दिल्ली और भिवाड़ी में वायु गुणवत्ता बेहद खराब हो गई है।
भिवाड़ी में एक्यूआई 384 तक पहुंच गया, जो डब्ल्यूएचओ की सुरक्षित सीमा से 700 फीसदी अधिक है।
दिल्ली में भी स्थिति चिंताजनक है, जहां एक्यूआई 360 दर्ज किया गया।
दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 9 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर में भिवाड़ी की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति 41 गुणा खराब है।
13 जनवरी 2026 को 247 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 6.1 फीसदी शहरों में हवा साफ है।
वहीं 27.5 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 66.4 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं।
विश्लेषण से पता चला है कि 13 जनवरी 2026 को देश में भिवाड़ी- ग्रेटर नोएडा की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही, जब वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 384 रिकॉर्ड किया गया। कल भिवाड़ी में वायु गुणवत्ता सूचकांक 227 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 157 अंकों का भारी उछाल आया है। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता ‘खराब’ से ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंच गई है।
रुझानों में सामने आया है कि भिवाड़ी की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी हैं। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
भिवाड़ी में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 700 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 9 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर में भिवाड़ी की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति 41 गुणा खराब है।
कल देश में वापी की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 366 दर्ज किया गया था। हालांकि आज सरकारी आंकड़ों में वापी का जिक्र नहीं है।
राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो वहां कल सूचकांक 297 दर्ज किया गया था, जो आज 63 अंकों के भारी उछाल के साथ बढ़कर 360 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता खराब से बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई है। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता डब्ल्यूएचओ मानकों से 2,200 फीसदी अधिक खराब है।
गौरतलब है कि इससे पहले 14 नवंबर को दिल्ली में 2025 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 461 तक पहुंच गया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 13 जनवरी 2026 को 247 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 6.1 फीसदी शहरों में हवा साफ है।
वहीं 27.5 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 66.4 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक बनी हुई है।
बता दें कि कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 25 फीसदी का इजाफा हुआ है। दूसरी तरफ संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में एक फीसदी से अधिक की गिरावट आई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में भी 5.7 फीसदी की गिरावट रिकॉर्ड की गई है। दूसरी तरह खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 26.7 फीसदी का इजाफा हुआ है, जोकि चिंता का विषय है। इसी तरह बेहद खराब हवा वाले शहरों की गिनती में भी कल से 400 फीसदी का इजाफा हुआ है।
फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 254 रिकॉर्ड किया गया है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में गुरुग्राम (379) दूसरे जबकि धारूहेड़ा (371) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 367 अंकों के साथ नोएडा चौथे स्थान पर है। दिल्ली-गाजियाबाद में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 360 और 358 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
मानेसर (348) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में बद्दी (341), श्री गंगानगर (324), बूंदी (290) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के तीन शहर (गुरुग्राम, धारूहेड़ा, मानेसर) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, धारूहेड़ा, नोएडा, दिल्ली, मानेसर, बद्दी, श्री गंगानगर, बूंदी, पंचकुला, मेरठ, नारनौल, बीकानेर, बुलंदशहर, बागपत, चरखी दादरी, बल्लभगढ़, फरीदाबाद, कोटा, मंडीखेड़ा, टोंक, आगरा, करनाल, चंडीगढ़, कटक, हापुड़, भुवनेश्वर, पानीपत, पीथमपुर, भीलवाड़ा, बिलीपाड़ा, चित्तौड़गढ़, मंडीदीप, मुजफ्फरनगर, बालासोर, ग्वालियर, सुआकाती, यमुना नगर, पाली, कुरुक्षेत्र, सिंगरौली, जबलपुर, जालोर, सीकर, नागौर, बहादुरगढ़, चूरू, बेतिया, जोधपुर, डूंगरपुर, आसनसोल, सहरसा, प्रतापगढ़, धौलपुर, राजसमंद, कानपुर, जींद, रोहतक, बारबिल, पुणे, भरतपुर, भिवानी, उल्हासनगर, गुम्मिडीपूंडी, समस्तीपुर, नलबाड़ी, बर्नीहाट, गांधीनगर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं भिवाड़ी, गाजियाबाद, खुर्जा, अंकलेश्वर, भोपाल, तालचेर, लखनऊ, झुंझुनू, हनुमानगढ़, बेगूसराय, कल्याण, अजमेर, पटना, कुंजेमुरा, उदयपुर, अहमदाबाद, भिवंडी, बारां, धनबाद, क्योंझर, धुले, रतलाम, अलवर, ब्रजराजनगर, सिवान, पटियाला, सिलीगुड़ी, परभनी, फतेहाबाद, विशाखापत्तनम, विरार, बदलापुर, जालंधर, जलगांव, मीरा-भायंदर, बोइसर, देहरादून, मुंबई, नांदेड़, अमृतसर, मालेगांव, मुरादाबाद, उज्जैन, बाड़मेर, खन्ना, औरंगाबाद (बिहार), ठाणे, राजमहेंद्रवरम, नासिक, अमरावती आंध्रप्रदेश), चंद्रपुर, बांसवाड़ा, गया, जलना, प्रयागराज आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 6.1 फीसदी यानी महज 15 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, दावनगेरे, गंगटोक, करूर, कोल्लम, कोप्पल, मदिकेरी, मैसूर, रामनाथपुरम, शिलांग, शिवमोगा, तंजावुर आदि शामिल हैं।
आज देश के जिन 68 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें चित्तूर, कोयंबटूर, कुड्डालोर, दौसा, धारवाड़, दुर्गापुर, एलूर, गोरखपुर, हिसार, हुबली, हैदराबाद, झांसी, कलबुर्गी, कन्नूर, करौली, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, लातूर, महाड, मंडी गोबिंदगढ़, मंगुराहा, मिलुपारा, मुंगेर, नयागढ़, पेरुंदुरई, पुडुचेरी, पुडुकोट्टई, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, सांगली, सासाराम, सतना, सिलचर, सिरसा आदि शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 116 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में अहमदाबाद, अजमेर, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमृतसर, अंगुल, अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बहादुरगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बेगूसराय, बेलापुर, बेतिया, भरतपुर, भिवंडी, भिवानी, बिहार शरीफ, बोइसर, ब्रजराजनगर, बक्सर, ब्यासनगर, बर्नीहाट, चंद्रपुर, चूरू, देहरादून, देवास, धनबाद, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, गुम्मिडीपूंडी, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावड़ा, इंदौर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जलना, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कडप्पा, कल्याण, कानपुर, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, कोलकाता, कुंजेमुरा, लखनऊ, लुधियाना, मालेगांव, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पंचगांव, परभनी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, राजमहेंद्रवरम, राजसमंद, रतलाम, ऋषिकेश, रोहतक, राउरकेला, सागर, सहरसा, समस्तीपुर, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सिरोही, सिवान, सोनीपत, ठाणे, तिरुपति, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वातवा, विरार, विशाखापत्तनम शामिल हैं।
आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 38 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में आगरा, अंकलेश्वर, बागपत, बालासोर, बल्लभगढ़, भीलवाड़ा, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलीपाड़ा, बुलंदशहर, बूंदी, चंडीगढ़, चरखी दादरी, चित्तौड़गढ़, कटक, फरीदाबाद, ग्वालियर, हापुड़, जबलपुर, करनाल, खुर्जा, कोटा, कुरुक्षेत्र, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नारनौल, पाली, पंचकुला, पानीपत, पीथमपुर, सिंगरौली, सुआकाती, तालचेर, टोंक, यमुना नगर शामिल हैं।
वहीं बद्दी, भिवाड़ी, दिल्ली, धारूहेड़ा, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, मानेसर, नोएडा, श्री गंगानगर में वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब' है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 247 में से महज 15 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 68 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 12 जनवरी 2026 को भी यह आंकड़ा 69 दर्ज किया गया था।
116 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज भिवाड़ी (384) में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां एक्यूआई 390 के करीब पहुंच गया। आंकड़ों के मुताबिक कल से वहां प्रदूषण में 157 अंकों का भारी उछाल आया है। इसके साथ ही आज भिवाड़ी में वायु गुणवत्ता खराब से बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
कल देश में वापी की हवा सबसे प्रदूषित थी, जब एक्यूआई बढ़कर 366 तक पहुंच गया था। हालांकि आज सरकारी आंकड़ों में वापी का जिक्र नहीं है।
गौरतलब है कि कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 297 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 63 अंकों के भारी उछाल के साथ वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़कर 360 पर पहुंच गया। मतलब कि दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता खराब से बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई है। दिल्ली के उलट कल से फरीदाबाद में प्रदूषण के स्तर में गिरावट आई है। आज फरीदाबाद में सूचकांक 254 रिकॉर्ड किया गया। हालांकि इसका मतलब है कि फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 13 जनवरी को नोएडा चौथे स्थान पर है, वहीं गुरुग्राम (378) दूसरे, जबकि धारूहेड़ा (371) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 212, गाजियाबाद में 358, गुवाहाटी में 125, गुरूग्राम में 378, नोएडा में 367, ग्रेटर नोएडा में 384 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 114 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 196, चेन्नई में 83, चंडीगढ़ में 234, हैदराबाद में 80, जयपुर में 142 और पटना में 144 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 15 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, दावनगेरे, गंगटोक, करूर, कोल्लम, कोप्पल, मदिकेरी, मैसूर, रामनाथपुरम, शिलांग, शिवमोगा, तंजावुर, थूथुकुडी, विजयपुरा शामिल हैं।
वहीं अगरतला, अहमदनगर, आइजोल, अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), अनंतपुर, आरा, बागलकोट, बरेली, बठिंडा, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भिलाई, बिलासपुर, चेन्नई, छाल, छपरा, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, कोयंबटूर, कुड्डालोर, दौसा, धारवाड़, दुर्गापुर, एलूर, गोरखपुर, हिसार, हुबली, हैदराबाद, झांसी, कलबुर्गी, कन्नूर, करौली, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, लातूर, महाड, मंडी गोबिंदगढ़, मंगुराहा, मिलुपारा, मुंगेर, नयागढ़, पेरुंदुरई, पुडुचेरी, पुडुकोट्टई, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, सांगली, सासाराम, सतना, सिलचर, सिरसा, शिवसागर, सोलापुर, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपुर, तुमडीह, वाराणसी, विजयवाड़ा, वृंदावन, यादगीर आदि 68 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:
157 अंकों के उछाल के साथ वापी बना देश का सबसे जहरीला शहर, शिलांग सबसे साफ