प्रतीकात्मक तस्वीर: सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट 
वायु

हवा का रिपोर्ट कार्ड: 221 एक्यूआई के साथ भिवानी सबसे आगे; दिल्ली-फरीदाबाद में भी बढ़ा प्रदूषण

27 अगस्त 2026 को 249 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि जहां 24.9 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 48.6 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि 26.5 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं।

Lalit Maurya

  • 27 अगस्त को देश की हवा में एक बार फिर प्रदूषण बढ़ने के संकेत मिले। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 249 शहरों के आंकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक, भिवानी 221 एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा। यहां एक दिन में ही एक्यूआई 85 अंक बढ़ा है और प्रदूषण में पीएम2.5 की प्रमुख भूमिका रही।

  • भिवानी में प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 1,370 फीसदी अधिक दर्ज किया गया। इसके उलट कर्नाटक का कारवार 21 एक्यूआई के साथ सबसे साफ शहर रहा।

  • प्रदूषण का बढ़ता दबाव दिल्ली-एनसीआर में भी नजर आया। दिल्ली का एक्यूआई 94 से बढ़कर 129 और फरीदाबाद का 89 से बढ़कर 149 पहुंच गया।

  • वहीं देश में मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की संख्या एक दिन में करीब 60 फीसदी बढ़ी है। 249 शहरों में 62 की हवा साफ, 121 की संतोषजनक और 64 की मध्यम रही, जबकि भिवानी और खोरा की हवा खराब श्रेणी में पहुंच गई।

  • आंकड़े बताते हैं कि प्रदूषण अब केवल सर्दियों की समस्या नहीं, बल्कि सालभर बदलते स्तरों के साथ कायम चुनौती है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 27 अगस्त 2026 को देश में भिवानी सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 221 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। हालांकि कल (26 अगस्त) भिवानी में सूचकांक 136 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 85 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि भिवानी की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

भिवानी में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,370 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में कारवार की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 21 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर भिवानी की तुलना कारवार से करें तो वहां स्थिति 10.5 गुणा खराब है।

वहीं कल देश में खैरथल की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 196 रिकॉर्ड किया गया था। आज खैरथल में 71 अंकों के भारी सुधार के साथ सूचकांक घटकर 125 पर पहुंच गया। हालांकि गुणवत्ता अभी भी ‘मध्यम’ श्रेणी में बनी हुई है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 94 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 129 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 35 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज एक बार फिर संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है। 

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 07-27 अगस्त को 63 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64  दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 89 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 149 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 60 अंक के उछाल के साथ फरीदाबाद में आज एक्यूआई संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गया है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 27 अगस्त 2026 को 249 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 24.9 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 48.6 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 26.5 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 12.7 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 17.1 फीसदी की कमी दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से करीब 60 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जोकि चिंता का विषय है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में खोरा (209) दूसरे जबकि लेह (188) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह पाली (175) चौथे स्थान पर है। बागपत (163) – नोएडा (161) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

श्री गंगानगर (154) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में जींद (151), नयागढ़ (150) और फरीदाबाद (149) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के चार शहर (भिवानी, खोरा, जींद, फरीदाबाद) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि भिवानी, खोरा, नोएडा, जींद, फरीदाबाद, भागलपुर, औरंगाबाद (बिहार), मेरठ, मोदीनगर, गया, चरखी दादरी, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, यमुनानगर, मानेसर, बारबिल, खन्ना और मुजफ्फरनगर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं पाली, बागपत, श्री गंगानगर, नयागढ़, सासाराम, जैसलमेर, सीकर, भीलवाड़ा, अजमेर, पानीपत, नागौर, जालौर, पीथमपुर, दिल्ली, नारनौल, विशाखापत्तनम, उदयपुर, गाजियाबाद, खैरथल, बीकानेर, बाड़मेर, सिरोही, ग्रेटर नोएडा, मेहसाणा, प्रतापगढ़, बिलाईपाड़ा, गांधीनगर, हिसार, जोधपुर, सिरसा, टोंक, छपरा, अहमदाबाद, चित्तौड़गढ़, अलवर, मंडीखेड़ा, कैथल, बद्दी, वातवा, अंबरनाथ, भिवाड़ी, जयपुर, राजसमंद, तालचेर, सिवान और मंगुराहा आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 24.9 फीसदी यानी 62 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में भरतपुर, भिलाई, भिवंडी, बोइसर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चिक्कमगलुरु, कुड्डालोर, धौलपुर, धुले, डोंबिवली, फिरोजाबाद, गुवाहाटी, हाजीपुर, हुबली, झांसी, कलबुर्गी, कानपुर, करौली, कारवार, कटनी, खुर्जा, कोल्हापुर, कोरबा, कुरनूल, लखनऊ, मदिकेरी, महाद, मैहर, मथुरा, मीरा-भायंदर, मुंबई, नागपुर, नाहरलागुन, नासिक, पंपोर, परभणी, प्रयागराज, पुडुचेरी, रामनगर, ऋषिकेश, राउरकेला, सागर, शिलांग, सिलचर, शिवसागर, सोलापुर, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर, तिरुमाला, तुमडीह, उल्हासनगर आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 121 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बुलंदशहर, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, चेन्नई, छाल, कटक, दमोह, दौसा, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, फतेहाबाद, फतेहपुर सीकरी, गडग, गजरौला, गुंटूर, ग्वालियर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हापुड़, हिंगोली, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, जलना, झालावाड़, झुंझुनू, जोरापोखर, कडप्पा, काकीनाडा, कल्याण, करनाल, कटिहार, क्योंझर, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लातूर, मछलीपट्टनम, मालेगांव, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नांदेड़, नंदेसरी, नवी मुंबई, नेल्लोर, पलवल, पंचकुला, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पुणे, रायबरेली, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, रतलाम, रोहतक, रूपनगर, सहरसा, सतारा, सतना आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 64 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें अहमदाबाद, अजमेर, अलवर, अंबरनाथ, औरंगाबाद (बिहार), बद्दी, बागपत, बारबिल, बाड़मेर, भागलपुर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, बीकानेर, बिलाईपाड़ा, चरखी दादरी, छपरा, चित्तौड़गढ़, दिल्ली, फरीदाबाद, गांधीनगर, गया, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, हिसार, जयपुर, जैसलमेर, जालौर, जींद, जोधपुर, कैथल, खैरथल, खन्ना, लेह, मंडीखेड़ा, मानेसर, मंगुराहा, मेरठ, मेहसाणा, मोदीनगर, मुजफ्फरनगर, नागौर, नारनौल, नयागढ़, नोएडा, पाली, पानीपत, पीथमपुर, प्रतापगढ़, राजसमंद, सासाराम, सीकर, सिलीगुड़ी, सिरोही, सिरसा, सिवान, श्री गंगानगर, तालचेर, टोंक, उदयपुर, वातवा, विशाखापत्तनम और यमुनानगर आदि शामिल हैं।

वहीं भिवानी (221) और खोरा (209) में स्थिति खराब है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 249 में से 62 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 121 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 26 अगस्त को भी यह आंकड़ा 146 दर्ज किया गया था।

64 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज भिवानी में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 221 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। हालांकि कल (26 अगस्त) भिवानी में सूचकांक 136 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 85 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।

वहीं कल देश में खैरथल की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 196 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज खैरथल में 71 अंकों के भारी सुधार के साथ सूचकांक घटकर 125 पर पहुंच गया। हालांकि गुणवत्ता अभी भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 94 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 129 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 35 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज एक बार फिर संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है। 

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 89 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 149 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 60 अंक के उछाल के साथ फरीदाबाद में आज एक्यूआई संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गया है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 27 अगस्त को पाली (175) चौथे स्थान पर है, वहीं खोरा (209) दूसरे, जबकि लेह (188) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 100, गाजियाबाद में 125, गुवाहाटी में 31, गुरूग्राम में 118, नोएडा में 161, ग्रेटर नोएडा में 118 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 47 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 46, चेन्नई में 73, चंडीगढ़ में 48, हैदराबाद में 51, जयपुर में 105 और पटना में 64 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 62 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में अकोला, अररिया, बदलापुर, बारां, बरेली, बेतिया, भरतपुर, भिलाई, भिवंडी, बोइसर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चिक्कमगलुरु, कुड्डालोर, धौलपुर, धुले, डोंबिवली, फिरोजाबाद, गुवाहाटी, हाजीपुर, हुबली, झांसी, कलबुर्गी, कानपुर, करौली, कारवार, कटनी, खुर्जा, कोल्हापुर, कोरबा, कुरनूल, लखनऊ, मदिकेरी, महाद, मैहर, मथुरा, मीरा-भायंदर, मुंबई, नागपुर, नाहरलागुन, नासिक, पंपोर, परभणी, प्रयागराज, पुडुचेरी, रामनगर, ऋषिकेश, राउरकेला, सागर, शिलांग, सिलचर, शिवसागर, सोलापुर, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर, तिरुमाला, तुमडीह, उल्हासनगर, वाराणसी, वृंदावन और यादगीर शामिल हैं।

वहीं अगरतला, आगरा, अमरावती (आंध्र प्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बहादुरगढ़, बालासोर, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारीपाड़ा, बैरकपुर, बठिंडा, बीड, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भावनगर, भोपाल, भुवनेश्वर, बिलासपुर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, चेन्नई, छाल, कटक, दमोह, दौसा, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, फतेहाबाद, फतेहपुर सीकरी, गडग, गजरौला, गुंटूर, ग्वालियर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हापुड़, हिंगोली, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, जलना, झालावाड़, झुंझुनू, जोरापोखर, कडप्पा, काकीनाडा, कल्याण, करनाल, कटिहार, क्योंझर, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लातूर, मछलीपट्टनम, मालेगांव, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नांदेड़, नंदेसरी, नवी मुंबई, नेल्लोर, पलवल, पंचकुला, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पुणे, रायबरेली, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, रतलाम, रोहतक, रूपनगर, सहरसा, सतारा, सतना, सवाई माधोपुर, शामली, शिवमोगा, सोनीपत, श्रीकाकुलम, श्रीनगर, सूरत, ठाणे, थूथुकुडी, तिरुपति, उज्जैन, वडोदरा, वापी, विजयवाड़ा और विरार आदि 121 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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