07 मई 2026 को देश में वायु प्रदूषण की तस्वीर बेहद असंतुलित नजर आई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, श्री गंगानगर 301 एक्यूआई के साथ एक बार फिर देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा, जहां स्थिति ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंच चुकी है। पिछले 24 घंटों में यहां प्रदूषण में 27 अंकों का उछाल दर्ज किया गया और हवा में ओजोन की अधिकता ने हालात और गंभीर बना दिए हैं।
इसके विपरीत, मोतिहारी 24 एक्यूआई के साथ देश का सबसे स्वच्छ शहर रहा, जिससे दोनों शहरों के बीच वायु गुणवत्ता का भारी अंतर सामने आया।
राष्ट्रीय स्तर पर 236 शहरों में से केवल 18.2 फीसदी शहरों में हवा ‘बेहतर’ रही, जबकि 51.7 फीसदी में स्थिति संतोषजनक और 30.1 फीसदी शहरों में चिंताजनक दर्ज की गई। मंडीदीप (286) और वातवा (219) भी ‘खराब’ श्रेणी में रहे, जबकि चूरू, चरखी दादरी और पीथमपुर जैसे शहरों में पीएम2.5 और पीएम10 का दबाव अधिक रहा।
दिल्ली और फरीदाबाद में भी प्रदूषण में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई, हालांकि दोनों शहर मध्यम श्रेणी में बने रहे। कुल मिलाकर, देश में प्रदूषण का असमान वितरण साफ दिखता है, जहां कुछ शहरों में हवा साफ है, वहीं कई इलाके लगातार जहरीली हवा से जूझ रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 07 मई 2026 को एक बार फिर देश में श्री गंगानगर सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 301 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल श्री गंगानगर में सूचकांक 274 दर्ज किया गया। मतलब की कल से वहां प्रदूषण में 27 अंकों का उछाल आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि श्री गंगानगर की हवा में ओजोन पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
श्री गंगानगर में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 400 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में मोतिहारी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 24 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर श्री गंगानगर की तुलना मोतिहारी से करें तो वहां स्थिति 12.5 गुणा खराब है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 121 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 125 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 4 अंकों का इजाफा दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 05 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 86 पर पहुंच गया। वहीं 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को एक्यूआई 93 रिकॉर्ड किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 104 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 117 पर पहुंच गया। मतलब कि वहां भी आज वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 07 मई 2026 को 236 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 18.2 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 51.7 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 30.1 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 10.4 फीसदी की कमी आई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 6.2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से करीब 26 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया, जोकि चिंता का विषय है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में मंडीदीप (286) दूसरे जबकि वातवा (219) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह चुरू (193) चौथे स्थान पर है। चरखी दादरी- पीथमपुर में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 181 और 173 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
सवाई माधोपुर (172) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में गाजियाबाद (171), सिरसा (171) और बर्नीहाट (असम) (163) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में राजस्थान के तीन शहर (श्री गंगानगर, चूरू, सवाई माधोपुर) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि मंडीदीप, वातवा, चरखी दादरी, बर्नीहाट (असम), भावनगर, धारूहेड़ा, राजकोट, मुजफ्फरनगर, पंचगांव, उज्जैन, महाड, नंदेसरी आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं ग्रेटर नोएडा, बांसवाड़ा, सिंगरौली, अहमदाबाद, नयागढ़, बीकानेर, मेहसाणा, बल्लभगढ़, जैसलमेर, नोएडा, पाली, गुरुग्राम, भिवाड़ी, जोधपुर, सीकर, गांधीनगर, टोंक, उदयपुर, दिल्ली, बाड़मेर, भीलवाड़ा, मेरठ, बर्नीहाट (मेघालय), नागौर, जोरापोखर, वडोदरा, चित्तौड़गढ़, फरीदाबाद, जालोर, भोपाल, सिरोही, अंकलेश्वर, बारबिल, जयपुर, पानीपत, कोटा, रतलाम, हनुमानगढ़, अजमेर, प्रतापगढ़ आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 18.2 फीसदी यानी 43 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बिहार शरीफ, बक्सर, चामराजनगर, चेन्नई, छपरा, चिक्काबल्लापुर, कुड्डालोर, दुर्गापुर, गया, गुवाहाटी, हल्दिया, कानपुर, कोहिमा, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, मदिकेरी, मैहर, मंडीखेड़ा, मोतिहारी, नाहरलागुन, नलबाड़ी, पेरुंदुरई, पुडुचेरी, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, रूपनगर, शिलांग, श्रीनगर, सुआकाती, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 122 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें देवास, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, एलुरु, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, हाजीपुर, हापुड़, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, जलना, झांसी, कैथल, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, करौली, करनाल, कटिहार, क्योंझर, खुर्जा, किशनगंज, कोल्हापुर, कोल्लम, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नागपुर, नांदेड़, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, पलवल, पंचकुला, परभणी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायरंगपुर, राजसमंद, रोहतक, राउरकेला, सहरसा, सतना, शिवमोगा, सिलचर आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 68 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अहमदाबाद, अजमेर, अंगुल, अंकलेश्वर, औरंगाबाद (बिहार), बद्दी, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बाड़मेर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भोपाल, बीकानेर, बूंदी, बर्नीहाट (असम), बर्नीहाट (मेघालय), चरखी दादरी, चित्तौड़गढ़, चुरू, दिल्ली, धनबाद, धारूहेड़ा, फरीदाबाद, गांधीनगर, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, ग्वालियर, हनुमानगढ़, जयपुर, जैसलमेर, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कटनी, कोटा, महाड, मेरठ, मेहसाणा, मुजफ्फरनगर, नागौर, नंदेसरी, नयागढ़, नोएडा, पाली, पंचगांव, पानीपत, पीथमपुर, प्रतापगढ़, राजकोट, रतलाम, सागर, सवाई माधोपुर, सीकर, सिंगरौली, सिरोही, सिरसा, टोंक, उदयपुर, उज्जैन, वडोदरा आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश में मंडीदीप (286) और वातवा (219) में स्थिति ‘खराब’ है। श्री गंगानगर (301) में स्थिति बेहद खराब दर्ज की गई है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 236 में से 43 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 122 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 06 मई को यह आंकड़ा 130 दर्ज किया गया था।
68 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज एक बार फिर श्री गंगानगर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 301 दर्ज किया गया। इससे पहले कल श्री गंगानगर में सूचकांक 274 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण में 27अंकों का इजाफा हुआ है। इसके साथ ही आज श्री गंगानगर में वायु गुणवत्ता खराब से बेहद खराब हो गई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 121 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 125 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 4 अंकों का इजाफा दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 104 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 117 पर पहुंच गया। मतलब कि वहां भी आज वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 07 मई को चुरू चौथे स्थान पर है, वहीं मंडीदीप (286) दूसरे, जबकि वातवा (219) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 111, गाजियाबाद में 171, गुवाहाटी में 46, गुरूग्राम में 136, नोएडा में 142, ग्रेटर नोएडा में 159 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 71 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 64, चेन्नई में 35, चंडीगढ़ में 56, हैदराबाद में 68, जयपुर में 113 और पटना में 94 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 43 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबरनाथ, अररिया, बरेली, बैरकपुर, भिलाई, बिहार शरीफ, बक्सर, चामराजनगर, चेन्नई, छपरा, चिक्काबल्लापुर, कुड्डालोर, दुर्गापुर, गया, गुवाहाटी, हल्दिया, कानपुर, कोहिमा, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, मदिकेरी, मैहर, मंडीखेड़ा, मोतिहारी, नाहरलागुन, नलबाड़ी, पेरुंदुरई, पुडुचेरी, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, रूपनगर, शिलांग, श्रीनगर, सुआकाती, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, तिरुमाला, तिरुपति, विजयपुरा, विरुधुनगर शामिल हैं।
वहीं अगरतला, आगरा, अहमदनगर, अलवर, अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बागलकोट, बागपत, बहादुरगढ़, बालासोर, बारीपदा, बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भिवंडी, भिवानी, भुवनेश्वर, बिलीपाड़ा, बोइसर, बुलंदशहर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, कोयंबटूर, कटक, दमोह, दौसा, देवास, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, एलुरु, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, हाजीपुर, हापुड़, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, जलना, झांसी, कैथल, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, करौली, करनाल, कटिहार, क्योंझर, खुर्जा, किशनगंज, कोल्हापुर, कोल्लम, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नागपुर, नांदेड़, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, पलवल, पंचकुला, परभणी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायरंगपुर, राजसमंद, रोहतक, राउरकेला, सहरसा, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिलीगुड़ी, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, सोनीपत, सूरत, तालचेर, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तुमडीह, उल्हासनगर, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार, विशाखापत्तनम, वृंदावन, यादगीर आदि 122 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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