देश के कई शहरों में वायु गुणवत्ता न केवल इंसानों बल्कि दूसरे जीवों के लिए भी सुरक्षित नहीं है; फोटो: सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई)  
वायु

प्रदूषण का हॉटस्पॉट बनता ओडिशा, अंगुल में लगातार दूसरे दिन हवा 'बेहद खराब'

11 अप्रैल 2026 को देश में अंगुल सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 321 दर्ज किया गया

Lalit Maurya

  • देश में वायु प्रदूषण की स्थिति एक बार फिर गंभीर होती दिख रही है और ओडिशा तेजी से प्रदूषण का नया हॉटस्पॉट बनकर उभर रहा है।

  • 11 अप्रैल 2026 को अंगुल लगातार दूसरे दिन देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां एक्यूआई 321 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। यह स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 400 फीसदी अधिक है, जिससे वहां की हवा लोगों के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक बन गई है।

  • चिंताजनक बात यह है कि देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में ओडिशा के तीन शहर अंगुल, कटक और ब्यासनगर शामिल हैं।

  • वहीं पूरे देश के 251 शहरों में से महज 21 शहरों में ही साफ हवा दर्ज की गई, जबकि करीब आधे शहरों में प्रदूषण का स्तर चिंताजनक बना हुआ है। हालांकि दिल्ली और फरीदाबाद में प्रदूषण में कुछ राहत दर्ज की गई है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर हवा की गुणवत्ता अब भी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 11 अप्रैल 2026 को एक बार फिर देश में अंगुल सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 321 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि इससे पहले 10 अप्रैल को ओडिशा के इस शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 313 दर्ज किया गया था।

मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में आठ अंकों का उछाल आया है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि अंगुल की हवा में ओजोन पूरी तरह हावी हैं। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। अंगुल में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 400 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में चामराजनगर की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 28 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर अंगुल की तुलना चामराजनगर से करें तो वहां स्थिति 11.5 गुणा खराब है।

राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 151 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 123 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 28 अंकों की कमी दर्ज की गई है। 

बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 93 पर पहुंच गया था। इसके बाद 01 अप्रैल को सूचकांक 113 दर्ज क्या गया। वहीं आज सूचकांक 114 रिकॉर्ड किया गया है। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 143 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 132 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 11 अप्रैल 2026 को 251 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 8.4 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 46.2 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 45.4 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 22.2 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 14.1 फीसदी की कमी आई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से करीब 32.5 फीसदी का उछाल आया है, जोकि चिंता का विषय है।     

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में कटक (302) दूसरे जबकि नांदेड़ (283) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह पेरुंदुरई (233) चौथे स्थान पर है। मंडीदीप-बल्लभगढ़ में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 216 और 213 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

पीथमपुर (206) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में श्री गंगानगर (205), ब्यासनगर (197) और गुरुग्राम (192) भी शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में ओडिशा के तीन शहर (अंगुल, कटक और ब्यासनगर) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि मंडीदीप, गुरुग्राम, मदिकेरी, सहरसा, चरखी दादरी, सोनीपत, भुवनेश्वर, चंद्रपुर, देवास, गुम्मिडीपूंडी, नासिक, भोपाल, कुरुक्षेत्र, अररिया, मानेसर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं पेरुंदुरई, बल्लभगढ़, पीथमपुर, बेलापुर, बिलीपाड़ा, वातवा, पिंपरी-चिंचवाड़, अहमदाबाद, बीकानेर, जयपुर, गांधीनगर, हाजीपुर, ग्रेटर नोएडा, वडोदरा, बुलंदशहर, सिंगरौली, गाजियाबाद, भिवाड़ी, सीकर, भावनगर, रतलाम, नागौर, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), जालौर, फरीदाबाद, बागपत, यादगीर, बदलापुर, नयागढ़, बद्दी, भिवंडी, हापुड़, मंगलौर, हावड़ा, जोधपुर, दिल्ली, परभनी, जैसलमेर, पटना, सूरत, मालेगांव, पुणे, टोंक, आगरा, भीलवाड़ा, करौली, नवी मुंबई, अमृतसर, कटनी, मुजफ्फरपुर, जबलपुर, मुंबई, बेगूसराय, महाड, मेहसाणा, उदयपुर, वाराणसी, बर्नीहाट (मेघालय), उल्हासनगर, विरार, इंदौर, दमोह, झुंझुनू, हिसार, पानीपत, भागलपुर, हनुमानगढ़, नंदेसरी, अगरतला, मीरा-भायंदर, लखनऊ आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 8.4 फीसदी यानी महज 21 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में गंगटोक, गुवाहाटी, किशनगंज, कोहिमा, कोरबा, मंडीखेड़ा, नाहरलागुन, नलबाड़ी, पंचकुला, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, ऋषिकेश, रूपनगर, श्रीनगर, विजयपुरा आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 116 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें ब्रजराजनगर, बक्सर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, छपरा, चिक्काबल्लापुर, कोयंबटूर, धनबाद, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गया, गोरखपुर, गुंटूर, हल्दिया, हुबली, हैदराबाद, जालंधर, जलना, झांसी, जींद, जोरापोखर, कैथल, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करनाल, काशीपुर, कटिहार, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, कुंजेमुरा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मंगुराहा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंगेर, नागांव, नारनौल, नेल्लोर, ऊटी, पाली, पलवल, पंपोर, पंचगांव, पटियाला, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रोहतक, राउरकेला, सागर, सतना, शिलांग, शिवमोगा, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरसा आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 106 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अमृतसर, अररिया, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बागपत, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बेगूसराय, बेलापुर, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलीपाड़ा, बुलंदशहर, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (मेघालय), चंद्रपुर, चरखी दादरी, चित्तौड़गढ़, चूरू, दमोह, दौसा, दिल्ली, देवास, फरीदाबाद, गांधीनगर, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हापुड़, हिसार, हावड़ा, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जलगांव, जालौर, झालावाड़, झुंझुनू, जोधपुर, करौली, कटनी, कोटा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, मदिकेरी, महाड, मालेगांव, मानेसर, मंगलौर, मेरठ, मेहसाणा, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागौर, नागपुर, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, नोएडा, पानीपत, परभनी, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पुणे, रतलाम, सहरसा, सांगली, सीकर, सिंगरौली, सिरोही, सोनीपत, सूरत, टोंक, उदयपुर, उल्हासनगर, वडोदरा, वाराणसी, वातवा, विरार, यादगीर आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश में जहां बल्लभगढ़, मंडीदीप, नांदेड़, पेरुंदुरई, पीथमपुर, श्री गंगानगर में स्थिति खराब है। वहीं अंगुल (321) में स्थिति बेहद खराब है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 251 में से महज 21 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 116 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 10 अप्रैल को यह आंकड़ा 135 दर्ज किया गया था।

106 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज भी अंगुल में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 321 दर्ज किया गया। गौरतलब है कि कल अंगुल में सूचकांक 313 रिकॉर्ड किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 8 अंकों का उछाल आया है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 151 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 123 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 28 अंकों की कमी दर्ज की गई है।   

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 143 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 132 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 11 अप्रैल को पेरुंदुरई चौथे स्थान पर है, वहीं कटक (302) दूसरे, जबकि नांदेड़ (283) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 144, गाजियाबाद में 146, गुवाहाटी में 43, गुरूग्राम में 192, नोएडा में 122, ग्रेटर नोएडा में 158 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 112 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 102, चेन्नई में 55, चंडीगढ़ में 61, हैदराबाद में 89, जयपुर में 161 और पटना में 122 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 21 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें भिलाई, भिवानी, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, गंगटोक, गुवाहाटी, किशनगंज, कोहिमा, कोरबा, मंडीखेड़ा, नाहरलागुन, नलबाड़ी, पंचकुला, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, ऋषिकेश, रूपनगर, श्रीनगर, विजयपुरा शामिल हैं।

वहीं आइजोल, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अनंतपुर, आरा, आसनसोल, बागलकोट, बहादुरगढ़, बालासोर, बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, लगाम, बेंगलुरु, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बक्सर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, छपरा, चिक्काबल्लापुर, कोयंबटूर, धनबाद, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गया, गोरखपुर, गुंटूर, हल्दिया, हुबली, हैदराबाद, जालंधर, जलना, झांसी, जींद, जोरापोखर, कैथल, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करनाल, काशीपुर, कटिहार, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, कुंजेमुरा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मंगुराहा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंगेर, नागांव, नारनौल, नेल्लोर, ऊटी, पाली, पलवल, पंपोर, पंचगांव, पटियाला, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रोहतक, राउरकेला, सागर, सतना, शिलांग, शिवमोगा, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरसा, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, सुआकाती, तालचेर, टेन्सा, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, तिरुमाला, तुमकुरु, तुमडीह, उडुपी, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम, वृंदावन, यमुना नगर आदि 116 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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