धनबाद के सबसे बड़े थोक बाजार रांगाटाड़ के पास चौराहे पर शेयरिंग ऑटो का जमावड़ा। फोटो : विकास चौधरी/ सीएसई 
वायु

प्रदूषण के बदलते समीकरण: सिंगरौली में 277 पर पहुंचा एक्यूआई, श्रीनगर सबसे साफ

दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 185 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 144 पर पहुंच गया।

Lalit Maurya

  • देश में प्रदूषण के बदलते समीकरण के बीच 27 मार्च 2026 को मध्य प्रदेश का सिंगरौली देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा, जहां एक्यूआई 277 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में है और यह विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 500 फीसदी अधिक है।

  • इसके विपरीत श्रीनगर देश का सबसे साफ शहर रहा, जहां एक्यूआई महज 32 रिकॉर्ड किया गया।

  • राजधानी दिल्ली और फरीदाबाद में पिछले 24 घंटों में प्रदूषण में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई, हालांकि दोनों शहर में वायु गुणवत्ता अभी भी मध्यम श्रेणी में हैं।

  • देश के 253 शहरों के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि केवल 8.3 फीसदी शहरों में हवा साफ है, जबकि 57.3 फीसदी शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक और 34.4 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं।

  • सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में बल्लभगढ़, बिलीपाड़ा, हाजीपुर, ग्रेटर नोएडा और अंगुल जैसे शहर शामिल हैं, जहां पीएम10 और पीएम2.5 प्रदूषण मुख्य कारण बना हुआ है।

  • कुल मिलाकर देश में प्रदूषण के स्तर में उतार-चढ़ाव जारी है, लेकिन खराब श्रेणी वाले शहरों की संख्या में आई गिरावट कुछ राहत जरूर देती है।

विश्लेषण के मुताबिक 27 मार्च 2026 को देश में सिंगरौली सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 277 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि कल मध्य प्रदेश के इस शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 258 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 19 अंकों का उछाल आया है। 

रुझानों में सामने आया है कि सिंगरौली की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। सिंगरौली में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 500 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में श्रीनगर की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 32 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर सिंगरौली की तुलना श्रीनगर से करें तो वहां स्थिति 8.6 गुणा खराब है।

राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 185 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 144 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 41 अंकों  का सुधार आया है। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

दिल्ली की तरफ ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 234 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 155 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज एक बार फिर खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 27 मार्च 2026 को 253 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 8.3 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 57.3 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 34.4 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 4.5 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 11.5 फीसदी से अधिक का इजाफा हुआ है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से करीब 5.7 फीसदी की कमी आई है। इसी तरह खराब हवा वाले शहरों में कल से 55.6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जोकि राहत की खबर है।       

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में बल्लभगढ़ (214) दूसरे जबकि बिलीपाड़ा (208) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह हाजीपुर (206) चौथे स्थान पर है। ग्रेटर नोएडा-अंगुल में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 196 और 190 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

गुरुग्राम (185) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में अगरतला (182), ब्यासनगर (181) और धनबाद (181) भी शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में ओडिशा के तीन शहर (अंगुल, बिलीपाड़ा, ब्यासनगर) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि बिलीपाड़ा, हाजीपुर, अंगुल, अगरतला, ब्यासनगर, समस्तीपुर, सोनीपत, रूपनगर, नंदेसरी, बेगूसराय, गुम्मिडीपूंडी, मुजफ्फरपुर, मंडी गोबिंदगढ़, चरखी दादरी, बर्नीहाट, रोहतक, महाद, तालचेर, वडोदरा, मानेसर, यमुना नगर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं सिंगरौली, बल्लभगढ़, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद, ग्वालियर, टोंक, बद्दी, फरीदाबाद, सवाई माधोपुर, बारबिल, छपरा, सोलापुर, बुलंदशहर, दिल्ली, नयागढ़, जोरापोखर, जैसलमेर, पटना, नोएडा, बेलापुर, फतेहाबाद, मालेगांव, भिवंडी, विशाखापत्तनम, बाड़मेर, भिवाड़ी, गया, पानीपत, बारां, झालावाड़, क्योंझर, सहरसा, आगरा, पाली, लुधियाना, कटक, जयपुर, आसनसोल, धुले, हापुड़, पुणे, चंद्रपुर, पिंपरी-चिंचवाड़, नासिक, वातवा, नांदेड़, अहमदाबाद, करौली, मेहसाणा, बागपत, नागपुर, भावनगर, खुर्जा, वाराणसी, बदलापुर, बेंगलुरु, सिरसा, जलगांव, लातूर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 8.3 फीसदी यानी महज 21 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में गंगटोक, कल्याण, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोप्पल, मदिकेरी, मैहर, मुंगेर, नागांव, नलबाड़ी, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, ऋषिकेश, श्रीनगर, थूथुकुडी, विजयपुरा आदि शामिल हैं। 

आज देश के जिन 145 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें बरेली, बैरकपुर, बठिंडा, भागलपुर, भिलाई, भीलवाड़ा, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बीकानेर, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, बक्सर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कोयंबटूर, दमोह, दौसा, देहरादून, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलना, जालौर, झांसी, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, कन्नूर, कानपुर, करनाल, कटिहार, कटनी, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, मछलीपट्टनम, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मंगलौर, मेरठ, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मैसूरु, नागौर, नाहरलागुन, नारनौल, नवी मुंबई, नेल्लोर, पलवल, पंपोर, पंचगांव, पंचकुला, परभनी, पटियाला आदि शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 83 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अंगुल, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), बद्दी, बदलापुर, बागपत, बारां, बारबिल, बाड़मेर, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भिवाड़ी, भिवंडी, लंदशहर, ब्यासनगर, बर्नीहाट, चंद्रपुर, चरखी दादरी, छाल, छपरा, कटक, दिल्ली, धनबाद, धुले, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गया, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, ग्वालियर, हापुड़, जयपुर, जैसलमेर, जलगांव, झालावाड़, जोरापोखर, करौली, क्योंझर, खुर्जा, लातूर, लुधियाना, महाद, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मानेसर, मेहसाणा, मिलुपारा, मुजफ्फरपुर, नागपुर, नांदेड़, नंदेसरी, नासिक, नयागढ़, नोएडा, पाली, पानीपत, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पुणे, रोहतक, रूपनगर, सहरसा, समस्तीपुर, सवाई माधोपुर, सिरसा, सोलापुर, सोनीपत, श्री गंगानगर, तालचेर, टोंक, वडोदरा, वाराणसी, वातवा, विशाखापत्तनम, यमुना नगर शामिल हैं।

इसी तरह बल्लभगढ़, बिलीपाड़ा, हाजीपुर, सिंगरौली में वायु गुणवत्ता ‘खराब’ है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 253 में से महज 21 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 145 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 26 मार्च को यह आंकड़ा 130 दर्ज किया गया था।

83 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज सिंगरौली में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 277 दर्ज किया गया। वहीं कल सिंगरौली में सूचकांक 258 रिकॉर्ड किया गया। मतलब कि कल से प्रदूषण के स्तर में 19 अंकों का इजाफा हुआ है। 

इससे पहले कल देश में (26 मार्च) को ग्रेटर नोएडा में वायु गुणवत्ता सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 260 दर्ज किया गया था। हालांकि आज वहां वायु गुणवत्ता में 64 अंकों का सुधार आया है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 185 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 144 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 41 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

दिल्ली की तरफ ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 234 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 155 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज एक बार फिर खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई।     

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 27 मार्च को हाजीपुर चौथे स्थान पर है, वहीं बल्लभगढ़ (214) दूसरे, जबकि बिलीपाड़ा (208) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 165, गाजियाबाद में 174, गुवाहाटी में 83, गुरूग्राम में 185, नोएडा में 136, ग्रेटर नोएडा में 196 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 96 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 97, चेन्नई में 62, चंडीगढ़ में 56, हैदराबाद में 74, जयपुर में 112 और पटना में 137 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 21 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें बागलकोट, बेतिया, एलुरु, गंगटोक, कल्याण, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोप्पल, मदिकेरी, मैहर, मुंगेर, नागांव, नलबाड़ी, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, ऋषिकेश, श्रीनगर, थूथुकुडी, विजयपुरा शामिल हैं।

वहीं अहमदनगर, आइजोल, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बालासोर, बांसवाड़ा, बरेली, बैरकपुर, बठिंडा, भागलपुर, भिलाई, भीलवाड़ा, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बीकानेर, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, बक्सर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कोयंबटूर, दमोह, दौसा, देहरादून, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलना, जालौर, झांसी, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, कन्नूर, कानपुर, करनाल, कटिहार, कटनी, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, मछलीपट्टनम, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मंगलौर, मेरठ, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मैसूरु, नागौर, नाहरलागुन, नारनौल, नवी मुंबई, नेल्लोर, पलवल, पंपोर, पंचगांव, पंचकुला, परभनी, पटियाला, पीथमपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, राउरकेला, सागर, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सीकर, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही, शिवसागर, सिवान, सुआकाती, सूरत, टेन्सा, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, उदयपुर, उडुपी, उज्जैन, उल्हासनगर, वापी, विजयवाड़ा, विरार, वृंदावन, यादगीर आदि 145 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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