गुजरात की सड़कों पर इक्का दुक्का इलेक्ट्रिक व्हीकल नजर आते हैं। फोटो: राजू सजवान  
वायु

भारत का ई-सफर: इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स में गुजरात को 16वीं रैंक, वाहन बेड़े में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की हिस्सेदारी केवल 1.36 फीसदी

इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की बजाय पेट्रोल-डीजल वाहन खरीदना ज्यादा पसंद करते हैं गुजरात के लोग

Raju Sajwan

बिजली से चलने वाले वाहनों (इलेक्ट्रिक व्हीकल्स) को वाहनों से होने वाले प्रदूषण और पेट्रोल-डीजल के आयात का एक बड़ा विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन गुजरात में इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति रूझान फिलहाल नहीं दिख रहा है। हालांकि राज्य सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए कई तरीके आजमा रही है। बावजूद इसके, अभी इलेक्ट्रिक वाहनों की तादात काफी कम है। 

केंद्रीय परिवहन मंत्रालय के ऑनलाइन पोर्टल वाहन में उपलब्ध वाहन-पंजीकरण आंकड़ों के मुताबिक 13 अगस्त तक गुजरात में कुल 2,92,67,731 वाहन पंजीकृत हैं। इनमें इलेक्ट्रिक (बीओवी) श्रेणी के 2,35,314 और ‘प्योर ईवी’ श्रेणी के 1,63,268 वाहन हैं। दोनों श्रेणियों को मिलाने पर राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या 13 अगस्त तक  3,98,582 है। यह कुल पंजीकृत वाहनों का केवल 1.36 प्रतिशत है। इसके उलट राज्य का वाहन बेड़ा अब भी मुख्य रूप से पेट्रोल और डीजल पर निर्भर है। दूसरे शब्दों में कहें तो राज्य में पेट्रोल वाहनों की संख्या इलेक्ट्रिक वाहनों से लगभग 52 गुना अधिक है।

हालांकि गुजरात में इलेक्ट्रिक वाहनों के पंजीकरण में तेजी दिखाई दे रही है। वाहन पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में 75,758 इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत हुए थे, जबकि 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 86,281 हो गई। यानी एक साल में करीब 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई। चालू वित्त वर्ष 2026-27 में 15 अगस्त तक ही 75,970 इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत हो चुके हैं। खास बात यह है कि महज साढ़े चार महीने में पंजीकरण पिछले पूरे वित्त वर्ष के करीब 88 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।  

फिर भी गुजरात अन्य राज्यों के मुकाबले काफी पिछड़ रहा है। नीति आयोग की अगस्त 2025 में जारी अब तक की पहली इंडिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स (आईईएमआई) 2024 रिपोर्ट में गुजरात को 42 के स्कोर के साथ 16वीं रैंक मिली है। रिपोर्ट के मुताबिक राज्य का ट्रांसपोर्ट इलेक्ट्रिफिकेशन प्रोग्रेस स्कोर 39, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर रेडीनेस स्कोर 44 और ईवी रिसर्च एंड इनोवेशन स्टेटस स्कोर 46 है। दिलचस्प यह है कि गवर्नमेंट इनिशिएटिव्स और कंज्यूमर इंसेंटिव्स के मामले में गुजरात का प्रदर्शन बेहतर है, लेकिन प्राइवेट ईवी एडॉप्शन का स्कोर सिर्फ 5 है। यानी पॉलिसी सपोर्ट और वास्तविक कंज्यूमर एडॉप्शन के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है।

चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में भी यही विरोधाभास नजर आता है। गुजरात का कुल चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर रेडीनेस स्कोर 44 है। पब्लिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और उसके लिए कैपिटल सब्सिडी के इंडिकेटर में राज्य का स्कोर 100 है, लेकिन ईवी-टू-ईवी चार्जर रेशियो केवल 24 और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्लानिंग का स्कोर 33 है। यह संकेत देता है कि चुनौती केवल चार्जिंग स्टेशन बनाने की नहीं, बल्कि बढ़ते ईवी बेड़े के अनुरूप पर्याप्त और रणनीतिक रूप से वितरित चार्जिंग नेटवर्क तैयार करने की भी है। अगस्त 2025 में जारी इस रिपोर्ट के बाद नीति आयोग की ओर से इस तरह की कोई दूसरी इंडिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स रिपोर्ट अभी तक जारी नहीं की गई है।

लेकिन खास बात यह है कि देश के ज्यादातर हिस्सों में ई-रिक्शा की तादात जिस तेजी से बढ़ रही है। गुजरात में वह ना के बराबर है। राज्य में केवल 1284 ई-रिक्शा (पैसेंजर) रजिस्टर्ड हैं। हालांकि माल ढुलाई वाले ई-रिक्शा की तादात थोड़ी ज्यादा है। राज्य में माल ढुलाई वाले 4181 ई-रिक्शा रजिस्टर्ड है। 

बैटरी यानी ई-रिक्शा को लेकर दो साल पहले दिल्ली से रिटायर होकर अहमदाबाद लौटे सुरेश भाई की टिपण्णी बेहद महत्व रखती है। वह कहते हैं, दिल्ली में मेट्रो या डीटीसी बस तक पहुंचने के लिए ई-रिक्शा फीडर का काम करते हैं, लेकिन अहमदाबाद में ऐसा नहीं है। यही वजह है कि लोगों को कम से कम दोपहिया वाहन तो घर में रखना ही पड़ता है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि ई-रिक्शा की वजह से दिल्ली में जाम भी बहुत लगता है।

गुजरात सरकार ने 23 जून 2021 को गुजरात राज्य इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2021 जारी की। नीति का उद्देश्य राज्य के परिवहन क्षेत्र को इलेक्ट्रिक गतिशीलता की ओर ले जाना, गुजरात को इलेक्ट्रिक वाहनों और उनके उपकरणों के विनिर्माण का केंद्र बनाना, इस क्षेत्र में निवेश और स्टार्टअप को बढ़ावा देना तथा वायु प्रदूषण कम करना था। नीति 1 जुलाई 2021 से चार वर्षों के लिए लागू की गई थी।

इसके तहत चार वर्षों में पहले दो लाख इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें 1.10 लाख दोपहिया, 70 हजार तिपहिया और 20 हजार चारपहिया वाहन शामिल थे। नीति में वाहनों की खरीद पर प्रति किलोवाट घंटा 10 हजार रुपए तक की राज्य सब्सिडी, चार्जिंग ढांचे और इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण को प्रोत्साहन देने के प्रावधान भी किए गए थे। 

हालांकि शुरुआती वर्षों में ईवी अपनाने की रफ्तार धीमी रही। आंकड़ों के अनुसार 2021-22 में केवल 19,032 ईवी पंजीकृत हुए, लेकिन 2022-23 में यह बढ़कर 81,121 और 2023-24 में 88,440 हो गए। यानी पहले साल धीमी शुरुआत के बाद दूसरे और तीसरे साल पंजीकरण में तेज उछाल आया और अंततः चार वर्षों में कुल 2,57,735 ईवी पंजीकृत हुए। 


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