हरियाणा और उत्तर प्रदेश के शहर प्रदूषण के हॉटस्पॉट बन गए हैं, जहां बल्लभगढ़ में एक्यूआई 370 तक पहुंच गया है। यह स्थिति विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 700 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में श्रीनगर की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 22 रिकॉर्ड किया गया।
गाजियाबाद और दिल्ली में भी प्रदूषण का स्तर चिंताजनक है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 272 दर्ज किया गया था, जो 04 फरवरी को 67 अंकों की बढ़ोतरी के साथ 339 पर पहुंच गया।
04 फरवरी 2026 को 242 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 4.5 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 38 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 57.4 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं।
फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 (+30) रिकॉर्ड किया गया है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में गाजियाबाद (363) दूसरे जबकि ग्रेटर नोएडा (352) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 351 अंकों के साथ नोएडा चौथे स्थान पर है। दिल्ली-चरखी दादरी में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 339 और 334 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
गुरुग्राम (334) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में धारूहेड़ा (332), अंगुल (316), मानेसर (315) भी शामिल हैं।
विश्लेषण से पता चला है कि 04 फरवरी 2026 को देश में बल्लभगढ़ की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 370 दर्ज किया गया। मतलब कि वायु गुणवत्ता बेहद खराब है। इससे पहले 03 फरवरी को सरकारी आंकड़ों में बल्लभगढ़ का जिक्र नहीं था।
रुझानों में सामने आया है कि बल्लभगढ़ की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। बल्लभगढ़ में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 700 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में श्रीनगर की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 22 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर बल्लभगढ़ की तुलना श्रीनगर से करें तो वहां स्थिति 16 गुणा खराब है।
इससे पहले कल देश में गाजियाबाद की हवा सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 337 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 26 अंकों के उछाल के साथ गाजियाबाद में एक्यूआई बढ़कर 363 पर पहुंच गया है।
राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो कल से प्रदूषण में उछाल आया है। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता खराब से बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई है। कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 272 दर्ज किया गया था, जो 04 फरवरी को 67 अंकों की बढ़ोतरी के साथ 339 पर पहुंच गया। इससे पहले 18 जनवरी को दिल्ली में 2026 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 04 फरवरी 2026 को 242 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 4.5 फीसदी शहरों में हवा साफ है।
वहीं 38 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 57.4 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक बनी हुई है।
बता दें कि कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 83.3 फीसदी का इजाफा हुआ है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 17.9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दूसरी तरफ मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में करीब 9.1 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरह खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में भी कल से 74.1 फीसदी का कमी दर्ज की गई। इसके विपरीत बेहद खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 500 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जोकि चिंता का विषय है।
फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 (+30) रिकॉर्ड किया गया है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में गाजियाबाद (363) दूसरे जबकि ग्रेटर नोएडा (352) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 351 अंकों के साथ नोएडा चौथे स्थान पर है। दिल्ली-चरखी दादरी में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 339 और 334 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
गुरुग्राम (334) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में धारूहेड़ा (332), अंगुल (316), मानेसर (315) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के तीन (गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा) और हरियाणा के पांच शहर (बल्लभगढ़, चरखी दादरी, गुरुग्राम, धारूहेड़ा, मानेसर) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, नोएडा, दिल्ली, चरखी दादरी, गुरुग्राम, धारूहेड़ा, मानेसर, बागपत, भिवाड़ी, सिंगरौली, झुंझुनू, नारनौल, रूपनगर, जींद, पीथमपुर, रोहतक, फरीदाबाद, चूरू, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, गुवाहाटी, बहादुरगढ़, राजमहेंद्रवरम, करनाल, पुणे, कोलकाता, नाहरलागुन, नागपुर, श्री गंगानगर, बूंदी, चित्तौड़गढ़, तालचेर, टोंक, एलूर, ग्वालियर, तुमकुरु, विशाखापत्तनम, देहरादून, पिंपरी-चिंचवाड़, मेरठ, नलबाड़ी, उल्हासनगर, वडोदरा, बालासोर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं बल्लभगढ़, हनुमानगढ़, बीकानेर, बद्दी, बिलीपाड़ा, चंद्रपुर, भिवंडी, अमरावती (आंध्रप्रदेश), नागौर, बदलापुर, महाड, अलवर, अमृतसर, पटियाला, सिलीगुड़ी, क्योंझर, बारबिल, सोलापुर, राजकोट, जालंधर, पानीपत, रतलाम, कटिहार, बोइसर, विरार, अहमदनगर, लुधियाना, सहरसा, कुंजेमुरा, हिसार, खुर्जा, जलगांव, धनबाद, अजमेर, अंकलेश्वर, गांधीनगर, खन्ना, धारवाड़, मंडी गोबिंदगढ़ आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 4.5 फीसदी यानी महज 11 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में अगरतला, बागलकोट, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, दमोह, झांसी, मदिकेरी, पुदुचेरी, शिलांग, श्रीनगर, वाराणसी आदि शामिल हैं।
आज देश के जिन 92 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें बिलासपुर, ब्रजराजनगर, बक्सर, चेन्नई, छाल, छपरा, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, कोयंबटूर, दौसा, दावनगेरे, देवास, धौलपुर, डूंगरपुर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, गया, गोरखपुर, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जलना, जालोर, जोधपुर, कलबुर्गी, कन्नूर, करौली, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, लातूर, मिलुपारा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मैसूर, नासिक, पलवल, पंचगांव, पंचकुला, पटना, पेरुंदुरई, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजसमंद, रामनगर, ऋषिकेश, सागर, समस्तीपुर आदि शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 120 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमृतसर, अनंतपुर, अंकलेश्वर, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बहादुरगढ़, बालासोर, बारां, बारबिल, बारीपदा, भिवंडी, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलीपाड़ा, बोइसर, बुलंदशहर, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, देहरादून, धनबाद, धारवाड़, धुले, दुर्गापुर, एलूर, फरीदाबाद, गांधीनगर, गुम्मिडीपूंडी, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हापुड़, हिसार, हावड़ा, जयपुर, जालंधर, जलगांव, झालावाड़, कडप्पा, कैथल, कल्याण, कानपुर, करनाल, काशीपुर, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, कोलकाता, कोल्लम, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, महाड, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मंगुराहा, मेरठ, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नवी मुंबई, पाली, पानीपत, परभनी, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, पुणे, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, रतलाम, राउरकेला, सहरसा, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सिरसा, सोलापुर, श्री गंगानगर, सूरत, तालचेर, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, टोंक, तुमकुरु, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, वातवा, विरार, विशाखापत्तनम, यादगीर, यमुना नगर शामिल हैं।
आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 7 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में झुंझुनू, जींद, नारनौल, पीथमपुर, रोहतक, रूपनगर, सिंगरौली शामिल हैं। वहीं अंगुल, बागपत, बल्लभगढ़, भिवाड़ी, चरखी दादरी, दिल्ली, धारूहेड़ा, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, मानेसर, नोएडा में वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब' है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 242 में से महज 11 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 92 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 03 फरवरी 2026 को यह आंकड़ा 78 दर्ज किया गया था।
120 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज बल्लभगढ़ में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 370 पर पहुंच गया है। हालांकि कल सरकारी आंकड़ों में बल्लभगढ़ का जिक्र नहीं था।
इससे पहले कल देश में गाजियाबाद की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब एक्यूआई बढ़कर 337 तक पहुंच गया था। हालांकि आज 26 अंकों के उछाल के साथ गाजियाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़कर 363 पर पहुंच गया है।
दिल्ली में 04 फरवरी को एक बार फिर प्रदूषण में इजाफा दर्ज किया गया। दिल्ली में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक 272 दर्ज किया गया था, जो आज (04 फरवरी) बढ़कर 339 पर पहुंच गया। मतलब कि कल से दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में 67 अंकों का भारी उछाल आया है। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 700 फीसदी अधिक खराब है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है, जहां सूचकांक 200 (+30) रिकॉर्ड किया गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 04 फरवरी को नोएडा चौथे स्थान पर है, वहीं गाजियाबाद (363) दूसरे, जबकि ग्रेटर नोएडा (352) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 163, गाजियाबाद में 363, गुवाहाटी में 190, गुरूग्राम में 334, नोएडा में 351, ग्रेटर नोएडा में 352 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 134 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 104, चेन्नई में 81, चंडीगढ़ में 149, हैदराबाद में 98, जयपुर में 128 और पटना में 94 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 11 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अगरतला, बागलकोट, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, दमोह, झांसी, मदिकेरी, पुदुचेरी, शिलांग, श्रीनगर, वाराणसी शामिल हैं।
वहीं आइजोल, अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), अररिया, आरा, औरंगाबाद (बिहार), बांसवाड़ा, बरेली, बाड़मेर, बैरकपुर, बेगूसराय, बेलगाम, बेंगलुरु, बेतिया, भागलपुर, भरतपुर, भिलाई, भीलवाड़ा, भोपाल, बिहार शरीफ, बिलासपुर, ब्रजराजनगर, बक्सर, चेन्नई, छाल, छपरा, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, कोयंबटूर, दौसा, दावनगेरे, देवास, धौलपुर, डूंगरपुर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, गया, गोरखपुर, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जलना, जालोर, जोधपुर, कलबुर्गी, कन्नूर, करौली, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, लातूर, मिलुपारा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मैसूर, नासिक, पलवल, पंचगांव, पंचकुला, पटना, पेरुंदुरई, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजसमंद, रामनगर, ऋषिकेश, सागर, समस्तीपुर, सांगली, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, सिवान, तंजावुर, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, उदयपुर, वापी, विजयवाड़ा, वृंदावन आदि 92 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:
245 में महज छह शहरों की हवा साफ, गाजियाबाद सबसे प्रदूषित, 337 पर पहुंचा एक्यूआई