06 जुलाई 2026 की तस्वीर ने देश की हवा का दोहरा चेहरा सामने रखा है, एक ओर दिल्ली और फरीदाबाद में राहत मिली, तो दूसरी ओर बिहार का आरा अचानक देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 221 शहरों के आंकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक आरा का एक्यूआई 235 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में है। आरा की हवा में पीएम2.5 का दबदबा इतना अधिक है कि प्रदूषण का स्तर डब्ल्यूएचओ की सुरक्षित सीमा से 1,450 फीसदी ऊपर पहुंच गया।
इसके उलट रायपुर 10 के एक्यूआई के साथ सबसे साफ शहर रहा। देश के प्रदूषण मानचित्र में हरियाणा की चिंता भी साफ दिखी, क्योंकि शीर्ष 10 सबसे प्रदूषित शहरों में उसके छह शहर—नारनौल, पानीपत, बल्लभगढ़, भिवानी, करनाल और फतेहाबाद—शामिल रहे।
हालांकि राहत की बात यह है कि दिल्ली का एक्यूआई 161 से गिरकर 94 और फरीदाबाद का 119 से 59 पर आ गया, जिससे दोनों शहरों की हवा संतोषजनक श्रेणी में लौट आई।
कुल मिलाकर, 43 फीसदी शहरों में हवा ‘बेहतर’ और 45.7 फीसदी में ‘संतोषजनक’ रही, जबकि केवल 11.3 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक दर्ज किए गए, यानी देश में फिलहाल राहत और खतरे, दोनों साथ-साथ चल रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 06 जुलाई 2026 को देश में आरा सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 235 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (05 जुलाई) सरकारी आंकड़ों में आरा का जिक्र नहीं था।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि आरा की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। आरा में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,450 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में रायपुर की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 10 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर आरा की तुलना रायपुर से करें तो वहां स्थिति 23.5 गुणा खराब है।
इससे पहले कल देश में धौलपुर की हवा सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 280 तक पहुंच गया था। हालांकि आज धौलपुर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 66 दर्ज किया गया है। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक खराब से सीधे संतोषजनक हो गया है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में भारी गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 161 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 94 पर पहुंच गया है। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 67 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज एक बार फिर वायु गुणवत्ता मध्यम से संतोषजनक हो गई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 30 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 85 पर पहुंच गया। वहीं 05 मई को सूचकांक 86, जबकि 04 मई को 88 दर्ज किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 119 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 59 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 60 अंकों के सुधार के साथ फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता संतोषजनक श्रेणी में पहुंच गई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 06 जुलाई 2026 को 221 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 43 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 45.7 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 11.3 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में करीब चार फीसदी की गिरावट आई है। वहीं दूसरी तरफ संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 17.4 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 41 फीसदी की कमी आई है। इसी तरह खराब हवा वाले शहरों में भी 71.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जोकि राहत की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में बूंदी (227) दूसरे जबकि नारनौल (180) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह पानीपत (164) चौथे स्थान पर है। बल्लभगढ़ (156)– भिवानी (151) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
गुम्मिडीपूंडी (145) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में करनाल (144), फतेहाबाद (133) और बीकानेर (132) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के छह शहर (नारनौल, पानीपत, बल्लभगढ़, भिवानी, करनाल और फतेहाबाद) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि आरा, नारनौल, बल्लभगढ़, भिवानी, गुम्मिडीपूंडी, चरखी दादरी, गुरुग्राम, बहादुरगढ़, खोरा आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं बूंदी, पानीपत, करनाल, फतेहाबाद, बीकानेर, धनबाद, ग्रेटर नोएडा, मेहसाणा, मंडी गोबिंदगढ़, छपरा, बद्दी, विशाखापत्तनम, अंकलेश्वर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 43 फीसदी यानी 95 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में कोयंबटूर, कुड्डालोर, दमोह, दौसा, देहरादून, धुले, दुर्गापुर, फिरोजाबाद, गडग, गया, गुवाहाटी, हल्दिया, हिंगोली, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जलगांव, जलना, झांसी, कैथल, कलबुर्गी, कल्याण, कानपुर, कारवार, काशीपुर, कटनी, क्योंझर, खैरथल, कोल्हापुर, कोलकाता, कोटा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, मदिकेरी, मैहर, मालेगांव, मीरा-भायंदर, मुंबई, नागौर, नागपुर, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पंचकुला, परभणी, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, रायपुर, राजगीर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 101 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बाड़मेर, बठिंडा, बेंगलुरु, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भुवनेश्वर, बोईसर, बुलंदशहर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चूरू, कटक, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, एलुरु, फरीदाबाद, गांधीनगर, गाजियाबाद, गुंटूर, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कन्नूर, करौली, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोल्लम, कोप्पल, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, मछलीपट्टनम, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मथुरा, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नंदेसरी, नेल्लोर, नोएडा, पाली, पलवल, पंपोर, पंचगांव, पटना, पीथमपुर, पूर्णिया आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 23 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अंकलेश्वर, बद्दी, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, भिवानी, बिहार शरीफ, बीकानेर, चरखी दादरी, छपरा, धनबाद, फतेहाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, करनाल, खोरा, मंडी गोबिंदगढ़, मेरठ, मेहसाणा, नारनौल, पानीपत, तालचेर, विशाखापत्तनम आदि शामिल हैं।
इसी तरह आरा (235) और बूंदी (227) में स्थिति खराब दर्ज की गई है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 221 में से 95 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 101 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 05 जुलाई को यह आंकड़ा 86 दर्ज किया गया था।
23 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आरा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 235 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (05 जुलाई) सरकारी आंकड़ों में आरा का जिक्र नहीं था।
इससे पहले कल देश में धौलपुर की हवा सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 280 तक पहुंच गया था। हालांकि आज धौलपुर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 66 दर्ज किया गया है। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक खराब से सीधे संतोषजनक हो गया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में भारी गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 161 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 94 पर पहुंच गया है। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 67 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज एक बार फिर वायु गुणवत्ता मध्यम से संतोषजनक हो गई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 119 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 59 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 60 अंकों के सुधार के साथ फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता संतोषजनक श्रेणी में पहुंच गई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 06 जुलाई को पानीपत (164) चौथे स्थान पर है, वहीं बूंदी (227) दूसरे, जबकि नारनौल (180) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 56, गाजियाबाद में 80, गुवाहाटी में 41, गुरूग्राम में 122, नोएडा में 73, ग्रेटर नोएडा में 116 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 45 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 57, चेन्नई में 73, चंडीगढ़ में 57, हैदराबाद में 49, जयपुर में 64 और पटना में 51 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 95 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अगरतला, अहमदनगर, आइजोल, अकोला, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बागलकोट, बालासोर, बरेली, बारीपाड़ा, बैरकपुर, बीड, बेगूसराय, बेलापुर, भरतपुर, भिलाई, भिवंडी, भोपाल, बिलाईपाड़ा, ब्यासनगर, चामराजनगर, चंद्रपुर, छाल, कोयंबटूर, कुड्डालोर, दमोह, दौसा, देहरादून, धुले, दुर्गापुर, फिरोजाबाद, गडग, गया, गुवाहाटी, हल्दिया, हिंगोली, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जलगांव, जलना, झांसी, कैथल, कलबुर्गी, कल्याण, कानपुर, कारवार, काशीपुर, कटनी, क्योंझर, खैरथल, कोल्हापुर, कोलकाता, कोटा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, मदिकेरी, मैहर, मालेगांव, मीरा-भायंदर, मुंबई, नागौर, नागपुर, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पंचकुला, परभणी, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, रायपुर, राजगीर, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सिलचर, शिवसागर, सोलापुर, टेन्सा, ठाणे, तिरुमाला, उदयपुर, उलहासनगर, वापी, वाराणसी, विजयपुरा शामिल हैं।
वहीं आगरा, अहमदाबाद, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अररिया, बारां, बाड़मेर, बठिंडा, बेंगलुरु, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भुवनेश्वर, बोईसर, बुलंदशहर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चूरू, कटक, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, एलुरु, फरीदाबाद, गांधीनगर, गाजियाबाद, गुंटूर, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कन्नूर, करौली, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोल्लम, कोप्पल, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, मछलीपट्टनम, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मथुरा, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नंदेसरी, नेल्लोर, नोएडा, पाली, पलवल, पंपोर, पंचगांव, पटना, पीथमपुर, पूर्णिया, राजकोट, रोहतक, रूपनगर, सांगली, सतना, सवाई माधोपुर, सीकर, सिंगरौली, सिरोही, सिरसा, श्री गंगानगर, श्रीनगर, सूरत, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, टोंक, उज्जैन, वडोदरा, विजयवाड़ा, वृंदावन, यमुना नगर आदि 101 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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