यह रिपोर्ट एक बार फिर बताती है कि देश में हवा की तस्वीर कितनी असमान और चिंताजनक हो चुकी है। 07 जुलाई 2026 को लगातार दूसरे दिन बिहार का आरा देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां एक्यूआई 284 दर्ज किया गया। सिर्फ 24 घंटों में यह सूचकांक 235 से बढ़कर 284 पर पहुंच गया, यानी 49 अंकों का उछाल।
आरा की हवा में पीएम2.5 का दबदबा है और यही सबसे बड़ी चिंता है, क्योंकि यह बेहद महीन जहरीले कण फेफड़ों के भीतर तक पहुंचकर शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। स्थिति की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आरा में प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 1,790 फीसदी अधिक है।
दूसरी ओर रायपुर देश का सबसे साफ शहर रहा, जहां एक्यूआई महज 10 दर्ज हुआ।
दिल्ली और फरीदाबाद में भी हवा बिगड़ी है। दिल्ली का एक्यूआई 94 से बढ़कर 113 और फरीदाबाद का 59 से 120 पर पहुंच गया, जिससे दोनों शहरों की हवा संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में खिसक गई।
हालांकि तस्वीर पूरी तरह निराशाजनक नहीं है। 233 शहरों के विश्लेषण में 99 शहरों की हवा साफ और 102 शहरों की संतोषजनक पाई गई। लेकिन आरा, गुरुग्राम, यमुना नगर और मानेसर जैसे शहर यह याद दिलाते हैं कि राहत के इन आंकड़ों के बीच भी देश का एक बड़ा हिस्सा अब भी जहरीली हवा के साये में सांस लेने को मजबूर है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 07 जुलाई 2026 को देश में एक बार फिर आरा सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 284 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (06 जुलाई) को आरा में सूचकांक 235 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 49 अंकों का उछाल आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि आरा की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
आरा में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,790 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में रायपुर की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 10 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर आरा की तुलना रायपुर से करें तो वहां स्थिति 28.4 गुणा खराब है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 94 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 113 पर पहुंच गया। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 19 अंकों की गिरावट आई है। इसके साथ ही दिल्ली में आज एक बार फिर वायु गुणवत्ता सूचकांक संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गया है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 30 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 85 पर पहुंच गया। वहीं 05 मई को सूचकांक 86, जबकि 04 मई को 88 दर्ज किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में वृद्धि हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 59 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 120 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 61 अंकों के उछाल के साथ फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 07 जुलाई 2026 को 233 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 42.5 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 43.8 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 13.7 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में करीब 4.2 फीसदी का इजाफा हुआ है। इसी तरफ संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में एक फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 30.4 फीसदी का उछाल आया है। वहीं दूसरी तरफ खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में गुरुग्राम (208) दूसरे जबकि यमुना नगर (196) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह मानेसर (192) चौथे स्थान पर है। ग्रेटर नोएडा (191)– बहादुरगढ़ (185) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
खोरा (185) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में सतारा (178), सिलीगुड़ी (171) और विशाखापत्तनम (171) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के चार शहर (गुरुग्राम, यमुना नगर, मानेसर, बहादुरगढ़) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि आरा, गुरुग्राम, यमुना नगर, मानेसर, बहादुरगढ़, खोरा, सतारा, गुम्मिडीपूंडी, बल्लभगढ़, भिवानी, फरीदाबाद, धनबाद, चूरू, देवास, छपरा, बिहार शरीफ, करनाल, चरखी दादरी, जींद, कटक आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं ग्रेटर नोएडा, विशाखापत्तनम, जैसलमेर, नोएडा, दिल्ली, अमृतसर, गाजियाबाद, फतेहाबाद आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 42.5 फीसदी यानी 99 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बरेली, बाड़मेर, बीड, बेगूसराय, भरतपुर, भिलाई, भोपाल, बिलाईपाड़ा, बोइसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, बक्सर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, छाल, चिक्कमगलुरु, चित्तौड़गढ़, कोयंबटूर, कुड्डालोर, दमोह, देहरादून, धुले, डोंबिवली, डूंगरपुर, फिरोजाबाद, गडग, गांधीनगर, गया, गुवाहाटी, हाजीपुर, हिंगोली, हैदराबाद, जबलपुर, जलगांव, जलना, जालोर, झालावाड़, झांसी, जोरापोखर, कैथल, कलबुर्गी, कानपुर, कारवार, काशीपुर, कटनी, क्योंझर, कोप्पल, कोटा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, मदिकेरी, मैहर, मालेगांव, मंगलौर, मीरा-भायंदर, नागौर, नागपुर, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, पंपोर, पंचकुला, परभणी, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़ आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 102 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें अंबाला, अनंतपुर, अंगुल, बद्दी, बागपत, बालासोर, बांसवाड़ा, बारीपाड़ा, बैरकपुर, बठिंडा, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भुवनेश्वर, बीकानेर, बुलंदशहर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, दौसा, धारूहेड़ा, दुर्गापुर, एलुरु, गोरखपुर, गुंटूर, ग्वालियर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हापुड़, हावड़ा, इंदौर, जयपुर, जालंधर, जोधपुर, कडप्पा, कल्याण, कन्नूर, करौली, कटिहार, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, मछलीपट्टनम, महाद, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मथुरा, मेहसाणा, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नारनौल, पलवल, पंचगांव, पटियाला आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 30 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अंकलेश्वर, बद्दी, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, भिवानी, बिहार शरीफ, बीकानेर, चरखी दादरी, छपरा, धनबाद, फतेहाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, करनाल, खोरा, मंडी गोबिंदगढ़, मेरठ, मेहसाणा, नारनौल, पानीपत, तालचेर, विशाखापत्तनम आदि शामिल हैं।
इसी तरह आरा (284) और गुरुग्राम (208) में स्थिति खराब दर्ज की गई है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 233 में से 99 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 102 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 06 जुलाई को यह आंकड़ा 101 दर्ज किया गया था।
30 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज एक बार फिर आरा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 284 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (06 जुलाई) को आरा में सूचकांक 235 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 49 अंकों का उछाल आया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 94 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 113 पर पहुंच गया। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 19 अंकों की गिरावट आई है। इसके साथ ही दिल्ली में आज एक बार फिर वायु गुणवत्ता सूचकांक संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गया है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में वृद्धि हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 59 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 120 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 61 अंकों के उछाल के साथ फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 07 जुलाई को मानेसर (192) चौथे स्थान पर है, वहीं गुरुग्राम (208) दूसरे, जबकि यमुना नगर (196) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 70, गाजियाबाद में 109, गुवाहाटी में 41, गुरूग्राम में 208, नोएडा में 118, ग्रेटर नोएडा में 191 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 68 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 55, चेन्नई में 74, चंडीगढ़ में 49, हैदराबाद में 48, जयपुर में 53 और पटना में 54 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 99 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, अकोला, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बागलकोट, बारां, बरबिल, बरेली, बाड़मेर, बीड, बेगूसराय, भरतपुर, भिलाई, भोपाल, बिलाईपाड़ा, बोइसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, बक्सर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, छाल, चिक्कमगलुरु, चित्तौड़गढ़, कोयंबटूर, कुड्डालोर, दमोह, देहरादून, धुले, डोंबिवली, डूंगरपुर, फिरोजाबाद, गडग, गांधीनगर, गया, गुवाहाटी, हाजीपुर, हिंगोली, हैदराबाद, जबलपुर, जलगांव, जलना, जालोर, झालावाड़, झांसी, जोरापोखर, कैथल, कलबुर्गी, कानपुर, कारवार, काशीपुर, कटनी, क्योंझर, कोप्पल, कोटा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, मदिकेरी, मैहर, मालेगांव, मंगलौर, मीरा-भायंदर, नागौर, नागपुर, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, पंपोर, पंचकुला, परभणी, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, पुणे, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजसमंद, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सागर, सांगली, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, सोलापुर, टेन्सा, ठाणे, टोंक, उलहासनगर, वाराणसी, यादगीर शामिल हैं।
वहीं अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अनंतपुर, अंगुल, बद्दी, बागपत, बालासोर, बांसवाड़ा, बारीपाड़ा, बैरकपुर, बठिंडा, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भुवनेश्वर, बीकानेर, बुलंदशहर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, दौसा, धारूहेड़ा, दुर्गापुर, एलुरु, गोरखपुर, गुंटूर, ग्वालियर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हापुड़, हावड़ा, इंदौर, जयपुर, जालंधर, जोधपुर, कडप्पा, कल्याण, कन्नूर, करौली, कटिहार, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, मछलीपट्टनम, महाद, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मथुरा, मेहसाणा, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नारनौल, पलवल, पंचगांव, पटियाला, पटना, प्रयागराज, पुडुचेरी, पूर्णिया, रायबरेली, राजगीर, राजकोट, रोहतक, रूपनगर, सतना, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरसा, श्री गंगानगर, श्रीनगर, सूरत, तालचेर, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तुमडीह, उदयपुर, उज्जैन, वडोदरा, वातवा, विजयवाड़ा, वृंदावन आदि 102 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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