17 फरवरी 2026 को जारी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि देश के 240 शहरों में से महज पांच शहरों की हवा ‘साफ’ रही, जबकि अधिकांश शहरों में प्रदूषण चिंताजनक स्तर पर बना हुआ है।
इस दिन गाजियाबाद सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा, जहां एक्यूआई 276 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है और विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 500 फीसदी अधिक है।
इसके मुकाबले शिलांग में सबसे साफ हवा रही, जहां एक्यूआई केवल 25 रहा।
दिल्ली और गुरुग्राम में प्रदूषण में हल्का सुधार जरूर दर्ज किया गया, लेकिन दोनों शहरों की हवा अब भी खराब श्रेणी में बनी हुई है।
कुल मिलाकर 61.7 फीसदी शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम से खराब स्तर पर रही, जबकि साफ हवा वाले शहरों की संख्या में पिछले दिन की तुलना में गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट में पीएम2.5 और पीएम10 कणों को प्रदूषण का मुख्य कारण बताया गया है।
विश्लेषण के मुताबिक 17 फरवरी 2026 को देश में गाजियाबाद सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 276 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे एक दिन पहले यानी 16 फरवरी को गाजियाबाद में एक्यूआई 272 था। यानी बीते 24 घंटों में प्रदूषण के स्तर में चार अंकों का उछाल आया है।
रुझानों में सामने आया है कि गाजियाबाद की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
गाजियाबाद में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 500 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 25 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर गाजियाबाद की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति 11 गुणा खराब है।
गौरतलब है कि कल देश में गुरुग्राम की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब एक्यूआई 296 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज वहां 71 अंकों के सुधार के साथ प्रदूषण का स्तर घटकर 225 पर पहुंच गया है। मतलब कि सुधार के बावजूद वायु गुणवत्ता आज भी खराब बनी हुई है।
राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। इसके बावजूद आज भी वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में बनी हुई है। कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 261 दर्ज किया गया था, जो 17 फरवरी को 12 अंकों के सुधार के साथ घटकर 249 पर पहुंच गया। इससे पहले 18 जनवरी को दिल्ली में 2026 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 17 फरवरी 2026 को 240 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 2.1 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 36.3 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 61.7 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक बनी हुई है।
बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 37.5 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 13.9 फीसदी की कमी दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में 12.1 फीसदी का इजाफा हुआ है। इसी तरफ खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 20 फीसदी का उछाल आया है, जोकि चिंता का विषय है।
फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 161 (+13) दर्ज किया गया है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में बागपत (258) दूसरे जबकि मुजफ्फरनगर (251) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 250 अंकों के साथ गुम्मिडीपूंडी चौथे स्थान पर है। दिल्ली-यमुना नगर में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 249 और 243 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
समस्तीपुर (242) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में बहादुरगढ़ (241), मेरठ (240) और हाजीपुर (235) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के चार (गाजियाबाद, बागपत, मुजफ्फरनगर, मेरठ) और हरियाणा के दो शहर (यमुना नगर, बहादुरगढ़) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि बागपत, मुजफ्फरनगर, गुम्मिडीपूंडी, यमुना नगर, समस्तीपुर, बहादुरगढ़, मेरठ, हाजीपुर, नोएडा, गुरुग्राम, हापुड़, बालासोर, रोहतक, धारूहेड़ा, मंडीदीप, कुरुक्षेत्र, करनाल, चरखी दादरी, भिवाड़ी, बिलाईपाड़ा, मोतिहारी, वातवा, जींद, लखनऊ, पुणे, सुआकाती, सहरसा, बेगूसराय, बर्नीहाट, मानेसर, कोलकाता, नाहरलागुन, राजमहेंद्रवरम, पंचगांव, आरा, तिरुमाला, बेंगलुरु, सोनीपत, भिवानी, चेन्नई, सूरत, अंबाला, मुजफ्फरपुर, एलूर, सांगली, ब्रजराजनगर, जलना, कोयंबटूर, किशनगंज, यादगीर, तुमकुरु, आसनसोल, पुदुचेरी, काशीपुर, बेतिया, हल्दिया, भोपाल, नागांव, भागलपुर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं गाजियाबाद, दिल्ली, ग्रेटर नोएडा, पटना, गुवाहाटी, सिंगरौली, बल्लभगढ़, अंगुल, गांधीनगर, फरीदाबाद, बठिंडा, बीकानेर, बारबिल, सिलीगुड़ी, हावड़ा, विशाखापत्तनम, वडोदरा, महाड, रामनगर, अहमदाबाद, उदयपुर, बदलापुर, तिरुवनंतपुरम, नयागढ़, भिवंडी, अमरावती (आंध्रप्रदेश), चूरू, झुंझुनू, अलवर, पाली, श्री गंगानगर, तालचेर, गया, कुंजेमुरा, टोंक, सीकर, मंगुराहा, उल्हासनगर, अहमदनगर, मालेगांव, नवी मुंबई, बेलापुर, पिंपरी-चिंचवाड़, बुलंदशहर, औरंगाबाद महाराष्ट्र), भावनगर, डूंगरपुर, सोलापुर, दुर्गापुर, नागपुर, पटियाला, नासिक, छपरा, धारवाड़, कानपुर, चंद्रपुर, रतलाम, अंकलेश्वर, नांदेड़, सिवान, लुधियाना, धुले, मीरा-भायंदर, रायरंगपुर, धनबाद, जालोर, राजसमंद आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 2.1 फीसदी यानी महज पांच शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बागलकोट, दमोह, पेरुंदुरई, रूपनगर, शिलांग आदि शामिल हैं।
आज देश के जिन 87 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें देहरादून, धौलपुर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, गोरखपुर, ग्वालियर, हिसार, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जालंधर, झांसी, कडप्पा, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, करौली, कटिहार, कटनी, खन्ना, खुर्जा, कोहिमा, कोल्हापुर, कोल्लम, कोरबा, मदिकेरी, मंडीखेड़ा, मुंगेर, मैसूर, नारनौल, पलवल, पंपोर, पंचकुला, परभनी, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पूर्णिया, रायपुर, ऋषिकेश, राउरकेला, सागर, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, सिरसा, शिवसागर, श्रीनगर, टेन्सा, ठाणे आदि शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 130 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में अहमदाबाद, अहमदनगर, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारबिल, बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, बेतिया, भागलपुर, भावनगर, भिवाड़ी, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलाईपाड़ा, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, ब्यासनगर, बर्नीहाट, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चेन्नई, छपरा, चूरू, कोयंबटूर, दौसा, धनबाद, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, फरीदाबाद, गांधीनगर, गया, गुवाहाटी, हल्दिया, हावड़ा, जयपुर, जलना, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कानपुर, करनाल, काशीपुर, क्योंझर, किशनगंज, कोलकाता, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, महाड, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मानेसर, मंगुराहा, मेहसाणा, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पाली, पंचगांव, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, पुदुचेरी, पुणे, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, सहरसा, सांगली, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सिंगरौली, सिवान, सोलापुर, सोनीपत, श्री गंगानगर, सुआकाती, सूरत, तालचेर, तिरुवनंतपुरम, तिरुमाला, टोंक, तुमकुरु, उदयपुर, उल्हासनगर, वडोदरा, वातवा, विशाखापत्तनम, यादगीर शामिल हैं।
आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 18 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में बागपत, बहादुरगढ़, बालासोर, कटक, दिल्ली, धारूहेड़ा, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, हाजीपुर, हापुड़, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नोएडा, रोहतक, समस्तीपुर, यमुना नगर शामिल हैं।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 240 में से महज पांच शहरों में हवा 'बेहतर' है। 87 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 16 फरवरी 2026 को यह आंकड़ा 101 दर्ज किया गया था।
130 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज गाजियाबाद में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 276 पर पहुंच गया। इससे पहले कल गाजियाबाद में एक्यूआई 272 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में चार अंकों का इजाफा हुआ है।
कल गुरुग्राम में वायु गुणवत्ता सूचकांक 296 दर्ज किया गया था। जहां आज 71 अंकों के सुधार के साथ सूचकांक घटकर 225 पर पहुंच गया। मतलब कि आज भी गुरुग्राम में वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली में 17 फरवरी को प्रदूषण में गिरावट दर्ज की गई। दिल्ली में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक 261 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 249 पर पहुंच गया। मतलब कि कल से दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में 12 अंकों का सुधार आया है। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 450 फीसदी अधिक खराब है।
दूसरी तरफ फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में उछाल आया है। फरीदाबाद में कल जहां एक्यूआई 148 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 161 पर पहुंच गया है। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 17 फरवरी को गुम्मिडीपूंडी चौथे स्थान पर है, वहीं बागपत (258) दूसरे, जबकि मुजफ्फरनगर (251) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 100, गाजियाबाद में 276, गुवाहाटी में 182, गुरूग्राम में 225, नोएडा में 234, ग्रेटर नोएडा में 234 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 101 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 167, चेन्नई में 134, चंडीगढ़ में 123, हैदराबाद में 92, जयपुर में 113 और पटना में 190 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन पांच शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें बागलकोट, दमोह, पेरुंदुरई, रूपनगर, शिलांग शामिल हैं।
वहीं अगरतला, आगरा, आइजोल, अजमेर, अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, बारां, बरेली, बारीपाड़ा, बाड़मेर, बैरकपुर, भरतपुर, भिलाई, भीलवाड़ा, बिलासपुर, बोइसर, बूंदी, बक्सर, चामराजनगर, छाल, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, देहरादून, धौलपुर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, गोरखपुर, ग्वालियर, हिसार, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जालंधर, झांसी, कडप्पा, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, करौली, कटिहार, कटनी, खन्ना, खुर्जा, कोहिमा, कोल्हापुर, कोल्लम, कोरबा, मदिकेरी, मंडीखेड़ा, मुंगेर, मैसूर, नारनौल, पलवल, पंपोर, पंचकुला, परभनी, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पूर्णिया, रायपुर, ऋषिकेश, राउरकेला, सागर, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, सिरसा, शिवसागर, श्रीनगर, टेन्सा, ठाणे, थूथुकुडी, तिरुपति, तुमडीह, उज्जैन, वापी, वाराणसी, विजयपुरा, विजयवाड़ा, विरार, वृंदावन आदि 87 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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प्रदूषित शहरों में पहले पायदान पर पहुंचा गुरुग्राम, गुवाहाटी-पंचगांव में भी स्थिति 'खराब'