हरियाणा तेजी से देश में प्रदूषण के हॉटस्पॉट के रूप में उभरता दिख रहा है। 11 जून को सिरसा में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 386 तक पहुंच गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। चिंताजनक बात यह है कि महज 24 घंटों में यहां प्रदूषण 234 अंकों की छलांग लगाकर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।
इसी तरह आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के सात शहर शामिल रहे, जिससे राज्य में बिगड़ती वायु गुणवत्ता की गंभीर तस्वीर सामने आई है।
सिरसा की हवा में पीएम10 कणों का दबदबा है और प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 750 फीसदी अधिक दर्ज किया गया।
हालांकि देशभर की तस्वीर पूरी तरह निराशाजनक नहीं है। 235 शहरों में से 126 शहरों की हवा ‘संतोषजनक’ और 33 शहरों की हवा ‘बेहतर’ श्रेणी में रही।
गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे शहरों में प्रदूषण में कुछ कमी भी दर्ज की गई। इसके बावजूद सिरसा, कैथल, हिसार और पानीपत जैसे शहरों की स्थिति बताती है कि उत्तर भारत, खासकर हरियाणा, वायु प्रदूषण के नए संकट केंद्र के रूप में उभर रहा है।
यह चेतावनी है कि यदि प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर तत्काल और प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया, तो लाखों लोगों के स्वास्थ्य पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 11 जून 2026 को देश में सिरसा सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 386 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल सिरसा में सूचकांक 152 रिकॉर्ड किया गया था। मतलब कि वहां कल से प्रदूषण में 234 अंकों का भारी उछाल आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि सिरसा की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
सिरसा में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 750 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में गडग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 23 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर सिरसा की तुलना गडग से करें तो वहां स्थिति 16 गुणा खराब है।
बता दें कि कल गुरुग्राम में स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 264 तक पहुंच गया। वहीं आज 56 अंकों के भारी सुधार के साथ गुरुग्राम में सूचकांक 208 पर पहुंच गया है। मतलब की सुधार के बावजूद वायु गुणवत्ता आज भी खराब बनी हुई है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 169 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 167 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में दो अंकों का मामूली सुधार दर्ज किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
इससे पहले 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 30 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 85 पर पहुंच गया। वहीं 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को एक्यूआई 93 रिकॉर्ड किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 158 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 99 पर पहुंच गया। मतलब कि फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता मध्यम से संतोषजनक श्रेणी में पहुंच गई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 11 जून 2026 को 235 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 14 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 53.6 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 32.4 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 8.3 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 6.8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों को देखें तो उनकी गिनती में करीब 11 फीसदी की कमी दर्ज की गई। इसी तरह खराब हवा वाले शहरों में भी 18 फीसदी से अधिक की कमी आई है, जोकि राहत की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में बीकानेर (246) दूसरे जबकि कैथल (241) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह हिसार (238) चौथे स्थान पर है। पंचगांव (224) – चरखी दादरी (216) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
पानीपत (210) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में गुरुग्राम (208), बागपत (207) और बर्नीहाट (मेघालय) (207) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के सात शहर (सिरसा, कैथल, हिसार, पंचगांव, चरखी दादरी, पानीपत, गुरुग्राम) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि कैथल, हिसार, पंचगांव, चरखी दादरी, बर्नीहाट (मेघालय), अंबाला, भिवानी, जींद, धारूहेड़ा, बहादुरगढ़, करनाल, मानेसर, तालचेर, पंचकुला, कुरुक्षेत्र, भिवाड़ी, गुम्मिडीपूंडी, बर्नीहाट (असम), लखनऊ, जालंधर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं सिरसा, बीकानेर, पानीपत, गुरुग्राम, बागपत, मेरठ, हनुमानगढ़, चूरू, गाजियाबाद, बद्दी, दिल्ली, यमुना नगर , मुजफ्फरनगर, बल्लभगढ़, बठिंडा, दौसा, रूपनगर, रोहतक, पाली, ग्रेटर नोएडा, बाड़मेर, बिलाईपाड़ा, वातवा, जैसलमेर, सीकर, जयपुर, नोएडा, करौली, सोनीपत, उदयपुर, टोंक, अगरतला, झुंझुनू, धनबाद, सहरसा, श्री गंगानगर, फतेहाबाद, हापुड़, जालौर, सवाई माधोपुर, पीथमपुर, भीलवाड़ा, धुले, नागौर, ग्वालियर, जोधपुर, आगरा, लुधियाना, पटियाला, अहमदाबाद आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 14 फीसदी यानी 33 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में भिलाई, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, डूंगरपुर, गडग, हल्दिया, जलना, कलबुर्गी, काशीपुर, कोहिमा, कोल्हापुर, कोप्पल, कोरबा, मदिकेरी, मुंगेर, मैसूर, नाहरलागुन, पेरुंदुरई, पुडुचेरी, राजमहेंद्रवरम, रामनगर, सांगली आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 126 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायबरेली, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सागर, शिलांग, सिलचर, सोलापुर, श्रीनगर, सुआकाती, सूरत, ठाणे, त्रिशूर, तिरुपति, तुमकुरु, तुमडीह, उज्जैन, वडोदरा, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, वृंदावन, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंकलेश्वर, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बालासोर, बारां, बारीपाड़ा, बेलापुर, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, बक्सर, ब्यासनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़ आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 66 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अंबाला, अंगुल, बद्दी, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बारबिल, बाड़मेर, बठिंडा, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवानी, बिलाईपाड़ा, बर्नीहाट (असम), चूरू, दौसा, दिल्ली, धनबाद, धारूहेड़ा, धुले, फतेहाबाद, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हापुड़, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जालौर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, करौली, करनाल, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मंडीखेड़ा, मानेसर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नागौर, नोएडा, पाली, पंचकुला, पटियाला, पीथमपुर, रोहतक, रूपनगर, सहरसा, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सोनीपत, श्री गंगानगर, तालचेर, टोंक, उदयपुर, वातवा, यमुना नगर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश में बागपत, बीकानेर, बर्नीहाट (मेघालय), चरखी दादरी, गुरुग्राम, हिसार, कैथल, पंचगांव, पानीपत में स्थिति खराब है। वहीं सिरसा (386) में हालात बेहद खराब दर्ज किए गए हैं।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 235 में से 33 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 126 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 10 जून को यह आंकड़ा 118 दर्ज किया गया था।
66 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज सिरसा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 386 दर्ज किया गया। हालांकि कल वहां एक्यूआई महज 152 ही दर्ज किया गया था। पिछले 24 घंटों में सिरसा में प्रदूषण के स्तर में 234 अंकों का भारी उछाल आया है।
इससे पहले कल गुरुग्राम में स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 264 तक पहुंच गया। आज 56 अंकों के भारी सुधार के साथ गुरुग्राम में सूचकांक 208 पर पहुंच गया है। मतलब की सुधार के बावजूद वायु गुणवत्ता आज भी खराब बनी हुई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 169 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 167 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में दो अंकों का मामूली सुधार दर्ज किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 158 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 99 पर पहुंच गया। मतलब कि फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता मध्यम से संतोषजनक श्रेणी में पहुंच गई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 11 जून को हिसार (238) चौथे स्थान पर है, वहीं बीकानेर (246) दूसरे, जबकि कैथल (241) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 109, गाजियाबाद में 176, गुवाहाटी में 81, गुरूग्राम में 208, नोएडा में 128, ग्रेटर नोएडा में 146 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 68 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 105, चेन्नई में 66, चंडीगढ़ में 90, हैदराबाद में 58, जयपुर में 130 और पटना में 82 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 33 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अहमदनगर, आइजोल, बैरकपुर, भिलाई, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, डूंगरपुर, गडग, हल्दिया, जलना, कलबुर्गी, काशीपुर, कोहिमा, कोल्हापुर, कोप्पल, कोरबा, मदिकेरी, मुंगेर, मैसूर, नाहरलागुन, पेरुंदुरई, पुडुचेरी, राजमहेंद्रवरम, रामनगर, सांगली, शिवमोगा, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, तिरुमाला, उल्हासनगर, विजयपुरा, विरार शामिल हैं।
वहीं लातूर, मछलीपट्टनम, मदुरई, महाद, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंगलौर, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागपुर, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, पलवल, परभणी, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायबरेली, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सागर, शिलांग, सिलचर, सोलापुर, श्रीनगर, सुआकाती, सूरत, ठाणे, त्रिशूर, तिरुपति, तुमकुरु, तुमडीह, उज्जैन, वडोदरा, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, वृंदावन, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंकलेश्वर, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बालासोर, बारां, बारीपाड़ा, बेलापुर, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, बक्सर, ब्यासनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कुड्डालोर, देहरादून, देवास, धारवाड़, धौलपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फरीदाबाद, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, हाजीपुर, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जलगांव, झांसी, जोरापोखर, कडप्पा, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, कटिहार, कटनी, क्योंझर, किशनगंज, कोलकाता, कोटा, कुंजेमुरा आदि 126 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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