दुनिया में पहले ही हाशिए पर जीवन बसर करने को मजबूर ये लोग पर्यावरण से जुड़ी एक से अधिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। इन्हें हर दिन गरीबी के साथ-साथ भीषण गर्मी, वायु प्रदूषण, बाढ़, सूखा जैसी चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है; फोटो: आईस्टॉक 
वायु

प्रदूषण का बदला नक्शा: वायु गुणवत्ता में सुधार के बावजूद प्रदूषण में पहले पायदान पर पीथमपुर

25 सितम्बर 2026 को 244 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 35.2 फीसदी शहरों में हवा साफ है। 52.5 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि 12.3 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं

Lalit Maurya

  • देश के शहरों में वायु प्रदूषण की तस्वीर 25 सितम्बर 2026 को कुछ हद तक बदली हुई नजर आई।

  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा जारी आंकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक, 244 शहरों में से 86 यानी 35.2 फीसदी शहरों में हवा ‘बेहतर’ रही, जबकि 128 शहरों यानी 52.5 फीसदी में वायु गुणवत्ता ‘संतोषजनक’ दर्ज की गई।

  • वहीं 29 शहरों में हवा ‘मध्यम’ और केवल एक शहर में ‘खराब’ श्रेणी में रही। यानी देश के करीब 88 फीसदी शहरों में हवा बेहतर या संतोषजनक रही। पिछले दिन की तुलना में साफ हवा वाले शहरों की संख्या में 22.9 फीसदी और संतोषजनक हवा वाले शहरों में 20.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जबकि मध्यम श्रेणी वाले शहरों की संख्या करीब 55 फीसदी घट गई।

  • इसके बावजूद कुछ शहरों में प्रदूषण का स्तर चिंता पैदा करने वाला रहा। मध्य प्रदेश का पीथमपुर 203 के एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा। हालांकि, यहां भी एक दिन में 65 अंकों का सुधार हुआ है, क्योंकि 24 सितम्बर को एक्यूआई 268 था।

  • पीथमपुर में पीएम10 प्रदूषण प्रमुख रहा और वहां दर्ज एक्यूआई विश्व स्वास्थ्य संगठन की निर्धारित सुरक्षित सीमा से करीब 350 फीसदी अधिक था। इसके विपरीत बिहार शरीफ में महज 13 का एक्यूआई दर्ज किया गया, यानी पीथमपुर की तुलना में वहां वायु गुणवत्ता में बड़ा अंतर रहा।

  • प्रदूषण के मामले में लेह 198 के साथ दूसरे, बीकानेर 183 के साथ तीसरे और पूर्णिया 161 के साथ चौथे स्थान पर रहे। शीर्ष दस प्रदूषित शहरों में राजस्थान के तीन शहर—बीकानेर, पाली और श्री गंगानगर—शामिल रहे।

  • हालांकि श्री गंगानगर में एक दिन में 162 अंकों का बड़ा सुधार हुआ और एक्यूआई 315 से घटकर 153 पर पहुंच गया।

  • दिल्ली में भी वायु गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज हुआ। एक्यूआई 145 से घटकर 78 हो गया, जबकि फरीदाबाद में यह 105 से घटकर 94 पर पहुंचा। इस तरह दोनों शहरों में हवा ‘संतोषजनक’ श्रेणी में आ गई। फिर भी अलग-अलग शहरों में पीएम2.5, पीएम10, ओजोन और अन्य प्रदूषकों का दबाव बना हुआ है।

  • आंकड़े बताते हैं कि राष्ट्रीय स्तर पर हवा में सुधार के बावजूद प्रदूषण का असर शहर-दर-शहर अलग है और कई क्षेत्रों में स्थानीय प्रदूषण स्रोत अब भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 25 सितम्बर 2026 को देश में पीथमपुर सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 203 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (24 सितम्बर) को पीथमपुर में सूचकांक 268 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 65 अंकों का सुधार आया है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि पीथमपुर की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

पीथमपुर में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 350 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में बिहार शरीफ की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 13 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर पीथमपुर की तुलना बिहार शरीफ से करें तो वहां स्थिति 15.6 गुणा खराब है।

इससे पहले कल देश में श्री गंगानगर की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 315 दर्ज किया गया। हालांकि आज 162 अंकों के भारी सुधार के साथ श्री गंगानगर में एक्यूआई घटकर 153 पर पहुंच गया। मतलब कि वायु गुणवत्ता बेहद खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में कमी आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 145 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 78 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 67 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता ‘मध्यम’ श्रेणी से संतोषजनक में पहुंच गई है।

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 07-25 सितम्बर को 63 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64  दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 105 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 94 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 11 अंकों के सुधार के साथ फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता मध्यम से संतोषजनक हो गई है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 25 सितम्बर 2026 को 244 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 35.2 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 52.5 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि दूसरी तरफ 12.3 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 22.9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 20.8 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से करीब 55 फीसदी की गिरावट आई है, जोकि राहत की खबर है। वहीं खराब हवा वाले शहरों की गिनती आज चार से एक पर आ गई है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में लेह (198) दूसरे जबकि बीकानेर (183) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह पूर्णिया (161) चौथे स्थान पर है। मंडी गोबिंदगढ़ (155) – पाली में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

जींद (154) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में पानीपत (153), श्री गंगानगर (153) और यमुना नगर (143) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में राजस्थान के तीन शहर (बीकानेर, पाली, श्री गंगानगर) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि पूर्णिया, मंडी गोबिंदगढ़, पाली, जींद, पानीपत, श्री गंगानगर, यमुनानगर, गुरुग्राम, वातवा, गुम्मिडीपूंडी, कैथल, हनुमानगढ़, उल्हासनगर और लुधियाना आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं पीथमपुर, बीकानेर, उदयपुर, नागौर, अंबरनाथ, सिरसा, चूरू, परभणी, जोधपुर, अहमदाबाद, छपरा, भीलवाड़ा, अंबाला और जालोर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 35.2 फीसदी यानी 86 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में देहरादून, धौलपुर, फतेहपुर सीकरी, फिरोजाबाद, गोरखपुर, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हापुड़, हावेरी, हावड़ा, इंदौर, झांसी, कलबुर्गी, कानपुर, करौली, करनाल, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खुर्जा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, लखनऊ, मछलीपट्टनम, मदिकेरी, मानेसर, मथुरा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुजफ्फरपुर, नागपुर, नाहरलागुन, नयागढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, रामनगर, ऋषिकेश, राउरकेला, सहरसा, सासाराम, शामली, सिलीगुड़ी, शिवसागर, श्रीनगर, टेन्सा, उडुपी, वाराणसी आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 128 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें भावनगर, भिवाड़ी, भिवंडी, भिवानी, बोईसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, बर्नीहाट (असम), चरखी दादरी, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कटक, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, डोंबिवली, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गजरौला, गांधीनगर, गया, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुंटूर, गुवाहाटी, हिंगोली, हिसार, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, झालावाड़, झुंझुनू, कडप्पा, काकीनाडा, कल्याण, कन्नूर, खैरथल, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोटा, कुरनूल, कुरुक्षेत्र, लातूर, महाद, मालेगांव, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मेरठ, मेहसाणा, मोदीनगर, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरनगर, नागांव, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, नोएडा, पलवल, पंचगांव, पंचकुला, पारादीप, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, पुणे, रायबरेली, राजकोट आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 29 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें अहमदाबाद, अंबाला, अंबरनाथ, भीलवाड़ा, बीकानेर, छपरा, चूरू, एलूर, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, हनुमानगढ़, जालोर, जींद, जोधपुर, कैथल, लेह, लुधियाना, मंडी गोबिंदगढ़, नागौर, पाली, पानीपत, परभणी, पूर्णिया, सिरसा, श्री गंगानगर, उदयपुर, उल्हासनगर, वातवा और यमुनानगर शामिल हैं।

वहीं पीथमपुर (203) में स्थिति 'खराब' दर्ज की गई है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 244 में से 86 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 128 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 24 सितम्बर को भी यह आंकड़ा 106 दर्ज किया गया था।

29 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज पीथमपुर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 203 दर्ज किया गया, जोकि ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (24 सितम्बर) पीथमपुर में सूचकांक 268 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 65 अंकों का सुधार आया है।

इससे पहले कल देश में श्री गंगानगर की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 315 दर्ज किया गया। हालांकि आज 162 अंकों के भारी सुधार के साथ श्री गंगानगर में एक्यूआई घटकर 153 पर पहुंच गया। मतलब कि वायु गुणवत्ता बेहद खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में कमी आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 145 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 78 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 67 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता ‘मध्यम’ श्रेणी से संतोषजनक में पहुंच गई है।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 105 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 94 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 11 अंकों के सुधार के साथ फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता मध्यम से संतोषजनक हो गई है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 25 सितम्बर को पूर्णिया (161) चौथे स्थान पर है, वहीं लेह (198) दूसरे, जबकि बीकानेर (183) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 49, गाजियाबाद में 73, गुवाहाटी में 59, गुरूग्राम में 140, नोएडा में 87, ग्रेटर नोएडा में 58 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 53 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 37, चेन्नई में 76, चंडीगढ़ में 48, हैदराबाद में 60, जयपुर में 75 और पटना में 58 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 86 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में अगरतला, आगरा, आइजोल, अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), आसनसोल, बालासोर, बारां, बरेली, बारीपाड़ा, बैरकपुर, बेतिया, भागलपुर, भरतपुर, भिलाई, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बिलाईपाड़ा, बुलंदशहर, ब्यासनगर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, दौसा, दावणगेरे, देहरादून, धौलपुर, फतेहपुर सीकरी, फिरोजाबाद, गोरखपुर, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हापुड़, हावेरी, हावड़ा, इंदौर, झांसी, कलबुर्गी, कानपुर, करौली, करनाल, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खुर्जा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, लखनऊ, मछलीपट्टनम, मदिकेरी, मानेसर, मथुरा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुजफ्फरपुर, नागपुर, नाहरलागुन, नयागढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, रामनगर, ऋषिकेश, राउरकेला, सहरसा, सासाराम, शामली, सिलीगुड़ी, शिवसागर, श्रीनगर, टेन्सा, उडुपी, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार और वृंदावन शामिल हैं।

वहीं अहमदनगर, अजमेर, अलवर, अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अररिया, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बागपत, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बड़ौत, बाड़मेर, बीड, बेलापुर, बेंगलुरु, भावनगर, भिवाड़ी, भिवंडी, भिवानी, बोईसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, बर्नीहाट (असम), चरखी दादरी, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कटक, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, डोंबिवली, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गजरौला, गांधीनगर, गया, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुंटूर, गुवाहाटी, हिंगोली, हिसार, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, झालावाड़, झुंझुनू, कडप्पा, काकीनाडा, कल्याण, कन्नूर, खैरथल, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोटा, कुरनूल, कुरुक्षेत्र, लातूर, महाद, मालेगांव, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मेरठ, मेहसाणा, मोदीनगर, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरनगर, नागांव, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, नोएडा, पलवल, पंचगांव, पंचकुला, पारादीप, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, पुणे, रायबरेली, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, रोहतक, रूपनगर, सतारा, सतना, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलचर, सिरोही, सिवान, सोलापुर, सोनीपत, सूरत, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, टोंक, उज्जैन, वडोदरा, वापी, विशाखापत्तनम और यादगीर आदि 128 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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