भारत की 96 फीसदी आबादी यानी 133 करोड़ लोग ऐसी हवा में सांस लेने को मजबूर हैं जहां पीएम 2.5 का वार्षिक औसत स्तर डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी मानकों से सात गुणा खराब है; फोटो: आईस्टॉक 
वायु

हवा का हाल: 293 एक्यूआई के साथ सहरसा सबसे प्रदूषित; खोरा, बड़ौत, भिवाड़ी, नोएडा में भी स्थिति 'खराब'

दूसरी तरफ आइजोल की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 14 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि सहरसा की तुलना आइजोल से करें तो वहां स्थिति 20 गुणा खराब है।

Lalit Maurya

  • जिस हवा में लोग हर दिन सांस ले रहे हैं, उसकी गुणवत्ता कई शहरों में तेजी से बदल रही है।

  • 20 सितंबर को सहरसा का एक्यूआई 293 तक पहुंच गया, जिसके साथ ही वह देश का सबसे प्रदूषित शहर भी बन गया। खोरा (266), बड़ौत (230), भिवाड़ी (219) और नोएडा (215) भी ‘खराब’ श्रेणी में रहे।

  • दूसरी ओर आइजोल में एक्यूआई महज 14 दर्ज हुआ। दोनों शहरों के बीच करीब 21 गुना का अंतर बताता है कि देश में हवा की गुणवत्ता कितनी असमान है।

  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 243 शहरों के लिए जारी आंकड़ों विश्लेषण में 56 शहरों की हवा ‘बेहतर’, 128 की ‘संतोषजनक’ और 54 की ‘मध्यम’ श्रेणी में रही। हालांकि खराब हवा वाले शहरों की संख्या बढ़कर पांच हो गई।

  • दिल्ली में सिर्फ 24 घंटे में एक्यूआई 42 अंक बढ़कर 160 और फरीदाबाद में 26 अंक बढ़कर 163 हो गया। इससे साफ है कि प्रदूषण की समस्या केवल सर्दियों या बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है।

  • पीएम2.5 और पीएम10 जैसे महीन कण कई शहरों की हवा में हावी हैं, जो लगातार निगरानी और प्रदूषण के स्रोतों पर नियंत्रण की जरूरत को रेखांकित करते हैं।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 20 सितम्बर 2026 को देश में सहरसा  सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 293 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (19 सितम्बर) सरकारी आंकड़ों में सहरसा का जिक्र नहीं था।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि सहरसा की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

सहरसा में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 550 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में आइजोल की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 14 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर सहरसा की तुलना आइजोल से करें तो वहां स्थिति 20 गुणा खराब है।

इससे पहले कल देश में मोदीनगर की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 203 दर्ज किया गया। हालांकि आज 19 अंकों के सुधार के साथ मोदीनगर में एक्यूआई 184 पर पहुंच गया है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 118 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 160 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 42 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता ‘मध्यम’ श्रेणी में बनी हुई है।

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 07-20 सितम्बर को 63 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64  दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 137 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 163 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 26 अंकों के उछाल के बावजूद फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 20 सितम्बर 2026 को 243 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 23 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 52.7 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि दूसरी तरफ 24.3 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 24.3 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 7.2 फीसदी की कमी दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से करीब 80 फीसदी की वृद्धि हुई है, जोकि चिंता की खबर है। वहीं खराब हवा वाले शहरों की गिनती बढ़कर पांच पर पहुंच गई है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में खोरा (266) दूसरे जबकि बड़ौत (230) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह भिवाड़ी (219) चौथे स्थान पर है। नोएडा (215) – लेह (196) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

गुरुग्राम (195) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में ग्रेटर नोएडा (184), मोदीनगर (184) और खैरथल (173) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के पांच शहर (खोरा, बड़ौत, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, मोदीनगर) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि खोरा, बड़ौत, भिवाड़ी, नोएडा, गुरुग्राम, ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद, बहादुरगढ़, जींद, यमुनानगर, मंडी गोबिंदगढ़, गाजियाबाद, गजरौला, हापुड़, मेरठ, राजगीर, पीथमपुर, समस्तीपुर, भागलपुर, अंकलेश्वर, गोरखपुर, पटना, चरखी दादरी, तालचेर, जयपुर, हाजीपुर, वातवा और बेगूसराय आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं सहरसा, खैरथल, बागपत, बर्नीहाट (मेघालय), अलवर, बीकानेर, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, चुरू, पाली, नारनौल, सीकर, नागौर, दौसा, कैथल, अंबरनाथ, श्री गंगानगर, पानीपत, फतेहाबाद, गया, सिरसा, अंबाला, बठिंडा, जालौर और हिसार आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 23 फीसदी यानी 56 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में भिलाई, भोपाल, चामराजनगर, चंडीगढ़, छाल, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, दमोह, धौलपुर, डोंबिवली, डूंगरपुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गंगटोक, हल्दिया, इंदौर, झालावाड़, काकीनाडा, कलबुर्गी, करनाल, किशनगंज, कोल्हापुर, कोरबा, कुरनूल, लातूर, मदिकेरी, मंडीखेड़ा, नागपुर, नाहरलागुन, नयागढ़, पंचगांव, पटियाला, प्रतापगढ़ आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 128 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बिलीपाड़ा, बोइसर, ब्रजराजनगर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कटक, देवास, धारवाड़, दुर्गापुर, फतेहपुर सीकरी, गांधीनगर, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हिंगोली, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, जलना, झांसी, जोधपुर, कडप्पा, कल्याण, कानपुर, करौली, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, कोहिमा, कोलकाता, कोटा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाद, मैहर, मंडीदीप, मंगलौर, मथुरा, मेहसाणा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागांव, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, पलवल, पारादीप, परभणी, पिंपरी-चिंचवाड़, पुडुचेरी, पुणे, रायबरेली, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजसमंद, रोहतक, रूपनगर, सागर, सासाराम, सतारा, सतना, सवाई माधोपुर आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 54 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें अलवर, अंबाला, अंबरनाथ, अंकलेश्वर, बागपत, बहादुरगढ़, बठिंडा, बेगूसराय, भागलपुर, बीकानेर, बुलंदशहर, बर्नीहाट (मेघालय), चरखी दादरी, चुरू, दौसा, दिल्ली, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गजरौला, गया, गाजियाबाद, गोरखपुर, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, हाजीपुर, हापुड़, हिसार, जयपुर, जैसलमेर, जालौर, झुंझुनू, जींद, कैथल, खैरथल, लेह, मंडी गोबिंदगढ़, मेरठ, मोदीनगर, मुजफ्फरनगर, नागौर, नारनौल, पाली, पानीपत, पटना, पीथमपुर, राजगीर, समस्तीपुर, सीकर, सिरसा, श्री गंगानगर, तालचेर, वातवा, वृंदावन और यमुनानगर शामिल हैं।

वहीं सहरसा (293), खोरा (266), बड़ौत (230), भिवाड़ी (219) और नोएडा (215) में स्थिति 'खराब' दर्ज की गई है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 243 में से 56 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 128 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 19 सितम्बर को भी यह आंकड़ा 138 दर्ज किया गया था।

54 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज सहरसा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 293 दर्ज किया गया, जोकि ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (19 सितम्बर) सरकारी आंकड़ों में सहरसा का जिक्र नहीं था।

इससे पहले कल देश में मोदीनगर की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 203 दर्ज किया गया। हालांकि आज 19 अंकों के सुधार के साथ मोदीनगर में एक्यूआई 184 पर पहुंच गया है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 118 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 160 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 42 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता ‘मध्यम’ श्रेणी में बनी हुई है।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 137 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 163 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 26 अंकों के उछाल के बावजूद फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 20 सितम्बर को भिवाड़ी (219) चौथे स्थान पर है, वहीं खोरा (266) दूसरे, जबकि बड़ौत (230) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 59, गाजियाबाद में 138, गुवाहाटी में 73, गुरूग्राम में 195, नोएडा में 215, ग्रेटर नोएडा में 184 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 54 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 54, चेन्नई में 74, चंडीगढ़ में 49, हैदराबाद में 56, जयपुर में 104 और पटना में 107 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 56 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में अहमदनगर, आइजोल, अमरावती (महाराष्ट्र), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बारां, बैरकपुर, बीड, बेतिया, भिलाई, भोपाल, चामराजनगर, चंडीगढ़, छाल, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, दमोह, धौलपुर, डोंबिवली, डूंगरपुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गंगटोक, हल्दिया, इंदौर, झालावाड़, काकीनाडा, कलबुर्गी, करनाल, किशनगंज, कोल्हापुर, कोरबा, कुरनूल, लातूर, मदिकेरी, मंडीखेड़ा, नागपुर, नाहरलागुन, नयागढ़, पंचगांव, पटियाला, प्रतापगढ़, प्रयागराज, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सांगली, सिलीगुड़ी, शिवसागर, सोलापुर, तिरुवनंतपुरम, तुमडीह, उडुपी, विरार और यादगीर शामिल हैं।

वहीं अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अकोला, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमृतसर, अंगुल, अररिया, आसनसोल, बद्दी, बालासोर, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारबिल, बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बेलापुर, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भिवानी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बिलीपाड़ा, बोइसर, ब्रजराजनगर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कटक, देवास, धारवाड़, दुर्गापुर, फतेहपुर सीकरी, गांधीनगर, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हिंगोली, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, जलना, झांसी, जोधपुर, कडप्पा, कल्याण, कानपुर, करौली, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, कोहिमा, कोलकाता, कोटा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाद, मैहर, मंडीदीप, मंगलौर, मथुरा, मेहसाणा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागांव, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, पलवल, पारादीप, परभणी, पिंपरी-चिंचवाड़, पुडुचेरी, पुणे, रायबरेली, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजसमंद, रोहतक, रूपनगर, सागर, सासाराम, सतारा, सतना, सवाई माधोपुर, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, सिवान, श्रीनगर, सूरत, ठाणे, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, टोंक, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम आदि 128 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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