देश में धौलपुर की हवा लगातार जहरीली होती जा रही है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के 05 अगस्त 2026 के आंकड़ों के अनुसार, धौलपुर एक बार फिर देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 298 दर्ज किया गया।
यह पिछले दिन के मुकाबले 50 अंक अधिक है और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की सुरक्षित सीमा से करीब 37 गुना (1,880 फीसदी) ज्यादा प्रदूषण को दर्शाता है। शहर की हवा में पीएम2.5 के बेहद महीन कण हावी हैं, जो फेफड़ों और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ाते हैं।
इसके विपरीत, उल्हासनगर देश का सबसे स्वच्छ शहर रहा, जहां एक्यूआई महज 8 दर्ज किया गया।
241 शहरों के विश्लेषण से पता चला कि 38.6 फीसदी शहरों की हवा साफ और 49.8 फीसदी की संतोषजनक रही, जबकि 11.6 फीसदी शहरों में वायु गुणवत्ता चिंता का विषय बनी हुई है।
दिल्ली में एक्यूआई 64 से बढ़कर 69 हो गया, हालांकि हवा अब भी संतोषजनक श्रेणी में है, जबकि फरीदाबाद में मामूली सुधार दर्ज किया गया। रिपोर्ट यह संकेत देती है कि देश के अधिकांश शहरों में हवा फिलहाल नियंत्रित है, लेकिन धौलपुर समेत कुछ शहरों में बढ़ता प्रदूषण गंभीर स्वास्थ्य चेतावनी बन चुका है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 05 अगस्त 2026 को देश में एक बार फिर धौलपुर सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 298 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (04 अगस्त) सरकारी आंकड़ों में धौलपुर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 248 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण में 50 अंकों का इजाफा हुआ है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि धौलपुर की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
धौलपुर में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,880 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में उल्हासनगर की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 8 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर धौलपुर की तुलना उल्हासनगर से करें तो वहां स्थिति 37 गुणा खराब है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 64 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 69 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 5 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 04 अगस्त को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 12 जून 2026 को सूचकांक 73 और 30 मई को 85 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 05 मई को सूचकांक 86, जबकि 04 मई को 88 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 88 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 80 पर पहुंच गया। हालांकि 8 अंको के सुधार के बावजूद फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 05 अगस्त 2026 को 241 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 38.6 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 49.8 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 11.6 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 18.4 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों में 4.3 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई। वहीं मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में भी कल से 68.8 फीसदी का उछाल आया है, जोकि चिंता का विषय है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में दौसा (165) दूसरे जबकि चरखी दादरी (152) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह पाली (135) चौथे स्थान पर है। सोनीपत (132) – गुम्मिडीपूंडी (131) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
बर्नीहाट (मेघालय) (127) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में गया (123), सिलीगुड़ी (122) और भागलपुर (120) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में राजस्थान के तीन शहर (धौलपुर, दौसा और पाली) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि धौलपुर, चरखी दादरी, पाली, गुम्मिडीपूंडी, बर्नीहाट (मेघालय), गया, गुरुग्राम, जयपुर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं दौसा, सोनीपत, भागलपुर, सीकर, मंडी गोबिंदगढ़, वातवा, बद्दी, यमुना नगर, टोंक, गांधीनगर, भीलवाड़ा, पीथमपुर, विशाखापत्तनम, जैसलमेर, प्रतापगढ़, सिवान, अलवर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 38.6 फीसदी यानी 93 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में फिरोजाबाद, गडग, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हिंगोली, हिसार, हैदराबाद, जालंधर, जलगांव, जलना, जींद, कलबुर्गी, कन्नूर, कानपुर, कारवार, क्योंझर, खुर्जा, कोल्हापुर, कोरबा, कुरनूल, कुरुक्षेत्र, लातूर, मदिकेरी, मदुरै, महाद, मानेसर, मथुरा, मेरठ, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पंचगांव, पंचकुला, परभणी, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुडुचेरी, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, रोहतक, राउरकेला, सागर, सांगली, शिलांग, श्रीनगर, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, तिरुमाला, तुमडीह, उल्हासनगर, वापी आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 120 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, दमोह, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गाजियाबाद, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हापुड़, हावड़ा, इंदौर, जबलपुर, जालोर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, काकीनाड़ा, कल्याण, करौली, करनाल, कटनी, खैरथल, खन्ना, खोरा, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कोटा, कुंजेमुरा, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मालेगांव, मंडीदीप, मंगलौर, मंगुराहा, मेहसाणा, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नंदेसरी, नारनौल, नेल्लोर, नोएडा, पलवल, पंपोर, पटना, पुणे, पूर्णिया, रायबरेली, राजकोट, राजसमंद, रूपनगर, सहरसा, सतारा, सतना आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 27 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अलवर, बद्दी, भागलपुर, भीलवाड़ा, र्नीहाट (मेघालय), चरखी दादरी, दौसा, गांधीनगर, गया, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, जयपुर, जैसलमेर, कैथल, मंडी गोबिंदगढ़, पाली, पीथमपुर, प्रतापगढ़, सीकर, सिलीगुड़ी, सिवान, सोनीपत, टोंक, वातवा, विशाखापत्तनम, यमुना नगर आदि शामिल हैं। वहीं धौलपुर (298) में स्थिति ‘खराब' है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 241 में से 93 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 120 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 04 अगस्त को यह आंकड़ा 115 दर्ज किया गया था।
27 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज एक बार फिर धौलपुर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 298 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (04 अगस्त) सरकारी आंकड़ों में धौलपुर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 248 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण में 50 अंकों का इजाफा हुआ है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 64 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 69 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 5 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 88 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 80 पर पहुंच गया। हालांकि 8 अंको के सुधार के बावजूद फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 05 अगस्त को पाली (135) चौथे स्थान पर है, वहीं दौसा (165) दूसरे, जबकि चरखी दादरी (152) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 61, गाजियाबाद में 70, गुवाहाटी में 63, गुरूग्राम में 103, नोएडा में 64, ग्रेटर नोएडा में 115 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 42 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 56, चेन्नई में 61, चंडीगढ़ में 37, हैदराबाद में 47, जयपुर में 102 और पटना में 63 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 93 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, अमरावती (महाराष्ट्र), अररिया, बदलापुर, बहादुरगढ़, बरेली, बीड, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, बेतिया, भरतपुर, भिलाई, भुवनेश्वर, बिलासपुर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चिक्काबल्लापुर, कोयंबटूर, डोंबिवली, फतेहपुर सीकरी, फिरोजाबाद, गडग, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हिंगोली, हिसार, हैदराबाद, जालंधर, जलगांव, जलना, जींद, कलबुर्गी, कन्नूर, कानपुर, कारवार, क्योंझर, खुर्जा, कोल्हापुर, कोरबा, कुरनूल, कुरुक्षेत्र, लातूर, मदिकेरी, मदुरै, महाद, मानेसर, मथुरा, मेरठ, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पंचगांव, पंचकुला, परभणी, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुडुचेरी, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, रोहतक, राउरकेला, सागर, सांगली, शिलांग, श्रीनगर, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, तिरुमाला, तुमडीह, उल्हासनगर, वापी, वाराणसी, विजयपुरा, विरार, वृंदावन शामिल हैं।
वहीं अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमृतसर, अंगुल, अंकलेश्वर, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बागलकोट, बालासोर, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बारीपाड़ा, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, भावनगर, भिवाड़ी, भिवंडी, भोपाल, बीकानेर, बिलाईपाड़ा, बोइसर, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चेन्नई, छाल, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, दमोह, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गाजियाबाद, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हापुड़, हावड़ा, इंदौर, जबलपुर, जालोर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, काकीनाड़ा, कल्याण, करौली, करनाल, कटनी, खैरथल, खन्ना, खोरा, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कोटा, कुंजेमुरा, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मालेगांव, मंडीदीप, मंगलौर, मंगुराहा, मेहसाणा, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नंदेसरी, नारनौल, नेल्लोर, नोएडा, पलवल, पंपोर, पटना, पुणे, पूर्णिया, रायबरेली, राजकोट, राजसमंद, रूपनगर, सहरसा, सतारा, सतना, सवाई माधोपुर, शामली, सिलचर, सिरोही, सिरसा, सोलापुर, श्री गंगानगर, सूरत, थूथुकुडी, तिरुपति, उदयपुर, उज्जैन, वडोदरा, विजयवाड़ा आदि 120 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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