30 जून 2026 को देश में हरियाणा वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा, जहां पानीपत और करनाल की हवा 'बेहद खराब' श्रेणी में पहुंच गई।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, पानीपत 317 के एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा। महज 24 घंटे में यहां प्रदूषण 129 अंक बढ़ गया और पीएम2.5 का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 20 गुना अधिक दर्ज किया गया।
करनाल (306), गुरुग्राम (249), बहादुरगढ़ (245) और सोनीपत (215) समेत देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के आठ शहर शामिल रहे, जो राज्य में बिगड़ती वायु गुणवत्ता की गंभीर तस्वीर पेश करते हैं।
हालांकि सोनीपत में एक दिन पहले की तुलना में सुधार दर्ज हुआ, वहीं दिल्ली और फरीदाबाद में प्रदूषण फिर बढ़ने लगा।
दूसरी ओर, मदिकेरी 14 के एक्यूआई के साथ देश का सबसे स्वच्छ शहर रहा। राहत की बात यह रही कि 239 में से 79 शहरों की हवा 'बेहतर' और 102 शहरों की 'संतोषजनक' श्रेणी में रही।
फिर भी उत्तर भारत के कई शहरों में पीएम2.5 और पीएम10 का बढ़ता स्तर संकेत देता है कि मानसून के बावजूद प्रदूषण का संकट पूरी तरह टला नहीं है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 30 जून 2026 को देश में पानीपत सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 317 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। कल पानीपत में एक्यूआई 188 दर्ज किया गया था। इसका मतलब है कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 129 अंकों का भारी उछाल आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि पानीपत की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
पानीपत में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,000 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 14 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर पानीपत की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 22.6 गुणा खराब है।
कल देश में सोनीपत में प्रदूषण सबसे ज्यादा था, जब एक्यूआई 343 दर्ज किया गया। हालांकि आज सोनीपत में 128 अंकों के भारी सुधार के साथ वायु गुणवत्ता सूचकांक 215 पर पहुंच गया है। मतलब की वायु गुणवत्ता बेहद खराब से ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गई है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में कल एक्यूआई 151 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 177 पर पहुंच गया है। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 26 अंकों का उछाल आया है। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 30 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 85 पर पहुंच गया। वहीं 05 मई को सूचकांक 86, जबकि 04 मई को 88 दर्ज किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में वृद्धि हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 170 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 199 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 29 अंकों के उछाल के साथ फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 30 जून 2026 को 239 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 33 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 42.7 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 24.3 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 33.9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 23.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी तरह मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 25 फीसदी का उछाल आया है। वहीं खराब हवा वाले शहरों की गिनती में 25 फीसदी की कमी रिकॉर्ड की गई, जोकि राहत की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में करनाल (306) दूसरे जबकि गुरुग्राम (249) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह बहादुरगढ़ (245) चौथे स्थान पर है। बागपत (219) – सोनीपत (215) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
गाजियाबाद (213) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में जींद (207), फरीदाबाद (199) और हिसार (196) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के आठ शहर (पानीपत, करनाल, गुरुग्राम, बहादुरगढ़, सोनीपत, जींद, फरीदाबाद और हिसार) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि पानीपत, करनाल, गुरुग्राम, बहादुरगढ़, सोनीपत, गाजियाबाद, जींद, फरीदाबाद, मोदीनगर, मेरठ, सिरसा, भिवानी, कैथल, भिवाड़ी, बक्सर, बर्नीहाट (मेघालय), खोरा, नारनौल, आगरा, वातवा, धारूहेड़ा, रूपनगर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं बागपत, हिसार, धनबाद, बीकानेर, फतेहाबाद, जैसलमेर, दिल्ली, ग्रेटर नोएडा, नोएडा, हापुड़, कुरुक्षेत्र, बाड़मेर, चूरू, रोहतक, हनुमानगढ़, बल्लभगढ़, अंबाला, मथुरा, श्री गंगानगर, बद्दी, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, दौसा, विशाखापत्तनम, पटियाला, जयपुर, झुंझुनू, बांसवाड़ा, अमृतसर, लुधियाना, खैरथल, भीलवाड़ा, खुर्जा आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 33.1 फीसदी यानी 79 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में भिलाई, भोपाल, भुवनेश्वर, बोइसर, ब्रजराजनगर, ब्यासनगर, चामराजनगर, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, कुड्डालोर, डोंबिवली, गडग, गुवाहाटी, हल्दिया, हिंगोली, हुबली, जबलपुर, जलगांव, झालावाड़, झांसी, कलबुर्गी, कानपुर, काशीपुर, कटनी, क्योंझर, कोहिमा, कोल्हापुर, कोल्लम, कोप्पल, कुंजेमुरा, लातूर, मदिकेरी, महाड, मंगलौर, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 102 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें ग्वालियर, हाजीपुर, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जालंधर, जलना, जालौर, जोधपुर, जोरापोखर, कल्याण, कन्नूर, कटिहार, खन्ना, किशनगंज, कोलकाता, कोरबा, कोटा, लखनऊ, मछलीपट्टनम, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, नागांव, नागौर, नंदेसरी, पलवल, पंपोर, पंचगांव, पंचकुला, पटना, प्रतापगढ़, पूर्णिया, रायरंगपुर, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, राउरकेला, सतना, सवाई माधोपुर, सीकर, सिंगरौली, सिरोही, शिवसागर, श्रीनगर आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 50 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें आगरा, अंबाला, अमृतसर, बद्दी, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बाड़मेर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवानी, बीकानेर, बुलंदशहर, बक्सर, बर्नीहाट (मेघालय), चूरू, दौसा, दिल्ली, धनबाद, धारूहेड़ा, फरीदाबाद, फतेहाबाद, ग्रेटर नोएडा, हनुमानगढ़, हापुड़, हिसार, जयपुर, जैसलमेर, झुंझुनू, कैथल, खैरथल, खोरा, खुर्जा, कुरुक्षेत्र, लुधियाना, मथुरा, मेरठ, मोदीनगर, मुजफ्फरनगर, नारनौल, नोएडा, पटियाला, रोहतक, रूपनगर, सिलीगुड़ी, सिरसा, श्री गंगानगर, तालचेर, वातवा, विशाखापत्तनम आदि शामिल हैं।
इसी तरह बागपत, बहादुरगढ़, गाजियाबाद, गुरुग्राम, जींद, सोनीपत में स्थिति खराब दर्ज की गई है। वहीं पानीपत (317) और करनाल (306) में स्थिति बेहद खराब दर्ज की गई है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 239 में से 79 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 102 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 29 जून को यह आंकड़ा 133 दर्ज किया गया था।
50 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज पानीपत में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 317 दर्ज किया गया, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है। इससे पहले कल पानीपत में एक्यूआई 188 दर्ज किया गया था। मतलब की कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 129 अंकों की भारी बढ़ोतरी हुई है।
कल देश में सोनीपत में प्रदूषण सबसे ज्यादा था, जब एक्यूआई 343 दर्ज किया गया। हालांकि आज सोनीपत में 128 अंकों के भारी सुधार के साथ वायु गुणवत्ता सूचकांक 215 पर पहुंच गया है। मतलब की वायु गुणवत्ता बेहद खराब से ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में कल एक्यूआई 151 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 177 पर पहुंच गया है। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 26 अंकों का उछाल आया है। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में वृद्धि हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 170 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 199 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 29 अंकों के उछाल के साथ फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 30 जून को बहादुरगढ़ (245) चौथे स्थान पर है, वहीं करनाल (306) दूसरे, जबकि गुरुग्राम (249) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 95, गाजियाबाद में 213, गुवाहाटी में 48, गुरूग्राम में 249, नोएडा में 151, ग्रेटर नोएडा में 167 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 47 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 60, चेन्नई में 50, चंडीगढ़ में 58, हैदराबाद में 51, जयपुर में 108 और पटना में 66 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 79 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अहमदनगर, आइजोल, अमरावती (महाराष्ट्र), आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बालासोर, बारबिल, बरेली, बारीपाड़ा, बैरकपुर, बेगूसराय, बेलापुर, भिलाई, भोपाल, भुवनेश्वर, बोइसर, ब्रजराजनगर, ब्यासनगर, चामराजनगर, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, कुड्डालोर, डोंबिवली, गडग, गुवाहाटी, हल्दिया, हिंगोली, हुबली, जबलपुर, जलगांव, झालावाड़, झांसी, कलबुर्गी, कानपुर, काशीपुर, कटनी, क्योंझर, कोहिमा, कोल्हापुर, कोल्लम, कोप्पल, कुंजेमुरा, लातूर, मदिकेरी, महाड, मंगलौर, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, परभणी, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, सागर, सांगली, सतारा, शिवमोगा, सिलचर, सोलापुर, तिरुवनंतपुरम, तिरुमाला, तुमडीह, उल्हासनगर, विजयपुरा, यादगीर शामिल हैं।
वहीं अगरतला, अहमदाबाद, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अनंतपुर, अंगुल, अररिया, बदलापुर, बागलकोट, बीड, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भिवंडी, बिहार शरीफ, बिलाईपाड़ा, बूंदी, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चित्तूर, दमोह, देहरादून, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, ग्वालियर, हाजीपुर, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जालंधर, जलना, जालौर, जोधपुर, जोरापोखर, कल्याण, कन्नूर, कटिहार, खन्ना, किशनगंज, कोलकाता, कोरबा, कोटा, लखनऊ, मछलीपट्टनम, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, नागांव, नागौर, नंदेसरी, पलवल, पंपोर, पंचगांव, पंचकुला, पटना, प्रतापगढ़, पूर्णिया, रायरंगपुर, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, राउरकेला, सतना, सवाई माधोपुर, सीकर, सिंगरौली, सिरोही, शिवसागर, श्रीनगर, सुआकाती, सूरत, ठाणे, थूथुकुडी, तिरुपति, टोंक, उदयपुर, उज्जैन, वडोदरा, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार, वृंदावन, यमुना नगर आदि 102 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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