गर्मी और मानसून के बीच जब देश के अधिकांश शहर अपेक्षाकृत साफ हवा में सांस ले रहे थे, तब मेघालय का बर्नीहाट अचानक जहरीली हवा के घेरे में आ गया। महज 24 घंटों में वहां प्रदूषण का स्तर इतनी तेजी से बढ़ा कि शहर देश का सबसे प्रदूषित इलाका बन गया। यह केवल एक शहर की कहानी नहीं, बल्कि उस अदृश्य संकट की चेतावनी है जो भारत के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग रूपों में लोगों के फेफड़ों पर हमला कर रहा है।
13 जून 2026 को बर्नीहाट का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 268 तक पहुंच गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। यहां पीएम2.5 का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 1,680 प्रतिशत अधिक दर्ज किया गया, जो गंभीर स्वास्थ्य जोखिम का संकेत है।
इसके विपरीत अंबरनाथ देश का सबसे स्वच्छ शहर रहा, जहां एक्यूआई महज 16 रिकॉर्ड किया गया।
राष्ट्रीय स्तर पर तस्वीर अपेक्षाकृत राहतभरी रही, क्योंकि 239 शहरों में से करीब 82 प्रतिशत में हवा ‘बेहतर’ या ‘संतोषजनक’ श्रेणी में दर्ज की गई।
दिल्ली में भी प्रदूषण बढ़ा, लेकिन हवा अब भी संतोषजनक बनी हुई है। वहीं राजस्थान के कई शहर देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल रहे।
आंकड़े बताते हैं कि प्रदूषण का संकट अब एक समान नहीं रहा—कुछ शहर राहत की सांस ले रहे हैं, जबकि कुछ जगहों पर हवा तेजी से स्वास्थ्य के लिए खतरनाक होती जा रही है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 13 जून 2026 को देश में मेघालय का बर्नीहाट सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 268 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल बर्नीहाट में सूचकांक 142 रिकॉर्ड किया गया था। मतलब कि वहां कल से प्रदूषण में 126 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि बर्नीहाट की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
बर्नीहाट में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,680 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में अंबरनाथ की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 16 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर बर्नीहाट की तुलना अंबरनाथ से करें तो वहां स्थिति 16.7 गुणा खराब है।
बता दें कि इससे पहले कल बीकानेर में स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 266 तक पहुंच गया था। वहीं आज 102 अंकों के भारी सुधार के साथ बीकानेर में सूचकांक 164 पर पहुंच गया है। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक सीधे बेहद खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गया है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में उछाल आया है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 73 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 96 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 23 अंकों का उछाल दर्ज किया गया है। इसके बावजूद दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है। कल दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन दर्ज किया गया था।
इससे पहले 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 30 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 85 पर पहुंच गया। वहीं 05 मई को सूचकांक 86, जबकि 04 मई को 88 दर्ज किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 114 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 126 पर पहुंच गया। मतलब कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 13 जून 2026 को 239 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 17.6 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 64.4 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 18 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 16 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 13.2 फीसदी का उछाल आया है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती 17.6 फीसदी घट गई है। कुछ ऐसी ही स्थिति खराब हवा वाले शहरों की भी है, जिनकी संख्या में कल से करीब 50 फीसदी की गिरावट आई है, जोकि राहत की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में धनबाद (183) दूसरे जबकि पाली (177) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह बाड़मेर (168) चौथे स्थान पर है। जैसलमेर (165) – बीकानेर (164) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
नागौर (157) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में चरखी दादरी (154), चूरू (154) और अंगुल (150) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में राजस्थान के पांच शहर (पाली, बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, नागौर और चूरू) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि बर्नीहाट (मेघालय), चरखी दादरी, तालचेर, फरीदाबाद, मंडीदीप, पंचगांव, मुजफ्फरनगर, बर्नीहाट (असम), गया, भिवानी, महाद आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं धनबाद, पाली, बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, नागौर, चूरू, सिरोही, सहरसा, जालोर, उदयपुर, बारबिल, पीथमपुर, वातवा, बिलीपाड़ा, जोधपुर, विशाखापत्तनम, भिवाड़ी, बांसवाड़ा, खन्ना, पानीपत, छपरा, बहादुरगढ़, हनुमानगढ़, धुले आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 17.6 फीसदी यानी 42 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में कोयंबटूर, कुड्डालोर, देहरादून, धारूहेड़ा, धौलपुर, डूंगरपुर, फिरोजाबाद, गडग, गंगटोक, झांसी, कडप्पा, कलबुर्गी, कोहिमा, मदिकेरी, मीरा-भायंदर, मुंगेर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, पंपोर, पंचकुला, पटियाला, रामनगर, समस्तीपुर, शिवमोगा, सिलचर, शिवसागर, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, तिरुमाला, उल्हासनगर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 154 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंकलेश्वर, अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बागलकोट, बागपत, बालासोर, बल्लभगढ़, बरेली, बारीपदा, बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बोइसर, बुलंदशहर, बूंदी, बक्सर, ब्यासनगर, चेन्नई, छाल, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कटक, दौसा, दिल्ली, देवास, धारवाड़, दुर्गापुर, एलुरु, गांधीनगर, गाजियाबाद, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हापुड़, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, जलगांव, जलना, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोरापोखर, कैथल, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करनाल, कटिहार, कटनी, खुर्जा, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मदुरई, मैहर, मालेगांव, मानेसर, मंगलौर, मेहसाणा, मिलुपारा, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 42 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अंगुल, बहादुरगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बाड़मेर, भिवाड़ी, भिवानी, बीकानेर, बिलीपाड़ा, बर्नीहाट (असम), चरखी दादरी, छपरा, चूरू, धनबाद, धुले, फरीदाबाद, गया, ग्रेटर नोएडा, हनुमानगढ़, जैसलमेर, जालोर, जोधपुर, खन्ना, महाद, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नागौर, नोएडा, पाली, पंचगांव, पानीपत, पीथमपुर, सहरसा, सिलीगुड़ी, सिरोही, तालचेर, उदयपुर, वातवा, विशाखापत्तनम आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश में मेघालय के बर्नीहाट (268) में स्थिति खराब है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 239 में से 42 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 154 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 12 जून को यह आंकड़ा 136 दर्ज किया गया था।
42 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज मेघालय के बर्नीहाट में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 268 दर्ज किया गया। हालांकि कल वहां एक्यूआई 142 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में बर्नीहाट में प्रदूषण के स्तर में 126 अंकों का भारी उछाल आया है।
इससे पहले कल बीकानेर में स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 266 तक पहुंच गया था। वहीं आज 102 अंकों के भारी सुधार के साथ बीकानेर में सूचकांक 164 पर पहुंच गया है। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक सीधे बेहद खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में उछाल आया है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 73 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 96 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 23 अंकों का उछाल दर्ज किया गया है। इसके बावजूद दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 114 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 126 पर पहुंच गया। मतलब कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 13 जून को बाड़मेर (168) चौथे स्थान पर है, वहीं धनबाद (183) दूसरे, जबकि पाली (177) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 82, गाजियाबाद में 95, गुवाहाटी में 71, गुरूग्राम में 99, नोएडा में 102, ग्रेटर नोएडा में 115 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 61 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 100, चेन्नई में 56, चंडीगढ़ में 44, हैदराबाद में 54, जयपुर में 73 और पटना में 79 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 42 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अंबरनाथ, बैरकपुर, भिलाई, बिलासपुर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चिक्काबल्लापुर, कोयंबटूर, कुड्डालोर, देहरादून, धारूहेड़ा, धौलपुर, डूंगरपुर, फिरोजाबाद, गडग, गंगटोक, झांसी, कडप्पा, कलबुर्गी, कोहिमा, मदिकेरी, मीरा-भायंदर, मुंगेर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, पंपोर, पंचकुला, पटियाला, रामनगर, समस्तीपुर, शिवमोगा, सिलचर, शिवसागर, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, तिरुमाला, उल्हासनगर, विजयपुरा, विरार शामिल हैं।
वहीं अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंकलेश्वर, अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बागलकोट, बागपत, बालासोर, बल्लभगढ़, बरेली, बारीपदा, बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बोइसर, बुलंदशहर, बूंदी, बक्सर, ब्यासनगर, चेन्नई, छाल, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कटक, दौसा, दिल्ली, देवास, धारवाड़, दुर्गापुर, एलुरु, गांधीनगर, गाजियाबाद, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हापुड़, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, जलगांव, जलना, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोरापोखर, कैथल, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करनाल, कटिहार, कटनी, खुर्जा, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मदुरई, मैहर, मालेगांव, मानेसर, मंगलौर, मेहसाणा, मिलुपारा, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नागपुर, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, पलवल, परभणी, पटना, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, रोहतक, राउरकेला, रूपनगर, सागर, सांगली, सतना, सवाई माधोपुर, सीकर, सोलापुर, सोनीपत, श्री गंगानगर, सुआकाती, सूरत, टेन्सा, ठाणे, त्रिशूर, तिरुपति, तुमकुरु, तुमडीह, उज्जैन, वडोदरा, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, वृंदावन, यमुना नगर आदि 154 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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