देश में वायु प्रदूषण का खतरा लगातार गहराता जा रहा है, जहां एक ओर मछलीपट्टनम और बर्नीहाट 283 एक्यूआई के साथ सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरे, वहीं दूसरी ओर मदिकेरी देश का सबसे स्वच्छ शहर रहा, जहाँ एक्यूआई महज 20 दर्ज किया गया।
चौंकाने वाली बात यह है कि सिर्फ 24 घंटों में कुछ शहरों में प्रदूषण में भारी उछाल आया है, और कई जगह प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से कई गुना ज्यादा पहुंच गया है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 241 शहरों के आंकड़े बताते हैं कि देश के सिर्फ 14.9 फीसदी शहरों में ही हवा साफ है, जबकि करीब 20 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक बने हुए हैं।
यह स्थिति साफ संकेत देती है कि देश में प्रदूषण का संकट उतार-चढ़ाव के बावजूद बना हुआ है और कई शहरों में हवा अब धीरे-धीरे स्वास्थ्य आपातकाल जैसी स्थिति की ओर बढ़ रही है।
विश्लेषण के मुताबिक 06 अप्रैल 2026 को देश में आंध्रप्रदेश का मछलीपट्टनम और मेघालय का बर्नीहाट अधिक प्रदूषित शहर रहे। इस दौरान मछलीपट्टनम और बर्नीहाट में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 283 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि इससे पहले 05 अप्रैल को जहां मछलीपट्टनम में एक्यूआई 75 जबकि बर्नीहाट में 152 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में इन शहरों में प्रदूषण के स्तर में अच्छा-खासा इजाफा हुआ है।
रुझानों में सामने आया है कि मछलीपट्टनम की हवा में ओजोन जबकि बर्नीहाट की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी हैं। देखा जाए तो इन शहरों की फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। बर्नीहाट में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 500 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 20 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर बर्नीहाट (मेघालय)-मछलीपट्टनम की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 14 गुणा खराब है।
बता दें कि इससे पहले कल श्री गंगानगर में वायु गुणवत्ता सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 249 दर्ज किया गया। हालांकि आज वहां एक्यूआई घटकर 241 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 8 अंकों का सुधार आया है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में मामूली बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 134 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 135 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में एक अंक का इजाफा हुआ है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 173 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 177 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 6 अप्रैल 2026 को 241 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 14.9 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 65.1 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 19.9 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 2.7 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में चार फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से 12.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी तरह खराब हवा वाले शहरों में कल से 20 फीसदी का उछाल आया है, जोकि चिंता का विषय है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में श्री गंगानगर (241) दूसरे जबकि अंगुल (221) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह बर्नीहाट (असम) (217) चौथे स्थान पर है। बल्लभगढ़-ग्रेटर नोएडा में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 204 और 192 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
सिंगरौली (184) सातवें स्थान पर है। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में फरीदाबाद (177), सवाई माधोपुर (174) और अररिया (164) भी शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में राजस्थान के दो शहर (श्री गंगानगर, सवाई माधोपुर) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि बर्नीहाट (असम), फरीदाबाद, अररिया, सोनीपत, देवास, चरखी दादरी, भिवानी, हापुड़, यमुना नगर, तिरुपति, मुजफ्फरनगर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं बर्नीहाट (मेघालय), बल्लभगढ़, ग्रेटर नोएडा, सिंगरौली, गाजियाबाद, नोएडा, गुरुग्राम, बागपत, दिल्ली, भिवाड़ी, मेरठ, बिलीपाड़ा, बुलंदशहर, मंडीदीप, पीथमपुर, पटना, बीकानेर, चंद्रपुर, अगरतला, वातवा, जोधपुर, हाजीपुर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 14.9 फीसदी यानी महज 36 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बक्सर, छपरा, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, हुबली, झांसी, जोरापोखर, कैथल, कानपुर, खन्ना, कोहिमा, कोरबा, कुंजेमुरा, मदिकेरी, मंडी गोबिंदगढ़, मुंगेर, नागांव, नलबाड़ी, पंपोर, पंचकुला आदि शामिल हैं।
आज देश के जिन 157 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, ब्यासनगर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कटक, दौसा, धारूहेड़ा, धौलपुर, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गंगटोक, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जलना, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, कडप्पा, कलबुर्गी, कल्याण, करौली, करनाल, काशीपुर, कटनी, क्योंझर, खुर्जा, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, कोटा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, महाड, मालेगांव, मानेसर, मंगलौर, मंगुराहा, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागौर, नागपुर, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़ आदि शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 42 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में अगरतला, अररिया, औरंगाबाद (बिहार), बद्दी, बागपत, बालासोर, बारां, भरतपुर, भिवाड़ी, भिवानी, बीकानेर, बिलीपाड़ा, बुलंदशहर, बूंदी, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चूरू, दिल्ली, देवास, धनबाद, फरीदाबाद, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, ग्वालियर, हाजीपुर, हापुड़, हिसार, जयपुर, जोधपुर, मंडीदीप, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नोएडा, पटना, पीथमपुर, सवाई माधोपुर, सिंगरौली, सोनीपत, तिरुपति, वातवा, यमुना नगर आदि शामिल हैं।
इसी तरह अंगुल, बल्लभगढ़, बर्नीहाट (असम), बर्नीहाट (मेघालय), मछलीपट्टनम, श्री गंगानगर में वायु गुणवत्ता ‘खराब’ है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 241 में से महज 36 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 157 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 05 अप्रैल को यह आंकड़ा 151 दर्ज किया गया था।
42 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज आंध्रप्रदेश के मछलीपट्टनम और मेघालय के बर्नीहाट में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 283 दर्ज किया गया। गौरतलब है कि कल से इन दोनों शहरों में प्रदूषण के स्तर में इजाफा हुआ है। इस दौरान जहां मछलीपट्टनम में सूचकांक में 163 अंकों का जबकि बर्नीहाट में 131 अंकों का भारी उछाल दर्ज किया गया है।
बता दें कि कल श्री गंगानगर में एक्यूआई 249 दर्ज किया गया था, जहां आज एक्यूआई घटकर 241 पर पहुंच गया है। मतलब कि वहां पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 8 अंकों का सुधार आया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में मामूली बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 134 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 135 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में एक अंक का इजाफा हुआ है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 173 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 177 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 06 अप्रैल को बर्नीहाट (असम) चौथे स्थान पर है, वहीं श्री गंगानगर (241) दूसरे, जबकि अंगुल (221) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 118, गाजियाबाद में 162, गुवाहाटी में 74, गुरूग्राम में 137, नोएडा में 159, ग्रेटर नोएडा में 192 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 53 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 58, चेन्नई में 55, चंडीगढ़ में 59, हैदराबाद में 70, जयपुर में 138 और पटना में 112 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 36 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, अंबरनाथ, बागलकोट, बेगूसराय, बेतिया, भिलाई, बक्सर, छपरा, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, हुबली, झांसी, जोरापोखर, कैथल, कानपुर, खन्ना, कोहिमा, कोरबा, कुंजेमुरा, मदिकेरी, मंडी गोबिंदगढ़, मुंगेर, नागांव, नलबाड़ी, पंपोर, पंचकुला, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, ऋषिकेश, शिलांग, सिलचर, श्रीनगर, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, विजयपुरा शामिल हैं।
वहीं आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंकलेश्वर, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बहादुरगढ़, बांसवाड़ा, बारबिल, बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, ब्यासनगर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कटक, दौसा, धारूहेड़ा, धौलपुर, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गंगटोक, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जलना, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, कडप्पा, कलबुर्गी, कल्याण, करौली, करनाल, काशीपुर, कटनी, क्योंझर, खुर्जा, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, कोटा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, महाड, मालेगांव, मानेसर, मंगलौर, मंगुराहा, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागौर, नागपुर, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, नेल्लोर, पाली, पलवल, पंचगांव, परभनी, पटियाला, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुदुचेरी, पुणे, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, रोहतक, राउरकेला, सागर, सहरसा, समस्तीपुर, सांगली, सतना, शिवमोगा, सीकर, सिलीगुड़ी, सिरोही, सिरसा, शिवसागर, सोलापुर, सुआकाती, सूरत, तालचेर, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तुमडीह, उदयपुर, उल्हासनगर, वडोदरा, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार, विशाखापत्तनम, वृंदावन, यादगीर आदि 157 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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