देशभर में हवा की गुणवत्ता में उतार-चढ़ाव के बीच 4 अप्रैल 2026 को टोंक सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा, जहां एक्यूआई 268 तक पहुंच गया, जो सुरक्षित सीमा से कई गुना ज्यादा और स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।
अंगुल, बिलीपाड़ा और बल्लभगढ़ जैसे शहर भी ‘खराब’ श्रेणी में रहे, जबकि सिंगरौली, अररिया और श्री गंगानगर में भी स्थिति चिंताजनक बनी रही। इसके उलट श्रीनगर की हवा सबसे साफ रही, जहां एक्यूआई महज 18 दर्ज हुआ, जो टोंक से करीब 15 गुणा बेहतर है।
हालांकि राहत की बात यह है कि दिल्ली, ग्रेटर नोएडा और फरीदाबाद जैसे प्रमुख शहरों में पिछले 24 घंटों में प्रदूषण में उल्लेखनीय गिरावट आई है।
कुल मिलाकर देश के अधिकांश शहरों में हवा ‘संतोषजनक’ श्रेणी में है, लेकिन कई इलाकों में पीएम10 और पीएम2.5 जैसे खतरनाक कण अब भी हवा को जहरीला बना रहे हैं, यह संकेत है कि प्रदूषण का संकट अभी टला नहीं, बल्कि लगातार बदलते रूप में मौजूद है।
विश्लेषण के मुताबिक 04 अप्रैल 2026 को देश में टोंक सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 268 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि कल से राजस्थान के इस शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक में 59 अंकों का इजाफा हुआ है। मतलब कि वायु गुणवत्ता आज भी खराब बनी हुई है।
रुझानों में सामने आया है कि टोंक की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। टोंक में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 450 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में श्रीनगर की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 18 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर टोंक की तुलना श्रीनगर से करें तो वहां स्थिति 14.8 गुणा खराब है।
बता दें कि इससे पहले कल ग्रेटर नोएडा में वायु गुणवत्ता सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 325 दर्ज किया गया। हालांकि आज वहां एक्यूआई घटकर 172 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 153 अंकों का सुधार आया है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 266 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 137 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 129 अंकों की गिरावट आई है। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 209 दर्ज किया गया था, जो आज सुधरकर 133 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वायु गुणवत्ता एक बार फिर मध्यम श्रेणी में पहुंच गई।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 04 अप्रैल 2026 को 246 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 12.6 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 65 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 23.4 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 10.7 फीसदी का इजाफा हुआ है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 26 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से 28.2 फीसदी की कमी आई है। इसी तरह खराब हवा वाले शहरों में कल से 80 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जोकि राहत की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में अंगुल (242) दूसरे जबकि बिलीपाड़ा (248) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह बल्लभगढ़ (208) चौथे स्थान पर है। सिंगरौली-अररिया में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 198 और 197 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
श्री गंगानगर (191) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में मैसूर (173), ग्रेटर नोएडा (172) और सोनीपत (156) भी शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में राजस्थान के दो शहर (टोंक, श्री गंगानगर) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि बिलीपाड़ा, अररिया, सोनीपत, भिवानी, गुरुग्राम, बर्नीहाट (असम), चरखी दादरी, दिल्ली, फरीदाबाद, वातवा , कन्नूर, चंद्रपुर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं टोंक, बल्लभगढ़, सिंगरौली, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ, हाजीपुर, नयागढ़, बर्नीहाट (मेघालय), नोएडा, पीथमपुर, मंगुराहा, छाल, पटना, देवास, कानपुर, सवाई माधोपुर, जलगांव, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, बागपत, बद्दी, तालचेर, आगरा, मेरठ, हापुड़, बूंदी, नंदेसरी, कटक, फिरोजाबाद, गांधीनगर, ग्वालियर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 12.6 फीसदी यानी महज 31 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में कोयंबटूर, दमोह, डिंडीगुल, एलुरु, गुवाहाटी, हुबली, कलबुर्गी, खन्ना, कोहिमा, मदिकेरी, मैहर, मीरा-भायंदर, नलबाड़ी, नेल्लोर, पंचकुला, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, ऋषिकेश, रूपनगर, शिवसागर, श्रीनगर आदि शामिल हैं।
आज देश के जिन 160 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बीकानेर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बक्सर, चंडीगढ़, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, दौसा, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फतेहाबाद, गंगटोक, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलना, जालोर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कैथल, कल्याण, करौली, करनाल, कटिहार, कटनी, क्योंझर, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाड, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मानेसर, मंगलौर, मेहसाणा, मिलुपारा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नारनौल, नासिक आदि शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 51 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में आगरा, अररिया, औरंगाबाद (बिहार), बद्दी, बागपत, बारबिल, भावनगर, भिवानी, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), बर्नीहाट (मेघालय), चंद्रपुर, चरखी दादरी, छाल, कटक, दिल्ली, देवास, धनबाद, फरीदाबाद, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, ग्वालियर, हाजीपुर, हापुड़, जयपुर, जलगांव, कन्नूर, कानपुर, लखनऊ, मंगुराहा, मेरठ, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नंदेसरी, नयागढ़, नोएडा, पटना, पीथमपुर, सागर, सवाई माधोपुर, सिंगरौली, सोनीपत, श्री गंगानगर, तालचेर, वातवा आदि शामिल हैं।
इसी तरह अंगुल, बल्लभगढ़, बिलीपाड़ा, टोंक में वायु गुणवत्ता ‘खराब’ है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 246 में से महज 31 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 160 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 03 अप्रैल को यह आंकड़ा 127 दर्ज किया गया था।
51 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज टोंक में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 268 दर्ज किया गया। गौरतलब है कि कल से टोंक में प्रदूषण में इजाफा हुआ है जहां कल एक्यूआई 209 दर्ज किया गया था।
बता दें कि कल ग्रेटर नोएडा में एक्यूआई 325 दर्ज किया गया था, जहां आज एक्यूआई घटकर 172 पर पहुंच गया है। मतलब कि वहां पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 153 अंकों का सुधार आया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 266 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 137 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 129 अंकों की गिरावट आई है। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 209 दर्ज किया गया था, जो आज सुधरकर 133 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वायु गुणवत्ता एक बार फिर मध्यम श्रेणी में पहुंच गई।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 04 अप्रैल को बल्लभगढ़ चौथे स्थान पर है, वहीं अंगुल (242) दूसरे, जबकि बिलीपाड़ा (238) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 101, गाजियाबाद में 151, गुवाहाटी में 47, गुरूग्राम में 148, नोएडा में 136, ग्रेटर नोएडा में 172 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 57 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 150, चेन्नई में 56, चंडीगढ़ में 55, हैदराबाद में 73, जयपुर में 125 और पटना में 122 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 31 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अकोला, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), बागलकोट, बेतिया, भिलाई, चामराजनगर, कोयंबटूर, दमोह, डिंडीगुल, एलुरु, गुवाहाटी, हुबली, कलबुर्गी, खन्ना, कोहिमा, मदिकेरी, मैहर, मीरा-भायंदर, नलबाड़ी, नेल्लोर, पंचकुला, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, ऋषिकेश, रूपनगर, शिवसागर, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम, विजयपुरा शामिल हैं।
वहीं अगरतला, अहमदाबाद, आइजोल, अजमेर, अमरावती (आंधप्रदेश), अंबाला, अमृतसर, अनंतपुर, अंकलेश्वर, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बहादुरगढ़, बालासोर, बांसवाड़ा, बारां, बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बीकानेर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बक्सर, चंडीगढ़, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, दौसा, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फतेहाबाद, गंगटोक, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलना, जालोर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कैथल, कल्याण, करौली, करनाल, कटिहार, कटनी, क्योंझर, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाड, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मानेसर, मंगलौर, मेहसाणा, मिलुपारा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, पाली, पलवल, चगांव, परभणी, पटियाला, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायबरेली, रायपुर, रायरंगपुर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, रोहतक, राउरकेला, सहरसा, समस्तीपुर, सांगली, सतना, शिलांग, शिवमोगा, सीकर, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही, सिरसा, सिवान, सोलापुर, सुआकाती, सूरत, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तुमडीह, उदयपुर, उल्हासनगर, वडोदरा, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार, विशाखापत्तनम, वृंदावन, यादगीर, यमुना नगर आदि 160 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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