25 मई 2026 को देशभर के 230 शहरों के वायु गुणवत्ता आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला कि 46.5 फीसदी शहरों में हवा की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, जबकि 42.2 फीसदी शहरों में यह संतोषजनक और केवल 11.3 फीसदी में ही साफ दर्ज की गई।
इस दौरान चरखी दादरी देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां एक्यूआई 392 तक पहुंच गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है और पिछले दिन के मुकाबले 56 अंकों की बढ़ोतरी दर्शाता है।
चूरू, बीकानेर, ग्रेटर नोएडा और सिंगरौली जैसे शहर भी शीर्ष प्रदूषित सूची में शामिल रहे, जबकि दिल्ली (254 एक्यूआई) और फरीदाबाद में भी प्रदूषण लगातार बढ़ता देखा गया।
दूसरी ओर तिरुवनंतपुरम (17 एक्यूआई) में सबसे साफ हवा दर्ज की गई, जो चरखी दादरी की तुलना में 22 गुणा बेहतर स्थिति को दर्शाता है।
विश्लेषण से यह भी सामने आया कि देश के कई औद्योगिक और शहरी क्षेत्रों में पीएम2.5 और पीएम10 का स्तर हावी है, जिससे स्वास्थ्य जोखिम बढ़ रहे हैं। कुल मिलाकर, देश के आधे से अधिक शहरों में वायु गुणवत्ता सामान्य से खराब दिशा में बढ़ती दिख रही है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 25 मई 2026 को देश में एक बार फिर चरखी दादरी सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 392 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल चरखी दादरी में सूचकांक 336 दर्ज किया गया। मतलब की कल से वहां प्रदूषण में 56 अंकों का भारी उछाल आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि चरखी दादरी की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
चरखी दादरी में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,500 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में तिरुवनंतपुरम की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 17 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर चरखी दादरी की तुलना तिरुवनंतपुरम से करें तो वहां स्थिति 22 गुणा खराब है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 205 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 254 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 49 अंकों का उछाल दर्ज किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता खराब बनी हुई है।
बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 05 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 86 पर पहुंच गया। वहीं 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को एक्यूआई 93 रिकॉर्ड किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 186 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 203 पर पहुंच गया। फरीदाबाद में भी आज वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 25 मई 2026 को 230 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 11.3 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 42.2 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 46.5 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा चिंताजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 7.1 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 4.9 फीसदी की कमी दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में भी कल से 5.7 फीसदी की गिरावट आई है। वहीं खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 21.4 फीसदी का उछाल आया है, जोकि चिंता का विषय है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में चूरू (336) दूसरे जबकि बीकानेर (335) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह ग्रेटर नोएडा (320) चौथे स्थान पर है। सिंगरौली- गाजियाबाद में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
श्री गंगानगर (311) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में मेरठ (299), पंचगांव (274) और हापुड़ (262) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के चार शहर (गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, मेरठ, हापुड़) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि चरखी दादरी, पंचगांव, कैथल, धारूहेड़ा, मानेसर, जींद, भिवानी, नारनौल, मंडी गोबिंदगढ़, अंबाला, बहादुरगढ़, पंचकुला, बर्नीहाट (असम), धौलपुर, काशीपुर, बिहार शरीफ, रोहतक, वातवा, कानपुर, हाजीपुर, राजगीर, किशनगंज आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं चूरू, बीकानेर, ग्रेटर नोएडा, सिंगरौली, गाजियाबाद, मेरठ, हापुड़, पानीपत, दिल्ली, नोएडा, बागपत, बल्लभगढ़, झुंझुनू, फरीदाबाद, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, जैसलमेर, गुरुग्राम, सीकर, भिवाड़ी, जयपुर, हनुमानगढ़, बाड़मेर, दौसा, नागौर, कुरुक्षेत्र, बर्नीहाट (मेघालय), ग्वालियर, सिरसा, दमोह, चंद्रपुर, भीलवाड़ा, पाली, टोंक, सवाई माधोपुर, प्रतापगढ़, सोनीपत, वाराणसी, यमुना नगर, लखनऊ, गया, खुर्जा, सागर, उदयपुर, सासाराम, फतेहाबाद, कटनी, जोधपुर, कोटा, अजमेर, देहरादून, आगरा, छपरा, पटियाला, भोपाल, मंडीदीप, विशाखापत्तनम, मुरादाबाद, नयागढ़, जोरापोखर, नागपुर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), रायपुर, अमृतसर, बिलाईपाड़ा, वृंदावन, चित्तौड़गढ़, जालोर, बांसवाड़ा, छाल, झालावाड़, फिरोजाबाद, तुमडीह, पीथमपुर, सिरोही, खन्ना आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 11.3 फीसदी यानी 26 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में गंगटोक, कलबुर्गी, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, मदिकेरी, मीरा-भायंदर, मुंबई, नाहरलागुन, नासिक, नवी मुंबई, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, रामनगर, सांगली, सिलचर, सोलापुर, श्रीनगर, सूरत, तिरुवनंतपुरम आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 97 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें भरतपुर, भावनगर, भिलाई, भिवंडी, बोइसर, बूंदी, बक्सर, ब्यासनगर, चंडीगढ़, चेन्नई, चित्तूर, कुड्डालोर, कटक, देवास, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गांधीनगर, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, झांसी, कडप्पा, कल्याण, कन्नूर, कटिहार, क्योंझर, कोलकाता, कोल्लम, कुंजेमुरा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मंडीखेड़ा, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, पंपोर, परभणी, पटना, प्रयागराज, पुणे, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, राउरकेला, सहरसा, सतना, शिवमोगा, सिलीगुड़ी, शिवसागर, सिवान आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 83 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें आगरा, अजमेर, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमृतसर, अंगुल, बद्दी, बहादुरगढ़, बांसवाड़ा, बाड़मेर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलाईपाड़ा, बुलंदशहर, बर्नीहाट (असम), बर्नीहाट (मेघालय), चंद्रपुर, छाल, छपरा, चित्तौड़गढ़, दमोह, दौसा, देहरादून, धौलपुर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गया, गुरुग्राम, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, जयपुर, जैसलमेर, जालोर, झालावाड़, जोधपुर, जोरापोखर, कानपुर, काशीपुर, कटनी, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोटा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, नागौर, नागपुर, नयागढ़, पाली, पंचकुला, पटियाला, पीथमपुर, प्रतापगढ़, पुडुचेरी, रायपुर, राजगीर, ऋषिकेश, रोहतक, सागर, सासाराम, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरोही, सिरसा, सोनीपत, टोंक, तुमडीह, उदयपुर, वाराणसी, वातवा, विशाखापत्तनम, वृंदावन, यमुना नगर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश में बागपत, बल्लभगढ़, बारां, भिवानी, दिल्ली, धारूहेड़ा, फरीदाबाद, हापुड़, झुंझुनू, जींद, कैथल, मानेसर, मेरठ, नारनौल, नोएडा, पंचगांव, पानीपत में स्थिति ‘खराब’ है। वहीं बीकानेर (335), चरखी दादरी (392), चूरू (336), गाजियाबाद (311), ग्रेटर नोएडा (320), सिंगरौली (313) और श्री गंगानगर (311) में स्थिति बेहद खराब है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 230 में से 26 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 97 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 24 मई को यह आंकड़ा 102 दर्ज किया गया था।
83 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज एक बार फिर चरखी दादरी में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 392 दर्ज किया गया। इससे पहले कल चरखी दादरी में सूचकांक 336 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण में 56 अंकों का इजाफा हुआ है। हालांकि आज भी चरखी दादरी में वायु गुणवत्ता बेहद खराब' बनी हुई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 205 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 254 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 49 अंकों का उछाल दर्ज किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता खराब बनी हुई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 186 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 203 पर पहुंच गया। फरीदाबाद में भी आज वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 25 मई को ग्रेटर नोएडा (320) चौथे स्थान पर है, वहीं चूरू (336) दूसरे, जबकि बीकानेर (335) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 150, गाजियाबाद में 311, गुवाहाटी में 74, गुरूग्राम में 174, नोएडा में 247, ग्रेटर नोएडा में 320 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 42 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 130, चेन्नई में 61, चंडीगढ़ में 81, हैदराबाद में 76, जयपुर में 168 और पटना में 96 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 26 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें बागलकोट, बेलापुर, चामराजनगर, चिक्काबल्लापुर, गंगटोक, कलबुर्गी, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, मदिकेरी, मीरा-भायंदर, मुंबई, नाहरलागुन, नासिक, नवी मुंबई, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, रामनगर, सांगली, सिलचर, सोलापुर, श्रीनगर, सूरत, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, उल्हासनगर शामिल हैं।
वहीं अगरतला, अहमदाबाद, अहमदनगर, अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बालासोर, बारबिल, बरेली, बारीपाड़ा, बैरकपुर, बेगूसराय, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भिलाई, भिवंडी, बोइसर, बूंदी, बक्सर, ब्यासनगर, चंडीगढ़, चेन्नई, चित्तूर, कुड्डालोर, कटक, देवास, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गांधीनगर, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, झांसी, कडप्पा, कल्याण, कन्नूर, कटिहार, क्योंझर, कोलकाता, कोल्लम, कुंजेमुरा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मंडीखेड़ा, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, पंपोर, परभणी, पटना, प्रयागराज, पुणे, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, राउरकेला, सहरसा, सतना, शिवमोगा, सिलीगुड़ी, शिवसागर, सिवान, सुआकाती, तालचेर, ठाणे, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, तुमकुरु, उज्जैन, वडोदरा, वापी, विजयवाड़ा, विरार आदि 97 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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