लेह का मुख्य बाजार; फोटो: आईस्टॉक 
वायु

देश में बदली हवा: 214 एक्यूआई के साथ भिवाड़ी सबसे प्रदूषित, लेह में भी 'खराब' हुई वायु गुणवत्ता

दूसरी तरफ देश में गंगटोक की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 16 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर भिवाड़ी की तुलना गंगटोक से करें तो वहां स्थिति 13 गुणा खराब है।

Lalit Maurya

  • देश में वायु प्रदूषण का नक्शा एक बार फिर तेजी से बदलता दिखाई दे रहा है। 15 सितंबर 2026 को राजस्थान के भिवाड़ी की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 214 दर्ज किया गया। एक दिन पहले 82 रहे एक्यूआई में 132 अंकों का उछाल बताता है कि महज 24 घंटे में हवा की स्थिति कितनी तेजी से बिगड़ सकती है।

  • भिवाड़ी में पीएम2.5 प्रदूषण हावी रहा और एक्यूआई विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 1,300 फीसदी अधिक रहा।

  • भिवाड़ी के बाद लेह 205 एक्यूआई के साथ दूसरे और पानीपत 179 के साथ तीसरे स्थान पर रहा। वहीं गंगटोक महज 16 एक्यूआई के साथ देश का सबसे साफ शहर रहा। यानी भिवाड़ी की हवा गंगटोक के मुकाबले करीब 13.3 गुना अधिक प्रदूषित रही।

  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 231 शहरों के आंकड़ों के मुताबिक 79 शहरों में हवा बेहतर, 128 में संतोषजनक और 22 शहरों में मध्यम रही, जबकि दो शहरों—भिवाड़ी और लेह—में हवा खराब दर्ज हुई।

  • चिंता की बात यह है कि साफ हवा वाले शहरों की संख्या एक दिन में 10.2 फीसदी घटी, जबकि मध्यम प्रदूषण वाले शहरों की संख्या 57.1 फीसदी बढ़ गई। दिल्ली में भी एक्यूआई 79 से बढ़कर 98 और फरीदाबाद में 105 से 123 हो गया, जो प्रदूषण के बदलते रुझानों की ओर इशारा करता है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 15 सितम्बर 2026 को देश में भिवाड़ी सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 214 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (14 सितम्बर) को भिवाड़ी में प्रदूषण का स्तर 82 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण में 132 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि भिवाड़ी की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

भिवाड़ी में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,300 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में गंगटोक की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 16 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर भिवाड़ी की तुलना गंगटोक से करें तो वहां स्थिति 13.3 गुणा खराब है।

इससे पहले कल देश में मंडी गोबिंदगढ़ की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 147 रिकॉर्ड किया गया। हालांकि आज 7 अंकों के उछाल के साथ मंडी गोबिंदगढ़ में सूचकांक बढ़कर 154 पर पहुंच गया है। मतलब की वहां वायु गुणवत्ता आज भी 'मध्यम' श्रेणी में बनी हुई है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 79 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 98 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 19 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है। 

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 07-15 सितम्बर को 63 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64  दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से वायु गुणवत्ता सूचकांक में वृद्धि दर्ज की गई। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 105 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 123 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 18 अंकों के उछाल के साथ फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 15 सितम्बर 2026 को 231 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 34.2 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 55.4 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 10.4 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 10.2 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 3.8 फीसदी की कमी दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 57.1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जोकि चिंता का विषय है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में लेह (205) दूसरे जबकि पानीपत (179) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह खोरा (169) चौथे स्थान पर है। मंडी गोबिंदगढ़ (154) – सहरसा  (144) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

कटक (142) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में अगरतला (140), बर्नीहाट (मेघालय) (138) और हिसार (133) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के तीन शहर (भिवाड़ी, पानीपत, हिसार) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि भिवाड़ी, पानीपत, खोरा, बर्नीहाट (मेघालय), जींद, मानेसर, फरीदाबाद, नोएडा, चरखी दादरी, यमुनानगर और गुरुग्राम आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं मंडी गोबिंदगढ़, सहरसा, अगरतला, ब्रजराजनगर, बागपत, ग्रेटर नोएडा, अंबाला और अलवर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 34.2 फीसदी यानी 79 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में भोपाल, बूंदी, चामराजनगर, चंडीगढ़, चिक्काबल्लापुर, चित्तौड़गढ़, दमोह, देहरादून, धौलपुर, धुले, डोंबिवली, फतेहपुर सीकरी, गांधीनगर, गंगटोक, हल्दिया, इंदौर, जालोर, झांसी, जोधपुर, काकीनाडा, कलबुर्गी, कोल्हापुर, कोटा, कुरनूल, लातूर, मदिकेरी, महाड, मीरा-भायंदर, मुंबई, नागपुर, नाहरलागुन, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पंचगांव, पंचकुला, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, पुणे, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजकोट, रतलाम, राउरकेला आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 128 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बीकानेर, बिलासपुर, बिलाईपाड़ा, बुलंदशहर, ब्यासनगर, चंद्रपुर, चेन्नई, छाल, चित्तूर, चूरू, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, दुर्गापुर, एलुरु, फतेहाबाद, गडग, गजरौला, गया, गाजियाबाद, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हापुड़, हिंगोली, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, झालावाड़, झुंझुनू, जोरापोखर, कडप्पा, कैथल, कानपुर, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंगुराहा, मथुरा, मेरठ, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नागौर, नंदेसरी, नारनौल, नेल्लोर, पाली, पलवल, पंपोर, पारादीप, परभणी, पटना, पीथमपुर, प्रयागराज, पुडुचेरी, पूर्णिया, रायबरेली, रामनगर, रोहतक, रूपनगर आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 22 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें अगरतला, अलवर, अंबाला, बद्दी, बागपत, ब्रजराजनगर, बर्नीहाट (मेघालय), चरखी दादरी, कटक, फरीदाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, हिसार, जींद, खोरा, मंडी गोबिंदगढ़, मानेसर, नोएडा, पानीपत, सहरसा, टोंक और यमुनानगर शामिल हैं।

वहीं भिवाड़ी (214) और लेह (205) में स्थिति 'खराब' दर्ज की गई है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 231 में से 79 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 128 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 14 सितम्बर को भी यह आंकड़ा 133 दर्ज किया गया था।

22 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज भिवाड़ी में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 214 दर्ज किया गया, जोकि ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (14 सितम्बर) को भिवाड़ी में प्रदूषण का स्तर 82 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण में 132 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।

इससे पहले कल देश में मंडी गोबिंदगढ़ की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 147 रिकॉर्ड किया गया। हालांकि आज 7 अंकों के उछाल के साथ मंडी गोबिंदगढ़ में सूचकांक बढ़कर 154 पर पहुंच गया है। मतलब की वहां वायु गुणवत्ता आज भी 'मध्यम' श्रेणी में बनी हुई है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 79 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 98 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 19 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है। 

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से वायु गुणवत्ता सूचकांक में वृद्धि दर्ज की गई। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 105 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 123 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 18 अंकों के उछाल के साथ फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 15 सितम्बर को खोरा (169) चौथे स्थान पर है, वहीं लेह (205) दूसरे, जबकि पानीपत (179) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 52, गाजियाबाद में 90, गुवाहाटी में 58, गुरूग्राम में 105, नोएडा में 123, ग्रेटर नोएडा में 114 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 44 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 73, चेन्नई में 90, चंडीगढ़ में 38, हैदराबाद में 52, जयपुर में 63 और पटना में 77 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 79 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अमरावती (आंध्र प्रदेश), अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अंकलेश्वर, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बालासोर, बांसवाड़ा, बारां, बारीपाड़ा, बीड, बेलापुर, भिलाई, भिवंडी, भोपाल, बूंदी, चामराजनगर, चंडीगढ़, चिक्काबल्लापुर, चित्तौड़गढ़, दमोह, देहरादून, धौलपुर, धुले, डोंबिवली, फतेहपुर सीकरी, गांधीनगर, गंगटोक, हल्दिया, इंदौर, जालोर, झांसी, जोधपुर, काकीनाडा, कलबुर्गी, कोल्हापुर, कोटा, कुरनूल, लातूर, मदिकेरी, महाड, मीरा-भायंदर, मुंबई, नागपुर, नाहरलागुन, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पंचगांव, पंचकुला, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, पुणे, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजकोट, रतलाम, राउरकेला, सागर, सांगली, सासाराम, शिवमोगा, सिरोही, शिवसागर, सोलापुर, श्रीनगर, ठाणे, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, विरार और यादगीर शामिल हैं।

वहीं आगरा, अमृतसर, अनंतपुर, अररिया, आसनसोल, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बरेली, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवानी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बीकानेर, बिलासपुर, बिलाईपाड़ा, बुलंदशहर, ब्यासनगर, चंद्रपुर, चेन्नई, छाल, चित्तूर, चूरू, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, दुर्गापुर, एलुरु, फतेहाबाद, गडग, गजरौला, गया, गाजियाबाद, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हापुड़, हिंगोली, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, झालावाड़, झुंझुनू, जोरापोखर, कडप्पा, कैथल, कानपुर, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंगुराहा, मथुरा, मेरठ, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नागौर, नंदेसरी, नारनौल, नेल्लोर, पाली, पलवल, पंपोर, पारादीप, परभणी, पटना, पीथमपुर, प्रयागराज, पुडुचेरी, पूर्णिया, रायबरेली, रामनगर, रोहतक, रूपनगर, सतारा, सतना, सवाई माधोपुर, शामली, सीकर, सिलचर, सिरसा, सोनीपत, श्रीगंगानगर, सूरत, तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, वडोदरा, वाराणसी, वातवा, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम और वृंदावन आदि 128 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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