देश में 05 मई 2026 को वायु प्रदूषण के आंकड़ों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण में सामने आया है कि मेहसाणा देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां एक्यूआई 248 दर्ज किया गया, जो खराब हवा को दर्शाता है। चिंता की बात है कि एक दिन पहले के मुकाबले यहां एक्यूआई में 99 अंकों का बड़ा उछाल दर्ज किया गया, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।
वहीं दिल्ली में राहत का रुख जारी रहा और एक्यूआई 88 से घटकर 86 पर पहुंच गया, जिससे राजधानी में वायु गुणवत्ता ‘संतोषजनक’ बनी रही। दूसरी ओर फरीदाबाद में प्रदूषण में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई।
देश के 218 शहरों के आंकड़ों से पता चलता है कि अधिकांश शहरों (60.1 फीसदी) में हवा संतोषजनक रही, जबकि 23.9 फीसदी शहरों में हवा है। हालांकि 16 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक बने हुए हैं।
सोनीपत, श्री गंगानगर और मैसूर जैसे शहर देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहे।
कुल मिलाकर, देश में वायु गुणवत्ता का परिदृश्य एक असमान तस्वीर पेश कर रहा है—जहां दिल्ली जैसे कुछ शहरों में मामूली सुधार राहत दे रहा है, वहीं मेहसाणा जैसे स्थानों पर प्रदूषण का तेज उछाल गंभीर चिंता का संकेत है। ऐसे में सतत निगरानी और स्थानीय स्तर पर प्रभावी प्रदूषण नियंत्रण उपायों की जरूरत और भी अधिक बढ़ जाती है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 05 मई 2026 को देश में मेहसाणा सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 248 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल मेहसाणा में सूचकांक 149 दर्ज किया गया। मतलब की कल से वहां प्रदूषण में 99 अंकों का भारी उछाल आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि मेहसाणा की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
मेहसाणा में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 450 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में श्रीनगर की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 16 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर मेहसाणा की तुलना श्रीनगर से करें तो वहां स्थिति 15.5 गुणा खराब है।
इससे पहले कल देश में पानीपत की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब एक्यूआई 295 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज सरकारी आंकड़ों में पानीपत का जिक्र नहीं है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 88 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 86 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में दो अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज भी संतोषजनक बनी हुई है।
बता दें कि इससे पहले 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 04 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 88 पर पहुंच गया। वहीं 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को एक्यूआई 93 रिकॉर्ड किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 73 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 86 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वहां आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 05 मई 2026 को 218 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 23.9 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 60.1 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 16 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 33.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 4.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से करीब 28.9 फीसदी की कमी आई है, जोकि राहत की खबर है। खराब हवा वाले शहरों की बात करें तो उनकी स्थिति में कल से कोई बदलाव नहीं हुआ है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में सोनीपत (246) दूसरे जबकि श्री गंगानगर (238) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह मैसूर (183) चौथे स्थान पर है। राजकोट- सवाई माधोपुर में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 180 और 175 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
झुंझुनू (174) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में असम का बर्नीहाट (171), चुरू (170) और जैसलमेर (162) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में राजस्थान के पांच शहर (श्री गंगानगर, सवाई माधोपुर, झुंझुनू, चूरू और जैसलमेर) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि सोनीपत, राजकोट, बर्नीहाट (असम), मंडीदीप, अलवर, वातवा, जींद आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं मेहसाणा, जैसलमेर, बर्नीहाट (मेघालय), पीथमपुर, सिरसा, चंद्रपुर, बाड़मेर, जालोर, मेरठ, बीकानेर, सिरोही, जोधपुर, नागपुर, बल्लभगढ़, जयपुर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 23.9 फीसदी यानी 52 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, मदिकेरी, मैहर, मंडीखेड़ा, मानेसर, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मोतिहारी, नाहरलागुन, पंचकुला, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, रामनगर, ऋषिकेश, रोहतक, रूपनगर, सांगली, सिलचर, श्रीनगर, सुआकाती, उल्हासनगर, वाराणसी, विजयपुरा, वृंदावन आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 131 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बहादुरगढ़, बालासोर, बारबिल, बठिंडा, बेलापुर, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिलासपुर, बिलीपाड़ा, बोइसर, बुलंदशहर, बूंदी, ब्यासनगर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चरखी दादरी, चेन्नई, दमोह, दिल्ली, देवास, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, एलुरु, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गांधीनगर, गाजियाबाद, गोरखपुर, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, कैथल, कलबुर्गी, कल्याण, करनाल, काशीपुर, कटिहार, कटनी, कोहिमा, कोल्लम, कोटा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाड, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मुंबई, नागांव, नागौर, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, नेल्लोर, नोएडा, पलवल, पंचगांव, परभणी आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 32 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अलवर, बद्दी, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बाड़मेर, बीकानेर, बर्नीहाट (असम), बर्नीहाट (मेघालय), चंद्रपुर, चित्तौड़गढ़, चुरू, दौसा, जयपुर, जैसलमेर, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, मंडीदीप, मेरठ, मैसूर, नागपुर, पीथमपुर, राजकोट, सागर, सवाई माधोपुर, सिरोही, सिरसा, वडोदरा, वातवा आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश में मेहसाणा, सोनीपत, श्री गंगानगर में स्थिति ‘खराब’ है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 218 में से 52 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 131 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 04 मई को यह आंकड़ा 137 दर्ज किया गया था।
32 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज मेहसाणा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 248 दर्ज किया गया। वहां वायु गुणवत्ता खराब दर्ज की गई है। इससे पहले कल मेहसाणा में सूचकांक 149 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण में 99 अंकों का भारी इजाफा हुआ है। इसके साथ ही मेहसाणा में वायु गुणवत्ता मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
इससे पहले कल देश में पानीपत की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब एक्यूआई 295 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज सरकारी आंकड़ों में पानीपत का जिक्र नहीं है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 88 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 86 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में दो अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज भी संतोषजनक बनी हुई है।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 73 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 86 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वहां आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 05 मई को मैसूर चौथे स्थान पर है, वहीं सोनीपत (246) दूसरे, जबकि श्री गंगानगर (238) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 64, गाजियाबाद में 71, गुवाहाटी में 53, गुरूग्राम में 99, नोएडा में 95, ग्रेटर नोएडा में 86 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 52 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 51, चेन्नई में 58, चंडीगढ़ में 69, हैदराबाद में 70, जयपुर में 101 और पटना में 66 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 52 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, अंबरनाथ, बरेली, बारीपदा, बैरकपुर, बेलगाम, भागलपुर, भिलाई, बिहार शरीफ, ब्रजराजनगर, बक्सर, छाल, चिक्कमगलुरु, धौलपुर, दुर्गापुर, फिरोजाबाद, गंगटोक, गया, हल्दिया, हावड़ा, झांसी, कानपुर, खुर्जा, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, मदिकेरी, मैहर, मंडीखेड़ा, मानेसर, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मोतिहारी, नाहरलागुन, पंचकुला, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, रामनगर, ऋषिकेश, रोहतक, रूपनगर, सांगली, सिलचर, श्रीनगर, सुआकाती, उल्हासनगर, वाराणसी, विजयपुरा, वृंदावन शामिल हैं।
वहीं आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बागलकोट, बागपत, बहादुरगढ़, बालासोर, बारबिल, बठिंडा, बेलापुर, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिलासपुर, बिलीपाड़ा, बोइसर, बुलंदशहर, बूंदी, ब्यासनगर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चरखी दादरी, चेन्नई, दमोह, दिल्ली, देवास, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, एलुरु, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गांधीनगर, गाजियाबाद, गोरखपुर, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, कैथल, कलबुर्गी, कल्याण, करनाल, काशीपुर, कटिहार, कटनी, कोहिमा, कोल्लम, कोटा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाड, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मुंबई, नागांव, नागौर, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, नेल्लोर, नोएडा, पलवल, पंचगांव, परभणी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, रतलाम, राउरकेला, सतना, शिवमोगा, सीकर, सिलीगुड़ी, सिंगरौली, शिवसागर, सोलापुर, सूरत, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, टोंक, तुमडीह, उदयपुर, उज्जैन, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम, यादगीर, यमुना नगर आदि 131 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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