बढ़ते प्रदूषण के साथ हवा में घुला जहर लोगों को बहुत ज्यादा बीमार बना रहा है, बच्चे और बुजुर्ग इसका सबसे ज्यादा शिकार बन रहे हैं; फोटो: आईस्टॉक 
वायु

प्रदूषण में गिरावट के बावजूद देश का सबसे प्रदूषित शहर बना अंगुल, 286 पर पहुंचा एक्यूआई

राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 216 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 176 पर पहुंच गया।

Lalit Maurya

  • देश में 23 अप्रैल 2026 को प्रदूषण के स्तर में व्यापक उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जहां कुछ शहरों में हवा साफ हुई तो कई जगह हालात अब भी गंभीर बने रहे। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अंगुल देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, हालांकि पिछले दिन की तुलना में इसमें मामूली सुधार दर्ज किया गया। बता दें कि अंगुल में एक्यूआई 308 से घटकर आज 286 पर पहुंच गया।

  • इसके विपरीत नाहरलागुन (एक्यूआई 23) सबसे स्वच्छ हवा वाला शहर रहा, जबकि कैथल, सिंगरौली, मेरठ और गाजियाबाद जैसे शहर भी देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहे।

  • दिल्ली और बल्लभगढ़ जैसे शहरों में प्रदूषण में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला, वहीं फरीदाबाद में स्थिति बिगड़ी। कुल मिलाकर 243 शहरों में से महज 22 शहरों में ही हवा ‘बेहतर’ श्रेणी में रही, जबकि अधिकांश शहर या तो ‘संतोषजनक’ या ‘मध्यम’ स्तर पर बने रहे और 80 से अधिक शहरों में स्थिति चिंताजनक रही।

  • आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि देश में वायु गुणवत्ता अस्थिर है, कुछ क्षेत्रों में सुधार के बावजूद बड़े हिस्से में प्रदूषण अब भी स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 23 अप्रैल 2026 को देश में अंगुल सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 286 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि कल अंगुल में वायु गुणवत्ता सूचकांक 308 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 22 अंकों का सुधार आया है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि अंगुल की हवा में ओजोन पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। अंगुल में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 370 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में नाहरलागुन की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 23 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर अंगुल की तुलना नाहरलागुन से करें तो वहां स्थिति 12.4 गुणा खराब है।

इससे पहले कल देश में बल्लभगढ़ की स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 344 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज 251 अंकों के भारी सुधार के साथ वहां सूचकांक 93 पर पहुंच गया है। इसके साथ ही बल्लभगढ़ में वायु गुणवत्ता बेहद खराब से संतोषजनक श्रेणी में पहुंच गई है।

राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 216 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 176 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 40 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।

बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 93 पर पहुंच गया था। इसके बाद 01 अप्रैल को सूचकांक 113 दर्ज क्या गया। वहीं आज सूचकांक 114 रिकॉर्ड किया गया है। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 86 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 126 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वायु गुणवत्ता आज संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 23 अप्रैल 2026 को 243 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 9.1 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 49.4 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 41.6 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 18.5 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 1.7 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से करीब 3.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दूसरी तरफ खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में कैथल (273) दूसरे जबकि सिंगरौली (271) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह मेरठ (265) चौथे स्थान पर है। बागपत-गाजियाबाद में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 255और 252 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

बिलीपाड़ा (241) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में बर्नीहाट (मेघालय) (240), रोहतक (236), बुलंदशहर (233) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के चार (मेरठ, बागपत, गाजियाबाद और बुलंदशहर) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि कैथल, रोहतक, चरखी दादरी, जींद, बहादुरगढ़, हाजीपुर, यमुना नगर, सुआकाती, खुर्जा, परभनी, पंचकुला, बारां, मानेसर, करनाल, मुजफ्फरपुर, पंचगांव, वातवा, मोतिहारी, गोरखपुर, राउरकेला, नंदेसरी, आरा, धारूहेड़ा आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं सिंगरौली, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, बिलीपाड़ा, बर्नीहाट (मेघालय), बुलंदशहर, ग्रेटर नोएडा, कुरुक्षेत्र, हापुड़, नयागढ़, बद्दी, तालचेर, बारबिल, दिल्ली, लखनऊ, नोएडा, श्री गंगानगर, भिवाड़ी, धनबाद, पानीपत, नांदेड़, मेहसाणा, पटना, गांधीनगर, जोरापोखर, पटियाला, चंद्रपुर, फरीदाबाद, आगरा, बेंगलुरु, गया, बांसवाड़ा, सहरसा, भावनगर, सोनीपत, मुरादाबाद, कोटा, टोंक, कटनी आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 9 फीसदी यानी महज 22 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में चेन्नई, कोयंबटूर, गुवाहाटी, झांसी, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, मदिकेरी, नाहरलागुन, नेल्लोर, पंपोर, पेरुंदुरई, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, रूपनगर, शिलांग, सिलचर, विजयपुरा शामिल हैं।

इसी तरह देश के 120 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेलगाम, भरतपुर, भीलवाड़ा, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बीकानेर, बिलासपुर, ब्रजराजनगर, बक्सर, चंडीगढ़, छाल, छपरा, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चूरू, दौसा, देहरादून, देवास, धौलपुर, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गंगटोक, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जालोर, झुंझुनू, जोधपुर, कडप्पा, करौली, कटिहार, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मदुरई, मैहर, मंडीखेड़ा, मंगलौर, मीरा-भायंदर, मुंबई, मैसूर, नागांव, नागौर, नलबाड़ी, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, ऊटी, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 82 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अंकलेश्वर, आरा, औरंगाबाद (बिहार), बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भिवाड़ी, भिवंडी, भोपाल, बूंदी, चंद्रपुर, चित्तौड़गढ़, कटक, दमोह, दिल्ली, धनबाद, धारूहेड़ा, धारवाड़, धुले, फरीदाबाद, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुरुग्राम, ग्वालियर, हाजीपुर, जलगांव, जलना, झालावाड़, जोरापोखर, कानपुर, करनाल, कटनी, क्योंझर, खुर्जा, कोटा, लखनऊ, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मानेसर, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नागपुर, नांदेड़, नंदेसरी, नोएडा, पाली, पलवल, पंचगांव, पंचकुला, पानीपत, परभनी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, रायरंगपुर, राउरकेला, सागर, सहरसा, सवाई माधोपुर, सिरसा, सोनीपत, श्री गंगानगर, सुआकाती, तालचेर, टोंक, वडोदरा, वाराणसी, वातवा, यमुना नगर आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश में अंगुल, बद्दी, बागपत, बहादुरगढ़, बिलीपाड़ा, बुलंदशहर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (मेघालय), चरखी दादरी, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, हापुड़, जींद, कैथल, कुरुक्षेत्र, मेरठ, नयागढ़, रोहतक, सिंगरौली में स्थिति ‘खराब’ है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 243 में से महज 22 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 120 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 22 अप्रैल को यह आंकड़ा 118 दर्ज किया गया था।

82 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज अंगुल में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 286 दर्ज किया गया। गौरतलब है कि कल अंगुल में वायु गुणवत्ता सूचकांक 308 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 22 अंकों की गिरावट आई है। इसके साथ ही वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ से ‘खराब’ हो गई है।  

इससे पहले कल देश में बल्लभगढ़ की स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 344 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज 251 अंकों के भारी सुधार के साथ वहां सूचकांक 93 पर पहुंच गया है। इसके साथ ही बल्लभगढ़ में वायु गुणवत्ता बेहद खराब से संतोषजनक श्रेणी में पहुंच गई है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 216 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 176 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 40 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 86 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 126 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वायु गुणवत्ता आज संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 23 अप्रैल को मेरठ चौथे स्थान पर है, वहीं कैथल (273) दूसरे, जबकि सिंगरौली (271) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 110, गाजियाबाद में 252, गुवाहाटी में 48, गुरूग्राम में 109, नोएडा में 171, ग्रेटर नोएडा में 230 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 74 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 174, चेन्नई में 45, चंडीगढ़ में 95, हैदराबाद में 78, जयपुर में 97 और पटना में 141 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 22 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें बेतिया, भिलाई, भिवानी, चामराजनगर, चेन्नई, कोयंबटूर, गुवाहाटी, झांसी, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, मदिकेरी, नाहरलागुन, नेल्लोर, पंपोर, पेरुंदुरई, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, रूपनगर, शिलांग, सिलचर, विजयपुरा शामिल हैं।

वहीं अगरतला, अहमदनगर, आइजोल, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बागलकोट, बालासोर, बल्लभगढ़, बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेलगाम, भरतपुर, भीलवाड़ा, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बीकानेर, बिलासपुर, ब्रजराजनगर, बक्सर, चंडीगढ़, छाल, छपरा, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चूरू, दौसा, देहरादून, देवास, धौलपुर, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गंगटोक, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जालोर, झुंझुनू, जोधपुर, कडप्पा, करौली, कटिहार, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मदुरई, मैहर, मंडीखेड़ा, मंगलौर, मीरा-भायंदर, मुंबई, मैसूर, नागांव, नागौर, नलबाड़ी, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, ऊटी, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, सांगली, सतना, शिवमोगा, सीकर, सिलीगुड़ी, सिरोही, शिवसागर, सोलापुर, श्रीनगर, सूरत, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तुमडीह, उदयपुर, उल्हासनगर, वापी, विजयवाड़ा, विरार, विशाखापत्तनम, वृंदावन, यादगीर आदि 120 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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