भारत के कई शहरों में बढ़ते प्रदूषण से बड़े ही नहीं बच्चे भी प्रदूषित हवा में सांस लेने को मजबूर हैं; फोटो: आईस्टॉक 
वायु

कटक बना देश का सबसे प्रदूषित शहर, बढ़ते ओजोन से 300 के पार पहुंचा एक्यूआई

कटक में ओजोन के बढ़ते असर से हवा ‘बेहद खराब’ हो गई है और प्रदूषण का स्तर डब्ल्यूएचओ की सुरक्षित सीमा से 400 फीसदी अधिक दर्ज किया गया।

Lalit Maurya

  • 19 फरवरी 2026 को कटक देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 303 दर्ज किया गया और हवा ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंच गई। बीते 24 घंटों में यहां एक्यूआई में 39 अंकों का उछाल आया है, जबकि हवा में ओजोन का असर पूरी तरह हावी रहा।

  • हालात इतने गंभीर हैं कि कटक में प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 400 फीसदी अधिक दर्ज किया गया।

  • दूसरी ओर शिलांग की हवा सबसे साफ रही, जहां एक्यूआई महज 36 रहा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 239 शहरों के आंकड़ों से पता चलता है कि देश में सिर्फ पांच फीसदी शहरों की हवा साफ है, जबकि लगभग आधे शहरों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

  • दस सबसे प्रदूषित शहरों में ओडिशा के तीन और हरियाणा के दो शहर शामिल हैं, वहीं दिल्ली में मामूली सुधार के बावजूद हवा अब भी खराब श्रेणी में बनी हुई है।

विश्लेषण के मुताबिक 19 फरवरी 2026 को देश में कटक सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 303 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। इससे एक दिन पहले यानी 18 फरवरी को कटक में एक्यूआई 264 था। यानी बीते 24 घंटों में प्रदूषण के स्तर में 39 अंकों का उछाल आया है। 

रुझानों में सामने आया है कि कटक की हवा में ओजोन पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

कटक में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 400 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 36 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर कटक की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति आठ गुणा खराब है।

गौरतलब है कि कल देश में हाजीपुर की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब एक्यूआई 291 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज सरकारी आंकड़ों में हाजीपुर का जिक्र नहीं है।

राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। इसके बावजूद आज भी वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में बनी हुई है। कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 214 दर्ज किया गया था, जो 19 फरवरी को 6 अंकों के सुधार के साथ घटकर 208 पर पहुंच गया। इससे पहले 18 जनवरी को दिल्ली में 2026 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया।    

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 19 फरवरी 2026 को 239 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज पांच फीसदी शहरों में हवा साफ है।

वहीं 47.3 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 47.7 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक बनी हुई है।

बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 200 फीसदी का इजाफा हुआ है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 8.7 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में 1.9 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरफ खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में भी कल से 57.7 फीसदी की गिरावट आई है, जोकि राहत की खबर है।    

फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 196 (+30) दर्ज किया गया है।       

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में ब्यासनगर (252) दूसरे जबकि बहादुरगढ़ (241) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 233 अंकों के साथ बालासोर चौथे स्थान पर है। सिंगरौली-गुम्मिडीपूंडी में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 229 और 218 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

धारूहेड़ा (215) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में गाजियाबाद (213), दिल्ली (208) और नाहरलागुन (207) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में ओडिशा के तीन (कटक, ब्यासनगर, बालासोर) और हरियाणा के दो शहर (बहादुरगढ़, धारूहेड़ा) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि बहादुरगढ़, बालासोर, गुम्मिडीपूंडी, धारूहेड़ा, गाजियाबाद, नाहरलागुन, भिवाड़ी, सूरत, फरीदाबाद, चरखी दादरी, समस्तीपुर, तुमकुरु, यमुना नगर, पानीपत, तिरुवनंतपुरम, कोलकाता, आसनसोल, हापुड़, बद्दी, बर्नीहाट, सहरसा, मेरठ, नलबाड़ी, वडोदरा, भिवानी, वातवा, बेगूसराय, पुणे, मंडी गोबिंदगढ़, जलगांव, सिरसा, सोनीपत, जलना, बांसवाड़ा, नागांव, हल्दिया, बारीपदा, मंडीदीप, मानेसर, मुजफ्फरपुर, किशनगंज, अंकलेश्वर, पंचगांव, देहरादून, एलूर, लातूर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं सिंगरौली, बल्लभगढ़, ग्रेटर नोएडा, हावड़ा, गुवाहाटी, बारबिल, तालचेर, धनबाद, पीथमपुर, सिलीगुड़ी, गुरुग्राम, कुंजेमुरा, विशाखापत्तनम, ब्रजराजनगर, अंगुल, पटना, भावनगर, दुर्गापुर, बीकानेर, गया, नयागढ़, राजकोट, अहमदाबाद, चंद्रपुर, धारवाड़, नागपुर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), मेहसाणा, मालेगांव, राजमहेंद्रवरम, अहमदनगर, बदलापुर, इंदौर, गांधीनगर, मंगुराहा, कुरुक्षेत्र, भिवंडी, चित्तौड़गढ़, क्योंझर, महाड, भागलपुर, सागर, मुजफ्फरनगर, पिंपरी-चिंचवाड़, अलवर, बेंगलुरु, नासिक, सांगली, गोरखपुर, कल्याण आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के पांच फीसदी यानी महज 12 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बागलकोट, चामराजनगर, चित्तूर, दमोह, फिरोजाबाद, गंगटोक, झांसी, मुंगेर, पेरुंदुरई, शिलांग, श्रीनगर, विरार आदि शामिल हैं। 

आज देश के जिन 113 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें भोपाल, बिलासपुर, बुलंदशहर, बूंदी, बक्सर, चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, चिक्कमगलुरु, चूरू, कोयंबटूर, दौसा, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, कन्नूर, कानपुर, करौली, कटिहार, कटनी, खन्ना, खुर्जा, कोहिमा, कोल्हापुर, कोल्लम, कोटा, लखनऊ, लुधियाना, मदिकेरी, मंडीखेड़ा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मैसूर, नागौर, नांदेड़, नारनौल, नवी मुंबई, पाली, पलवल, पंपोर, पंचकुला, परभनी, पटियाला आदि शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 102 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में अहमदाबाद, अहमदनगर, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमृतसर, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारबिल, बारीपदा, बेगूसराय, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भिवंडी, भिवानी, भुवनेश्वर, बीकानेर, ब्रजराजनगर, बर्नीहाट, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चित्तौड़गढ़, देहरादून, धनबाद, धारवाड़, दुर्गापुर, एलूर, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, गुवाहाटी, हल्दिया, हापुड़, हावड़ा, इंदौर, जलगांव, जलना, कल्याण, करनाल, काशीपुर, क्योंझर, किशनगंज, कोलकाता, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लातूर, महाड, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मानेसर, मंगुराहा, मेरठ, मेहसाणा, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागपुर, नलबाड़ी, नासिक, नयागढ़, नोएडा, पंचगांव, पानीपत, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, पुणे, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, सागर, सहरसा, समस्तीपुर, सांगली, सवाई माधोपुर, सिलीगुड़ी, सिरसा, सोनीपत, श्री गंगानगर, सुकाती, सूरत, तालचेर, तिरुवनंतपुरम, तुमकुरु, तुमडीह, वडोदरा, वातवा, विशाखापत्तनम, यमुना नगर शामिल हैं।

आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 11 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में बहादुरगढ़, बालासोर, भिवाड़ी, ब्यासनगर, दिल्ली, धारूहेड़ा, गाजियाबाद, गुम्मिडीपूंडी, मिलुपारा, नाहरलागुन, सिंगरौली शामिल हैं। इसी तरह कटक में वायु गुणवत्ता सूचकांक 303 दर्ज किया गया है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 239 में से महज पांच शहरों में हवा 'बेहतर' है। 113 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 18 फरवरी 2026 को यह आंकड़ा 104 दर्ज किया गया था।

102 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज कटक में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 303 पर पहुंच गया। इससे पहले कल कटक में एक्यूआई 264 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 39 अंकों का इजाफा हुआ है।      

कल हाजीपुर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 291 दर्ज किया गया था। वहीं आज सरकारी आंकड़ों में हाजीपुर का जिक्र नहीं है।

दिल्ली में 19 फरवरी को प्रदूषण में गिरावट दर्ज की गई। दिल्ली में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक 214 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 208 पर पहुंच गया। मतलब कि कल से दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में 6 अंकों का सुधार आया है। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 200 फीसदी अधिक खराब है।  

दूसरी तरफ फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में उछाल आया है। फरीदाबाद में कल जहां एक्यूआई 166 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 196 पर पहुंच गया है। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।     

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 19 फरवरी को बालासोर चौथे स्थान पर है, वहीं ब्यासनगर (252) दूसरे, जबकि बहादुरगढ़ (241) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 99, गाजियाबाद में 213, गुवाहाटी में 166, गुरूग्राम में 148, नोएडा में 197, ग्रेटर नोएडा में 180 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 67 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 94, चेन्नई में 96, चंडीगढ़ में 78, हैदराबाद में 85, जयपुर में 90 और पटना में 137 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 12 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें बागलकोट, चामराजनगर, चित्तूर, दमोह, फिरोजाबाद, गंगटोक, झांसी, मुंगेर, पेरुंदुरई, शिलांग, श्रीनगर, विरार शामिल हैं।

वहीं अगरतला, आगरा, आइजोल, अजमेर, अकोला, अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अनंतपुर, बागपत, बारां, बरेली, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बेलापुर, भरतपुर, भिलाई, भीलवाड़ा, भोपाल, बिलासपुर, बुलंदशहर, बूंदी, बक्सर, चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, चिक्कमगलुरु, चूरू, कोयंबटूर, दौसा, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, कन्नूर, कानपुर, करौली, कटिहार, कटनी, खन्ना, खुर्जा, कोहिमा, कोल्हापुर, कोल्लम, कोटा, लखनऊ, लुधियाना, मदिकेरी, मंडीखेड़ा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मैसूर, नागौर, नांदेड़, नारनौल, नवी मुंबई, पाली, पलवल, पंपोर, पंचकुला, परभनी, पटियाला, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुदुचेरी, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, रोहतक, राउरकेला, रूपनगर, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सीकर, सिलचर, सिरोही, सिवान, सोलापुर, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, टोंक, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वाराणसी, विजयपुरा, विजयवाड़ा, वृंदावन, यादगीर आदि 113 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:

छोटे शहरों में बढ़ता जहर: हाजीपुर में बढ़कर 291 पर पहुंचा एक्यूआई