सिर्फ बड़े शहरों की समस्या नहीं रहा वायु प्रदूषण; प्रतीकात्मक तस्वीर: विकास चौधरी/सीएसई  
वायु

228 अंकों के साथ प्रदूषित शहरों में पहले पायदान पर चरखी दादरी, बड़ौत में सुधार के बावजूद स्थिति 'खराब'

30 अगस्त 2026 को 245 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से 33.1 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 49.8 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि 17.1 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं

Lalit Maurya

  • 30 अगस्त 2026 को देश की हवा में प्रदूषण का उतार-चढ़ाव साफ दिखाई दिया। 245 शहरों के सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण में हरियाणा का चरखी दादरी 228 के एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा। चिंताजनक बात यह है कि महज 24 घंटों में वहां एक्यूआई 135 से 93 अंक उछलकर ‘मध्यम’ से ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गया।

  • चरखी दादरी की हवा में पीएम2.5 का दबदबा है और प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 1,400 फीसदी अधिक दर्ज किया गया। इसके उलट कारवार का एक्यूआई केवल 14 रहा और वहां की हवा देश में सबसे साफ रही।

  • बड़ौत में एक्यूआई 262 से घटकर 225 होने के बावजूद हवा ‘खराब’ श्रेणी में बनी रही।

  • देश के 81 शहरों (33.1 फीसदी) में हवा साफ, 122 शहरों (49.8 फीसदी) में संतोषजनक और 40 शहरों (17.1 फीसदी) में मध्यम रही।

  • चरखी दादरी, अंबाला और फरीदाबाद के साथ हरियाणा तथा बड़ौत, बुलंदशहर और नोएडा के साथ उत्तर प्रदेश के तीन-तीन शहर देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहे।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 30 अगस्त 2026 को देश में चरखी दादरी सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 228 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (29 अगस्त) चरखी दादरी में वायु गुणवत्ता का स्तर 135 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 93 अंकों का भारी इजाफा हुआ है और वायु गुणवत्ता ‘मध्यम’ से ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गई है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि चरखी दादरी की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

चरखी दादरी में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,400 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में कारवार की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 14 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर चरखी दादरी की तुलना कारवार से करें तो वहां स्थिति 16 गुणा खराब है।

वहीं कल देश में बड़ौत की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 262 रिकॉर्ड किया गया। आज बड़ौत में 37 अंकों के सुधार के साथ सूचकांक घटकर 225 पर पहुंच गया। हालांकि इसके बावजूद वहां वायु गुणवत्ता आज भी ‘खराब’ श्रेणी में बनी हुई है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में कमी आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 130 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 129 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में एक अंक की मामूली गिरावट आई है। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है। 

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 07-30 अगस्त को 63 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64  दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में वृद्धि हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 137 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 151 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 14 अंकों के उछाल के साथ फरीदाबाद में आज भी एक्यूआई मध्यम श्रेणी में बना हुआ है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 30 अगस्त 2026 को 245 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 33.1 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 49.8 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 17.1 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 12.5 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 7.6 फीसदी की कमी आई है। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से करीब 11.1 फीसदी की गिरावट आई है, जोकि राहत की खबर है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में बड़ौत (225) दूसरे जबकि अंबाला (183) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह भागलपुर (177) चौथे स्थान पर है। सहरसा (176) – बुलंदशहर (168) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

बद्दी (166) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में नोएडा (154), फरीदाबाद (151) और श्री गंगानगर (136) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा (चरखी दादरी, अंबाला और फरीदाबाद) और उत्तर प्रदेश (बड़ौत, बुलंदशहर और नोएडा) के तीन-तीन शहर शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि चरखी दादरी, बड़ौत, फरीदाबाद, भिवानी, गुम्मिडीपूंडी, खन्ना, मानेसर, जींद, पानीपत और यमुनानगर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं अंबाला, भागलपुर, सहरसा, बुलंदशहर, बद्दी, नोएडा, श्रीगंगानगर, गजरौला, दौसा, ग्रेटर नोएडा, दिल्ली, सीकर, मेरठ, भिवाड़ी, शामली, कैथल, मुजफ्फरनगर, जैसलमेर, टोंक, हापुड़, नारनौल, छपरा, अलवर, सिरसा, मथुरा, पाली, अमृतसर, कुरुक्षेत्र, सिवान, गाजियाबाद और पीथमपुर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 33.1 फीसदी यानी 81 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में भुवनेश्वर, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, चामराजनगर, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, कटक, धुले, डोंबिवली, फिरोजाबाद, हल्दिया, हुबली, हैदराबाद, जलगांव, कडप्पा, काकीनाडा, कलबुर्गी, कारवार, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, लखनऊ, मदिकेरी, महाद, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पंचकुला, पिंपरी-चिंचवाड़, पुडुचेरी, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, रामनगर, ऋषिकेश, राउरकेला, समस्तीपुर, सांगली आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 122 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, दमोह, देहरादून, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, फतेहपुर सीकरी, गडग, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुंटूर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हिंगोली, हिसार, हावड़ा, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, जालोर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, करनाल, कटिहार, कटनी, खोरा, खुर्जा, कोहिमा, कोटा, मछलीपट्टनम, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मेहसाणा, मुरादाबाद, मैसूरु, नागांव, नागौर, नलबाड़ी, नंदेसरी, नयागढ़, नेल्लोर, पलवल आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 40 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें अलवर, अंबाला, अमृतसर, बद्दी, भागलपुर, भिवाड़ी, भिवानी, बुलंदशहर, छपरा, दौसा, दिल्ली, फरीदाबाद, गजरौला, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, हापुड़, जैसलमेर, जींद, कैथल, खन्ना, कुरुक्षेत्र, मानेसर, मथुरा, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नारनौल, नोएडा, पाली, पंचगांव, पानीपत, पीथमपुर, सहरसा, शामली, सीकर, सिरसा, सिवान, श्रीगंगानगर, टोंक और यमुनानगर आदि शामिल हैं।

वहीं बड़ौत (225) और चरखी दादरी (228) में स्थिति खराब है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 245 में से 81 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 122 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 29 अगस्त को भी यह आंकड़ा 132 दर्ज किया गया था।

40 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज चरखी दादरी में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 228 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (29 अगस्त) चरखी दादरी में वायु गुणवत्ता का स्तर 135 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 93 अंकों का भारी इजाफा हुआ है और वायु गुणवत्ता मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।

वहीं कल देश में बड़ौत की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 262 रिकॉर्ड किया गया। आज बड़ौत में 37 अंकों के सुधार के साथ सूचकांक घटकर 225 पर पहुंच गया। हालांकि इसके बावजूद वहां वायु गुणवत्ता आज भी ‘खराब’ श्रेणी में बनी हुई है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में कमी आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 130 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 129 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में एक अंक की मामूली गिरावट आई है। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है। 

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में वृद्धि हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 137 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 151 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 14 अंकों के उछाल के साथ फरीदाबाद में आज भी एक्यूआई मध्यम श्रेणी में बना हुआ है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 30 अगस्त को भागलपुर (177) चौथे स्थान पर है, वहीं बड़ौत (225) दूसरे, जबकि अंबाला (183) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 69, गाजियाबाद में 103, गुवाहाटी में 58, गुरूग्राम में 86, नोएडा में 154, ग्रेटर नोएडा में 130 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 41 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 49, चेन्नई में 71, चंडीगढ़ में 77, हैदराबाद में 47, जयपुर में 89 और पटना में 61 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 81 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में अगरतला, अहमदनगर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र), अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बारबिल, बैरकपुर, बीड, बेलापुर, भिलाई, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, चामराजनगर, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, कटक, धुले, डोंबिवली, फिरोजाबाद, हल्दिया, हुबली, हैदराबाद, जलगांव, कडप्पा, काकीनाडा, कलबुर्गी, कारवार, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, लखनऊ, मदिकेरी, महाद, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पंचकुला, पिंपरी-चिंचवाड़, पुडुचेरी, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, रामनगर, ऋषिकेश, राउरकेला, समस्तीपुर, सांगली, शिलांग, शिवमोगा, सिलचर, सिलीगुड़ी, शिवसागर, सोलापुर, सूरत, टेन्सा, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, तिरुमाला, तुमडीह, उल्हासनगर, वापी, वाराणसी, विजयपुरा, विरार और यादगीर शामिल हैं।

वहीं आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अकोला, अंबरनाथ, आसनसोल, बागपत, बहादुरगढ़, बालासोर, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बरेली, बारीपाड़ा, बाड़मेर, बठिंडा, बेगूसराय, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भोपाल, बिलाईपाड़ा, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, दमोह, देहरादून, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, फतेहपुर सीकरी, गडग, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुंटूर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हिंगोली, हिसार, हावड़ा, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, जालोर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, करनाल, कटिहार, कटनी, खोरा, खुर्जा, कोहिमा, कोटा, मछलीपट्टनम, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मेहसाणा, मुरादाबाद, मैसूरु, नागांव, नागौर, नलबाड़ी, नंदेसरी, नयागढ़, नेल्लोर, पलवल, पंपोर, परभणी, पटियाला, पटना, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, रायबरेली, राजसमंद, रोहतक, रूपनगर, सागर, सतारा, सतना, सवाई माधोपुर, सिरोही, श्रीकाकुलम, श्रीनगर, तालचेर, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुपति, उदयपुर, उज्जैन, वडोदरा, वातवा, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम और वृंदावन आदि 122 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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