31 अगस्त 2026 को देश में वायु प्रदूषण की तस्वीर ने फिर चिंता बढ़ा दी। सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक, उत्तर प्रदेश का बड़ौत देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां एक्यूआई 239 दर्ज किया गया। यह ‘खराब’ श्रेणी में है और एक दिन पहले के मुकाबले 14 अंक अधिक है।
बड़ौत की हवा में पीएम2.5 जैसे महीन कणों का दबदबा बना हुआ है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं।
इसके विपरीत छत्तीसगढ़ का कोरबा 14 के एक्यूआई के साथ देश का सबसे साफ शहर रहा। यानी दोनों शहरों की हवा की गुणवत्ता में करीब 12.5 गुना का अंतर रहा।
देश के 246 शहरों के आंकड़ों में 82 शहरों की हवा ‘बेहतर’, 125 की ‘संतोषजनक’ और 37 की ‘मध्यम’ श्रेणी में रही, जबकि बड़ौत और अंबाला में स्थिति ‘खराब’ रही। हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कई शहर प्रदूषण की शीर्ष सूची में शामिल रहे।
हालांकि चरखी दादरी, दिल्ली और फरीदाबाद में पिछले 24 घंटों के दौरान कुछ सुधार दर्ज किया गया।
आंकड़े बताते हैं कि देश के कई शहरों में हवा फिलहाल राहत दे रही है, लेकिन प्रदूषण का उतार-चढ़ाव लगातार चिंता का कारण बना हुआ है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 31 अगस्त 2026 को देश में बड़ौत सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 239 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (30 अगस्त) बड़ौत में वायु गुणवत्ता का स्तर 225 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 14 अंकों का इजाफा हुआ है और वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में बनी हुई है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि बड़ौत की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
बड़ौत में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,490 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में कोरबा की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 14 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर बड़ौत की तुलना कोरबा से करें तो वहां स्थिति 12.5 गुणा खराब है।
वहीं कल देश में चरखी दादरी की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 228 रिकॉर्ड किया गया। आज चरखी दादरी में 78 अंकों के भारी सुधार के साथ सूचकांक घटकर 150 पर पहुंच गया। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में कमी आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 129 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 116 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 13 अंकों की गिरावट आई है। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 07-31 अगस्त को 63 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 151 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 135 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 16 अंकों के सुधार के बावजूद फरीदाबाद में आज भी एक्यूआई मध्यम श्रेणी में बना हुआ है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 31 अगस्त 2026 को 246 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 33.3 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 50.8 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 15.9 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 1.2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 2.5 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से करीब 7.5 फीसदी की गिरावट आई है, जोकि राहत की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में अंबाला (215) दूसरे जबकि खन्ना (191) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह बुलंदशहर (187) चौथे स्थान पर है। चरखी दादरी (150) – नोएडा (145) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
मंडी गोबिंदगढ़ (136) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में दौसा (135), फरीदाबाद (135) और ग्रेटर नोएडा (134) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के तीन (अंबाला, चरखी दादरी, फरीदाबाद) और उत्तर प्रदेश के चार (बड़ौत, बुलंदशहर, नोएडा, ग्रेटर नोएडा) शहर शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि बड़ौत, खन्ना, चरखी दादरी, फरीदाबाद, भिवानी, मानेसर और कल्याण आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं अंबाला, बुलंदशहर, नोएडा, मंडी गोबिंदगढ़, दौसा, ग्रेटर नोएडा, सहरसा, सीकर, श्री गंगानगर, कैथल, दिल्ली, टोंक, नारनौल, छपरा, अमृतसर, हापुड़, जैसलमेर, मेरठ, गुम्मिडीपूंडी, मथुरा, पीथमपुर, सिवान, पाली, फतेहाबाद, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, कुरुक्षेत्र और वातवा आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 33.3 फीसदी यानी 82 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में कटक, दमोह, धारूहेड़ा, धुले, डोंबिवली, डूंगरपुर, फिरोजाबाद, गया, गुवाहाटी, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, काकीनाडा, कलबुर्गी, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, मदिकेरी, महाद, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पुडुचेरी, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सांगली, शिलांग, सिलीगुड़ी, सिंगरौली, शिवसागर, सोलापुर, श्रीनगर, सूरत आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 125 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बेगूसराय, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भोपाल, बूंदी, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चुरू, देहरादून, देवास, धारवाड़, धौलपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फतेहपुर सीकरी, गडग, गजरौला, गांधीनगर, गोरखपुर, गुंटूर, गुरुग्राम, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हिंगोली, हिसार, इंदौर, जयपुर, जलना, जालौर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कानपुर, करौली, करनाल, कटिहार, कटनी, खोरा, खुर्जा, कोहिमा, कोटा, लखनऊ, मछलीपट्टनम, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मंगुराहा, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंगेर, मैसूरु, नागांव, नागौर, नलबाड़ी, नयागढ़, नेल्लोर, पलवल, पंपोर, पंचकुला, पानीपत, परभणी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायबरेली, राजसमंद, रोहतक, रूपनगर, सागर, समस्तीपुर, सतारा, सतना आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 37 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अलवर, अंबाला, अमृतसर, बद्दी, भागलपुर, भिवाड़ी, भिवानी, बुलंदशहर, छपरा, दौसा, दिल्ली, फरीदाबाद, गजरौला, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, हापुड़, जैसलमेर, जींद, कैथल, खन्ना, कुरुक्षेत्र, मानेसर, मथुरा, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नारनौल, नोएडा, पाली, पंचगांव, पानीपत, पीथमपुर, सहरसा, शामली, सीकर, सिरसा, सिवान, श्रीगंगानगर, टोंक और यमुनानगर आदि शामिल हैं।
वहीं बड़ौत (239) और अंबाला (215) में स्थिति खराब है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 246 में से 82 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 125 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 30 अगस्त को भी यह आंकड़ा 122 दर्ज किया गया था।
37 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज बड़ौत में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 239 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (30 अगस्त) बड़ौत में वायु गुणवत्ता का स्तर 225 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 14 अंकों का इजाफा हुआ है और वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में बनी हुई है।
वहीं कल देश में चरखी दादरी की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 228 रिकॉर्ड किया गया। आज चरखी दादरी में 78 अंकों के भारी सुधार के साथ सूचकांक घटकर 150 पर पहुंच गया। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में कमी आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 129 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 116 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 13 अंकों की गिरावट आई है। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 151 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 135 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 16 अंकों के सुधार के बावजूद फरीदाबाद में आज भी एक्यूआई मध्यम श्रेणी में बना हुआ है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 31 अगस्त को बुलंदशहर (187) चौथे स्थान पर है, वहीं अंबाला (215) दूसरे, जबकि खन्ना (191) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 71, गाजियाबाद में 102, गुवाहाटी में 48, गुरूग्राम में 89, नोएडा में 145, ग्रेटर नोएडा में 134 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 40 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 54, चेन्नई में 66, चंडीगढ़ में 53, हैदराबाद में 48, जयपुर में 86 और पटना में 59 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 82 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में अहमदनगर, अमरावती (आंध्र प्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र), अंगुल, अररिया, बदलापुर, बालासोर, बरबिल, बीड, बेलापुर, भिलाई, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिलासपुर, बिलीपाड़ा, बोइसर, ब्रजराजनगर, ब्यासनगर, चामराजनगर, छाल, चिक्कमगलुरु, कुड्डालोर, कटक, दमोह, धारूहेड़ा, धुले, डोंबिवली, डूंगरपुर, फिरोजाबाद, गया, गुवाहाटी, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, काकीनाडा, कलबुर्गी, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, मदिकेरी, महाद, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पुडुचेरी, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सांगली, शिलांग, सिलीगुड़ी, सिंगरौली, शिवसागर, सोलापुर, श्रीनगर, सूरत, टेन्सा, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, तिरुमाला, तुमडीह, वाराणसी, विजयपुरा, विरार और यादगीर शामिल हैं।
वहीं अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अकोला, अंबरनाथ, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बागपत, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बरेली, बारीपाड़ा, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भोपाल, बूंदी, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चुरू, देहरादून, देवास, धारवाड़, धौलपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फतेहपुर सीकरी, गडग, गजरौला, गांधीनगर, गोरखपुर, गुंटूर, गुरुग्राम, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हिंगोली, हिसार, इंदौर, जयपुर, जलना, जालौर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कानपुर, करौली, करनाल, कटिहार, कटनी, खोरा, खुर्जा, कोहिमा, कोटा, लखनऊ, मछलीपट्टनम, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मंगुराहा, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंगेर, मैसूरु, नागांव, नागौर, नलबाड़ी, नयागढ़, नेल्लोर, पलवल, पंपोर, पंचकुला, पानीपत, परभणी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायबरेली, राजसमंद, रोहतक, रूपनगर, सागर, समस्तीपुर, सतारा, सतना, सवाई माधोपुर, शामली, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, सिरसा, सोनीपत, श्रीकाकुलम, तालचेर, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुपति, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम आदि 125 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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