केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 14 फरवरी 2026 को जारी आंकड़ों के अनुसार देश में बल्लभगढ़ सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 284 दर्ज किया गया। बीते 24 घंटों में यहां प्रदूषण स्तर 22 अंक बढ़ा है और पीएम10 कणों का प्रभाव सबसे अधिक देखा गया।
रिपोर्ट के मुताबिक बल्लभगढ़ में प्रदूषण विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 500 फीसदी अधिक है।
वहीं मदिकेरी देश का सबसे साफ शहर रहा, जहां एक्यूआई 36 रिकॉर्ड हुआ।
दिल्ली में भी प्रदूषण बढ़कर 230 पहुंच गया, जबकि गुरुग्राम, मंडीदीप और श्री गंगानगर जैसे शहर शीर्ष प्रदूषित सूची में शामिल रहे।
कुल 239 शहरों में से महज 3.3 फीसदी में हवा साफ पाई गई, जबकि करीब 62 फीसदी शहरों में वायु गुणवत्ता चिंताजनक बनी हुई है।
विश्लेषण के मुताबिक 14 फरवरी 2026 को देश में बल्लभगढ़ सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 284 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे एक दिन पहले यानी 13 फरवरी को बल्लभगढ़ में एक्यूआई 262 था। यानी बीते 24 घंटों में प्रदूषण के स्तर में 22 अंकों का उछाल आया है।
रुझानों में सामने आया है कि बल्लभगढ़ की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
बल्लभगढ़ में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 500 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 36 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर बल्लभगढ़ की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति करीब सात गुणा खराब है।
गौरतलब है कि कल देश में सूरत की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब एक्यूआई 286 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज वहां 54 अंकों के सुधार के साथ प्रदूषण का स्तर घटकर 232 पर पहुंच गया है। मतलब कि सुधार के बावजूद वायु गुणवत्ता आज भी खराब बनी हुई है।
राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। इसके साथ ही वायु गुणवत्ता मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई है। कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 197 दर्ज किया गया था, जो 14 फरवरी को 33 अंकों के उछाल के साथ बढ़कर 230 पर पहुंच गया। इससे पहले 18 जनवरी को दिल्ली में 2026 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 14 फरवरी 2026 को 239 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 3.3 फीसदी शहरों में हवा साफ है।
वहीं 34.7 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 61.9 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक बनी हुई है।
बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 33 फीसदी से अधिक का इजाफा हुआ है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 1.2 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में 6.8 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरफ खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 38.9 फीसदी का उछाल आया है, जोकि चिंता का विषय है।
फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 181 (+32) दर्ज किया गया है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में गुरुग्राम (276) दूसरे जबकि मंडीदीप (268) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 267 अंकों के साथ श्री गंगानगर चौथे स्थान पर है। गाजियाबाद-टोंक में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 255 और 244 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
पीथमपुर (242) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में बहादुरगढ़ (241), मानेसर (238) और नागपुर (232) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में मध्य प्रदेश के दो (मंडीदीप, पीथमपुर) और हरियाणा के चार शहर (बल्लभगढ़, गुरुग्राम, बहादुरगढ़, मानेसर) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि गुरुग्राम, मंडीदीप, गाजियाबाद, टोंक, पीथमपुर, बहादुरगढ़, मानेसर, नागपुर, सूरत, दिल्ली, वडोदरा, हापुड़, नोएडा, पंचगांव, देहरादून, मुजफ्फरनगर, धारूहेड़ा, गुम्मिडीपूंडी, नाहरलागुन, भिवानी, सिंगरौली, चित्तौड़गढ़, अंकलेश्वर, कटक, करनाल, तुमकुरु, बिलीपाड़ा, कोलकाता, इंदौर, भोपाल, यमुना नगर, उज्जैन, बेलापुर, मंडीखेड़ा, बागपत, ग्वालियर, सिरसा, हाजीपुर, डूंगरपुर, बर्नीहाट, पुणे, नलबाड़ी, बद्दी, राजकोट, रोहतक, सोनीपत, नागांव, उल्हासनगर, एलूर, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), भीलवाड़ा, नांदेड़, चंडीगढ़, सांगली, मुरादाबाद, बारीपदा, जलना, वापी आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं बल्लभगढ़, ग्रेटर नोएडा, गुवाहाटी, भिवाड़ी, विशाखापत्तनम, बुलंदशहर, फरीदाबाद, सीकर, हावड़ा, बीकानेर, मेरठ, अमरावती (आंध्रप्रदेश), गांधीनगर, कोटा, बारबिल, जालोर, वातवा, अहमदाबाद, रतलाम, चूरू, भुवनेश्वर, चंद्रपुर, भावनगर, भिवंडी, कल्याण, झुंझुनू, मंडी गोबिंदगढ़, सिलीगुड़ी, जैसलमेर, पाली, कुरुक्षेत्र, उदयपुर, जयपुर, खुर्जा, नवी मुंबई, अमरावती (महाराष्ट्र), सुआकाती, प्रतापगढ़, मुंबई, बदलापुर, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, मंगुराहा, आगरा, अलवर, नयागढ़, महाड, देवास, कानपुर, अहमदनगर, बांसवाड़ा, चरखी दादरी, कन्नूर, सागर, कुंजेमुरा, बठिंडा, हनुमानगढ़, राजमहेंद्रवरम आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 3.3 फीसदी यानी महज आठ शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बागलकोट, चामराजनगर, चिक्काबल्लापुर, दमोह, मदिकेरी, रूपनगर, शिवमोगा, श्रीनगर आदि शामिल हैं।
आज देश के जिन 83 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें अमृतसर, अनंतपुर, अररिया, आरा, बरेली, बाड़मेर, बैरकपुर, बेगूसराय, बेंगलुरु, बेतिया, भागलपुर, भिलाई, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बक्सर, चेन्नई, छाल, छपरा, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, कोयंबटूर, दौसा, धारवाड़, धौलपुर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, गोरखपुर, हिसार, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जालंधर, झांसी, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, करौली, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोल्लम, कोरबा, लातूर, मिलुपारा, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नारनौल, पलवल आदि शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 123 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र), अंगुल, अंकलेश्वर, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बागपत, बालासोर, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बारीपदा, बठिंडा, बेलापुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलीपाड़ा, बोइसर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, बर्नीहाट, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, देवास, धनबाद, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, फरीदाबाद, गांधीनगर, गया, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावड़ा, इंदौर, जयपुर, जैसलमेर, जलगांव, जलना, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जोधपुर, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करनाल, खुर्जा, कोलकाता, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, महाड, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मंगुराहा, मेरठ, मेहसाना , मुरादाबाद, मुंबई, नागांव, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पाली, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, पुणे, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, रोहतक, राउरकेला, सागर, सांगली, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सिंगरौली, सिरसा, सोनीपत, सुआकाती, ठाणे, तुमकुरु, तुमडीह, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वापी, वातवा, विरार, वृंदावन, यमुना नगर शामिल हैं।
आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 25 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, भिवाड़ी, ब्यासनगर, देहरादून, दिल्ली, धारूहेड़ा, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, गुवाहाटी, हापुड़, मंडीदीप, मानेसर, मुजफ्फरनगर, नागपुर, नोएडा, पंचगांव, पीथमपुर, श्री गंगानगर, सूरत, टोंक, वडोदरा, विशाखापत्तनम शामिल हैं।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 239 में से महज आठ शहरों में हवा 'बेहतर' है। 83 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 13 फरवरी 2026 को यह आंकड़ा 82 दर्ज किया गया था।
123 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज बल्लभगढ़ में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 284 पर पहुंच गया। इससे पहले कल बल्लभगढ़ में एक्यूआई 262 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 22 अंकों का इजाफा हुआ है।
कल सूरत में वायु गुणवत्ता सूचकांक 286 दर्ज किया गया था। जहां आज 54 अंकों के सुधार के साथ सूचकांक घटकर 232 पर पहुंच गया। मतलब कि आज भी सूरत में वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली में 14 फरवरी को प्रदूषण में इजाफा दर्ज किया गया। दिल्ली में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक 197 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 230 पर पहुंच गया। मतलब कि कल से दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में 33 अंकों का उछाल आया है। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 1,400 फीसदी अधिक खराब है।
फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में उछाल आया है। फरीदाबाद में कल जहां एक्यूआई 149 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 181 पर पहुंच गया है। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 14 फरवरी को श्री गंगानगर चौथे स्थान पर है, वहीं गुरुग्राम (276) दूसरे, जबकि मंडीदीप (268) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 159, गाजियाबाद में 255, गुवाहाटी में 226, गुरूग्राम में 276, नोएडा में 214, ग्रेटर नोएडा में 226 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 125 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 115, चेन्नई में 91, चंडीगढ़ में 126, हैदराबाद में 87, जयपुर में 133 और पटना में 124 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन आठ शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें बागलकोट, चामराजनगर, चिक्काबल्लापुर, दमोह, मदिकेरी, रूपनगर, शिवमोगा, श्रीनगर शामिल हैं।
वहीं अगरतला, आइजोल, अंबाला, अमृतसर, अनंतपुर, अररिया, आरा, बरेली, बाड़मेर, बैरकपुर, बेगूसराय, बेंगलुरु, बेतिया, भागलपुर, भिलाई, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बक्सर, चेन्नई, छाल, छपरा, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, कोयंबटूर, दौसा, धारवाड़, धौलपुर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, गोरखपुर, हिसार, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जालंधर, झांसी, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, करौली, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोल्लम, कोरबा, लातूर, मिलुपारा, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नारनौल, पलवल, पंपोर, पंचकुला, परभनी, पटियाला, प्रयागराज, पुदुचेरी, पूर्णिया, रायपुर, रामनगर, ऋषिकेश, सहरसा, समस्तीपुर, सासाराम, सिलचर, सिरोही, सिवान, सोलापुर, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, वाराणसी, विजयपुरा, विजयवाड़ा, यादगीर आदि 83 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:
गुरुग्राम से सूरत तक पहुंचा प्रदूषण, गुवाहाटी में भी 222 दर्ज किया गया एक्यूआई