19 अप्रैल 2026 को देश में वायु प्रदूषण ने खतरनाक रूप ले लिया, जहां गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा में एक्यूआई बढ़कर 336 तक पहुंच गया। मतलब कि इन दोनों शहरों में वायु गुणवत्ता एक बार फिर ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंच गई है।
इन शहरों में महज 24 घंटों में एक्यूआई में 140 से 150 अंकों तक का उछाल दर्ज किय गया, जबकि हवा में पीएम10 कणों का दबदबा रहा। डबलूएचओ मानकों से कई गुना अधिक प्रदूषण गंभीर स्वास्थ्य खतरे का संकेत दे रहा है।
दिल्ली में भी प्रदूषण तेजी से बढ़कर 152 से 258 पर पहुंच गया, जो हालात के बिगड़ने को दर्शाता है।
देशभर के रुझान चिंताजनक हैं, जहां एक ओर साफ हवा वाले शहरों की संख्या घटी है, वहीं खराब हवा वाले शहरों में 183 फीसदी की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई।
देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के छह शहरों का शामिल होना स्थिति की गंभीरता को और बढ़ाता है। इसके विपरीत भिवानी जैसे शहरों में हवा साफ दर्ज की गई, जो प्रदूषण के असमान फैलाव को उजागर करती है।
कुल मिलाकर, तेजी से बढ़ता प्रदूषण और लगातार बिगड़ते आंकड़े देश के लिए एक बड़े पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संकट की चेतावनी दे रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 19 अप्रैल 2026 को देश में गाजियाबाद-ग्रेटर नोएडा सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहे। इस दौरान इन दोनों शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 336 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि कल गाजियाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 194 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 142 अंकों का उछाल आया है। इसी तरह ग्रेटर नोएडा में कल से प्रदूषण के स्तर में 156 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि गाजियाबाद-ग्रेटर नोएडा की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी हैं। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। गाजियाबाद में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 600 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में भिवानी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 22 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहरों गाजियाबाद-ग्रेटर नोएडा की तुलना भिवानी से करें तो वहां स्थिति 11.5 गुणा खराब है।
इससे पहले कल देश में बर्नीहाट (मेघालय) की स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 280 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज 37 अंकों के सुधार के साथ बर्नीहाट में सूचकांक 243 तक पहुंच गया।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 152 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 258 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 106 अंकों का भारी उछाल दर्ज किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता एक बार फिर 'खराब' श्रेणी में पहुंच गई है।
बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 93 पर पहुंच गया था। इसके बाद 01 अप्रैल को सूचकांक 113 दर्ज क्या गया। वहीं आज सूचकांक 114 रिकॉर्ड किया गया है। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में उछाल आया है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 126 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 172 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 19 अप्रैल 2026 को 249 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 9.6 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 48.2 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 42.2 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में चार फीसदी का गिरावट आई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में अभी 2.4 फीसदी की कमी दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से करीब 10.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी तरफ खराब हवा वाले शहरों की गिनती में करीब 183 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जोकि चिंता का विषय है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में मेरठ (310) दूसरे जबकि नोएडा (299) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह हापुड़ (298) चौथे स्थान पर है। सिंगरौली- बागपत में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 289 और 266 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
चरखी दादरी (264) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में मानेसर (259), दिल्ली (258) और बर्नीहाट (मेघालय) (243) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तरप्रदेश के छह शहर (गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, मेरठ, नोएडा, हापुड़, बागपत) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि चरखी दादरी, मानेसर, बल्लभगढ़, मंडी गोबिंदगढ़, यमुना नगर, रोहतक, धारूहेड़ा, मंगुराहा, जींद, खुर्जा, बिलासपुर, नंदेसरी, जलगांव, मुजफ्फरपुर, बहादुरगढ़, ग्वालियर, परभनी, वापी, करनाल, पंचगांव, नारनौल, कैथल, छाल, मंडीदीप, अंबाला, धारवाड़ आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, मेरठ, नोएडा, हापुड़, सिंगरौली, बागपत, दिल्ली, बर्नीहाट (मेघालय), बुलंदशहर, पानीपत, गुरुग्राम, भिवाड़ी, बिलीपाड़ा, बारबिल, कुरुक्षेत्र, मुजफ्फरनगर, बद्दी, सिरसा, फरीदाबाद, कटनी, लखनऊ, सवाई माधोपुर, आगरा, हनुमानगढ़, टोंक, नयागढ़, चूरू, चंद्रपुर, हिसार, भावनगर, गया, दमोह, जयपुर, भोपाल, नवी मुंबई, बीकानेर, बेलापुर, गांधीनगर, वडोदरा, जोरापोखर, सीकर, झुंझुनू, वातवा, ले, वृंदावन, पटियाला, मुरादाबाद, पीथमपुर, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), सोलापुर, झालावाड़, मेहसाणा, अहमदाबाद, बठिंडा, फिरोजाबाद, पटना, भिवंडी, देवास, तुमडीह, वाराणसी, करौली, यादगीर, चंडीगढ़, दौसा, नागपुर, सोनीपत, बारां, श्री गंगानगर, अकोला, बेंगलुरु, कानपुर, परी-चिंचवाड़, सासाराम, उल्हासनगर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 9.6 फीसदी यानी महज 24 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बेगूसराय, बेतिया, भिवानी, चेन्नई, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, गंगटोक, कलबुर्गी, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, मदिकेरी, मंगलौर, नलबाड़ी, नेल्लोर, पेरुंदुरई, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, रूपनगर, शिलांग, सिलचर, श्रीनगर शामिल हैं।
इसी तरह देश के 120 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बैरकपुर, बेलगाम, भागलपुर, भिलाई, भीलवाड़ा, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बोइसर, बूंदी, बक्सर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चामराजनगर, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कटक, देहरादून, धौलपुर, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलना, जालोर, झांसी, जोधपुर, कडप्पा, कन्नूर, कटिहार, क्योंझर, खन्ना, कोल्हापुर, कोल्लम, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मदुरै, महाड, मंडीखेड़ा, मीरा-भायंदर, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मैसूर, नागांव, नागौर, नांदेड़, नासिक, पाली, पलवल, पंचकुला, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायपुर आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 85 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अकोला, अंबाला, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बहादुरगढ़, बारां, बारबिल, बठिंडा, बेलापुर, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भिवंडी, भोपाल, बीकानेर, बिलासपुर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, छाल, चूरू, दमोह, दौसा, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धुले, फरीदाबाद, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हिसार, जयपुर, जलगांव, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोरापोखर, कैथल, कानपुर, करौली, करनाल, कटनी, खुर्जा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, मंडीदीप, मंगुराहा, मेहसाणा, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नागपुर, नंदेसरी, नारनौल, नवी मुंबई, नयागढ़, पंचगांव, परभनी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, सागर, सासाराम, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरसा, सोलापुर, सोनीपत, श्री गंगानगर, सुआकाती, टोंक, तुमडीह, उल्हासनगर, वडोदरा, वापी, वाराणसी, वातवा, वृंदावन, यादगीर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश में बागपत, बल्लभगढ़, भिवाड़ी, बुलंदशहर, चरखी दादरी, दिल्ली, गुरुग्राम, हापुड़, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नोएडा, रोहतक, सिंगरौली, श्री गंगानगर में स्थिति ‘खराब’ है। वहीं ग्रेटर नोएडा (336) और गाजियाबाद (336) और मेरठ (310) में स्थिति बेहद खराब है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 249 में से महज 24 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 120 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 18 अप्रैल को यह आंकड़ा 123 दर्ज किया गया था।
85 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 336 दर्ज किया गया। गौरतलब है कि कल गाजियाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 194 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 142 अंकों का उछाल आया है। इसी तरह ग्रेटर नोएडा में भी प्रदूषण के स्तर में 156 अंकों का भारी उछाल दर्ज किया गया है। ग्रेटर नोएडा में वायु गुणवत्ता 180 से बढ़कर 336 तक पहुंच गई है। मतलब वायु गुणवत्ता मध्यम से बेहद खराब हो गई है।
इससे पहले कल देश में बर्नीहाट (मेघालय) की स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 280 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज 37 अंकों के सुधार के साथ बर्नीहाट में सूचकांक 243 तक पहुंच गया।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 152 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 258 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 106 अंकों का भारी उछाल दर्ज किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता एक बार फिर 'खराब' श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में उछाल आया है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 126 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 172 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 19 अप्रैल को हापुड़ चौथे स्थान पर है, वहीं मेरठ (310) दूसरे, जबकि नोएडा (299) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 150, गाजियाबाद में 336, गुवाहाटी में 67, गुरूग्राम में 217, नोएडा में 299, ग्रेटर नोएडा में 336 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 89 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 154, चेन्नई में 42, चंडीगढ़ में 108, हैदराबाद में 81, जयपुर में 130 और पटना में 112 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 24 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अमरावती (आंध्रप्रदेश), बेगूसराय, बेतिया, भिवानी, चेन्नई, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, गंगटोक, कलबुर्गी, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, मदिकेरी, मंगलौर, नलबाड़ी, नेल्लोर, पेरुंदुरई, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, रूपनगर, शिलांग, सिलचर, श्रीनगर, विजयपुरा शामिल हैं।
वहीं अगरतला, अहमदनगर, आइजोल, अजमेर, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, आसनसोल, बदलापुर, बागलकोट, बालासोर, बांसवाड़ा, बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बेलगाम, भागलपुर, भिलाई, भीलवाड़ा, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बोइसर, बूंदी, बक्सर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चामराजनगर, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कटक, देहरादून, धौलपुर, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलना, जालोर, झांसी, जोधपुर, कडप्पा, कन्नूर, कटिहार, क्योंझर, खन्ना, कोल्हापुर, कोल्लम, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मदुरै, महाड, मंडीखेड़ा, मीरा-भायंदर, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मैसूर, नागांव, नागौर, नांदेड़, नासिक, पाली, पलवल, पंचकुला, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सहरसा, समस्तीपुर, सांगली, सतना, शिवमोगा, सिलीगुड़ी, सिरोही, शिवसागर, सिवान, सूरत, तालचेर, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, तुमकुरु, उदयपुर, विजयवाड़ा, विरार, विशाखापत्तनम आदि 120 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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