27 अप्रैल 2026 को देश में हवा का हाल गंभीर तस्वीर पेश करता है। इस दौरान जहां मेरठ सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा, वहीं बल्लभगढ़, गाजियाबाद और हरियाणा के कई शहरों में हालात ‘खराब’ बने रहे।
मेरठ का एक्यूआई 282 तक पहुंच गया, जो सुरक्षित सीमा से कई गुणा अधिक है और हवा में जहरीले कणों का दबदबा साफ दिखाता है।
हालांकि दिल्ली में 24 घंटों में सुधार दर्ज हुआ और वायु गुणवत्ता ‘खराब’ से ‘मध्यम’ श्रेणी में आ गई, लेकिन फरीदाबाद में प्रदूषण बढ़ा है। देशभर के आंकड़े बताते हैं कि एक तरफ कुछ शहरों में राहत के संकेत हैं, तो दूसरी तरफ उत्तर भारत के औद्योगिक और शहरी क्लस्टर अब भी प्रदूषण के हॉटस्पॉट बने हुए हैं।
इस बीच रामनाथपुरम सबसे साफ हवा वाले शहर के रूप में सामने आया, जहां एक्यूआई महज 20 दर्ज हुआ, जो मेरठ की तुलना में 14 गुणा बेहतर है। कुल मिलाकर तस्वीर यही है कि देश में हवा की गुणवत्ता में उतार-चढ़ाव जारी है, लेकिन कई शहर अब भी जहरीली हवा की चपेट में हैं।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 27 अप्रैल 2026 को देश में मेरठ सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 282 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि कल मेरठ में वायु गुणवत्ता सूचकांक 243 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 39 अंकों का उछाल आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि मेरठ की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
मेरठ में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 500 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में रामनाथपुरम की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 20 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर मेरठ की तुलना रामनाथपुरम से करें तो वहां स्थिति 14.1 गुणा खराब है।
इससे पहले कल (26 अप्रैल 2026) देश में सिंगरौली की स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 349 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज सरकारी आंकड़ों में सिंगरौली का जिक्र नहीं है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 222 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 197 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 25 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 93 पर पहुंच गया था। इसके बाद 01 अप्रैल को सूचकांक 113 दर्ज क्या गया। वहीं आज सूचकांक 114 रिकॉर्ड किया गया है। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 122 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 145 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 27 अप्रैल 2026 को 230 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 11.7 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 45.2 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 43 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 22.7 फीसदी का इजाफा हुआ है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी तीन फीसदी का उछाल दर्ज किया गया। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से करीब 8.5 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरफ खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से करीब 28 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जोकि राहत की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में बल्लभगढ़ (253) दूसरे जबकि गाजियाबाद (251) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह सोनीपत (241) चौथे स्थान पर है। रोहतक-पानीपत में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 235 और 223 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
बहादुरगढ़ (221) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में भिवाड़ी (217), ग्रेटर नोएडा (215) और हापुड़ (213) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के पांच शहर (बल्लभगढ़, सोनीपत, रोहतक, पानीपत, बहादुरगढ़) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि सोनीपत, रोहतक, पानीपत, बहादुरगढ़, मंडी गोबिंदगढ़, नारनौल, जींद, धारूहेड़ा, कल्याण, यमुना नगर, फरीदाबाद, पंचगांव, लखनऊ, नंदेसरी, पंचकुला, हनुमानगढ़, करनाल, अहमदनगर, मंडीदीप, तिरुपति, कैथल, गुम्मिडीपूंडी, पाली, वातवा, बिलासपुर, खन्ना, लातूर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं मेरठ, बल्लभगढ़, गाजियाबाद, भिवाड़ी, ग्रेटर नोएडा, हापुड़, बर्नीहाट (मेघालय), बुलंदशहर, दिल्ली, श्री गंगानगर, सवाई माधोपुर, बीकानेर, नोएडा, गुरुग्राम, बद्दी, कुरुक्षेत्र, मेहसाणा, टोंक, नांदेड़, आगरा, चूरू, सीकर, ग्वालियर, परभनी, चरखी दादरी, पीथमपुर, जैसलमेर, करौली, खुर्जा, फतेहाबाद, नागपुर, जयपुर, वडोदरा, कोरबा, वृंदावन, बारां, भावनगर, विशाखापत्तनम, यादगीर, पटियाला, नागौर, देवास, दौसा, कानपुर, कटनी, बेलापुर, भोपाल, दमोह, धौलपुर, वाराणसी, अलवर, बांसवाड़ा, बदलापुर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 11.7 फीसदी यानी महज 27 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बक्सर, चामराजनगर, चेन्नई, चिक्कमगलुरु, गंगटोक, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, मदिकेरी, मोतिहारी, मुंगेर, नेल्लोर, पंपोर, पेरुंदुरई, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, रामनाथपुरम, सहरसा, सांगली, सिलचर, शिवसागर शामिल हैं।
इसी तरह देश के 104 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बूंदी, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, छाल, चिक्काबल्लापुर, चित्तौड़गढ़, कटक, देहरादून, धनबाद, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जालंधर, जलगांव, जलना, जालौर, झांसी, जोधपुर, जोरापोखर, कलबुर्गी, कन्नूर, कटिहार, क्योंझर, कोल्हापुर, कोल्लम, कोटा, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मदुरै, महाद, मैहर, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नाहरलागुन, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, रायपुर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सासाराम आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 86 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अलवर, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बेलापुर, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भोपाल, बीकानेर, बिलासपुर, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चूरू, दमोह, दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धौलपुर, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गांधीनगर, गया, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, ग्वालियर, हनुमानगढ़, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, कैथल, कल्याण, कानपुर, करौली, करनाल, कटनी, खन्ना, खुर्जा, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मेहसाणा, मुजफ्फरनगर, नागौर, नागपुर, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नोएडा, पाली, पंचगांव, पंचकुला, परभनी, पटियाला, पीथमपुर, सागर, सवाई माधोपुर, सीकर, श्री गंगानगर, ठाणे, तिरुपति, टोंक, तुमडीह, वडोदरा, वाराणसी, वातवा, विशाखापत्तनम, वृंदावन, यादगीर, यमुना नगर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश में अंगुल, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, भिवाड़ी, बुलंदशहर, बर्नीहाट (मेघालय), गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, हापुड़, मेरठ, पानीपत, रोहतक, सोनीपत में स्थिति ‘खराब’ है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 230 में से महज 27 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 104 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 26 अप्रैल को यह आंकड़ा 101 दर्ज किया गया था।
86 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज मेरठ में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 282 दर्ज किया गया। गौरतलब है कि कल मेरठ में वायु गुणवत्ता सूचकांक 243 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 39 अंकों का इजाफा हुआ है। इसके साथ ही वायु गुणवत्ता आज भी ‘खराब’ बनी हुई है।
इससे पहले कल (26 अप्रैल 2026) देश में सिंगरौली की स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 349 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज सरकारी आंकड़ों में सिंगरौली का जिक्र नहीं है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 222 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 197 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 25 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 122 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 145 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 27 अप्रैल को सोनीपत चौथे स्थान पर है, वहीं बल्लभगढ़ (253) दूसरे, जबकि गाजियाबाद (251) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 144, गाजियाबाद में 251, गुवाहाटी में 51, गुरूग्राम में 168, नोएडा में 173, ग्रेटर नोएडा में 215 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 81 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 142, चेन्नई में 48, चंडीगढ़ में 68, हैदराबाद में 78, जयपुर में 123 और पटना में 84 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 27 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें बैरकपुर, भिलाई, बक्सर, चामराजनगर, चेन्नई, चिक्कमगलुरु, गंगटोक, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, मदिकेरी, मोतिहारी, मुंगेर, नेल्लोर, पंपोर, पेरुंदुरई, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, रामनाथपुरम, सहरसा, सांगली, सिलचर, शिवसागर, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम, विजयपुरा शामिल हैं।
वहीं अजमेर, अकोला, अमरावती (आंधप्रदेश), अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, आसनसोल, बगलकोट, बालासोर, बरेली, बारीपाड़ा, बाड़मेर, बठिंडा, भागलपुर, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिलीपाड़ा, ब्रजराजनगर, बूंदी, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, छाल, चिक्काबल्लापुर, चित्तौड़गढ़, कटक, देहरादून, धनबाद, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जालंधर, जलगांव, जलना, जालौर, झांसी, जोधपुर, जोरापोखर, कलबुर्गी, कन्नूर, कटिहार, क्योंझर, कोल्हापुर, कोल्लम, कोटा, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मदुरै, महाद, मैहर, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नाहरलागुन, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, रायपुर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सिलीगुड़ी, सिरोही, सिवान, सोलापुर, सुआकाती, सूरत, तालचेर, टेन्सा, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, उदयपुर, उल्हासनगर, वापी, विजयवाड़ा, विरार आदि 104 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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