फोटो: विकास चौधरी 
वायु

27 सितम्बर को दिल्ली में दर्ज हुआ साल का दूसरा सबसे साफ दिन, घटकर 53 पर पहुंचा एक्यूआई

बता दें कि 2026 में 09 जुलाई को दिल्ली की हवा सबसे साफ थी, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया था।

Lalit Maurya

  • 27 सितम्बर को दिल्ली की हवा ने इस साल एक बार फिर राहत की सांस लेने का मौका दिया। राजधानी में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 53 पर पहुंच गया, जो 2026 का अब तक का दूसरा सबसे साफ दिन है। इससे पहले 9 जुलाई को दिल्ली का एक्यूआई 48 दर्ज किया गया था।

  • 26 सितम्बर के 72 के मुकाबले महज 24 घंटे में 19 अंकों का सुधार बताता है कि हवा की गुणवत्ता में कितना तेज उतार-चढ़ाव हो सकता है। हालांकि, इस राहत के बीच पड़ोसी फरीदाबाद की हवा संतोषजनक से खिसककर मध्यम श्रेणी में पहुंच गई, जहां एक्यूआई 93 से बढ़कर 110 हो गया।

  • देश की तस्वीर भी इसी विरोधाभास को सामने लाती है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 235 शहरों के आंकड़ों के मुताबिक, 81 शहरों यानी करीब 34.5 फीसदी में हवा बेहतर रही, जबकि 138 शहरों यानी 58.7 फीसदी में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। हालांकि 16 शहरों में हवा मध्यम श्रेणी में बनी रही।

  • दूसरी ओर, तमिलनाडु का गुम्मिडीपूंडी 174 एक्यूआई के साथ दिन का सबसे प्रदूषित शहर रहा। वहां एक दिन में एक्यूआई 34 अंक बढ़ा और पीएम2.5 प्रदूषण हावी रहा। इसके उलट कर्नाटक का मदिकेरी महज 15 एक्यूआई के साथ सबसे साफ शहर रहा। यानी देश के दो शहरों के बीच हवा की गुणवत्ता में करीब 12 गुना का फर्क रहा।

  • ये आंकड़े याद दिलाते हैं कि साफ हवा कोई स्थाई उपलब्धि नहीं, बल्कि बदलते मौसम, उत्सर्जन और स्थानीय परिस्थितियों के बीच हर दिन बदलती वास्तविकता है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 27 सितम्बर  2026 को देश में गुम्मिडीपूंडी सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 174 दर्ज किया गया, जो ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (26 सितम्बर) को गुम्मिडीपूंडी में सूचकांक 140 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 34 अंकों का उछाल आया है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि गुम्मिडीपूंडी की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

गुम्मिडीपूंडी में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,000 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 15 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर गुम्मिडीपूंडी की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 11 गुणा खराब है।

इससे पहले कल देश में लेह की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 195 दर्ज किया गया। हालांकि आज 85 अंकों के भारी सुधार के साथ लेह में एक्यूआई घटकर 110 पर पहुंच गया। मतलब कि वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में कमी आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 72 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 53 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 19 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है।

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 06 सितम्बर को 55 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64  दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में वृद्धि हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 93 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 110 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 17 अंकों के उछाल के बाद फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 27 सितम्बर 2026 को 235 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 34.5 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 58.7 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि दूसरी तरफ 6.8 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 5.8 फीसदी की कमी आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 0.7 फीसदी का मामूली इजाफा दर्ज किया गया। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 20 फीसदी की गिरावट आई है, जोकि राहत की खबर है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में बर्नीहाट (मेघालय) (149) दूसरे जबकि विशाखापत्तनम (141) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह अररिया (128) चौथे स्थान पर है। अमरावती (आंध्रप्रदेश) – बीकानेर (121) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

पाली (119) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में मंडी गोबिंदगढ़ (116), मोदीनगर (111) और टोंक (111) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में राजस्थान के तीन शहर (बीकानेर, पाली, टोंक) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि गुम्मिडीपूंडी, अररिया और मंडी गोबिंदगढ़ आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं बर्नीहाट (मेघालय), विशाखापत्तनम, अमरावती (आंध्र प्रदेश), बीकानेर, पाली, छपरा, फरीदाबाद और वातवा  आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 34.5 फीसदी यानी 81 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में हापुड़, हुबली, इंदौर, जलगांव, झांसी, कलबुर्गी, कानपुर, करौली, क्योंझर, खोरा, खुर्जा, कोल्हापुर, कोरबा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, मछलीपट्टनम, मदिकेरी, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मानेसर, मथुरा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पंचकुला, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, रायपुर, राजगीर, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सांगली, सासाराम, शामली, सिलीगुड़ी आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 138 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवंडी, भोपाल, बिलीपाड़ा, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, डोंबिवली, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फतेहाबाद, गडग, गजरौला, गांधीनगर, गया, गाजियाबाद, गुंटूर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, ग्वालियर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हिंगोली, हिसार, हावड़ा, हैदराबाद, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलना, जालौर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कडप्पा, कैथल, काकीनाडा, कल्याण, कन्नूर, करनाल, कटिहार, कटनी, खैरथल, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कोटा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लुधियाना, महाद, मंडीदीप, मंगलौर, मेरठ, मेहसाणा, मोतिहारी, नागांव, नागौर, नागपुर, नांदेड़, नारनौल, नेल्लोर, नोएडा, पंचगांव, पानीपत, पारादीप आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 16 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें अमरावती (आंध्र प्रदेश), अररिया, भुवनेश्वर, बीकानेर, बर्नीहाट (मेघालय), छपरा, एलूर, फरीदाबाद, गुम्मिडीपूंडी, लेह, मंडी गोबिंदगढ़, मोदीनगर, पाली, टोंक, वातवा और विशाखापत्तनम शामिल हैं।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 235 में से 81 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 138 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 26 सितम्बर को यह आंकड़ा 137 दर्ज किया गया था।

16 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज गुम्मिडीपूंडी में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 174 दर्ज किया गया, जोकि ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (26 सितम्बर) गुम्मिडीपूंडी में सूचकांक 140 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 34 अंकों का उछाल आया है।

इससे पहले कल देश में लेह की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 195 दर्ज किया गया। हालांकि आज 85 अंकों के भारी सुधार के साथ लेह में एक्यूआई घटकर 110 पर पहुंच गया। मतलब कि वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में कमी आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 72 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 53 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 19 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में वृद्धि हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 93 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 110 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 17 अंकों के उछाल के बाद फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 27 सितम्बर को अररिया (128) चौथे स्थान पर है, वहीं बर्नीहाट (मेघालय) (149) दूसरे, जबकि विशाखापत्तनम (141) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 60, गाजियाबाद में 56, गुवाहाटी में 53, गुरूग्राम में 71, नोएडा में 55, ग्रेटर नोएडा में 40 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 45 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 34, चेन्नई में 78, चंडीगढ़ में 37, हैदराबाद में 57, जयपुर में 93 और पटना में 69 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 81 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में आगरा, अहमदनगर, अकोला, आसनसोल, बदलापुर, बागपत, बड़ौत, बीड, बेतिया, भागलपुर, भिलाई, बोइसर, ब्रजराजनगर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चरखी दादरी, देहरादून, धौलपुर, धुले, फतेहपुर सीकरी, गंगटोक, ग्रेटर नोएडा, हाजीपुर, हापुड़, हुबली, इंदौर, जलगांव, झांसी, कलबुर्गी, कानपुर, करौली, क्योंझर, खोरा, खुर्जा, कोल्हापुर, कोरबा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, मछलीपट्टनम, मदिकेरी, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मानेसर, मथुरा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पंचकुला, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, रायपुर, राजगीर, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सांगली, सासाराम, शामली, सिलीगुड़ी, शिवसागर, सोलापुर, टेन्सा, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर, उडुपी, वाराणसी, विरार और वृंदावन शामिल हैं।

वहीं अगरतला, अहमदाबाद, अजमेर, अलवर, अंबाला, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, बद्दी, बहादुरगढ़, बालासोर, बांसवाड़ा, बारां, बरबिल, बारीपाड़ा, बाड़मेर, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवंडी, भोपाल, बिलीपाड़ा, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, डोंबिवली, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फतेहाबाद, गडग, गजरौला, गांधीनगर, गया, गाजियाबाद, गुंटूर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, ग्वालियर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हिंगोली, हिसार, हावड़ा, हैदराबाद, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलना, जालौर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कडप्पा, कैथल, काकीनाडा, कल्याण, कन्नूर, करनाल, कटिहार, कटनी, खैरथल, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कोटा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लुधियाना, महाद, मंडीदीप, मंगलौर, मेरठ, मेहसाणा, मोतिहारी, नागांव, नागौर, नागपुर, नांदेड़, नारनौल, नेल्लोर, नोएडा, पंचगांव, पानीपत, पारादीप, परभणी, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, रायबरेली, राजमहेंद्रवरम, राजसमंद, रोहतक, रूपनगर, सागर, सतारा, सतना, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलचर, सिरोही, सिरसा, सिवान, सोनीपत, श्री गंगानगर, श्रीनगर, सूरत, तालचेर, थूथुकुडी, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, विजयवाड़ा और यादगीर आदि 138 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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