देश की हवा में प्रदूषण का उतार-चढ़ाव लगातार जारी है। 1 सितंबर 2026 को 249 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण में सामने आया है कि बड़ौत एक बार फिर सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां एक्यूआई 241 दर्ज किया गया। यह ‘खराब’ श्रेणी में है और एक दिन पहले के 239 के मुकाबले प्रदूषण में और बढ़ोतरी हुई है।
बड़ौत की हवा में पीएम2.5 का दबदबा चिंता बढ़ा रहा है। इसके उलट नाहरलागुन में महज 16 एक्यूआई के साथ देश की सबसे साफ हवा दर्ज की गई—यानी दोनों शहरों की हवा की गुणवत्ता में करीब 15 गुना का अंतर रहा।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, 249 शहरों में 78 शहरों (31.3%) की हवा साफ, 131 (52.6%) की संतोषजनक और 38 (16.1%) शहरों की हवा मध्यम श्रेणी में रही।
हालांकि साफ हवा वाले शहरों की संख्या एक दिन में 4.9 फीसदी घटी है, जबकि मध्यम श्रेणी वाले शहरों की संख्या बढ़ी है।
प्रदूषण की सबसे गंभीर तस्वीर उत्तर प्रदेश और हरियाणा में दिखी। बड़ौत के बाद बुलंदशहर, अंबाला, ग्रेटर नोएडा और नोएडा जैसे शहर भी प्रदूषण की ऊंची मार झेल रहे हैं।
दिल्ली में मामूली सुधार के बावजूद एक्यूआई 113 रहा, जबकि फरीदाबाद में यह बढ़कर 139 पहुंच गया। आंकड़े बताते हैं कि साफ हवा अभी भी देश के हर शहर की पहुंच से दूर है और कई शहरों में सांस लेना लगातार चुनौती बन रहा है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 01 सितम्बर 2026 को एक बार फिर देश में बड़ौत सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 241 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (31 अगस्त) बड़ौत में वायु गुणवत्ता का स्तर 239 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 2 अंकों का इजाफा हुआ है और वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में बनी हुई है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि बड़ौत की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
बड़ौत में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,500 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में नाहरलागुन की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 16 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर बड़ौत की तुलना नाहरलागुन से करें तो वहां स्थिति 15 गुणा खराब है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में कमी आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 116 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 113 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 3 अंकों की गिरावट आई है। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 07-01 सितम्बर को 63 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 135 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 139 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 4 अंकों के उछाल के बावजूद फरीदाबाद में आज भी एक्यूआई मध्यम श्रेणी में बना हुआ है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 01 सितम्बर 2026 को 249 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 31.3 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 52.6 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 16.1 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 4.9 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 4.8 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से करीब 2.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जोकि चिंता का विषय है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में बुलंदशहर (222) दूसरे जबकि अंबाला (159) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह ग्रेटर नोएडा (158) चौथे स्थान पर है। दौसा (157) – नोएडा (155) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
पानीपत (149) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में फतेहपुर सीकरी (145), बद्दी (139) और फरीदाबाद (139) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के तीन (अंबाला, पानीपत, फरीदाबाद) और उत्तर प्रदेश के चार (बड़ौत, बुलंदशहर, ग्रेटर नोएडा, नोएडा) शहर शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि बड़ौत, यमुना नगर, मानेसर और सासाराम आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं बुलंदशहर, अंबाला, ग्रेटर नोएडा, दौसा, नोएडा, पानीपत, फतेहपुर सीकरी, बद्दी, फरीदाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर, गजरौला, भिवाड़ी, शामली, सीकर, श्री गंगानगर, कैथल, मोदीनगर, दिल्ली, गुम्मिडीपूंडी, नारनौल, छपरा, हापुड़, पाली, टोंक, मथुरा, भागलपुर, वातवा, फतेहाबाद, कुरुक्षेत्र, पीथमपुर, अलवर, गाजियाबाद, विशाखापत्तनम और सिवान आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 31.3 फीसदी यानी 78 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में देहरादून, धुले, डोंबिवली, हाजीपुर, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, इंदौर, काकीनाडा, कलबुर्गी, कानपुर, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, लखनऊ, मदिकेरी, महाद, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, परभणी, प्रयागराज, राजकोट, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सांगली, शिलांग, शिवमोगा, सिलीगुड़ी, शिवसागर, सोलापुर, सूरत, टेन्सा, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, तुमडीह, उज्जैन आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 131 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, ब्रजराजनगर, बूंदी, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, चरखी दादरी, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कुड्डालोर, कटक, दमोह, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, फिरोजाबाद, गडग, गांधीनगर, गया, गुंटूर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हिंगोली, हिसार, हैदराबाद, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जलना, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कल्याण, कन्नूर, करौली, करनाल, कारवार, कटिहार, कटनी, खन्ना, खोरा, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोटा, मछलीपट्टनम, मालेगांव, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मेहसाणा आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 38 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अलवर, अंबाला, बद्दी, भागलपुर, भिवाड़ी, छपरा, दौसा, दिल्ली, फरीदाबाद, फतेहाबाद, फतेहपुर सीकरी, गजरौला, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, हापुड़, कैथल, कुरुक्षेत्र, मानेसर, मथुरा, मेरठ, मोदीनगर, मुजफ्फरनगर, नारनौल, नोएडा, पाली, पंचगांव, पानीपत, पीथमपुर, सासाराम, शामली, सीकर, सिवान, श्री गंगानगर, टोंक, वातवा, विशाखापत्तनम और यमुना नगर आदि शामिल हैं।
वहीं बड़ौत (241) और बुलंदशहर (222) में स्थिति खराब है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 249 में से 78 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 131 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 31 अगस्त को भी यह आंकड़ा 125 दर्ज किया गया था।
38 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज एक बार फिर बड़ौत में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 241 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (31 अगस्त) बड़ौत में वायु गुणवत्ता का स्तर 239 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 2 अंकों का इजाफा हुआ है और वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में कमी आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 116 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 113 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 3 अंकों की गिरावट आई है। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 135 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 139 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 4 अंकों के उछाल के बावजूद फरीदाबाद में आज भी एक्यूआई मध्यम श्रेणी में बना हुआ है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 01 सितम्बर को ग्रेटर नोएडा (158) चौथे स्थान पर है, वहीं बुलंदशहर (222) दूसरे, जबकि अंबाला (159) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 75, गाजियाबाद में 105, गुवाहाटी में 64, गुरूग्राम में 94, नोएडा में 155, ग्रेटर नोएडा में 158 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 36 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 45, चेन्नई में 84, चंडीगढ़ में 49, हैदराबाद में 53, जयपुर में 88 और पटना में 64 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 78 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में अहमदनगर, अमरावती (महाराष्ट्र), अंगुल, अररिया, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बालासोर, बैरकपुर, बीड, बेलापुर, बेतिया, भिलाई, भिवंडी, बिलासपुर, बिलाईपाड़ा, बोइसर, बर्नीहाट (मेघालय), चामराजनगर, चंडीगढ़, छाल, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, देहरादून, धुले, डोंबिवली, हाजीपुर, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, इंदौर, काकीनाडा, कलबुर्गी, कानपुर, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, लखनऊ, मदिकेरी, महाद, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, परभणी, प्रयागराज, राजकोट, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सांगली, शिलांग, शिवमोगा, सिलीगुड़ी, शिवसागर, सोलापुर, सूरत, टेन्सा, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, तुमडीह, उज्जैन, उल्हासनगर, वापी, वाराणसी, विजयपुरा और विरार शामिल हैं।
वहीं अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अकोला, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबरनाथ, अमृतसर, अनंतपुर, अंकलेश्वर, आसनसोल, बागपत, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बरेली, बारीपाड़ा, बाड़मेर, बठिंडा, बेगूसराय, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, ब्रजराजनगर, बूंदी, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, चरखी दादरी, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कुड्डालोर, कटक, दमोह, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, फिरोजाबाद, गडग, गांधीनगर, गया, गुंटूर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हिंगोली, हिसार, हैदराबाद, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जलना, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कल्याण, कन्नूर, करौली, करनाल, कारवार, कटिहार, कटनी, खन्ना, खोरा, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोटा, मछलीपट्टनम, मालेगांव, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मेहसाणा, मुरादाबाद, मैसूरु, नागौर, नलबाड़ी, नेल्लोर, पलवल, पंपोर, पंचकुला, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, पुडुचेरी, पुणे, रायबरेली, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजसमंद, रोहतक, रूपनगर, सागर, सहरसा, सतारा, सतना, सवाई माधोपुर, सिलचर, सिंगरौली, सिरोही, सिरसा, सोनीपत, श्रीकाकुलम, श्रीनगर, तालचेर, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, वडोदरा, विजयवाड़ा और वृंदावन आदि 131 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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