत्ता विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 470 फीसदी अधिक दर्ज की गई।

  • प्रदूषण का असर दिल्ली-एनसीआर में भी दिखाई दिया। दिल्ली में एक्यूआई 71 से बढ़कर 129 हो गया, यानी 24 घंटे में 58 अंकों की वृद्धि हुई। फरीदाबाद में भी एक्यूआई 97 से बढ़कर 101 पहुंच गया और हवा फिर ‘मध्यम’ श्रेणी में आ गई।

  • देशभर में भी हवा की स्थिति बिगड़ने के संकेत मिले हैं। 255 शहरों में केवल 32 शहरों की हवा ‘बेहतर’ रही, जबकि 133 शहरों में हवा ‘संतोषजनक’ और 88 शहरों में ‘मध्यम’ श्रेणी में रही।

  • एक दिन में साफ और संतोषजनक हवा वाले शहरों की संख्या घटी, जबकि मध्यम श्रेणी वाले शहरों की संख्या 109.5 फीसदी बढ़ गई है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 30 सितम्बर 2026 को देश में पलवल सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 259 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (29 सितम्बर) को पलवल में सूचकांक 159 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 100 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि पलवल की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

पलवल में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 470 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 21 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर पलवल की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 12.3 गुणा खराब है।

इससे पहले देश में बीकानेर की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 227 रिकॉर्ड किया गया। लेकिन आज 60 अंकों के सुधार के साथ वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 167 पर पहुंच गया है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 71 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 129 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 58 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 06 सितम्बर को 55 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64  दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में वृद्धि हुई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 97 दर्ज किया गया था, जो आज 4 अंकों के उछाल के साथ बढ़कर 101 पर पहुंच गया। मतलब कि फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता एक बार फिर संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में आ गई है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 30 सितम्बर 2026 को 255 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 12.5 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 52.2 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि दूसरी तरफ 35.3 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 17.9 फीसदी की कमी आई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 21.8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 109.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जोकि चिंता का विषय है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में मोदीनगर (253) दूसरे जबकि बड़ौत (195) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह बुलंदशहर (183) चौथे स्थान पर है। गुम्मिडीपूंडी (180) – चरखी दादरी (178) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

मंडीदीप (176) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में पाली (176), जींद (168) और बीकानेर (167) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के तीन शहर (पलवल, चरखी दादरी, जींद) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि बड़ौत, गुम्मिडीपूंडी, चरखी दादरी, जींद, ब्रजराजनगर, वडोदरा, कोलकाता, गुरुग्राम, पानीपत, तालचेर, जालंधर, बर्नीहाट (असम), पूर्णिया और यमुना नगर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं पलवल, बुलंदशहर, मंडीदीप, पाली, बीकानेर, दौसा, सीकर, नारनौल, चंद्रपुर, चूरू, मंडी गोबिंदगढ़, सिरसा, भिवाड़ी, बर्नीहाट (मेघालय), विशाखापत्तनम, झुंझुनू, खोरा, नोएडा, गाजियाबाद, पीथमपुर, नागौर, दिल्ली, मथुरा, सवाई माधोपुर, जयपुर, ग्रेटर नोएडा, उदयपुर, बागपत, हावड़ा, चित्तौड़गढ़, मुंगेर, जोरापोखर, श्री गंगानगर, टेन्सा, अगरतला, देवास, वातवा, जालोर, झांसी, जोधपुर, कोटा, भीलवाड़ा, खुर्जा, अहमदाबाद, बद्दी, अंकलेश्वर, बिलीपाड़ा, छपरा, अंबाला, बहादुरगढ़, बूंदी, भोपाल, हनुमानगढ़, बरेली, गजरौला, कुरुक्षेत्र, भिवानी, टोंक, मुजफ्फरनगर, अजमेर, कटनी, सासाराम, बारीपाड़ा, फरीदाबाद, फतेहाबाद और सूरत आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 12.5 फीसदी यानी 32 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बेलगाम, बेतिया, भागलपुर, चामराजनगर, चंडीगढ़, कोयंबटूर, देहरादून, फिरोजाबाद, गडग, गंगटोक, हावेरी, कलबुर्गी, करौली, क्योंझर, कोल्हापुर, लातूर, मदिकेरी, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मिलुपारा, नलबाड़ी, नयागढ़, पंचकुला, राजगीर, रतलाम, ऋषिकेश, समस्तीपुर आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 133 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें दमोह, धारूहेड़ा, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हापुड़, हिंगोली, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जलगांव, जलना, झालावाड़, कडप्पा, काकीनाडा, कल्याण, कानपुर, करनाल, कटिहार, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाद, मैहर, मानेसर, मैंगलोर, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागपुर, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, पंपोर, पंचगांव, पारादीप, परभणी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, रायबरेली आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 88 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें अगरतला, अहमदाबाद, अजमेर, अंबाला, अंकलेश्वर, बद्दी, बागपत, बहादुरगढ़, बड़ौत, बरेली, बारीपाड़ा, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलीपाड़ा, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, बर्नीहाट (असम), बर्नीहाट (मेघालय), चंद्रपुर, चरखी दादरी, छपरा, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, दौसा, दिल्ली, देवास, डोंबिवली, एलूर, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गजरौला, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, हनुमानगढ़, हिसार, हावड़ा, जयपुर, जालंधर, जालोर, झांसी, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कटनी, खोरा, खुर्जा, कोलकाता, कोटा, कुरुक्षेत्र, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मथुरा, मेरठ, मुंगेर, मुजफ्फरनगर, नागौर, नंदेसरी, नारनौल, नोएडा, पाली, पानीपत, पीथमपुर, पूर्णिया, सासाराम, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरसा, श्री गंगानगर, सूरत, तालचेर, टेन्सा, टोंक, उदयपुर, वडोदरा, वातवा, विशाखापत्तनम, वृंदावन और यमुना नगर शामिल हैं।

वहीं पलवल (259) और मोदीनगर (253) में स्थिति खराब दर्ज की गई है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 255 में से 32 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 133 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 29 सितम्बर को यह आंकड़ा 170 दर्ज किया गया था।

88 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज पलवल में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 259 दर्ज किया गया, जोकि ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (29 सितम्बर) को पलवल में सूचकांक 159 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 100 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।

इससे पहले देश में बीकानेर की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 227 रिकॉर्ड किया गया। लेकिन आज 60 अंकों के सुधार के साथ वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 167 पर पहुंच गया है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 71 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 129 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 58 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में वृद्धि हुई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 97 दर्ज किया गया था, जो आज 4 अंकों के उछाल के साथ बढ़कर 101 पर पहुंच गया। मतलब कि फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता एक बार फिर संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में आ गई है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 30 सितम्बर को बुलंदशहर (183) चौथे स्थान पर है, वहीं मोदीनगर (253) दूसरे, जबकि बड़ौत (195) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 98, गाजियाबाद में 137, गुवाहाटी में 72, गुरूग्राम में 130, नोएडा में 138, ग्रेटर नोएडा में 123 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 75 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 64, चेन्नई में 81, चंडीगढ़ में 46, हैदराबाद में 83, जयपुर में 126 और पटना में 91 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 32 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में आइजोल, बठिंडा, बेलगाम, बेतिया, भागलपुर, चामराजनगर, चंडीगढ़, कोयंबटूर, देहरादून, फिरोजाबाद, गडग, गंगटोक, हावेरी, कलबुर्गी, करौली, क्योंझर, कोल्हापुर, लातूर, मदिकेरी, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मिलुपारा, नलबाड़ी, नयागढ़, पंचकुला, राजगीर, रतलाम, ऋषिकेश, समस्तीपुर, सिलचर, शिवसागर और तिरुवनंतपुरम शामिल हैं।

वहीं आगरा, अहमदनगर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बालासोर, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बाड़मेर, बैरकपुर, बीड, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भिलाई, बिलासपुर, बोइसर, ब्यासनगर, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, दमोह, धारूहेड़ा, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हापुड़, हिंगोली, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जलगांव, जलना, झालावाड़, कडप्पा, काकीनाडा, कल्याण, कानपुर, करनाल, कटिहार, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाद, मैहर, मानेसर, मैंगलोर, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागपुर, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, पंपोर, पंचगांव, पारादीप, परभणी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, रायबरेली, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रोहतक, राउरकेला, रूपनगर, सांगली, सतारा, सतना, शामली, सिरोही, सोलापुर, सोनीपत, श्रीनगर, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, उज्जैन, उल्हासनगर, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार और यादगीर आदि 133 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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