देश में 6 फरवरी 2026 को सबसे प्रदूषित शहर देवास रहा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 304 दर्ज किया गया। सिर्फ 24 घंटे में देवास का एक्यूआई 112 से बढ़कर 304 पहुंच गया, यानी 192 अंकों की भारी छलांग। यहां प्रदूषण में ओजोन का असर सबसे ज्यादा देखा गया और हवा स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 400 फीसदी अधिक जहरीली पाई गई।
इसके उलट शिलांग सबसे साफ शहर रहा, जहां एक्यूआई महज 30 रिकॉर्ड हुआ। यानी देवास की स्थिति शिलांग से लगभग 10 गुना ज्यादा खराब है।
दिल्ली में प्रदूषण में थोड़ी राहत आई है। एक्यूआई 241 से घटकर 220 पर पहुंच आया, लेकिन हवा अभी भी खराब श्रेणी में बनी हुई है। दिल्ली में प्रदूषण मानकों से 1300 फीसदी तक अधिक।
236 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 4.7 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 41.1 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 54.2 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं।
विश्लेषण से पता चला है कि 06 फरवरी 2026 को देश में देवास की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 304 दर्ज किया गया। मतलब कि वायु गुणवत्ता बेहद खराब है। इससे पहले कल 05 फरवरी को देवास में वायु गुणवत्ता सूचकांक 112 दर्ज किया गया था। मतलब कि 24 घंटों में वहां सूचकांक में 192 अंकों का भारी उछाल आया है।
रुझानों में सामने आया है कि देवास की हवा में ओजोन पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। देवास में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 400 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 30 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर देवास की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति 10 गुणा खराब है।
राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। हालांकि वहां वायु गुणवत्ता अभी भी खराब बनी हुई है। कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 241 दर्ज किया गया था, जो 06 फरवरी को 21 अंकों के सुधार के साथ 220 पर पहुंच गया। इससे पहले 18 जनवरी को दिल्ली में 2026 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 06 फरवरी 2026 को 236 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 4.7 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 41.1 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 54.2 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक बनी हुई है।
बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 21.4 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 5.8 फीसदी की गिरावट रिकॉर्ड की गई। दूसरी तरफ मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में करीब 3.7 फीसदी का इजाफा हुआ है।
इसी तरह खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में भी कल से 16.7 फीसदी का इजाफा हुआ है, जोकि चिंता का विषय है। इसके विपरीत बेहद खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है।
फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 155 (-7) रिकॉर्ड किया गया है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में मंडीदीप (289) दूसरे जबकि चरखी दादरी (265) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 259 अंकों के साथ गुरुग्राम चौथे स्थान पर है। गाजियाबाद-श्री गंगानगर में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 254 और 242 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
मंडी गोबिंदगढ़ (226) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में दिल्ली (220), झुंझुनू (216) और धारूहेड़ा (213) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में मध्य प्रदेश के दो (देवास-मंडीदीप) और हरियाणा के तीन शहर (गुरुग्राम, धारूहेड़ा, चरखी दादरी) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि मंडीदीप, चरखी दादरी, गुरुग्राम, गाजियाबाद, श्री गंगानगर, दिल्ली, धारूहेड़ा, वडोदरा, बिलीपाड़ा, हाजीपुर, बल्लभगढ़, पीथमपुर, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, बहादुरगढ़, नाहरलागुन, मीरा-भायंदर, भिवाड़ी, टोंक, गुवाहाटी, नागपुर, सूरत, पुणे, मानेसर, बेलापुर, फरीदाबाद, भीलवाड़ा, झालावाड़, कोटा, उदयपुर, हावड़ा, जयपुर, जींद, राजकोट, अंगुल, मुजफ्फरनगर, पिंपरी-चिंचवाड़, मंगुराहा, बागपत, जालंधर, बारां, मेरठ, सोलापुर, कोलकाता, पाली, बर्नीहाट, गांधीनगर, नवी मुंबई, अहमदाबाद, ग्वालियर, परभनी, देहरादून, रोहतक, मुजफ्फरपुर, एलूर, उज्जैन, गुम्मिडीपूंडी, नलबाड़ी, मुंबई आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं मंडी गोबिंदगढ़, झुंझुनू, बीकानेर, सीकर, रूपनगर, सिंगरौली, विशाखापत्तनम, वातवा, हनुमानगढ़, बारबिल, बुलंदशहर, चंद्रपुर, कुंजेमुरा, भिवंडी, कुरुक्षेत्र, ब्रजराजनगर, चित्तौड़गढ़, चूरू, महाड, बद्दी, विरार, बदलापुर, तालचेर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), खुर्जा, सिलीगुड़ी, उल्हासनगर, भुवनेश्वर, बोइसर, जालोर, डूंगरपुर, जलगांव, नागौर, अजमेर, अलवर, अमरावती (महाराष्ट्र), राजमहेंद्रवरम, अहमदनगर, मालेगांव, लुधियाना, सहरसा, यमुना नगर, बालासोर, पटना, रतलाम, खन्ना, नासिक, ठाणे, आगरा, तुमडीह आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 4.7 फीसदी यानी महज 11 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में किशनगंज, मदिकेरी, पेरुंदुरई, पुदुचेरी, शिलांग, श्रीनगर, तंजावुर, थूथुकुडी आदि शामिल हैं।
आज देश के जिन 97 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें चित्तूर, कोयंबटूर, दौसा, दावनगेरे, धनबाद, धारवाड़, धौलपुर, धुले, दुर्गापुर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, गया, गोरखपुर, हल्दिया, हापुड़, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जलना, झांसी, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, करनाल, कटिहार, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, लातूर, लखनऊ, मंडीखेड़ा, मिलुपारा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंगेर, मैसूर, पलवल, पंपोर, पंचगांव, पंचकुला, पानीपत, पटियाला, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पूर्णिया, रामनगर, ऋषिकेश आदि शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 113 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र), अंगुल, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बागपत, बहादुरगढ़, बालासोर, बल्लभगढ़, बारां, बारबिल, बारीपदा, बेगूसराय, बेलापुर, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, बर्नीहाट, चंद्रपुर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, देहरादून, डूंगरपुर, एलूर, फरीदाबाद, गांधीनगर, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुवाहाटी, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हावड़ा, जयपुर, जालंधर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, जींद, जोधपुर, कटनी, खन्ना, खुर्जा, कोलकाता, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लुधियाना, महाड, मालेगांव, मानेसर, मंगुराहा, मेरठ, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, नोएडा, पाली, परभनी, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, पुणे, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, रोहतक, रूपनगर, सहरसा, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सिंगरौली, सिरसा, सोलापुर, सूरत, तालचेर, ठाणे, टोंक, तुमडीह, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वातवा, विरार, विशाखापत्तनम, यादगीर, यमुना नगर शामिल हैं।
आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 14 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में बीकानेर, बिलीपाड़ा, ब्यासनगर, चरखी दादरी, दिल्ली, धारूहेड़ा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, हाजीपुर, झुंझुनू, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, श्री गंगानगर, वडोदरा शामिल हैं।
वहीं देवास में वायु गुणवत्ता बेहद खराब है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 236 में से महज 11 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 97 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 05 फरवरी 2026 को यह आंकड़ा 103 दर्ज किया गया था।
113 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज देवास में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 304 पर पहुंच गया है। इससे पहले कल देवास में एक्यूआई 112 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 192 अंकों का भारी उछाल आया है।
इससे पहले कल बल्लभगढ़ में वायु गुणवत्ता सूचकांक 302 दर्ज किया गया था। जहां आज 105 अंकों के सुधार के साथ सूचकांक घटकर 197 पर पहुंच गया।
दिल्ली में 06 फरवरी को प्रदूषण में गिरावट दर्ज की गई। दिल्ली में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक 241 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 220 पर पहुंच गया। मतलब कि कल से दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में 21 अंकों का सुधार आया है। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 1,300 फीसदी अधिक खराब है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है, जहां सूचकांक 155 (-7) रिकॉर्ड किया गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 06 फरवरी को गुरुग्राम चौथे स्थान पर है, वहीं मंडीदीप (289) दूसरे, जबकि चरखी दादरी (265) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 127, गाजियाबाद में 254, गुवाहाटी में 169, गुरूग्राम में 259, नोएडा में 196, ग्रेटर नोएडा में 194 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 118 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 94, चेन्नई में 94, चंडीगढ़ में 88, हैदराबाद में 97, जयपुर में 150 और पटना में 104 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 11 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अगरतला, बागलकोट, चिक्काबल्लापुर, किशनगंज, मदिकेरी, पेरुंदुरई, पुदुचेरी, शिलांग, श्रीनगर, तंजावुर, थूथुकुडी शामिल हैं।
वहीं आइजोल, अकोला, अंबाला, अमृतसर, अनंतपुर, अररिया, आसनसोल, बांसवाड़ा, बरेली, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बेलगाम, बेंगलुरु, बेतिया, भागलपुर, भिलाई, बिहार शरीफ, बिलासपुर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, छपरा, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, कोयंबटूर, दौसा, दावनगेरे, धनबाद, धारवाड़, धौलपुर, धुले, दुर्गापुर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, गया, गोरखपुर, हल्दिया, हापुड़, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जलना, झांसी, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, करनाल, कटिहार, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, लातूर, लखनऊ, मंडीखेड़ा, मिलुपारा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंगेर, मैसूर, पलवल, पंपोर, पंचगांव, पंचकुला, पानीपत, पटियाला, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पूर्णिया, रामनगर, ऋषिकेश, राउरकेला, सागर, समस्तीपुर, सांगली, सासाराम, सतना, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, सिवान, तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, वाराणसी, विजयपुरा, विजयवाड़ा, वृंदावन आदि 97 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:
239 शहरों में महज 14 की हवा साफ, बल्लभगढ़ फिर बना प्रदूषण का केंद्र