18 जनवरी 2026 को दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 440 तक पहुंच गया, जो इस वर्ष का सबसे प्रदूषित दिन था।
गाजियाबाद में स्थिति और भी गंभीर रही, जहां एक्यूआई 458 दर्ज किया गया। इस बढ़ते प्रदूषण के कारण दिल्ली में ग्रेप-4 की पाबंदियां फिर से लागू कर दी गई हैं।
गाजियाबाद में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,800 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 10 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर में गाजियाबाद की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति 45 गुणा खराब है।
विश्लेषण से पता चला है कि 18 जनवरी 2026 को देश में गाजियाबाद की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 458 रिकॉर्ड किया गया। इससे पहले 17 जनवरी को गाजियाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 394 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 64 अंकों का इजाफा हुआ है। इसके साथ ही वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ से गंभीर श्रेणी में पहुंच गई है।
रुझानों में सामने आया है कि गाजियाबाद की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी हैं। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
गाजियाबाद में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,800 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 10 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर में गाजियाबाद की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति 45 गुणा खराब है।
कल देश में दिल्ली की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 दर्ज किया गया था। हालांकि 18 जनवरी को 40 अंकों के उछाल के साथ दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 440 पर पहुंच गया है। मतलब कि वहां वायु गुणवत्ता बेहद खराब से गंभीर श्रेणी में पहुंच गई है। इसके साथ ही दिल्ली में ग्रेप-4 की पाबंदियां फिर से लागु कर दी गई हैं।
बता दें कि ग्रेप-4 को तभी लागू किया जाता है जब हवा में प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है और इससे आम जनता के स्वास्थ्य पर सीधा खतरा मंडराने लगता है। गौरतलब है कि इससे पहले 14 नवंबर को दिल्ली में 2025 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 461 तक पहुंच गया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 18 जनवरी 2026 को 236 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 2.5 फीसदी शहरों में हवा साफ है।
वहीं 27.1 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 68.6 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक बनी हुई है।
बता दें कि कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में करीब 20 फीसदी का इजाफा हुआ है। इसी तरफ संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 16.4 फीसदी का इजाफा हुआ है। दूसरी तरफ मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में 15.4 फीसदी की गिरावट आई है। खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 9.4 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया है, जोकि चिंता का विषय है। बेहद खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 14.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 247 रिकॉर्ड किया गया है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में दिल्ली (440) दूसरे जबकि नोएडा (430) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 402 अंकों के साथ ग्रेटर नोएडा चौथे स्थान पर है। पानीपत-गुरुग्राम में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 397 और 378 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
धारूहेड़ा (361) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में मेरठ (352), भिवाड़ी (348) और अंगुल (335) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के चार शहर (गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, मेरठ) और हरियाणा के तीन शहर (पानीपत, गुरुग्राम, धारूहेड़ा) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि गाजियाबाद, दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, पानीपत, गुरुग्राम, धारूहेड़ा, मेरठ, भिवाड़ी, बागपत, मुजफ्फरनगर, मानेसर, नारनौल, हापुड़, चरखी दादरी, सिंगरौली, बालासोर, बुलंदशहर, करनाल, कोल्लम, जैसलमेर, विशाखापत्तनम, आसनसोल, अंबाला, भुवनेश्वर, बल्लभगढ़, जींद, फरीदाबाद, चुरू, तालचेर, लखनऊ, हावड़ा, हाजीपुर, बिहार शरीफ, राजगीर, कोलकाता, कुरुक्षेत्र, कानपुर, कैथल, सहरसा, टोंक, प्रयागराज, मंडीखेड़ा, कोटा, यमुना नगर , बारीपदा, बीकानेर, गुम्मिडीपूंडी, सीकर, गया, बिलीपाड़ा, पीथमपुर, बहादुरगढ़, कटनी, पंचगांव, गुवाहाटी, समस्तीपुर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं धनबाद, सवाई माधोपुर, बद्दी, नागौर, औरंगाबाद (बिहार), झुंझुनू, पटियाला, बेगूसराय, सिवान, रतलाम, क्योंझर, चंद्रपुर, अलवर, फतेहाबाद, ब्रजराजनगर, कुंजेमुरा, मालेगांव, अंकलेश्वर, नयागढ़, रामनगर, सिलीगुड़ी, बारां, जालोर, खन्ना, प्रतापगढ़, कल्याण, नांदेड़, तुमडीह, अजमेर, उल्हासनगर, पलवल, अहमदनगर, धारवाड़, श्री गंगानगर, देवास, अमृतसर, धुले, जलगांव, अकोला, आरा, बांसवाड़ा, उदयपुर, पुडुकोट्टई, बदलापुर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 2.5 फीसदी यानी महज छह शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बागलकोट, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, मदिकेरी, शिलांग, सिलचर आदि शामिल हैं।
आज देश के जिन 64 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, मदुरै, महाड, मंडी गोबिंदगढ़, मंगुराहा, मीरा-भायंदर, मुंबई, मैसूर, नासिक, नवी मुंबई, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, पुडुचेरी, पुणे, रायरंगपुर, रामनाथपुरम, ऋषिकेश, रूपनगर, सागर, सांगली, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सिरोही, श्रीनगर, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुपति, वापी, विजयपुरा, विजयवाड़ा आदि शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 115 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमृतसर, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बहादुरगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बरेली, बैरकपुर, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भीलवाड़ा, भिवानी, भोपाल, बिलीपाड़ा, ब्रजराजनगर, बक्सर, बर्नीहाट, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, चित्तौड़गढ़, कोयंबटूर, कुड्डालोर, देहरादून, देवास, धारवाड़, धौलपुर, धुले, दुर्गापुर, एलूर, फतेहाबाद, गांधीनगर, गया, गुम्मिडीपूंडी, गुवाहाटी, ग्वालियर, हल्दिया, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, जलगांव, जलना, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जोधपुर, कल्याण, काशीपुर, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, कुंजेमुरा, लुधियाना, मालेगांव, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नयागढ़, पाली, पलवल, पंचगांव, पंचकुला, परभनी, पटियाला, पटना, पीथमपुर, प्रतापगढ़, पुडुकोट्टई, पूर्णिया, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, राउरकेला, समस्तीपुर, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सिरसा, सिवान, सोलापुर, सोनीपत, श्री गंगानगर, सूरत, तिरुमाला, तुमडीह, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वाराणसी शामिल हैं।
आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 35 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में अंबाला, आसनसोल, बालासोर, बल्लभगढ़, बारीपदा, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बीकानेर, बुलंदशहर, चरखी दादरी, चुरू, धनबाद, फरीदाबाद, हाजीपुर, हापुड़, हावड़ा, जैसलमेर, जींद, कैथल, कानपुर, करनाल, कोलकाता, कोल्लम, कोटा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, मंडीखेड़ा, प्रयागराज, राजगीर, सहरसा, सिंगरौली, तालचेर, टोंक, विशाखापत्तनम, यमुना नगर शामिल हैं।
वहीं अंगुल, बागपत, भिवाड़ी, ब्यासनगर, कटक, धारूहेड़ा, गुरुग्राम, मानेसर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नारनौल, पानीपत में वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब' है। इसी तरह देश में दिल्ली, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा और नोएडा में स्थिति गंभीर है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 236 में से महज छह शहरों में हवा 'बेहतर' है। 64 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 17 जनवरी 2026 को भी यह आंकड़ा 55 दर्ज किया गया था।
115 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज गाजियाबाद (458) में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। आंकड़ों के मुताबिक कल से वहां प्रदूषण में 64 अंकों का इजाफा हुआ है। इसके साथ ही गाजियाबाद में वायु गुणवत्ता बेहद खराब से गंभीर श्रेणी में पहुंच गई है।
कल देश में दिल्ली की हवा सबसे प्रदूषित थी, जब एक्यूआई बढ़कर 400 तक पहुंच गया था। हालांकि आज 40 अंकों के उछाल के साथ दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 440 पर पहुंच गया है। मतलब कि वायु गुणवत्ता बेहद खराब से गंभीर हो गई है।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण के स्तर में गिरावट आई है, जहां सूचकांक 247 रिकॉर्ड किया गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 18 जनवरी को ग्रेटर नोएडा चौथे स्थान पर है, वहीं दिल्ली (440) दूसरे, जबकि नोएडा (430) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 156, गाजियाबाद में 458, गुवाहाटी में 185, गुरूग्राम में 378, नोएडा में 430, ग्रेटर नोएडा में 402 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 83 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 242, चेन्नई में 108, चंडीगढ़ में 159, हैदराबाद में 88, जयपुर में 154 और पटना में 156 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन छह शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें बागलकोट, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, मदिकेरी, शिलांग, सिलचर शामिल हैं।
वहीं आइजोल, अमरावती (महाराष्ट्र), अनंतपुर, बाड़मेर, बठिंडा, बेलगाम, बेतिया, भरतपुर, भिलाई, भिवंडी, बिलासपुर, बोइसर, छाल, दौसा, डूंगरपुर, फिरोजाबाद, गोरखपुर, हुबली, हैदराबाद, झांसी, कडप्पा, कलबुर्गी, कन्नूर, करौली, करूर, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, मदुरै, महाड, मंडी गोबिंदगढ़, मंगुराहा, मीरा-भायंदर, मुंबई, मैसूर, नासिक, नवी मुंबई, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, पुडुचेरी, पुणे, रायरंगपुर, रामनाथपुरम, ऋषिकेश, रूपनगर, सागर, सांगली, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सिरोही, श्रीनगर, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुपति, वापी, विजयपुरा, विजयवाड़ा, विरार, वृंदावन, यादगीर आदि 64 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:
प्रदूषण में पहले स्थान पर दिल्ली, बढ़कर 400 पर पहुंचा एक्यूआई