देश में प्रदूषण का भूगोल तेजी से बदल रहा है, जहां कभी बड़े महानगर संकट के केंद्र माने जाते थे, वहीं अब छोटे और मझोले शहर ज्यादा गंभीर खतरे में उभर रहे हैं।
2 मई 2026 के सरकारी आंकड़ों के अनुसार हरियाणा का सोनीपत देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां एक्यूआई 247 तक पहुंच गया। यह स्तर सुरक्षित सीमा से करीब 15 गुणा अधिक है।
चौंकाने वाली बात यह है कि सबसे प्रदूषित दस शहरों में से आधे हरियाणा के हैं, जबकि हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर और नारनौल जैसे छोटे शहर भी शीर्ष सूची में शामिल हैं।
इसके उलट, दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में अपेक्षाकृत सुधार या स्थिरता दिखी, हालांकि दिल्ली में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई। देशभर के 233 शहरों के विश्लेषण से पता चलता है कि जहां 15 फीसदी शहरों में हवा साफ है, वहीं करीब एक चौथाई शहर अब भी खराब या चिंताजनक स्थिति में हैं।
यह रुझान संकेत देता है कि प्रदूषण अब केवल महानगरों की समस्या नहीं रहा, बल्कि छोटे शहर तेजी से नए हॉटस्पॉट बन रहे हैं। पीएम2.5 और पीएम10 जैसे महीन कणों का बढ़ता दबाव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है, जिससे नीति और नियंत्रण रणनीतियों में तत्काल बदलाव की जरूरत साफ दिखती है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 02 मई 2026 को देश में सोनीपत सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 247 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। कल सोनीपत में वायु गुणवत्ता सूचकांक 241 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में प्रदूषण के स्तर में छह अंकों का इजाफा हुआ है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि सोनीपत की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। सोनीपत में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1500 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में मोतिहारी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 18 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर सोनीपत की तुलना मोतिहारी से करें तो वहां स्थिति 22 गुणा खराब है।
कल देश में छपरा की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 308 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज सरकारी आंकड़ों में बिहार के इस शहर का जिक्र नहीं है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 120 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 144 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 24 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज एक बार फिर मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 93 पर पहुंच गया था। इसके बाद 01 अप्रैल को सूचकांक 113 दर्ज क्या गया। वहीं आज सूचकांक 114 रिकॉर्ड किया गया है। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 110 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 120 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 02 मई 2026 को 233 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 15 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 61.8 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 23.2 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 31.4 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 26.3 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से करीब 14.3 फीसदी की कमी आई है, जोकि राहत की खबर है। दूसरी तरफ खराब हवा वाले शहरों के आंकड़ों को देखें तो कल से उनकी गिनती में 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में हनुमानगढ़ (235) दूसरे जबकि श्री गंगानगर (230) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह नारनौल (218) चौथे स्थान पर है। चरखी दादरी-मेरठ में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 213 और 206 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
हिसार (196) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में सिंगरौली (190), ग्वालियर (189) और करनाल (189) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के पांच शहर (सोनीपत, नारनौल, चरखी दादरी, हिसार, करनाल) शामिल हैं।
विश्लेषणसेयहभीपताचलाहैकिसोनीपत, हनुमानगढ़, नारनौल, चरखी दादरी, मेरठ, ग्वालियर, करनाल, गाजियाबाद, पंचगांव, नोएडा, मुजफ्फरनगर, ग्रेटर नोएडा, जींद, बहादुरगढ़, बुलंदशहर, बर्नीहाट (असम), तिरुपति आदिशहरोंकीहवामेंप्रदूषणकेमहीनकण (पीएम2.5) हावीहैं।
वहीं सिंगरौली, भिवाड़ी, बाड़मेर, गुरुग्राम, सिरोही, बीकानेर, चंद्रपुर, वातवा, जैसलमेर, बल्लभगढ़, पाली, उदयपुर, बर्नीहाट (मेघालय), चुरू, फरीदाबाद, करौली, मेहसाणा, कुरुक्षेत्र, जोधपुर, नागपुर, प्रतापगढ़, फतेहाबाद, अलवर, पीथमपुर, बिलीपाड़ा, गांधीनगर, भोपाल, हापुड़, झालावाड़ आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 15 फीसदी यानी 35 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में अंबरनाथ, अररिया, बरेली, बारीपदा, बैरकपुर, भिलाई, बक्सर, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, कुड्डालोर, गुवाहाटी, कलबुर्गी, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, मदिकेरी, मंगुराहा, मोतिहारी, मुंबई, पेरुंदुरई, पुदुचेरी, ऋषिकेश, रोहतक, रूपनगर, सहरसा, सांगली, शिवमोगा, सिलचर, श्रीनगर, सूरत, तिरुवनंतपुरम, उल्हासनगर, विजयपुरा, विरार शामिल हैं।
इसी तरह देश के 144 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बांसवाड़ा, बारां, बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, ब्यासनगर, चंडीगढ़, चेन्नई, चित्तौड़गढ़, कोयंबटूर, कटक, दमोह, दौसा, देवास, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, हाजीपुर, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, जलगांव, झांसी, झुंझुनू, जोरापोखर, कडप्पा, कैथल, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, कटिहार, कटनी, खन्ना, खुर्जा, कोल्लम, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाद, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मानेसर, मिलुपारा, मुरादाबाद, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नागौर, नांदेड़, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, पलवल, पंचकुला, परभनी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, राउरकेला, सागर, सासाराम, सतना, सवाई माधोपुर, सीकर आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 48 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अलवर, बद्दी, बागपत, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बारबिल, बाड़मेर, भरतपुर, भिवाड़ी, भोपाल, बीकानेर, बिलीपाड़ा, बुलंदशहर, बर्नीहाट (असम), बर्नीहाट (मेघालय), चंद्रपुर, चुरू, दिल्ली, धनबाद, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गांधीनगर, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, ग्वालियर, हापुड़, हिसार, जैसलमेर, झालावाड़, जींद, जोधपुर, करौली, करनाल, कुरुक्षेत्र, मेहसाणा, मुजफ्फरनगर, नागपुर, नोएडा, पाली, पंचगांव, पीथमपुर, प्रतापगढ़, सिंगरौली, सिरोही, तिरुपति, उदयपुर, वातवा आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश में चरखी दादरी, हनुमानगढ़, मेरठ, नारनौल, सोनीपत, श्री गंगानगर में स्थिति ‘खराब’ है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 233 में से महज 35 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 144 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 01 मई को यह आंकड़ा 114 दर्ज किया गया था।
48 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज सोनीपत में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 247 दर्ज किया गया। मतलब कि वायु गुणवत्ता खराब दर्ज की गई है। इससे पहले कल सोनीपत में वायु गुणवत्ता सूचकांक 241 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में छह अंकों का इजाफा हुआ है।
कल देश में छपरा की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 308 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज सरकारी आंकड़ों में बिहार के इस शहर का जिक्र नहीं है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 120 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 144 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 24 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज एक बार फिर मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 110 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 120 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 02 मई को नारनौल चौथे स्थान पर है, वहीं हनुमानगढ़ (235) दूसरे, जबकि श्री गंगानगर (230) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 189, गाजियाबाद में 184, गुवाहाटी में 45, गुरूग्राम में 154, नोएडा में 158, ग्रेटर नोएडा में 154 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 72, चेन्नई में 72, चंडीगढ़ में 73, हैदराबाद में 72, जयपुर में 88 और पटना में 87 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 35 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अंबरनाथ, अररिया, बरेली, बारीपदा, बैरकपुर, भिलाई, बक्सर, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, कुड्डालोर, गुवाहाटी, कलबुर्गी, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, मदिकेरी, मंगुराहा, मोतिहारी, मुंबई, पेरुंदुरई, पुदुचेरी, ऋषिकेश, रोहतक, रूपनगर, सहरसा, सांगली, शिवमोगा, सिलचर, श्रीनगर, सूरत, तिरुवनंतपुरम, उल्हासनगर, विजयपुरा, विरार शामिल हैं।
वहीं आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बागलकोट, बालासोर, बांसवाड़ा, बारां, बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, ब्यासनगर, चंडीगढ़, चेन्नई, चित्तौड़गढ़, कोयंबटूर, कटक, दमोह, दौसा, देवास, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, हाजीपुर, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, जलगांव, झांसी, झुंझुनू, जोरापोखर, कडप्पा, कैथल, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, कटिहार, कटनी, खन्ना, खुर्जा, कोल्लम, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाद, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मानेसर, मिलुपारा, मुरादाबाद, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नागौर, नांदेड़, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, पलवल, पंचकुला, परभनी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, राउरकेला, सागर, सासाराम, सतना, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सिरसा, शिवसागर, सोलापुर, सुआकाती, तालचेर, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, टोंक, तुमडीह, उज्जैन, वडोदरा, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम, वृंदावन, यादगीर आदि 144 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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