11 अगस्त को देश की हवा में एक बार फिर क्षेत्रीय स्तर पर बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला। बिहार का सहरसा 239 के एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां महज एक दिन में एक्यूआई 78 से बढ़कर 239 पहुंच गया।
यहां पीएम10 प्रदूषण प्रमुख रहा और वायु गुणवत्ता विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 430 फीसदी अधिक रही।
सहरसा के बाद गोरखपुर (214), लेह (183) और रायबरेली (168) सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहे। दस सबसे प्रदूषित शहरों में बिहार के चार शहरों की मौजूदगी चिंता बढ़ाती है।
इसके उलट कर्नाटक का दावणगेरे 21 के एक्यूआई के साथ सबसे साफ शहर रहा।
देश के 248 शहरों के आंकड़ों में 94 शहरों की हवा साफ, 127 की संतोषजनक और 25 शहरों की मध्यम रही, जबकि सहरसा समेत एक शहर खराब श्रेणी में रहा। दिल्ली में भी मामूली सुधार दर्ज हुआ और एक्यूआई 89 से घटकर 78 पहुंच गया।
हालांकि, कई शहरों में पीएम2.5 और पीएम10 का बढ़ता दबाव बताता है कि साफ हवा की तस्वीर अभी समान नहीं है और स्थानीय प्रदूषण स्रोत लगातार चुनौती बने हुए हैं।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 11 अगस्त 2026 को देश में सहरसा सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 239 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (10 अगस्त) को सहरसा में सूचकांक 78 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से प्रदूषण के स्तर में 160 अंकों का इजाफा हुआ है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि सहरसा की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
सहरसा में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 430 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में दावणगेरे की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 21 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर सहरसा की तुलना दावणगेरे से करें तो वहां स्थिति 11.3 गुणा खराब है।
इससे पहले कल देश में ग्रेटर नोएडा की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 201 दर्ज किया गया, हालांकि आज 117 अंकों के भारी सुधार के साथ वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक घटकर 84 पर पहुंच गया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 89 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 78 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 11 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 07-11 अगस्त को 63 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी दर्ज की गई। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 119 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 118 पर पहुंच गया। इसके साथ ही एक अंक के मामूली सुधार के बावजूद फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 11 अगस्त 2026 को 248 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 37.9 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 51.2 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 10.9 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 9.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 7.3 फीसदी की कमी दर्ज की गई। वहीं मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से करीब 39 फीसदी का इजाफा हुआ है, जोकि चिंता का विषय है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में गोरखपुर (214) दूसरे जबकि लेह (183) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह रायबरेली (168) चौथे स्थान पर है। समस्तीपुर (154) – चरखी दादरी (146) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
गया (146) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में पाली (144), मोतिहारी (140) और बर्नीहाट (मेघालय) (134) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में बिहार के चार शहर (सहरसा, समस्तीपुर, गया, मोतिहारी) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि गोरखपुर, रायबरेली, समस्तीपुर, चरखी दादरी, गया, मोतिहारी, बर्नीहाट (मेघालय), फरीदाबाद, खोरा, वातवा, गुरुग्राम आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं सहरसा, पाली, बल्लभगढ़, बेगूसराय, छपरा, भागलपुर, सोनीपत, सिवान, बद्दी, पलवल, जैसलमेर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 37.9 फीसदी यानी 94 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में भुवनेश्वर, बिलासपुर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, ब्यासनगर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चिक्काबल्लापुर, कोयंबटूर, कटक, दमोह, दावणगेरे, देहरादून, धुले, डोंबिवली, फतेहाबाद, फतेहपुर सीकरी, फिरोजाबाद, गजरौला, गुंटूर, हाजीपुर, हल्दिया, हापुड़, हिसार, हैदराबाद, इंदौर, जलगांव, कलबुर्गी, करनाल, कारवार, कटनी, क्योंझर, कोल्हापुर, कोरबा, कुरुक्षेत्र, लातूर, मदिकेरी, महाड, मंडीदीप, मंगलौर, मीरा-भायंदर, मोदीनगर, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरनगर, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पंचकुला, परभणी, पटियाला आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 127 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बांसवाड़ा, बारबिल, बारीपाड़ा, बाड़मेर, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवानी, बिलीपाड़ा, बोइसर, बूंदी, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, चेन्नई, छाल, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धौलपुर, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गांधीनगर, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुवाहाटी, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हिंगोली, हावड़ा, हुबली, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, जलना, जालोर, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कैथल, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कोटा, कुंजेमुरा, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मानेसर, मंगुराहा, मथुरा, मेरठ, मेहसाणा, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नंदेसरी, नारनौल, नेल्लोर आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 25 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें बद्दी, बल्लभगढ़, बेगूसराय, भागलपुर, बर्नीहाट (मेघालय), चरखी दादरी, छपरा, एलूर, फरीदाबाद, गया, गुरुग्राम, जैसलमेर, खोरा, लेह, मोतिहारी, पाली, पलवल, रायबरेली, समस्तीपुर, शामली, सिलीगुड़ी, सिवान, सोनीपत, श्री गंगानगर, वातवा आदि शामिल हैं। वहीं सहरसा (239) में वायु गुणवत्ता ‘खराब’ दर्ज की गई है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 248 में से 94 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 127 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 10 अगस्त को भी यह आंकड़ा 137 दर्ज किया गया था।
25 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज सहरसा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 239 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (10 अगस्त) को ग्रेटर नोएडा में सूचकांक 78 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से प्रदूषण के स्तर में 160 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।
इससे पहले कल देश में ग्रेटर नोएडा की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 201 दर्ज किया गया, हालांकि आज 117 अंकों के भारी सुधार के साथ वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक घटकर 84 पर पहुंच गया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 89 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 78 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 11 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी दर्ज की गई। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 119 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 118 पर पहुंच गया। इसके साथ ही एक अंक के मामूली सुधार के बावजूद फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 11 अगस्त को रायबरेली (168) चौथे स्थान पर है, वहीं गोरखपुर (214) दूसरे, जबकि लेह (183) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 82, गाजियाबाद में 75, गुवाहाटी में 63, गुरूग्राम में 106, नोएडा में 68, ग्रेटर नोएडा में 84 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 41 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 70, चेन्नई में 59, चंडीगढ़ में 43, हैदराबाद में 48, जयपुर में 66 और पटना में 78 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 94 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में अहमदनगर, अकोला, बदलापुर, बागपत, बालासोर, बरेली, बैरकपुर, बठिंडा, बीड, बेलापुर, बेलगाम, बेतिया, भिलाई, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिलासपुर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, ब्यासनगर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चिक्काबल्लापुर, कोयंबटूर, कटक, दमोह, दावणगेरे, देहरादून, धुले, डोंबिवली, फतेहाबाद, फतेहपुर सीकरी, फिरोजाबाद, गजरौला, गुंटूर, हाजीपुर, हल्दिया, हापुड़, हिसार, हैदराबाद, इंदौर, जलगांव, कलबुर्गी, करनाल, कारवार, कटनी, क्योंझर, कोल्हापुर, कोरबा, कुरुक्षेत्र, लातूर, मदिकेरी, महाड, मंडीदीप, मंगलौर, मीरा-भायंदर, मोदीनगर, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरनगर, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पंचकुला, परभणी, पटियाला, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, रायपुर, रायरंगपुर, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सागर, सांगली, शिलांग, शिवमोगा, सिंगरौली, सोलापुर, सूरत, त्रिशूर, तिरुमाला, तुमडीह, उज्जैन, उल्हासनगर, वापी, विजयपुरा, विरार, वृंदावन और यादगीर शामिल हैं।
वहीं अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अलवर, अमरावती (आंध्र प्रदेश), अंबाला, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बागलकोट, बहादुरगढ़, बांसवाड़ा, बारबिल, बारीपाड़ा, बाड़मेर, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवानी, बिलीपाड़ा, बोइसर, बूंदी, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, चेन्नई, छाल, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धौलपुर, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गांधीनगर, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुवाहाटी, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हिंगोली, हावड़ा, हुबली, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, जलना, जालोर, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कैथल, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कोटा, कुंजेमुरा, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मानेसर, मंगुराहा, मथुरा, मेरठ, मेहसाणा, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नंदेसरी, नारनौल, नेल्लोर, नोएडा, पंचगांव, पानीपत, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, पुणे, पूर्णिया, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, रोहतक, रूपनगर, सतारा, सतना, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलचर, सिरोही, सिरसा, श्रीनगर, तालचेर, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, टोंक, उदयपुर, वडोदरा, वाराणसी, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम और यमुना नगर आदि 127 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
देश में वायु गुणवत्ता की ताजा जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर से प्राप्त कर सकते हैं