26 मार्च 2026 को ग्रेटर नोएडा देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 260 रिकॉर्ड किया गया, जो सुरक्षित स्तर से 450 फीसदी अधिक है। इसी तरह सिंगरौली (258) और बल्लभगढ़ (246) सहित कई शहरों में भी प्रदूषण का स्तर गंभीर बना हुआ है।
दिल्ली और फरीदाबाद में हालात बिगड़े हैं, जबकि महज 8.8 फीसदी शहरों की हवा साफ है। इसके विपरीत नागांव में वायु गुणवत्ता सबसे बेहतर रही (एक्यूआई 36) रही।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़े बताते हैं कि देश के 249 शहरों में 39 फीसदी में हवा की स्थिति चिंताजनक है, और पिछले 24 घंटों में खराब हवा वाले शहरों की संख्या में 80 फीसदी की तेज वृद्धि हुई है।
विश्लेषण के मुताबिक 26 मार्च 2026 को देश में ग्रेटर नोएडा सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 260 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि कल उत्तर प्रदेश के इस शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 175 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 85 अंकों का उछाल आया है।
रुझानों में सामने आया है कि ग्रेटर नोएडा की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। ग्रेटर नोएडा में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 450 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में नागांव की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 36 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर ग्रेटर नोएडा की तुलना नागांव से करें तो वहां स्थिति 7.2 गुणा खराब है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 183 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 185 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में दो अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली की तरफ ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 180 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 234 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज एक बार फिर मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 26 मार्च 2026 को 249 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 8.8 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 52.2 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 39 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 8.3 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी नौ फीसदी से अधिक की कमी दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से करीब 14.3 फीसदी का इजाफा हुआ है। इसी तरह खराब हवा वाले शहरों में कल से 80 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जोकि चिंता का विषय है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में सिंगरौली (258) दूसरे जबकि बल्लभगढ़ (246) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह फरीदाबाद (234) चौथे स्थान पर है। गाजियाबाद-हाजीपुर में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 220 और 215 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
समस्तीपुर (212) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में गुरुग्राम (211), भिवाड़ी (206), मानेसर (199) भी शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के चार शहर (बल्लभगढ़, फरीदाबाद, गुरुग्राम, मानेसर) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि फरीदाबाद, हाजीपुर, समस्तीपुर, मानेसर, रामनगर, बिलीपाड़ा, रूपनगर, चरखी दादरी, रोहतक, सोनीपत, हापुड़, मंडीदीप, अररिया, मंडी गोबिंदगढ़, गुम्मिडीपूंडी, धारूहेड़ा, नंदेसरी, बेलापुर, मुजफ्फरपुर, यमुना नगर, सांगली, तुमडीह, बर्नीहाट आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं ग्रेटर नोएडा, सिंगरौली, बल्लभगढ़, गाजियाबाद, गुरुग्राम, भिवाड़ी, दिल्ली, नोएडा, बीकानेर, टोंक, वातवा, चूरू, बद्दी, नयागढ़, बागपत, झुंझुनू, मेरठ, खुर्जा, आगरा, सहरसा, मालेगांव, पीथमपुर, धनबाद, नागौर, सिरसा, जोरापोखर, सुआकाती, बेंगलुरु, लखनऊ, महाद, मुजफ्फरनगर, गया, कटिहार, कुंजेमुरा, झालावाड़, गांधीनगर, पाली, ब्रजराजनगर, सोलापुर, नागपुर, चित्तौड़गढ़, पुणे आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 8.8 फीसदी यानी महज 22 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में गंगटोक, गुवाहाटी, हुबली, कलबुर्गी, कोप्पल, मदिकेरी, नागांव, नलबाड़ी, नेल्लोर, पेरुंदुरई, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, ऋषिकेश, श्रीनगर, थूथुकुडी, विजयपुरा आदि शामिल हैं।
आज देश के जिन 130 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें अंबाला, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद महाराष्ट्र), बदलापुर, बालासोर, बांसवाड़ा, बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, भागलपुर, भावनगर, भिलाई, भीलवाड़ा, भिवंडी, भुवनेश्वर, बीदर, बिलासपुर, बोइसर, बक्सर, चंडीगढ़, चेन्नई, छपरा, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, कोयंबटूर, कटक, दमोह, देहरादून, देवास, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, फिरोजाबाद, गोरखपुर, गुंटूर, हल्दिया, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जलगांव, जलना, जालौर, झांसी, जींद, जोधपुर, कडप्पा, कैथल, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, करनाल, क्योंझर, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता आदि शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 88 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अंगुल, अररिया, औरंगाबाद (बिहार), बद्दी, बागपत, बारां, बारबिल, बेलापुर, बेंगलुरु, भरतपुर, भोपाल, बीकानेर, बिलीपाड़ा, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, बर्नीहाट, चंद्रपुर, चरखी दादरी, छाल, चित्तौड़गढ़, चूरू, दौसा, दिल्ली, धनबाद, धारूहेड़ा, गांधीनगर, गया, गुम्मिडीपूंडी, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हापुड़, हिसार, जयपुर, झालावाड़, झुंझुनू, जोरापोखर, कटिहार, कटनी, खुर्जा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, महाद, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मानेसर, मेरठ, मिलुपारा, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नागौर, नागपुर, नंदेसरी, नासिक, नयागढ़, नोएडा, पाली, पलवल, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, पुणे, रामनगर, रोहतक, राउरकेला, रूपनगर, सागर, सहरसा, सांगली, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरसा, सोलापुर, सोनीपत, श्री गंगानगर, सुआकाती, टोंक, तुमडीह, वातवा, विशाखापत्तनम, वृंदावन, यमुना नगर शामिल हैं।
इसी तरह बल्लभगढ़, भिवाड़ी, फरीदाबाद, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, हाजीपुर, समस्तीपुर, सिंगरौली में वायु गुणवत्ता ‘खराब’ है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 249 में से महज 22 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 130 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 25 मार्च को यह आंकड़ा 143 दर्ज किया गया था।
88 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज ग्रेटर नोएडा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 260 दर्ज किया गया। वहीं कल ग्रेटर नोएडा में सूचकांक 175 रिकॉर्ड किया गया था। मतलब कि कल से प्रदूषण के स्तर में 85 अंकों का इजाफा हुआ है।
इससे पहले कल देश में (25 मार्च) को बल्लभगढ़ में वायु गुणवत्ता सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 236 दर्ज किया गया था। हालांकि आज वहां वायु गुणवत्ता में 10 अंकों का उछाल आया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 183 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 185 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में दो अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली की तरफ ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 180 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 234 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज एक बार फिर मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 26 मार्च को फरीदाबाद चौथे स्थान पर है, वहीं सिंगरौली (258) दूसरे, जबकि बल्लभगढ़ (246) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 156, गाजियाबाद में 220, गुवाहाटी में 49, गुरूग्राम में 211, नोएडा में 184, ग्रेटर नोएडा में 260 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 81 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 115, चेन्नई में 57, चंडीगढ़ में 62, हैदराबाद में 77, जयपुर में 114 और पटना में 155 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 22 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें बागलकोट, बेतिया, बिहार शरीफ, चामराजनगर, एलुरु, गंगटोक, गुवाहाटी, हुबली, कलबुर्गी, कोप्पल, मदिकेरी, नागांव, नलबाड़ी, नेल्लोर, पेरुंदुरई, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, ऋषिकेश, श्रीनगर, थूथुकुडी, विजयपुरा शामिल हैं।
वहीं अहमदनगर, आइजोल, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद महाराष्ट्र), बदलापुर, बालासोर, बांसवाड़ा, बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, भागलपुर, भावनगर, भिलाई, भीलवाड़ा, भिवंडी, भुवनेश्वर, बीदर, बिलासपुर, बोइसर, बक्सर, चंडीगढ़, चेन्नई, छपरा, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, कोयंबटूर, कटक, दमोह, देहरादून, देवास, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, फिरोजाबाद, गोरखपुर, गुंटूर, हल्दिया, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जलगांव, जलना, जालौर, झांसी, जींद, जोधपुर, कडप्पा, कैथल, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, करनाल, क्योंझर, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, कोरबा, लातूर, मछलीपट्टनम, मैहर, मंडीखेड़ा, मंगलौर, मेहसाणा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मैसूरु, नाहरलागुन, नांदेड़, नारनौल, नवी मुंबई, पंपोर, पंचगांव, पंचकुला, परभनी, पटियाला, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही, शिवसागर, सूरत, तालचेर, टेन्सा, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर, तिरुमाला, उदयपुर, उडुपी, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार, यादगीर आदि 130 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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