भारत की 96 फीसदी आबादी यानी 133 करोड़ लोग ऐसी हवा में सांस लेने को मजबूर हैं जहां पीएम 2.5 का वार्षिक औसत स्तर डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी मानकों से सात गुणा खराब है; फोटो: आईस्टॉक 
वायु

बढ़ते ओजोन से अंगुल में 313 पर पहुंचा एक्यूआई, पीथमपुर-ग्रेटर नोएडा-सवाई माधोपुर में स्थिति खराब

10 अप्रैल 2026 को 246 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 11 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं दूसरी तरफ 34.1 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं

Lalit Maurya

  • देश में वायु प्रदूषण एक बार फिर बढ़ रहा है, जहां 10 अप्रैल 2026 को ओजोन के बढ़ते असर के चलते अंगुल सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा और एक्यूआई 24 घंटे में 189 से छलांग लगाकर 313 तक पहुंच गया। यह स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 400 फीसदी अधिक है।

  • पीथमपुर, ग्रेटर नोएडा और सवाई माधोपुर जैसे शहर भी ‘खराब’ श्रेणी में बने हुए हैं, जबकि दिल्ली-एनसीआर में भी प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है।

  • देशभर के 246 शहरों के आंकड़ों में सिर्फ 11 फीसदी शहरों में ही साफ हवा दर्ज की गई, जबकि 34 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं।

  • दूसरी ओर, कोहिमा सबसे साफ शहर रहा, जो देश में बढ़ती प्रदूषण असमानता को भी उजागर करता है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 10 अप्रैल 2026 को देश में अंगुल सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 313 दर्ज किया गया, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि इससे पहले 09 अप्रैल को ओड़िशा के इस शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 189 दर्ज किया गया था।

मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 124 अंकों का उछाल आया है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि अंगुल की हवा में ओजोन पूरी तरह हावी हैं। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। अंगुल में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 400 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में कोहिमा की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 23 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर अंगुल की तुलना कोहिमा से करें तो वहां स्थिति 13.6 गुणा खराब है।

इससे पहले कल देश में पीथमपुर की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 192 तक पहुंच गया। हालांकि आज पीथमपुर में प्रदूषण के स्तर 52 अंकों का भारी उछाल आया है। इसके साथ ही सूचकांक 244 पर पहुंच गया।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 101 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 151 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 50 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 93 पर पहुंच गया था। इसके बाद 01 अप्रैल को सूचकांक 113 दर्ज क्या गया। वहीं आज सूचकांक 114 रिकॉर्ड किया गया है। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से उछाल आया है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 117 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 143 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 10 अप्रैल 2026 को 246 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 11 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 54.9 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 34.1 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 48.1 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 3.1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से करीब 25 फीसदी का उछाल आया है, जोकि चिंता का विषय है।     

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में पीथमपुर (244) दूसरे जबकि ग्रेटर नोएडा (242) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह सवाई माधोपुर (207) चौथे स्थान पर है। नांदेड़-बुलंदशहर में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 197 और 188 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

सिंगरौली (181) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में गाजियाबाद (175), गुरुग्राम (172), वातवा (165) भी शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के तीन शहर (ग्रेटर नोएडा, बुलंदशहर और गाजियाबाद) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि गाजियाबाद, वातवा, मंडीदीप, सोनीपत, मंडी गोबिंदगढ़, हापुड़, चरखी दादरी, मानेसर, नवी मुंबई, वडोदरा, अमृतसर, सूरत, कुरुक्षेत्र, मेरठ, धारूहेड़ा आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं पीथमपुर, ग्रेटर नोएडा, बुलंदशहर, सिंगरौली, गुरुग्राम, भिवाड़ी, नोएडा, अंकलेश्वर, बिलीपाड़ा, गांधीनगर, बेलापुर, फरीदाबाद, परभनी, राजकोट, अहमदाबाद, यादगीर, भिवंडी, बद्दी, देवास, भावनगर, पिंपरी-चिंचवाड़, आगरा, भरतपुर, बीकानेर, नासिक, बागपत, ठाणे, करौली, रतलाम, सोलापुर, इंदौर, बदलापुर, पुणे, सांगली, उल्हासनगर, पानीपत, विरार, महाड, अहमदनगर, खुर्जा, विशाखापत्तनम, अमरावती (महाराष्ट्र), जलगांव, मेहसाणा, गुम्मिडीपूंडी, मुंबई, चित्तौड़गढ़, कटक आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 11 फीसदी यानी महज 27 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में गुवाहाटी, हल्दिया, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, मदिकेरी, नागांव, नाहरलागुन, नलबाड़ी, पंपोर, पंचकुला, पुदुचेरी, रायरंगपुर, राजगीर, ऋषिकेश, रूपनगर, शिलांग, शिवमोगा, श्रीनगर आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 135 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), बर्नीहाट (मेघालय), चंडीगढ़, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, कोयंबटूर, दमोह, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गया, गुंटूर, हनुमानगढ़, हिसार, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जैसलमेर, जालंधर, जालोर, झांसी, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करनाल, कटिहार, कटनी, क्योंझर, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मालेगांव, मंगलौर, मंगुराहा, मिलुपारा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरनगर, मैसूर, नागौर, नागपुर, नंदेसरी, नारनौल, नयागढ़, पाली, पलवल, पंचगांव, पटियाला, पेरुंदुरई, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पूर्णिया, रायबरेली आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 80 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अंकलेश्वर, औरंगाबाद (बिहार), बद्दी, बदलापुर, बागपत, बारां, बारबिल, बेलापुर, भरतपुर, भावनगर, भिवाड़ी, भिवंडी, भोपाल, बीकानेर, बिलीपाड़ा, बुलंदशहर, बूंदी, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चित्तौड़गढ़, चुरू, कटक, दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, फरीदाबाद, गांधीनगर, गाजियाबाद, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, ग्वालियर, हाजीपुर, हापुड़, इंदौर, जयपुर, जलगांव, झालावाड़, करौली, खुर्जा, कोटा, कुरुक्षेत्र, महाड, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मानेसर, मेरठ, मेहसाणा, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, नोएडा, पानीपत, परभनी, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पुणे, राजकोट, रतलाम, सांगली, सीकर, सिंगरौली, सोलापुर, सोनीपत, सूरत, ठाणे, टोंक, उल्हासनगर, वडोदरा, वातवा, विरार, विशाखापत्तनम, यादगीर आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश में जहां पीथमपुर, ग्रेटर नोएडा, सवाई माधोपुर में स्थिति खराब है। वहीं अंगुल (313) में स्थिति बेहद खराब है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 246 में से महज 27 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 135 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 09 अप्रैल को यह आंकड़ा 131 दर्ज किया गया था।

80 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज अंगुल में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 313 दर्ज किया गया। गौरतलब है कि कल अंगुल में सूचकांक 189 रिकॉर्ड किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 124 अंकों का उछाल आया है।

इससे पहले कल देश में पीथमपुर की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 192 तक पहुंच गया। हालांकि आज पीथमपुर में प्रदूषण के स्तर 52 अंकों का भारी उछाल आया है। इसके साथ ही सूचकांक बढ़कर 244 पर पहुंच गया।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 101 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 151 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 50 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से उछाल आया है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 117 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 143 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 10 अप्रैल को सवाई माधोपुर चौथे स्थान पर है, वहीं पीथमपुर (244) दूसरे, जबकि ग्रेटर नोएडा (242) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 153, गाजियाबाद में 175, गुवाहाटी में 38, गुरूग्राम में 172, नोएडा में 150, ग्रेटर नोएडा में 242 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 104 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 92, चेन्नई में 62, चंडीगढ़ में 59, हैदराबाद में 73, जयपुर में 110 और पटना में 150 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 27 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, बरेली, बेतिया, भिवानी, बक्सर, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, गुवाहाटी, हल्दिया, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, मदिकेरी, नागांव, नाहरलागुन, नलबाड़ी, पंपोर, पंचकुला, पुदुचेरी, रायरंगपुर, राजगीर, ऋषिकेश, रूपनगर, शिलांग, शिवमोगा, श्रीनगर, विजयपुरा शामिल हैं।

वहीं अगरतला, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अंबरनाथ, अनंतपुर, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बागलकोट, बहादुरगढ़, बालासोर, बांसवाड़ा, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भिलाई, भीलवाड़ा, भुवनेश्वर, बीदर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), बर्नीहाट (मेघालय), चंडीगढ़, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, कोयंबटूर, दमोह, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गया, गुंटूर, हनुमानगढ़, हिसार, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जैसलमेर, जालंधर, जालोर, झांसी, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करनाल, कटिहार, कटनी, क्योंझर, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मालेगांव, मंगलौर, मंगुराहा, मिलुपारा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरनगर, मैसूर, नागौर, नागपुर, नंदेसरी, नारनौल, नयागढ़, पाली, पलवल, पंचगांव, पटियाला, पेरुंदुरई, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पूर्णिया, रायबरेली, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजसमंद, रामनगर, रोहतक, राउरकेला, सागर, सहरसा, समस्तीपुर, सासाराम, सतना, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही, शिवसागर, सिवान, सुआकाती, तालचेर, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपुर, तुमडीह, उदयपुर, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, वृंदावन आदि 135 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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