देश में एक बार फिर बढ़ते प्रदूषण ने खतरे की घंटी बजा दी है। 19 मई 2026 को जारी सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण में सामने आया है कि कई शहरों में सांस लेना मुश्किल होता जा रहा है। हरियाणा का चरखी दादरी 342 एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां स्थिति ‘बेहद खराब’ श्रेणी में है और हवा में पीएम2.5 का जहर हावी है।
इतना ही नहीं, यहां प्रदूषण स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 2100 फीसदी अधिक दर्ज किया गया। दूसरी ओर, कर्नाटक का मदिकेरी 14 एक्यूआई के साथ देश का सबसे साफ शहर रहा।
दिल्ली में भी हालात बिगड़े हैं, जहां एक्यूआई 173 से बढ़कर 208 पहुंच गया, जबकि फरीदाबाद में 171 से 200 तक उछाल दर्ज हुआ।
तालचेर (316), ग्रेटर नोएडा (312) और पंचगांव (303) जैसे शहर भी गंभीर प्रदूषण की चपेट में रहे।
239 शहरों के विश्लेषण में केवल 12.6 फीसदी शहरों की हवा ‘बेहतर’, 44 फीसदी ‘संतोषजनक’ और 43.5 फीसदी ‘चिंताजनक’ पाई गई। कुल मिलाकर देश के बड़े हिस्से में हवा में जहर घुला हुआ है, और प्रदूषण का यह उतार-चढ़ाव अब स्वास्थ्य के लिए लगातार गहरा खतरा बनता जा रहा है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 19 मई 2026 को देश में एक बार फिर चरखी दादरी सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 342 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल चरखी दादरी में सूचकांक 317 दर्ज किया गया। मतलब की कल से वहां प्रदूषण में 25 अंकों का उछाल आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि चरखी दादरी की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
चरखी दादरी में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,100 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 14 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर चरखी दादरी की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 24.4 गुणा खराब है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 173 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 208 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 35 अंकों का इजाफा दर्ज किया गया है। हालांकि दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 05 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 86 पर पहुंच गया। वहीं 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को एक्यूआई 93 रिकॉर्ड किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 171 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 200 पर पहुंच गया। हालांकि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 19 मई 2026 को 239 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 12.6 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 44 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 43.5 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 15.4 फीसदी का उछाल आया है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 2.8 फीसदी की कमी दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से 5.9 फीसदी की गिरावट आई है। वहीं खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 171 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया, जोकि चिंता का विषय है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में तालचेर (316) दूसरे जबकि ग्रेटर नोएडा (312) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह पंचगांव (303) चौथे स्थान पर है। श्री गंगानगर-मेरठ में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 302 और 253 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
जींद (249) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में गाजियाबाद (247), यमुना नगर (245) और सिंगरौली (239) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के चार शहर (चरखी दादरी, पंचगांव, जींद, यमुना नगर) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि चरखी दादरी, पंचगांव, जींद, यमुना नगर, राजकोट, खन्ना, मानेसर, करनाल, कैथल, बल्लभगढ़, भिवाड़ी, फरीदाबाद, बर्नीहाट (असम), अंबाला, गुरुग्राम, भिवानी, धारूहेड़ा, बक्सर, आगरा, पंचकुला, हाजीपुर, लखनऊ, मंडीदीप, कानपुर, काशीपुर, बहादुरगढ़, कोटा आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं ग्रेटर नोएडा, मेरठ, गाजियाबाद, सिंगरौली, नोएडा, हापुड़, पानीपत, बद्दी, मुजफ्फरनगर, दिल्ली, बागपत, कुरुक्षेत्र, मंगुराहा, रतलाम, सवाई माधोपुर, वातवा, दौसा, बुलंदशहर, जैसलमेर, चूरू, पीथमपुर, बीकानेर, मेहसाणा, खुर्जा, कटनी, हनुमानगढ़, रोहतक, मुरादाबाद, टोंक, चंद्रपुर, झुंझुनू, जोरापोखर, पटियाला, ग्वालियर, पाली, भोपाल, देवास, गांधीनगर, अंगुल, भावनगर, करौली, सीकर, अहमदाबाद, बांसवाड़ा, बारबिल, कटक, प्रतापगढ़, वडोदरा, भीलवाड़ा, फतेहाबाद, जोधपुर, लुधियाना, विशाखापत्तनम, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बारां, बाड़मेर, अमृतसर, नागौर, अलवर, सागर, वाराणसी, अगरतला, अंकलेश्वर, धौलपुर, पटना, उदयपुर, भरतपुर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 12.6 फीसदी यानी 30 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में कोयंबटूर, गंगटोक, गुवाहाटी, कन्नूर, कोहिमा, कोलकाता, मदिकेरी, मंडीखेड़ा, मीरा-भायंदर, नागांव, नाहरलागुन, नेल्लोर, पेरुंदुरई, राजमहेंद्रवरम, रामनगर, ऋषिकेश आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 105 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें भुवनेश्वर, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, कुड्डालोर, देहरादून, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गडग, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, हल्दिया, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जालोर, झालावाड़, झांसी, कडप्पा, कलबुर्गी, कल्याण, कटिहार, किशनगंज, कोल्हापुर, कोल्लम, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, मछलीपट्टनम, महाड, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पलवल, पंपोर, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 80 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अलवर, अंबाला, अमृतसर, अंगुल, अंकलेश्वर, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बहादुरगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बाड़मेर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवानी, भोपाल, बीकानेर, बुलंदशहर, बूंदी, बक्सर, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, दौसा, देवास, धनबाद, धारूहेड़ा, धौलपुर, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गांधीनगर, गुरुग्राम, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, जयपुर, जैसलमेर, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कानपुर, करौली, काशीपुर, कटनी, खुर्जा, कोटा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मंडीदीप, मंगुराहा, मेहसाणा, मिलुपारा, मुरादाबाद, नागौर, पाली, पंचकुला, परभणी, पटियाला, पटना, पीथमपुर, प्रतापगढ़, रायबरेली, रतलाम, रोहतक, सागर, सवाई माधोपुर, सीकर, टोंक, उदयपुर, वडोदरा, वाराणसी, वातवा, विशाखापत्तनम आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश में बद्दी, बागपत, बल्लभगढ़, ब्यासनगर, दिल्ली, गाजियाबाद, हापुड़, जींद, कैथल, करनाल, खन्ना, मानेसर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नोएडा, पानीपत, राजकोट, सिंगरौली, यमुना नगर में स्थिति ‘खराब’ है। वहीं चरखी दादरी (342), ग्रेटर नोएडा (312), पंचगांव (303), श्री गंगानगर (302), और तालचेर (316) में स्थिति बेहद खराब है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 239 में से 30 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 105 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 18 मई को यह आंकड़ा 108 दर्ज किया गया था।
80 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज फिर चरखी दादरी में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 342 दर्ज किया गया। इससे पहले कल चरखी दादरी में सूचकांक 317 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण में 25 अंकों का इजाफा हुआ है। इसके साथ ही आज भी चरखी दादरी में वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ बनी हुई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 173 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 208 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 35 अंकों का इजाफा दर्ज किया गया है। हालांकि दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 171 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 200 पर पहुंच गया। हालांकि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 19 मई को पंचगांव चौथे स्थान पर है, वहीं तालचेर (316) दूसरे, जबकि ग्रेटर नोएडा (312) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 127, गाजियाबाद में 247, गुवाहाटी में 44, गुरूग्राम में 178, नोएडा में 233, ग्रेटर नोएडा में 312 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 56 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 130, चेन्नई में 57, चंडीगढ़ में 90, हैदराबाद में 77, जयपुर में 144 और पटना में 102 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 30 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, अंबरनाथ, बागलकोट, बैरकपुर, भिलाई, चामराजनगर, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, गंगटोक, गुवाहाटी, कन्नूर, कोहिमा, कोलकाता, मदिकेरी, मंडीखेड़ा, मीरा-भायंदर, नागांव, नाहरलागुन, नेल्लोर, पेरुंदुरई, राजमहेंद्रवरम, रामनगर, ऋषिकेश, रूपनगर, सांगली, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, उल्हासनगर शामिल हैं।
वहीं अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र), अररिया, आरा, आसनसोल, बालासोर, बरेली, बारीपदा, बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, बेतिया, भागलपुर, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, कुड्डालोर, देहरादून, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गडग, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, हल्दिया, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जालोर, झालावाड़, झांसी, कडप्पा, कलबुर्गी, कल्याण, कटिहार, किशनगंज, कोल्हापुर, कोल्लम, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, मछलीपट्टनम, महाड, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पलवल, पंपोर, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, राजसमंद, राउरकेला, सहरसा, समस्तीपुर, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, सिरसा, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, श्रीनगर, सूरत, ठाणे, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, उज्जैन, वापी, विजयवाड़ा, विरार आदि 105 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
देश में वायु गुणवत्ता की ताजा जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर से प्राप्त कर सकते हैं