वायु

दिल्ली में दर्ज हुआ 2026 का सबसे साफ दिन, छपरा बना प्रदूषण की राजधानी

20 मार्च 2026 को 240 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 16.3 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 64 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है

Lalit Maurya

  • 20 मार्च 2026 के आंकड़ों में एक ओर जहां दिल्ली ने साल का सबसे साफ दिन दर्ज कर राहत की सांस ली, वहीं बिहार का छपरा प्रदूषण का नया केंद्र बनकर उभरा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 195 दर्ज किया गया।

  • मतलब की पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 73 अंकों का तेज उछाल देखा गया। देश के ज्यादातर शहर भले ही ‘संतोषजनक’ श्रेणी में रहे, लेकिन छपरा समेत कई शहरों में पीएम2.5 और पीएम10 का खतरनाक स्तर स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है।

  • साफ हवा वाले शहरों की संख्या में बढ़ोतरी के बावजूद प्रदूषण का असमान फैलाव यह दिखाता है कि देश अब भी कुछ शहर प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे हैं।

विश्लेषण के मुताबिक 20 मार्च 2026 को देश में छपरा सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 195 दर्ज किया गया, जो ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि कल बिहार के इस शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 122 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 73 अंकों का उछाल आया है।

रुझानों में सामने आया है कि छपरा की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। छपरा में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,200 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में पंपोर की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 19 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर छपरा की तुलना पंपोर से करें तो वहां स्थिति 10.3 गुणा खराब है।

इससे पहले कल देश में अंगुल की हवा सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 303 दर्ज किया गया। हालांकि आज 138 अंकों के सुधार के साथ सूचकांक 165 पर पहुंच गया है। मतलब कि अंगुल में वायु गुणवत्ता बेहद खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।

राजधानी दिल्ली की बात करें तो कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 137 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 93 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 44 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। राहत की खबर यह है कि 2026 में यह पहला मौका है जब दिल्ली में प्रदूषण इतना कम दर्ज किया गया है।

इसी तरफ फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 164 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 157 पर पहुंच गया। इसका मतलब कि फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।        

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 20 मार्च 2026 को 240 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 16.3 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 64 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 18.8 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 30 फीसदी का इजाफा हुआ है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 18.2 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से करीब 37.5 फीसदी की गिरावट आई है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में हाजीपुर (184) दूसरे जबकि सिंगरौली (178) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह ग्वालियर (176) चौथे स्थान पर है। अंगुल-फरीदाबाद में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 165 और 157 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

सोनीपत (157) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में वातवा (155), मुजफ्फरपुर (148) और भागलपुर (145) भी शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में बिहार के चार शहर (छपरा, हाजीपुर, मुजफ्फरपुर, भागलपुर) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि छपरा, हाजीपुर, ग्वालियर, सोनीपत, मुजफ्फरपुर, अगरतला, बिलीपाड़ा, मंडी गोबिंदगढ़, आरा, रोहतक, बहादुरगढ़, गुम्मिडीपूंडी, समस्तीपुर, यमुना नगर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं सिंगरौली, फरीदाबाद, वातवा, भागलपुर, पीथमपुर, धनबाद, औरंगाबाद (बिहार), जलगांव, पटना, मंगुराहा, लखनऊ, गया, बल्लभगढ़, सहरसा, कोरबा, गोरखपुर, सासाराम, धुले, छाल, देवास, तालचेर, नासिक, झालावाड़, महाड आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 16.3 फीसदी यानी महज 39 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में कोयंबटूर, देहरादून, डूंगरपुर, गंगटोक, गुवाहाटी, हल्दिया, हुबली, जालंधर, जींद, कैथल, कलबुर्गी, खन्ना, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, लातूर, मदिकेरी, मैहर, नेल्लोर, पंपोर, पंचगांव, पेरुंदुरई, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, ऋषिकेश आदि शामिल हैं। 

आज देश के जिन 156 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें अलवर, अंबाला, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बागपत, बांसवाड़ा, बारां, बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बेगूसराय, भरतपुर, भावनगर, भिवाड़ी, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट, चामराजनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, चूरू, कटक, दमोह, दौसा, दिल्ली, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुंटूर, गुरुग्राम, हनुमानगढ़, हापुड़, हिसार, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालोर, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, कडप्पा, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, करनाल, कटिहार, कटनी, खुर्जा, किशनगंज, कोल्लम, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लुधियाना आदि शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 45 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में अगरतला, अंगुल, आरा, औरंगाबाद (बिहार), बहादुरगढ़, बालासोर, बल्लभगढ़, बारबिल, बेंगलुरु, भागलपुर, भुवनेश्वर, बिलीपाड़ा, छाल, छपरा, देवास, धनबाद, धुले, फरीदाबाद, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, ग्वालियर, हाजीपुर, जलगांव, झालावाड़, कोरबा, लखनऊ, महाड, मंडी गोबिंदगढ़, मंगुराहा, मेहसाणा, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नासिक, पटना, पीथमपुर, रोहतक, सहरसा, समस्तीपुर, सासाराम, सिंगरौली, सोनीपत, तालचेर, वातवा, यमुना नगर शामिल हैं।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 240 में से महज 39 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 156 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 19 मार्च को यह आंकड़ा 132 दर्ज किया गया था।

45 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज छपरा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 195 पर पहुंच गया। वहीं कल छपरा में सूचकांक 122 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से प्रदूषण के स्तर में 73 अंकों का भारी उछाल आया है।

इससे पहले कल अंगुल में स्थिति सबसे ज्यादा खराब रिकॉर्ड की गई थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 303 तक पहुंच गया। वहीं आज अंगुल में एक्यूआई 165 दर्ज किया गया। मतलब कि कल से सूचकांक में 138 अंकों का सुधार आया है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 137 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 93 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 44 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता संतोषजनक हो गई है।

दिल्ली की तरफ ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 164 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 157 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।           

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 20 मार्च को ग्वालियर चौथे स्थान पर है, वहीं हाजीपुर (184) दूसरे, जबकि सिंगरौली (178) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 176, गाजियाबाद में 100, गुवाहाटी में 49, गुरूग्राम में 98, नोएडा में 86, ग्रेटर नोएडा में 98 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 61 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 120, चेन्नई में 45, चंडीगढ़ में 62, हैदराबाद में 63, जयपुर में 90 और पटना में 127 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 39 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, बागलकोट, भिलाई, भीलवाड़ा, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, कोयंबटूर, देहरादून, डूंगरपुर, गंगटोक, गुवाहाटी, हल्दिया, हुबली, जालंधर, जींद, कैथल, कलबुर्गी, खन्ना, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, लातूर, मदिकेरी, मैहर, नेल्लोर, पंपोर, पंचगांव, पेरुंदुरई, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, ऋषिकेश, रूपनगर, शिलांग, शिवसागर, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम, वृंदावन, यादगीर शामिल हैं।

वहीं आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अकोला, अलवर, अंबाला, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बागपत, बांसवाड़ा, बारां, बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बेगूसराय, भरतपुर, भावनगर, भिवाड़ी, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट, चामराजनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, चूरू, कटक, दमोह, दौसा, दिल्ली, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुंटूर, गुरुग्राम, हनुमानगढ़, हापुड़, हिसार, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालोर, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, कडप्पा, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, करनाल, कटिहार, कटनी, खुर्जा, किशनगंज, कोल्लम, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मालेगांव, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मानेसर, मंगलौर, मेरठ, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मैसूर, नागांव, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नवी मुंबई, नयागढ़, नोएडा, पाली, पलवल, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, पूर्णिया, रायरंगपुर, राजगीर, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, राउरकेला, सागर, सांगली, सतना, सवाई माधोपुर, शिवमोगा, सीकर, सिलचर, सिरोही, सिरसा, सिवान, सोलापुर, श्री गंगानगर, सूरत, टेन्सा, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, टोंक, तुमडीह, उडुपी, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार, विशाखापत्तनम आदि 156 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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