बढ़ते प्रदूषण के साथ हवा में घुला जहर लोगों को बहुत ज्यादा बीमार बना रहा है, बच्चे और बुजुर्ग इसका सबसे ज्यादा शिकार बन रहे हैं; फोटो: आईस्टॉक 
वायु

हवा का हाल: प्रदूषण की रेस में ग्रेटर नोएडा सबसे आगे, कोहिमा सबसे साफ

दिल्ली में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 154 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 198 पर पहुंच गया।

Lalit Maurya

  • देश में प्रदूषण का स्तर एक बार फिर चिंताजनक होता दिख रहा है। 29 मार्च 2026 को ग्रेटर नोएडा देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां एक्यूआई 260 दर्ज किया गया और सिर्फ 24 घंटे में प्रदूषण 74 अंक बढ़ गया।

  • ग्रेटर नोएडा की हवा में पीएम10 कणों का दबदबा है और प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 450 फीसदी ज्यादा पहुंच गया है।

  • दूसरी तरफ कोहिमा देश का सबसे साफ शहर रहा, जहां एक्यूआई महज 21 दर्ज किया गया, यानी ग्रेटर नोएडा की हवा वहां से 12 गुना ज्यादा खराब है।

  • राजधानी दिल्ली और फरीदाबाद में भी प्रदूषण बढ़ा है, हालांकि वे अभी मध्यम श्रेणी में हैं।

  • देश के 241 शहरों के विश्लेषण से पता चला है कि केवल 14.9 फीसदी शहरों में हवा साफ है, जबकि 28.2 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं और खराब हवा वाले शहरों की संख्या में 133 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। सबसे प्रदूषित 10 शहरों में एनसीआर के कई शहर शामिल हैं, जिससे साफ है कि उत्तर भारत में प्रदूषण का दबाव लगातार बना हुआ है।

विश्लेषण के मुताबिक 29 मार्च 2026 को देश में ग्रेटर नोएडा सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 260 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि कल उत्तर प्रदेश के इस शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 186 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 74 अंकों का उछाल आया है। 

रुझानों में सामने आया है कि ग्रेटर नोएडा की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। ग्रेटर नोएडा में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 450 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में कोहिमा की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 21 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर ग्रेटर नोएडा की तुलना कोहिमा से करें तो वहां स्थिति 12.3 गुणा खराब है।

राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 154 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 198 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 44 अंकों इजाफा हुआ है। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

दिल्ली की तरफ ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 161 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 172 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।     

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 29 मार्च 2026 को 241 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 14.9 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 56.8 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 28.2 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 100 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 11.6 फीसदी से अधिक की गिरावट आई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है। इसी तरह खराब हवा वाले शहरों में कल से 133 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जोकि चिंता का विषय है।         

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में बल्लभगढ़ (239) दूसरे जबकि रोहतक (238) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह गुरुग्राम (230) चौथे स्थान पर है। गाजियाबाद-मुजफ्फरनगर में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 229 और 212 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

नोएडा (204) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में दिल्ली (198), मानेसर (193), बाड़मेर (191) भी शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के चार शहर (ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, नोएडा) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि रोहतक, गुरुग्राम, मुजफ्फरनगर, मानेसर, चरखी दादरी, यमुना नगर, बागपत, मेरठ, सोनीपत, कैथल, मंडीखेड़ा, अगरतला, गुम्मिडीपूंडी, हापुड़, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), भिवानी, ग्वालियर, धुले, वातवा, करनाल, सुआकाती, रूपनगर, महाद, जींद, मुरादाबाद आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं ग्रेटर नोएडा, बल्लभगढ़, गाजियाबाद, नोएडा, दिल्ली, बाड़मेर, सिंगरौली, भिवाड़ी, फरीदाबाद, पानीपत, बिलीपाड़ा, बुलंदशहर, सिरसा, सवाई माधोपुर, बीकानेर, चंद्रपुर, बारबिल, लखनऊ, खुर्जा, पीथमपुर, जयपुर, हिसार, बद्दी, नयागढ़, विशाखापत्तनम, अलवर, गया, कुरुक्षेत्र, आगरा, पाली, मालेगांव, कुंजेमुरा, बारां, जैसलमेर, सीकर, चूरू, जलगांव आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 14.9 फीसदी यानी महज 36 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में गुवाहाटी, हल्दिया, हुबली, कलबुर्गी, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, मदिकेरी, मैहर, मैंगलोर, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, नागांव, नलबाड़ी, पंपोर, पुदुचेरी, ऋषिकेश, सहरसा, शिलांग, शिवमोगा आदि शामिल हैं। 

आज देश के जिन 137 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें बठिंडा, बेलापुर, बेंगलुरु, बेतिया, भागलपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, ब्रजराजनगर, बूंदी, बक्सर, ब्यासनगर, बर्नीहाट, चामराजनगर, चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, कोयंबटूर, कटक, दमोह, देहरादून, देवास, धारवाड़, धौलपुर, दुर्गापुर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गोरखपुर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलना, जालौर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, कटिहार, क्योंझर, खन्ना, कोल्हापुर, कोरबा, कोटा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मंगुराहा, मेहसाणा, मीरा-भायंदर, मुजफ्फरपुर, नागौर, नागपुर, नांदेड़, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, पलवल, पंचगांव, पंचकुला, परभणी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़ आदि शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 61 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में अगरतला, आगरा, अलवर, अंगुल, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बागपत, बारां, बारबिल, बाड़मेर, भरतपुर, भिवाड़ी, भिवानी, बीकानेर, बिलीपाड़ा, बुलंदशहर, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चूरू, दिल्ली, धुले, फरीदाबाद, गया, गुम्मिडीपूंडी, ग्वालियर, हापुड़, हिसार, जयपुर, जैसलमेर, जलगांव, जींद, कैथल, करनाल, कटनी, खुर्जा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, महाद, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मानेसर, मेरठ, मुरादाबाद, मैसूरु, नयागढ़, पाली, पानीपत, पीथमपुर, रूपनगर, सवाई माधोपुर, सीकर, सिंगरौली, सिरसा, सोनीपत, श्री गंगानगर, सुआकाती, वातवा, विशाखापत्तनम, यमुना नगर शामिल हैं।

इसी तरह बल्लभगढ़, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, मुजफ्फरनगर, नोएडा, रोहतक में वायु गुणवत्ता ‘खराब’ है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 241 में से महज 36 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 137 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 28 मार्च को यह आंकड़ा 155 दर्ज किया गया था।

61 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज ग्रेटर नोएडा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 260 दर्ज किया गया। वहीं कल ग्रेटर नोएडा में सूचकांक 186 रिकॉर्ड किया गया। मतलब कि कल से प्रदूषण के स्तर में 74 अंकों का इजाफा हुआ है। 

इससे पहले कल देश में (28 मार्च) को मंडी गोबिंदगढ़ में वायु गुणवत्ता सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 296 दर्ज किया गया था। हालांकि आज वहां वायु गुणवत्ता में 201 अंकों का सुधार आया है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 154 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 198 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 44 अंकों इजाफा हुआ है। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

दिल्ली की तरफ ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 161 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 172 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।     

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 29 मार्च को नोएडा चौथे स्थान पर है, वहीं बल्लभगढ़ (239) दूसरे, जबकि रोहतक (238) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 116, गाजियाबाद में 229, गुवाहाटी में 40, गुरूग्राम में 230, नोएडा में 204, ग्रेटर नोएडा में 260 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 46 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 132, चेन्नई में 54, चंडीगढ़ में 64, हैदराबाद में 86, जयपुर में 128 और पटना में 87 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 36 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें बागलकोट, बेगूसराय, भिलाई, बोइसर, डूंगरपुर, एलुरु, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हुबली, कलबुर्गी, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, मदिकेरी, मैहर, मैंगलोर, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, नागांव, नलबाड़ी, पंपोर, पुदुचेरी, ऋषिकेश, सहरसा, शिलांग, शिवमोगा, सिलचर, शिवसागर, श्रीनगर, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, वापी, विजयपुरा, विरार शामिल हैं।

वहीं अहमदाबाद, अहमदनगर, आइजोल, अजमेर, अकोला, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, आसनसोल, बदलापुर, बालासोर, बांसवाड़ा, बरेली, बठिंडा, बेलापुर, बेंगलुरु, बेतिया, भागलपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, ब्रजराजनगर, बूंदी, बक्सर, ब्यासनगर, बर्नीहाट, चामराजनगर, चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, कोयंबटूर, कटक, दमोह, देहरादून, देवास, धारवाड़, धौलपुर, दुर्गापुर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गोरखपुर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलना, जालौर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, कटिहार, क्योंझर, खन्ना, कोल्हापुर, कोरबा, कोटा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मंगुराहा, मेहसाणा, मीरा-भायंदर, मुजफ्फरपुर, नागौर, नागपुर, नांदेड़, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, पलवल, पंचगांव, पंचकुला, परभणी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, राउरकेला, सागर, समस्तीपुर, सांगली, सतना, सिलीगुड़ी, सिरोही, सिवान, सोलापुर, सूरत, तालचेर, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, वाराणसी, विजयवाड़ा, वृंदावन आदि 137 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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