18 सितम्बर 2026 को देश के 249 शहरों में वायु प्रदूषण की तस्वीर मिली-जुली रही।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक, मोदीनगर 215 के एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा और यहां हवा ‘खराब’ श्रेणी में दर्ज की गई।
खास बात यह रही कि देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के पांच शहर—मोदीनगर, खोरा, बुलंदशहर, ग्रेटर नोएडा और बड़ौत—शामिल रहे।
वहीं लेह 195 और कैथल 183 के एक्यूआई के साथ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे।
इसके विपरीत मध्य प्रदेश का दमोह 16 के एक्यूआई के साथ सबसे साफ शहर रहा। कुल 249 शहरों में 96 शहरों की हवा ‘बेहतर’, 128 की ‘संतोषजनक’ और 24 शहरों की ‘मध्यम’ श्रेणी में रही, जबकि मोदीनगर में हवा ‘खराब’ दर्ज हुई। यानी करीब 90 फीसदी शहरों में वायु गुणवत्ता बेहतर से संतोषजनक श्रेणी में रही।
दिल्ली के लिए आंकड़े कुछ राहत लेकर आए। यहां एक्यूआई 106 से घटकर 88 हो गया और हवा ‘संतोषजनक’ श्रेणी में पहुंच गई। फरीदाबाद में भी एक्यूआई 119 से घटकर 107 हुआ, हालांकि वहां हवा अभी ‘मध्यम’ श्रेणी में बनी रही।
इस बीच कुड्डालोर में एक्यूआई 222 से गिरकर 102 पर पहुंचा, जिससे वहां हवा ‘खराब’ से ‘मध्यम’ श्रेणी में आ गई।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 18 सितम्बर 2026 को देश में मोदीनगर सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 215 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (17 सितम्बर) को मोदीनगर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 207 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण में आठ अंकों का उछाल आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि मोदीनगर की हवा में ओजोन पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
मोदीनगर में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 250 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में दमोह की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 16 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर मोदीनगर की तुलना दमोह से करें तो वहां स्थिति 13.4 गुणा खराब है।
इससे पहले कल देश में कुड्डालोर की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 222 रिकॉर्ड किया गया। हालांकि आज 120 अंकों के भारी सुधार के साथ कुड्डालोर में सूचकांक घटकर 102 पर पहुंच गया है। मतलब की वहां वायु गुणवत्ता आज खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 106 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 88 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 18 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता संतोषजनक श्रेणी में पहुंच गई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 07-18 सितम्बर को 63 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से वायु गुणवत्ता सूचकांक में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 119 दर्ज किया गया था, जो आज गिरकर 107 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 12 अंकों के सुधार के बावजूद फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 18 सितम्बर 2026 को 249 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 38.6 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 51.4 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि दूसरी तरफ 10 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 47.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 7.9 फीसदी की कमी दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से करीब 36.8 फीसदी की गिरावट आई है, जोकि राहत की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में लेह (195) दूसरे जबकि कैथल (183) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह खोरा (142) चौथे स्थान पर है। टोंक – बुलंदशहर में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
मंडी गोबिंदगढ़ (139) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में ग्रेटर नोएडा (138), विशाखापत्तनम (138) और बड़ौत (127) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के पांच शहर (मोदीनगर, खोरा, बुलंदशहर, ग्रेटर नोएडा, बड़ौत) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि खोरा, मंडी गोबिंदगढ़, बड़ौत, बर्नीहाट (मेघालय), ब्यासनगर और पानीपत आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं बुलंदशहर, विशाखापत्तनम, सहरसा, छपरा, फरीदाबाद, खैरथल, गजरौला और कुड्डालोर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 38.6 फीसदी यानी 96 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में दमोह, दावणगेरे, देहरादून, धुले, डोंबिवली, डूंगरपुर, फतेहपुर सीकरी, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, हल्दिया, हनुमानगढ़, हिंगोली, हैदराबाद, इंदौर, जलगांव, जालोर, झांसी, जोधपुर, कलबुर्गी, करौली, करनाल, कटनी, कोल्हापुर, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, मदिकेरी, मेहसाणा, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुंबई, नागौर, नाहरलागुन, नासिक, नवी मुंबई, पलवल, पंचगांव, पटियाला, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, राजगीर, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सागर, सांगली, सासाराम, सवाई माधोपुर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 128 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भिवाड़ी, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलीपाड़ा, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, चित्तूर, चूरू, दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, एलुरु, फतेहाबाद, गाजियाबाद, गुंटूर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हापुड़, हावड़ा, हुबली, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, झालावाड़, झुंझुनू, कडप्पा, काकीनाडा, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, कटिहार, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाद, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मानेसर, मैंगलोर, मेरठ, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नयागढ़, नेल्लोर, पाली, पारादीप, परभणी, पटना, पीथमपुर, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, पूर्णिया, रायबरेली, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, रोहतक, रूपनगर आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 24 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें बड़ौत, बुलंदशहर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (मेघालय), चेन्नई, छपरा, कुड्डालोर, कटक, एलूर, फरीदाबाद, गजरौला, ग्रेटर नोएडा, हिसार, कैथल, खैरथल, खोरा, लेह, मंडी गोबिंदगढ़, नोएडा, पानीपत, सहरसा, तालचेर, टोंक और विशाखापत्तनम शामिल हैं।
वहीं मोदीनगर (215) में स्थिति 'खराब' दर्ज की गई है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 249 में से 96 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 128 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 17 सितम्बर को भी यह आंकड़ा 139 दर्ज किया गया था।
24 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज मोदीनगर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 215 दर्ज किया गया, जोकि ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (17 सितम्बर) को मोदीनगर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 207 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण में आठ अंकों का उछाल आया है।
इससे पहले कल देश में कुड्डालोर की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 222 रिकॉर्ड किया गया। हालांकि आज 120 अंकों के भारी सुधार के साथ कुड्डालोर में सूचकांक घटकर 102 पर पहुंच गया है। मतलब की वहां वायु गुणवत्ता आज खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 106 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 88 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 18 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता संतोषजनक श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से वायु गुणवत्ता सूचकांक में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 119 दर्ज किया गया था, जो आज गिरकर 107 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 12 अंकों के सुधार के बावजूद फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 18 सितम्बर को खोरा (142) चौथे स्थान पर है, वहीं लेह (195) दूसरे, जबकि कैथल (183) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 57, गाजियाबाद में 80, गुवाहाटी में 62, गुरूग्राम में 81, नोएडा में 117, ग्रेटर नोएडा में 138 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 31 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 51, चेन्नई में 115, चंडीगढ़ में 36, हैदराबाद में 50, जयपुर में 76 और पटना में 62 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 96 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में अहमदाबाद, अहमदनगर, आइजोल, अजमेर, अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), अररिया, आरा, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बल्लभगढ़, बारां, बाड़मेर, बीड, बेतिया, भिलाई, भीलवाड़ा, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, चामराजनगर, चंडीगढ़, चरखी दादरी, छाल, चिक्कमगलुरु, दमोह, दावणगेरे, देहरादून, धुले, डोंबिवली, डूंगरपुर, फतेहपुर सीकरी, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, हल्दिया, हनुमानगढ़, हिंगोली, हैदराबाद, इंदौर, जलगांव, जालोर, झांसी, जोधपुर, कलबुर्गी, करौली, करनाल, कटनी, कोल्हापुर, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, मदिकेरी, मेहसाणा, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुंबई, नागौर, नाहरलागुन, नासिक, नवी मुंबई, पलवल, पंचगांव, पटियाला, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, राजगीर, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सागर, सांगली, सासाराम, सवाई माधोपुर, शिवमोगा, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही, सोलापुर, श्रीनगर, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर, उडुपी, उल्हासनगर, विरार और यादगीर शामिल हैं।
वहीं अगरतला, आगरा, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अंबरनाथ, अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, आसनसोल, बद्दी, बागपत, बहादुरगढ़, बालासोर, बांसवाड़ा, बारबिल, बरेली, बारीपदा, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भिवाड़ी, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलीपाड़ा, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, चित्तूर, चूरू, दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, एलुरु, फतेहाबाद, गाजियाबाद, गुंटूर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हापुड़, हावड़ा, हुबली, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, झालावाड़, झुंझुनू, कडप्पा, काकीनाडा, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, कटिहार, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाद, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मानेसर, मैंगलोर, मेरठ, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नयागढ़, नेल्लोर, पाली, पारादीप, परभणी, पटना, पीथमपुर, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, पूर्णिया, रायबरेली, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, रोहतक, रूपनगर, सतारा, सतना, सीकर, सिरसा, शिवसागर, सिवान, सोनीपत, श्री गंगानगर, सूरत, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, उदयपुर, उज्जैन, वडोदरा, वापी, वाराणसी, वातवा, विजयवाड़ा, वृंदावन और यमुना नगर आदि 128 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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