देश में वायु प्रदूषण की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
07 मार्च 2026 को गुरुग्राम 322 एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जबकि सिंगरौली में भी वायु गुणवत्ता 300 के पार पहुंच गया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 244 शहरों के आंकड़ों से पता चलता है कि आधे से ज्यादा शहरों में हवा चिंताजनक स्तर पर है, जबकि महज 2.5 फीसदी शहरों में ही हवा साफ दर्ज की गई।
विश्लेषण के मुताबिक 07 मार्च 2026 को देश में गुरुग्राम सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 322 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि कल गुरुग्राम में एक्यूआई 238 रिकॉर्ड किया गया था। मतलब कि कल से सूचकांक में 84 अंकों का इजाफा हुआ है।
रुझानों में सामने आया है कि गुरुग्राम की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
गुरुग्राम में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,000 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में भिलाई की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 33 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर गुरुग्राम की तुलना भिलाई से करें तो वहां स्थिति 9 गुणा खराब है।
इससे पहले कल देश में अंगुल की स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 298 रिकॉर्ड किया गया। हालांकि आज 189 अंकों के भारी सुधार के साथ वहां सूचकांक घटकर 109 पर पहुंच गया है।
राजधानी दिल्ली की बात करें तो कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 172 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 246 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 74 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 1,500 फीसदी अधिक खराब है।
इसी तरफ फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 187 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 202 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 07 मार्च 2026 को 244 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 2.5 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 34.8 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 51.6 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा चिंताजनक बनी हुई है।
बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 10.5 फीसदी की कमी आई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से करीब 3.3 फीसदी का इजाफा हुआ है। इसी तरह खराब गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में भी कल से करीब 33.3 फीसदी की भारी बढ़ोतरी रिकॉर्ड की गई, जोकि चिंता का विषय है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में सिंगरौली (303) दूसरे जबकि गाजियाबाद (292) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 292 अंकों के साथ पानीपत चौथे स्थान पर है। मंडीदीप-यमुना नगर में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 283 और 279 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
नोएडा (272) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में मानेसर (271), ग्रेटर नोएडा (265), बल्लभगढ़ (264) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के पांच शहर (यमुना नगर, गुरुग्राम, बल्लभगढ़, मानेसर, पानीपत) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि गुरुग्राम, सिंगरौली, गाजियाबाद, पानीपत, मंडीदीप, यमुना नगर, नोएडा, मानेसर, करनाल, बागपत, धारूहेड़ा, कुरुक्षेत्र, भिवाड़ी, हापुड़, मुजफ्फरनगर, दिल्ली, बहादुरगढ़, मेरठ, बुलंदशहर, देहरादून, बर्नीहाट, अगरतला, फरीदाबाद, हाजीपुर, सहरसा, खन्ना, जींद, ब्रजराजनगर, भिवानी, बेगूसराय, खुर्जा, गुम्मिडीपूंडी, बद्दी, ग्वालियर, किशनगंज, लखनऊ, बारबिल, गया, पटना, चंडीगढ़, नाहरलागुन, रूपनगर, जयपुर, महाड, मोतिहारी, नंदेसरी, बेंगलुरु, समस्तीपुर, आरा, नलबाड़ी आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं ग्रेटर नोएडा, बल्लभगढ़, शिलांग, सिरसा, सीकर, सिलीगुड़ी, कुंजेमुरा, पटियाला, विशाखापत्तनम, उल्हासनगर, चंद्रपुर, भीलवाड़ा, बिलीपाड़ा, सूरत, टोंक, जालंधर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), छपरा, चित्तौड़गढ़, क्योंझर, धनबाद, जलगांव, चूरू, औरंगाबाद (बिहार), झुंझुनू, हनुमानगढ़, अहमदनगर, भिवंडी, कल्याण, मंगुराहा, बदलापुर, मालेगांव, गांधीनगर, सासाराम, कटनी, नांदेड़, तुमडीह, पाली, पिंपरी-चिंचवाड़, अंगुल, सिवान, भावनगर, जैसलमेर, वृंदावन, अकोला, पेरुंदुरई, प्रतापगढ़, अलवर, धौलपुर, उदयपुर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 2.5 फीसदी यानी महज छह शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में आइजोल, भिलाई, मदिकेरी, पंचकुला, श्रीनगर, विरार आदि शामिल हैं।
आज देश के जिन 85 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जलना, जालोर, झांसी, जोधपुर, कडप्पा, कलबुर्गी, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, लातूर, लुधियाना, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मेहसाना, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुंगेर, नारनौल, नासिक, पलवल, पंपोर, परभनी, प्रयागराज, पुदुचेरी, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, रतलाम, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, सुआकाती, तालचेर, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर, तिरुपति, वापी, वाराणसी, विजयपुरा आदि शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 127 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अंगुल, अररिया, आरा, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बालासोर, बारां, बारबिल, बेगूसराय, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, बिहार शरीफ, बीकानेर, बिलीपाड़ा, ब्रजराजनगर, बूंदी, बक्सर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, छपरा, चिक्काबल्लापुर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, दमोह, दौसा, धनबाद, धौलपुर, दुर्गापुर, गांधीनगर, गया, गुम्मिडीपूंडी, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, कल्याण, कानपुर, करौली, काशीपुर, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लखनऊ, महाड, मालेगांव, मंगुराहा, मिलुपारा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, नवी मुंबई, नयागढ़, पाली, पंचगांव, पटियाला, पटना, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, पुणे, पूर्णिया, रायरंगपुर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, ऋषिकेश, राउरकेला, रूपनगर, सागर, सहरसा, समस्तीपुर, सांगली, सासाराम, शिलांग, सीकर, सिलीगुड़ी, सिरसा, सिवान, सोलापुर, सोनीपत, श्री गंगानगर, सूरत, थूथुकुडी, तिरुमाला, टोंक, तुमडीह, उदयपुर, उल्हासनगर, वडोदरा, वातवा, विशाखापत्तनम, वृंदावन शामिल हैं।
आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 24 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में अगरतला, बागपत, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, भिवाड़ी, बुलंदशहर, बर्नीहाट, देहरादून, दिल्ली, धारूहेड़ा, फरीदाबाद, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, हापुड़, करनाल, कुरुक्षेत्र, मंडीदीप, मानेसर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नोएडा, पानीपत, सवाई माधोपुर, यमुना नगर शामिल हैं।
वहीं गुरुग्राम (322), सिंगरौली (303) में स्थिति बेहद खराब है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 244 में से महज छह शहरों में हवा 'बेहतर' है। 85 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 06 मार्च को यह आंकड़ा 95 दर्ज किया गया था।
127 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज गुरुग्राम में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 322 पर पहुंच गया। वहीं कल गुरुग्राम में एक्यूआई 238 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से सूचकांक में 84 अंकों का इजाफा हुआ है।
गौरतलब है कि कल देश में अंगुल की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब एक्यूआई 298 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 189 अंकों के भारी सुधार के साथ वहां सूचकांक घटकर 109 पर पहुंच गया। इसके साथ ही अंगुल में वायु गुणवत्ता आज ‘मध्यम’ श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 172 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 246 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 74 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 1,500 फीसदी अधिक खराब है।
इसी तरफ फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 187 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 202 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 07 मार्च को पानीपत चौथे स्थान पर है, वहीं सिंगरौली (303) दूसरे, जबकि गाजियाबाद (292) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 172, गाजियाबाद में 292, गुवाहाटी में 98, गुरूग्राम में 322, नोएडा में 272, ग्रेटर नोएडा में 265 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 68 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 170, चेन्नई में 98, चंडीगढ़ में 157, हैदराबाद में 89, जयपुर में 155 और पटना में 163 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन छह शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, भिलाई, मदिकेरी, पंचकुला, श्रीनगर, विरार शामिल हैं।
वहीं अजमेर, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, आसनसोल, बांसवाड़ा, बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बेलापुर, बेतिया, भुवनेश्वर, बिलासपुर, बोइसर, ब्यासनगर, चामराजनगर, चरखी दादरी, चेन्नई, छाल, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, कोयंबटूर, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, एलूर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, गोरखपुर, गुवाहाटी, हल्दिया, हिसार, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जलना, जालोर, झांसी, जोधपुर, कडप्पा, कलबुर्गी, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, लातूर, लुधियाना, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मेहसाना, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुंगेर, नारनौल, नासिक, पलवल, पंपोर, परभनी, प्रयागराज, पुदुचेरी, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, रतलाम, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, सुआकाती, तालचेर, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर, तिरुपति, वापी, वाराणसी, विजयपुरा, विजयवाड़ा, यादगीर आदि 85 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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प्रदूषण में अव्वल ओडिशा का अंगुल, बढ़कर 298 पर पहुंचा एक्यूआई