देश में वायु प्रदूषण की तस्वीर एक बार फिर बेहद असमान और चिंताजनक नजर आई है। 1 मई 2026 को छपरा 308 एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा, जहां हवा ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंच गई।
हालात इतने गंभीर हैं कि यहां पीएम2.5 का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 1950 फीसदी अधिक दर्ज किया गया, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा है।
इसके उलट मिजोरम की राजधानी आइजोल में एक्यूआई महज 14 रहा, जिससे साफ होता है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में हवा की गुणवत्ता में 22 गुणा तक का अंतर मौजूद है।
हालांकि कुछ राहत की खबर भी सामने आई है। दिल्ली-एनसीआर समेत कई शहरों में बीते 24 घंटों में प्रदूषण में गिरावट दर्ज की गई है और हवा मध्यम श्रेणी में बनी हुई है। देशभर के 228 शहरों के आंकड़ों के मुताबिक 50 फीसदी शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक है, जबकि 22.4 फीसदी शहरों में हवा साफ दर्ज की गई।
फिर भी 27.6 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक बने हुए हैं, जहां पीएम2.5 और पीएम10 जैसे खतरनाक कण हावी हैं। कुल मिलाकर, यह तस्वीर बताती है कि सुधार के संकेत जरूर हैं, लेकिन देश अभी भी गंभीर प्रदूषण संकट से जूझ रहा है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 01 मई 2026 को देश में छपरा सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 308 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि कल सरकारी आंकड़ों में छपरा का जिक्र नहीं था।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि छपरा की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। छपरा में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,950 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में आइजोल की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 14 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर छपरा की तुलना आइजोल से करें तो वहां स्थिति 22 गुणा खराब है।
कल देश में नारनौल की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 306 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज 139 अंकों के भारी सुधार के साथ वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 167 पर पहुंच गया है। मतलब कि वायु गुणवत्ता बेहद खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 148 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 120 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 28 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज एक बार फिर मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 93 पर पहुंच गया था। इसके बाद 01 अप्रैल को सूचकांक 113 दर्ज क्या गया। वहीं आज सूचकांक 114 रिकॉर्ड किया गया है। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 124 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 110 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 01 मई 2026 को 228 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 22.4 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 50 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 27.6 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 50 फीसदी का उछाल आया है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 6.6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से करीब 13.8 फीसदी की कमी आई है, जोकि राहत की खबर है। खराब हवा वाले शहरों के आंकड़ों को देखें तो कल से उनकी गिनती में कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में भिवानी (304) दूसरे जबकि पानीपत (296) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह सोनीपत (241) चौथे स्थान पर है। हिसार-मंडीदीप में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 223 और 210 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
श्री गंगानगर (209) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में भरतपुर (192), वातवा (179) और सवाई माधोपुर (178) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के चार शहर (भिवानी, पानीपत, सोनीपत, हिसार) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि छपरा, भिवानी, पानीपत, सोनीपत, मंडीदीप, वातवा, नारनौल, बहादुरगढ़, झालावाड़, बर्नीहाट (असम), पंचगांव, जींद, यमुना नगर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं बल्लभगढ़, बीकानेर, भीलवाड़ा, हनुमानगढ़, चूरू, चरखी दादरी, पाली, गाजियाबाद, सिरोही, बाड़मेर, चित्तौड़गढ़, पीथमपुर, मेहसाणा, प्रतापगढ़, देवास, भिवाड़ी, गुरुग्राम, जालोर, उदयपुर, फतेहाबाद, झुंझुनू, बर्नीहाट (मेघालय), टोंक, राजसमंद, फरीदाबाद, अजमेर, जोधपुर, अलवर, बुलंदशहर, जैसलमेर, रतलाम, कोटा, नोएडा, जयपुर, भोपाल, जलगांव आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 22.4 फीसदी यानी 51 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बरेली, बारीपाड़ा, बैरकपुर, भिलाई, बिलासपुर, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, कुड्डालोर, धौलपुर, दुर्गापुर, फिरोजाबाद, हल्दिया, हावड़ा, झांसी, कानपुर, कटनी, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कुंजेमुरा, मदिकेरी, मैहर, मंडीखेड़ा, मंगुराहा, मोतिहारी, नयागढ़, नेल्लोर, पेरुंदुरई, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, रामनगर, ऋषिकेश शामिल हैं।
इसी तरह देश के 114 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बेंगलुरु, भागलपुर, भिवंडी, बिहार शरीफ, बिलाईपाड़ा, ब्रजराजनगर, बूंदी, बक्सर, ब्यासनगर, चंडीगढ़, चेन्नई, कोयंबटूर, दौसा, धारूहेड़ा, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, एलुरु, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, कडप्पा, कलबुर्गी, कल्याण, करौली, करनाल, कटिहार, खुर्जा, कोल्लम, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाड, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मानेसर, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, पंचकुला, परभनी , पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुदुचेरी, पुणे, पूर्णिया, रायपुर आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 56 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अजमेर, अलवर, अंगुल, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारबिल, बाड़मेर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, बुलंदशहर, बर्नीहाट (असम), बर्नीहाट (मेघालय), चंद्रपुर, चरखी दादरी, चित्तौड़गढ़, चूरू, दिल्ली, देवास, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, हनुमानगढ़, जयपुर, जैसलमेर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कोटा, मेरठ, मेहसाणा, नारनौल, नोएडा, पाली, पंचगांव, पीथमपुर, प्रतापगढ़, राजसमंद, रतलाम, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरोही, टोंक, उदयपुर, वातवा, यमुना नगर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश में हिसार, मंडीदीप, पानीपत, सोनीपत, श्री गंगानगर में स्थिति ‘खराब’ है। वहीं देश में भिवानी (304) और छपरा (308) में स्थिति बेहद खराब है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 228 में से महज 51 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 114 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 30 अप्रैल को यह आंकड़ा 122 दर्ज किया गया था।
56 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज छपरा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 308 दर्ज किया गया। मतलब कि वायु गुणवत्ता बेहद खराब दर्ज की गई है। गौरतलब है कि कल सरकारी आंकड़ों में छपरा का जिक्र नहीं था।
कल देश में नारनौल की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 306 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज 139 अंकों के भारी सुधार के साथ वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 167 पर पहुंच गया है। मतलब कि वायु गुणवत्ता बेहद खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 148 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 120 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 28 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज एक बार फिर मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 124 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 110 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 01 मई को सोनीपत चौथे स्थान पर है, वहीं भिवानी (304) दूसरे, जबकि पानीपत (296) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 76, गाजियाबाद में 130, गुवाहाटी में 58, गुरूग्राम में 118, नोएडा में 104, ग्रेटर नोएडा में 124 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 51 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 59, चेन्नई में 58, चंडीगढ़ में 60, हैदराबाद में 72, जयपुर में 103 और पटना में 80 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 51 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, अंबाला, अंबरनाथ, अररिया, बरेली, बारीपाड़ा, बैरकपुर, भिलाई, बिलासपुर, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, कुड्डालोर, धौलपुर, दुर्गापुर, फिरोजाबाद, हल्दिया, हावड़ा, झांसी, कानपुर, कटनी, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कुंजेमुरा, मदिकेरी, मैहर, मंडीखेड़ा, मंगुराहा, मोतिहारी, नयागढ़, नेल्लोर, पेरुंदुरई, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, रामनगर, ऋषिकेश, रोहतक, रूपनगर, सांगली, शिवमोगा, सिलचर, श्रीनगर, सुआकाती, सूरत, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, उल्हासनगर, विजयपुरा, वृंदावन शामिल हैं।
वहीं आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बगलकोट, बागपत, बालासोर, बारां, बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भिवंडी, बिहार शरीफ, बिलाईपाड़ा, ब्रजराजनगर, बूंदी, बक्सर, ब्यासनगर, चंडीगढ़, चेन्नई, कोयंबटूर, दौसा, धारूहेड़ा, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, एलुरु, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, कडप्पा, कलबुर्गी, कल्याण, करौली, करनाल, कटिहार, खुर्जा, कोल्लम, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाड, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मानेसर, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, पंचकुला, परभनी , पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुदुचेरी, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, राजकोट, राउरकेला, सागर, सहरसा, सासाराम, सतना, सिलीगुड़ी, सिंगरौली, सिरसा, शिवसागर, सोलापुर, तालचेर, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, उज्जैन, वडोदरा, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार, विशाखापत्तनम, यादगीर आदि 114 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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