देश में वायु प्रदूषण का बदलता परिदृश्य एक बार फिर चिंता बढ़ा रहा है। 3 अक्टूबर 2026 के केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक, हरियाणा का यमुनानगर 228 के एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा।
एक दिन में 69 अंकों की बढ़ोतरी के साथ वहां की हवा ‘मध्यम’ से ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गई। यमुनानगर की हवा में पीएम2.5 का दबदबा रहा, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का संकेत है। इसके विपरीत उडुपी में एक्यूआई महज 31 दर्ज हुआ और वह देश का सबसे साफ शहर रहा।
प्रदूषण की यह तस्वीर केवल एक शहर तक सीमित नहीं है। गाजियाबाद (222), मंडीदीप (212) और नोएडा (204) भी ‘खराब’ वायु गुणवत्ता वाले शहरों में शामिल रहे।
देश के 252 शहरों में 113 की हवा ‘मध्यम’ और 118 शहरों में ‘संतोषजनक’ रही, जबकि केवल 17 शहरों में हवा ‘बेहतर’ दर्ज की गई। दिल्ली में एक्यूआई मामूली सुधार के साथ 171 रहा, जबकि फरीदाबाद में 40 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज हुई।
आंकड़े बताते हैं कि प्रदूषण का केंद्र लगातार बदल रहा है और महीन कणों से दूषित हवा देश के कई शहरों में लोगों की सेहत पर बढ़ता दबाव बना रही है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 03 अक्टूबर 2026 को देश में यमुना नगर सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 228 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (02 अक्टूबर) को यमुना नगर में सूचकांक 159 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 69 अंकों का इजाफा हुआ है। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि यमुना नगर की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
यमुना नगर में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,400 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में उडुपी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 31 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर यमुना नगर की तुलना उडुपी से करें तो वहां स्थिति 7.3 गुणा खराब है।
इससे पहले देश में तालचेर की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 231 रिकॉर्ड किया गया। लेकिन आज 99 अंकों के भारी सुधार के साथ तालचेर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 132 पर पहुंच गया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 174 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 171 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 3 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 06 सितम्बर को 55 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 99 दर्ज किया गया था, जो आज 40 अंकों के उछाल के साथ बढ़कर 139 पर पहुंच गया। इसके साथ ही फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 03 अक्टूबर 2026 को 252 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 6.7 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 46.8 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि दूसरी तरफ 46.4 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 26.1 फीसदी की कमी आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 12.4 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 4.2 फीसदी की कमी आई है, जोकि राहत की खबर है। वहीं खराब हवा वाले शहरों की गिनती छह से घटकर चार पर पहुंच गई है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में गाजियाबाद (222) दूसरे जबकि मंडीदीप (212) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह नोएडा (204) चौथे स्थान पर है। अंबरनाथ (194) – गुरुग्राम में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
मेरठ (192) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में बुलंदशहर (191), शामली (190) और मानेसर (188) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के पांच शहर (गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ, बुलंदशहर, शामली) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि यमुना नगर, गाजियाबाद, गुरुग्राम, मेरठ, शामली, मानेसर, जींद, चंद्रपुर, ब्रजराजनगर, मोदीनगर, अंबाला, खोरा, हिंगोली, भावनगर, मथुरा, मंडी गोबिंदगढ़, बद्दी, गुम्मिडीपूंडी, सतारा, अररिया, वाराणसी, कोलकाता, बरेली, जालंधर, चरखी दादरी, दुर्गापुर, धारूहेड़ा, वडोदरा, कानपुर, पाली, सांगली, हाजीपुर, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), महाद, दमोह, नांदेड़ और बर्नीहाट (असम) आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं मंडीदीप, नोएडा, अंबरनाथ, बुलंदशहर, गजरौला, भिवाड़ी, पारादीप, मुजफ्फरनगर, दिल्ली, श्री गंगानगर, अंकलेश्वर, बागपत, वृंदावन, बहादुरगढ़, खुर्जा, नागौर, कुरुक्षेत्र, सवाई माधोपुर, अगरतला, सिरसा, बड़ौत, विशाखापत्तनम, देवास, कल्याण, मुरादाबाद, सासाराम, दौसा, फरीदाबाद, पीथमपुर, फतेहपुर सीकरी, बीकानेर, नारनौल, अहमदाबाद, गोरखपुर, हिसार, सीकर, तालचेर, बारीपदा, चित्तौड़गढ़, परभणी, कटनी, उल्हासनगर, हावड़ा, टोंक, बिलासपुर, जोरापोखर, टेन्सा, वातवा, भिवानी, बिलीपाड़ा, सूरत, उदयपुर, लखनऊ, जयपुर, जोधपुर, भोपाल, पिंपरी-चिंचवाड़, बैरकपुर, डोंबिवली, फतेहाबाद, झुंझुनू, क्योंझर, ग्वालियर, रायरंगपुर, चुरू, हनुमानगढ़, पुणे, सहरसा, जबलपुर, मुंगेर, पटियाला, ग्रेटर नोएडा, जलना, जैसलमेर, जालौर, पटना, आगरा और गांधीनगर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 6.7 फीसदी यानी 17 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में एलुरु, गंगटोक, हुबली, कलबुर्गी, कुरनूल, मछलीपट्टनम, मंडीखेड़ा, पुडुचेरी, राजगीर, ऋषिकेश, सिलचर, तुमडीह आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 118 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भिलाई, भीलवाड़ा, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बोइसर, बूंदी, ब्यासनगर, चंडीगढ़, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, कटक, दावणगेरे, देहरादून, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, फिरोजाबाद, गया, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हैदराबाद, इंदौर, जलगांव, झालावाड़, झांसी, कडप्पा, कैथल, काकीनाडा, कन्नूर, करनाल, काशीपुर, कटिहार, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, लुधियाना, मैहर, मालेगांव, मैंगलोर, मंगुराहा, मेहसाणा, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागपुर, नाहरलागुन, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, नेल्लोर, पलवल, पंपोर, पंचगांव, पंचकुला, प्रतापगढ़, प्रयागराज आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 113 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अंबाला, अंबरनाथ, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बागपत, बहादुरगढ़, बड़ौत, बरेली, बारीपदा, बैरकपुर, भावनगर, भिवाड़ी, भिवानी, भोपाल, बीकानेर, बिलासपुर, बिलीपाड़ा, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, चरखी दादरी, चित्तौड़गढ़, चुरू, दमोह, दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, डोंबिवली, दुर्गापुर, एलूर, फरीदाबाद, फतेहाबाद, फतेहपुर सीकरी, गजरौला, गांधीनगर, गोरखपुर, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हिंगोली, हिसार, हावड़ा, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलना, जालौर, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कल्याण, कानपुर, कटनी, क्योंझर, खोरा, खुर्जा, कोलकाता, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, महाद, मंडी गोबिंदगढ़, मानेसर, मथुरा, मेरठ, मोदीनगर, मुरादाबाद, मुंगेर, मुजफ्फरनगर, नागौर, नांदेड़, नारनौल, पाली, पारादीप, परभणी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, पुणे, रायरंगपुर, सहरसा, सांगली, सासाराम, सतारा, सवाई माधोपुर, शामली, सीकर, सिरसा, श्री गंगानगर, सूरत, तालचेर, टेन्सा, टोंक, उदयपुर, उल्हासनगर, वडोदरा, वाराणसी, वातवा, विशाखापत्तनम और वृंदावन शामिल हैं।
वहीं देश में आज यमुना नगर (228), गाजियाबाद (222), मंडीदीप (212) और नोएडा (204) में स्थिति खराब है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 252 में से 17 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 118 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 02 अक्टूबर को यह आंकड़ा 105 दर्ज किया गया था।
113 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज यमुना नगर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 228 दर्ज किया गया, जोकि ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (02 अक्टूबर) को यमुना नगर में सूचकांक 159 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 69 अंकों का इजाफा हुआ है। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
इससे पहले देश में तालचेर की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 231 रिकॉर्ड किया गया। लेकिन आज 99 अंकों के भारी सुधार के साथ तालचेर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 132 पर पहुंच गया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 174 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 171 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 3 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 99 दर्ज किया गया था, जो आज 40 अंकों के उछाल के साथ बढ़कर 139 पर पहुंच गया। इसके साथ ही फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 03 अक्टूबर को नोएडा (204) चौथे स्थान पर है, वहीं गाजियाबाद (222) दूसरे, जबकि मंडीदीप (212) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 111, गाजियाबाद में 222, गुवाहाटी में 62, गुरूग्राम में 194, नोएडा में 204, ग्रेटर नोएडा में 107 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 88 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 115, चेन्नई में 90, चंडीगढ़ में 81, हैदराबाद में 74, जयपुर में 114 और पटना में 105 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 17 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में बदलापुर, बेतिया, भिवंडी, चामराजनगर, एलुरु, गंगटोक, हुबली, कलबुर्गी, कुरनूल, मछलीपट्टनम, मंडीखेड़ा, पुडुचेरी, राजगीर, ऋषिकेश, सिलचर, तुमडीह और उडुपी शामिल हैं।
वहीं अहमदनगर, आइजोल, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, आरा, आसनसोल, बालासोर, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बरबिल, बाड़मेर, बीड, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भिलाई, भीलवाड़ा, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बोइसर, बूंदी, ब्यासनगर, चंडीगढ़, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, कटक, दावणगेरे, देहरादून, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, फिरोजाबाद, गया, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हैदराबाद, इंदौर, जलगांव, झालावाड़, झांसी, कडप्पा, कैथल, काकीनाडा, कन्नूर, करनाल, काशीपुर, कटिहार, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, लुधियाना, मैहर, मालेगांव, मैंगलोर, मंगुराहा, मेहसाणा, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागपुर, नाहरलागुन, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, नेल्लोर, पलवल, पंपोर, पंचगांव, पंचकुला, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पूर्णिया, रायबरेली, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, रोहतक, राउरकेला, रूपनगर, सागर, समस्तीपुर, सतना, शिलांग, सिलीगुड़ी, सिरोही, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, सोनीपत, श्रीनगर, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, तिरुमाला, तिरुपति, उज्जैन, वापी, विजयवाड़ा, विरार और यादगीर आदि 118 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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