लेह का मुख्य बाजार; फोटो: आईस्टॉक 
वायु

प्रदूषण का बदलता नक्शा: लेह की हवा सबसे खराब, आइजोल सबसे साफ, कैसा है आपके शहर का हाल?

28 अगस्त 2026 को 253 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 24.5 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 52.6 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि 22.9 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं।

Lalit Maurya

  • 28 अगस्त 2026 को देश में प्रदूषण का नक्शा एक बार फिर बदला नजर आया।

  • 253 शहरों के सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण में लेह 189 के एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जबकि आइजोल में एक्यूआई महज 14 दर्ज किया गया। यानी लेह की हवा आइजोल की तुलना में करीब 13.5 गुना ज्यादा प्रदूषित रही।

  • आंकड़ों के मुताबिक 62 शहरों यानी 24.5 फीसदी में हवा साफ, 133 शहरों यानी 52.6 फीसदी में संतोषजनक और 58 शहरों यानी 22.9 फीसदी में वायु गुणवत्ता चिंताजनक रही।

  • पिछले दिन सबसे प्रदूषित रहे भिवानी में बड़ी राहत मिली और एक्यूआई 221 से घटकर 138 पर आ गया। दिल्ली और फरीदाबाद में भी मामूली सुधार दर्ज हुआ, हालांकि दोनों की हवा मध्यम श्रेणी में बनी रही।

  • देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा और राजस्थान के तीन-तीन शहर शामिल रहे। आंकड़े यह भी बताते हैं कि अलग-अलग क्षेत्रों में प्रदूषण के स्रोत और प्रमुख प्रदूषक बदल रहे हैं—कहीं पीएम2.5, कहीं पीएम10 तो कहीं कार्बन मोनोऑक्साइड और ओजोन हवा की गुणवत्ता बिगाड़ रहे हैं।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 28 अगस्त 2026 को देश में लेह सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 189 दर्ज किया गया, जो ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है। हालांकि कल (27 अगस्त) लेह में सूचकांक 188 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में एक अंक का मामूली इजाफा हुआ है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि लेह की हवा में कार्बन मोनोऑक्साइड पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

लेह में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 4,600 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में आइजोल की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 14 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर लेह की तुलना आइजोल से करें तो वहां स्थिति 13.5 गुणा खराब है।

वहीं कल देश में भिवानी की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 221 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज भिवानी में 83 अंकों के भारी सुधार के साथ सूचकांक घटकर 138 पर पहुंच गया। इसके साथ ही गुणवत्ता ‘खराब’ से ‘मध्यम’ श्रेणी में पहुंच गई है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 129 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 128 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में एक अंक का मामूली सुधार आया है। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज एक बार फिर मध्यम श्रेणी में बनी हुई है। 

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 07-28 अगस्त को 63 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64  दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 149 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 139 पर पहुंच गया। साथ ही 10 अंक के सुधार के साथ फरीदाबाद में आज भी एक्यूआई मध्यम श्रेणी में बना हुआ है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 28 अगस्त 2026 को 253 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 24.5 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 52.6 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 22.9 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस बनी हुई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 9.9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से करीब 9.4 फीसदी की गिरावट आई है, जोकि राहत की खबर है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में भागलपुर (176) दूसरे जबकि दौसा (175) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह मानेसर चौथे स्थान पर है। अंबाला (163) – समस्तीपुर (160) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

श्री गंगानगर (160) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में नयागढ़ (151), भिवाड़ी (150) और चरखी दादरी (148) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा (मानेसर, अंबाला, चरखी दादरी) और राजस्थान (दौसा, श्री गंगानगर, भिवाड़ी) के तीन-तीन शहर शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि भागलपुर, मानेसर, समस्तीपुर, चरखी दादरी, खोरा, गुम्मिडीपूंडी, फरीदाबाद, भिवानी, जींद, रोहतक, अलवर, दिल्ली, खन्ना, पाली, पंचगांव, गोरखपुर और गुरुग्राम आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं दौसा, अंबाला, श्री गंगानगर, नयागढ़, भिवाड़ी, सीकर, बद्दी, टोंक, अमरावती (आंध्रप्रदेश), नारनौल, विशाखापत्तनम, बुलंदशहर, सिरसा, हिसार, अजमेर, भीलवाड़ा, पीथमपुर, नोएडा, जयपुर, ग्रेटर नोएडा, जैसलमेर, बहादुरगढ़, छपरा, नागौर, सवाई माधोपुर, बीकानेर, मंडीदीप, मथुरा, मंगुराहा, वातवा, मेरठ, प्रतापगढ़, सिवान, बागपत, गाजियाबाद, झुंझुनू, उदयपुर, मुजफ्फरनगर और पानीपत आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 24.5 फीसदी यानी 62 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में कारवार, कटनी, कोल्हापुर, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लखनऊ, मदिकेरी, महाद, मैहर, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुंबई, नाहरलागुन, नासिक, नवी मुंबई, प्रयागराज, पुडुचेरी, रायरंगपुर, रामनगर, ऋषिकेश, राउरकेला, शिलांग, सिलचर, सिलीगुड़ी, शिवसागर, सोलापुर, टेन्सा, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, तिरुमाला, तुमडीह, वापी आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 133 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भोपाल, बिलासपुर, बिलाईपाड़ा, बोइसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, ब्यासनगर, चंद्रपुर, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, देहरादून, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, फतेहाबाद, फतेहपुर सीकरी, गडग, गजरौला, गांधीनगर, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हापुड़, हिंगोली, हावड़ा, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, झालावाड़, झांसी, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, काकीनाडा, कल्याण, कानपुर, करौली, करनाल, कटिहार, क्योंझर, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कोटा, कुरुक्षेत्र, लातूर, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मेहसाणा, मोदीनगर आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 58 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें अजमेर, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, बद्दी, बागपत, बहादुरगढ़, भागलपुर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवानी, बीकानेर, बुलंदशहर, चरखी दादरी, छपरा, दौसा, दिल्ली, धनबाद, फरीदाबाद, गाजियाबाद, गोरखपुर, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, हिसार, जयपुर, जैसलमेर, झुंझुनू, जींद, खन्ना, खोरा, लेह, मंडीदीप, मानेसर, मंगुराहा, मथुरा, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नागौर, नारनौल, नयागढ़, नोएडा, पाली, पंचगांव, पानीपत, पीथमपुर, प्रतापगढ़, रोहतक, समस्तीपुर, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरसा, सिवान, श्री गंगानगर, टोंक, उदयपुर, वातवा और विशाखापत्तनम आदि शामिल हैं।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 253 में से 62 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 133 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 27 अगस्त को भी यह आंकड़ा 121 दर्ज किया गया था।

58 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज लेह में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 189 दर्ज किया गया, जो ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है। हालांकि कल (27 अगस्त) लेह में सूचकांक 188 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में एक अंक का मामूली इजाफा हुआ है।

वहीं कल देश में भिवानी की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 221 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज भिवानी में 83 अंकों के भारी सुधार के साथ सूचकांक घटकर 138 पर पहुंच गया। इसके साथ ही गुणवत्ता ‘खराब’ से ‘मध्यम’ श्रेणी में पहुंच गई है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 129 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 128 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में एक अंक का मामूली सुधार आया है। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज एक बार फिर मध्यम श्रेणी में बनी हुई है। 

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 149 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 139 पर पहुंच गया। साथ ही 10 अंक के सुधार के साथ फरीदाबाद में आज भी एक्यूआई मध्यम श्रेणी में बना हुआ है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 28 अगस्त को मानेसर (175) चौथे स्थान पर है, वहीं भागलपुर (176) दूसरे, जबकि दौसा तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 83, गाजियाबाद में 103, गुवाहाटी में 61, गुरूग्राम में 106, नोएडा में 120, ग्रेटर नोएडा में 115 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 44 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 36, चेन्नई में 77, चंडीगढ़ में 49, हैदराबाद में 50, जयपुर में 117 और पटना में 71 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 62 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में आइजोल, अररिया, बदलापुर, बल्लभगढ़, बरेली, बीड, बेलगाम, भिलाई, भिवंडी, भुवनेश्वर, चामराजनगर, चंडीगढ़, छाल, चिक्कमगलुरु, कटक, दमोह, दावणगेरे, धुले, डोंबिवली, डूंगरपुर, फिरोजाबाद, गंगटोक, गया, हुबली, हैदराबाद, जलगांव, कलबुर्गी, कारवार, कटनी, कोल्हापुर, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लखनऊ, मदिकेरी, महाद, मैहर, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुंबई, नाहरलागुन, नासिक, नवी मुंबई, प्रयागराज, पुडुचेरी, रायरंगपुर, रामनगर, ऋषिकेश, राउरकेला, शिलांग, सिलचर, सिलीगुड़ी, शिवसागर, सोलापुर, टेन्सा, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, तिरुमाला, तुमडीह, वापी, विजयपुरा और विरार शामिल हैं।

वहीं अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अकोला, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बालासोर, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बारीपाड़ा, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भोपाल, बिलासपुर, बिलाईपाड़ा, बोइसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, ब्यासनगर, चंद्रपुर, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, देहरादून, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, फतेहाबाद, फतेहपुर सीकरी, गडग, गजरौला, गांधीनगर, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हापुड़, हिंगोली, हावड़ा, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, झालावाड़, झांसी, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, काकीनाडा, कल्याण, कानपुर, करौली, करनाल, कटिहार, क्योंझर, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कोटा, कुरुक्षेत्र, लातूर, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मेहसाणा, मोदीनगर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नागपुर, नलबाड़ी, नंदेसरी, नेल्लोर, पलवल, पंपोर, पंचकुला, परभणी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पुणे, पूर्णिया, रायबरेली, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, रूपनगर, सागर, सहरसा, सतारा, सतना, शामली, शिवमोगा, सिंगरौली, सिरोही, श्रीकाकुलम, श्रीनगर, सूरत, तालचेर, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुपति, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, वाराणसी, विजयवाड़ा, वृंदावन, यादगीर और यमुना नगर आदि 133 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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