देश में बढ़ती गर्मी के बीच अब जहरीली हवा भी लोगों की सांसों पर भारी पड़ने लगी है। 26 मई 2026 को पंजाब का मंडी गोबिंदगढ़ देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 341 तक पहुंच गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सिर्फ 24 घंटे में यहां प्रदूषण 145 अंकों तक बढ़ गया। शहर की हवा में पीएम2.5 जैसे बेहद खतरनाक महीन कण पूरी तरह हावी हैं, जो फेफड़ों और दिल की बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ा सकते हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि यहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 2,100 फीसदी ज्यादा दर्ज किया गया।
दूसरी ओर महाराष्ट्र का अंबरनाथ सबसे साफ शहर रहा, जहां एक्यूआई महज 22 रिकॉर्ड किया गया। यानी मंडी गोबिंदगढ़ की हवा अंबरनाथ से करीब 15 गुणा ज्यादा जहरीली रही।
राजधानी दिल्ली में हल्का सुधार जरूर दर्ज हुआ, लेकिन एक्यूआई 252 के साथ हवा अब भी ‘खराब’ श्रेणी में बनी हुई है।
वहीं ग्रेटर नोएडा, श्री गंगानगर, बल्लभगढ़, गाजियाबाद और मेरठ जैसे शहर भी गंभीर प्रदूषण की चपेट में रहे।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश के करीब 45 फीसदी शहरों में हवा चिंताजनक बनी हुई है। रुझानों से यह भी साफ है कि कई शहरों में पीएम2.5 और पीएम10 जैसे प्रदूषक तेजी से बढ़ रहे हैं, जो आने वाले दिनों में स्वास्थ्य संकट को और गहरा सकते हैं।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 26 मई 2026 को देश में मंडी गोबिंदगढ़ सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 341 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल मंडी गोबिंदगढ़ में सूचकांक 196 दर्ज किया गया। मतलब की कल से वहां प्रदूषण में 145 अंकों का भारी उछाल आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि मंडी गोबिंदगढ़ की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
मंडी गोबिंदगढ़ में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,100 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में अंबरनाथ की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 22 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर मंडी गोबिंदगढ़ की तुलना अंबरनाथ से करें तो वहां स्थिति 15 गुणा खराब है।
वहीं कल चरखी दादरी में स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 392 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज वहां 229 अंकों के सुधार के साथ एक्यूआई घटकर 163 पर पहुंच गया है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 254 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 252 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में दो अंकों के सुधार दर्ज किया गया है। इसके साथ ही आज भी दिल्ली में वायु गुणवत्ता खराब बनी हुई है।
बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 05 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 86 पर पहुंच गया। वहीं 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को एक्यूआई 93 रिकॉर्ड किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 203 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 213 पर पहुंच गया। फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता खराब बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 26 मई 2026 को 237 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 15.6 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 39.7 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 44.7 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा चिंताजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 42.3 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 3.1 फीसदी की कमी आई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है। खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 11.8 फीसदी का उछाल आया है, जोकि चिंता का विषय है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में ग्रेटर नोएडा (332) दूसरे जबकि श्री गंगानगर (312) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह बल्लभगढ़ (304) चौथे स्थान पर है। गाजियाबाद- मेरठ में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
दिल्ली (252) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में पंचगांव (250), मानेसर (244) और नोएडा (244) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के चार शहर (गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, मेरठ, नोएडा) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि मंडी गोबिंदगढ़, पंचगांव, मानेसर, कैथल, धारूहेड़ा, रोहतक, भिवानी, बहादुरगढ़, नारनौल, जींद, गुरुग्राम, चरखी दादरी, अंबाला, पंचकुला, बिलासपुर, धौलपुर, करनाल, वातवा, काशीपुर, गुम्मिडीपूंडी आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं ग्रेटर नोएडा, बल्लभगढ़, गाजियाबाद, मेरठ, दिल्ली, नोएडा, हापुड़, मेहसाणा, उदयपुर, बागपत, फरीदाबाद, पानीपत, चूरू, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, झुंझुनू, मुजफ्फरनगर, सीकर, वाराणसी, बिलीपाड़ा, बाड़मेर, बीकानेर, लखनऊ, भिवाड़ी, डूंगरपुर, कुरुक्षेत्र, जयपुर, कोटा, करौली, नागौर, बारां, दौसा, झालावाड़, प्रतापगढ़, सवाई माधोपुर, सोनीपत, टोंक, बारबिल, जोरापोखर, ग्वालियर, बुलंदशहर, मुरादाबाद, पाली, मंडीदीप, यमुना नगर, जोधपुर, आगरा, गया, सागर, हनुमानगढ़, सिरसा, विरार, विशाखापत्तनम, जबलपुर, प्रयागराज, भोपाल, अजमेर, दमोह, फतेहाबाद, खुर्जा, वृंदावन, सिरोही, अमृतसर, जैसलमेर, जालोर, कटनी, कानपुर, खन्ना, पटियाला, अमरावती (आंध्रप्रदेश), बूंदी, नयागढ़, पीथमपुर, बांसवाड़ा, बारीपदा, छाल, गांधीनगर, नागपुर, थूथुकुडी आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 15.6 फीसदी यानी 37 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में अंकलेश्वर, बागलकोट, बेलापुर, बेतिया, भिलाई, बक्सर, चामराजनगर, कोयंबटूर, कुड्डालोर, गंगटोक, कडप्पा, कलबुर्गी, कोहिमा, कोल्हापुर, मदिकेरी, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुंगेर, मैसूर, नाहरलागुन, नासिक, नवी मुंबई आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 94 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बरेली, बैरकपुर, बेगूसराय, बेलगाम, बेंगलुरु, भावनगर, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बोइसर, ब्रजराजनगर, ब्यासनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, कटक, देहरादून, देवास, धारवाड़, धुले, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जालंधर, जलगांव, झांसी, कन्नूर, क्योंझर, किशनगंज, कोलकाता, कोल्लम, कोप्पल, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाड, मुजफ्फरपुर, नागांव, नांदेड़, नंदेसरी, पलवल, परभणी, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पुडुचेरी, पुणे, रायपुर आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 83 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें आगरा, अजमेर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमृतसर, अंगुल, बद्दी, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बारीपदा, बाड़मेर, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भोपाल, बीकानेर, बिलासपुर, बिलीपाड़ा, बुलंदशहर, बूंदी, चरखी दादरी, छाल, दमोह, दौसा, धौलपुर, डूंगरपुर, फतेहाबाद, गांधीनगर, गया, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कानपुर, करौली, करनाल, काशीपुर, कटनी, खन्ना, खुर्जा, कोटा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मिलुपारा, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, नागौर, नागपुर, नारनौल, नयागढ़, पाली, पंचकुला, पटियाला, पीथमपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, सागर, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरोही, सिरसा, सोनीपत, थूथुकुडी, टोंक, वाराणसी, वातवा, विरार, विशाखापत्तनम, वृंदावन, यमुना नगर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश में बागपत, बहादुरगढ़, भिवानी, चित्तौड़गढ़, चूरू, दिल्ली, धारूहेड़ा, फरीदाबाद, गाजियाबाद, हापुड़, कैथल, मानेसर, मेरठ, मेहसाणा, नोएडा, पंचगांव, पानीपत, रोहतक, उदयपुर में स्थिति ‘खराब’ है। वहीं बल्लभगढ़ (304), ग्रेटर नोएडा (332), मंडी गोबिंदगढ़ (341) और श्री गंगानगर (312) में स्थिति बेहद खराब है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 237 में से 37 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 94 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 25 मई को यह आंकड़ा 97 दर्ज किया गया था।
83 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज मंडी गोबिंदगढ़ में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 341 दर्ज किया गया। इससे पहले कल मंडी गोबिंदगढ़ में सूचकांक 196 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण में 145 अंकों का भारी इजाफा हुआ है। हालांकि आज मंडी गोबिंदगढ़ में वायु गुणवत्ता मध्यम से 'बेहद खराब' श्रेणी में पहुंच गई है।
वहीं कल चरखी दादरी में स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 392 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज वहां 229 अंकों के सुधार के साथ एक्यूआई घटकर 163 पर पहुंच गया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 254 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 252 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में दो अंकों के सुधार दर्ज किया गया है। इसके साथ ही आज भी दिल्ली में वायु गुणवत्ता खराब बनी हुई है।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 203 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 213 पर पहुंच गया। फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता खराब बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 26 मई को बल्लभगढ़ (304) चौथे स्थान पर है, वहीं ग्रेटर नोएडा (332) दूसरे, जबकि श्री गंगानगर (312) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 143, गाजियाबाद में 297, गुवाहाटी में 76, गुरूग्राम में 180, नोएडा में 244, ग्रेटर नोएडा में 332 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 45 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 172, चेन्नई में 63, चंडीगढ़ में 95, हैदराबाद में 71, जयपुर में 163 और पटना में 98 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 37 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अहमदनगर, आइजोल, अंबरनाथ, अंकलेश्वर, बागलकोट, बेलापुर, बेतिया, भिलाई, बक्सर, चामराजनगर, कोयंबटूर, कुड्डालोर, गंगटोक, कडप्पा, कलबुर्गी, कोहिमा, कोल्हापुर, मदिकेरी, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुंगेर, मैसूर, नाहरलागुन, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, पंपोर, पेरुंदुरई, रामनगर, सहरसा, सांगली, सिलचर, श्रीनगर, टेन्सा, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, उल्हासनगर शामिल हैं।
वहीं अगरतला, अहमदाबाद, अकोला, अलवर, अमरावती (महाराष्ट्र), अनंतपुर, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बालासोर, बरेली, बैरकपुर, बेगूसराय, बेलगाम, बेंगलुरु, भावनगर, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बोइसर, ब्रजराजनगर, ब्यासनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, कटक, देहरादून, देवास, धारवाड़, धुले, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जालंधर, जलगांव, झांसी, कन्नूर, क्योंझर, किशनगंज, कोलकाता, कोल्लम, कोप्पल, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाड, मुजफ्फरपुर, नागांव, नांदेड़, नंदेसरी, पलवल, परभणी, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पुडुचेरी, पुणे, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सतना, शिवमोगा, सिलीगुड़ी, शिवसागर, सोलापुर, सुआकाती, सूरत, तालचेर, त्रिशूर, तिरुपति, तुमकुरु, तुमडीह, उज्जैन, वडोदरा, विजयवाड़ा आदि 94 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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