28 अप्रैल 2026 को जारी सरकारी वायु गुणवत्ता आंकड़ों ने देश में बढ़ते प्रदूषण संकट की चिंताजनक तस्वीर पेश की है। हरियाणा का कैथल इस दिन देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 370 तक पहुंच गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है।
यह स्थिति और गंभीर इसलिए मानी जा रही है क्योंकि एक ही दिन पहले यहां एक्यूआई 121 था, यानी महज 24 घंटों में प्रदूषण में 249 अंकों का तेज उछाल दर्ज हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार कैथल की हवा में सूक्ष्म कण (पीएम2.5) की अत्यधिक मौजूदगी इसे सीधे तौर पर स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बना रही है।
इसके उलट देश में रामनाथपुरम सबसे साफ शहर रहा, जहां एक्यूआई महज 16 दर्ज किया गया। तुलना करें तो कैथल की हवा रामनाथपुरम से करीब 23 गुणा अधिक प्रदूषित पाई गई। यह अंतर देश के भीतर वायु गुणवत्ता में भारी असमानता को उजागर करता है।
237 शहरों के विश्लेषण में सामने आया है कि महज 8.9 फीसदी शहरों में हवा ‘बेहतर’ पाई गई, जबकि लगभग 48.9 फीसदी शहर संतोषजनक श्रेणी में रहे। चिंता की बात यह है कि 42.2 फीसदी शहरों में वायु गुणवत्ता या तो मध्यम से खराब स्तर पर पहुंच चुकी है या तेजी से बिगड़ रही है। खास तौर पर खराब श्रेणी वाले शहरों की संख्या में पिछले 24 घंटों में लगभग 100 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।
दिल्ली में भी प्रदूषण बढ़ा है, जहां एक्यूआई 197 से बढ़कर 239 हो गया और स्थिति फिर से ‘मध्यम से खराब’ श्रेणी में पहुंच गई। मेरठ (287), भिवानी (314), फतेहाबाद (313), मानेसर और ग्रेटर नोएडा जैसे शहर लगातार उच्च प्रदूषण स्तर पर बने हुए हैं। विशेष रूप से हरियाणा के कई शहर देश के सबसे प्रदूषित क्षेत्रों में प्रमुखता से शामिल हैं।
इसके विपरीत फरीदाबाद में थोड़ी राहत देखने को मिली, जहां एक्यूआई 145 से घटकर 123 पर पहुंच गया। वहीं मुंबई, चेन्नई और गुवाहाटी जैसे कुछ शहरों में हवा अपेक्षाकृत बेहतर बनी रही।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 28 अप्रैल 2026 को देश में कैथल सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 370 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि कल कैथल में वायु गुणवत्ता सूचकांक 121 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 249 अंकों का भारी उछाल आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि कैथल की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
कैथल में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,300 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में रामनाथपुरम की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 16 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर कैथल की तुलना रामनाथपुरम से करें तो वहां स्थिति 23.1 गुणा खराब है।
इससे पहले कल (27 अप्रैल 2026) देश में मेरठ की स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 282 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज मेरठ में वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़कर 287 पर पहुंच गया है। मतलब कि मेरठ में वायु गुणवत्ता आज भी खराब बनी हुई है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 197 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 239 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 42 अंकों का इजाफा दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज एक बार फिर मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 93 पर पहुंच गया था। इसके बाद 01 अप्रैल को सूचकांक 113 दर्ज क्या गया। वहीं आज सूचकांक 114 रिकॉर्ड किया गया है। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 145 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 123 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 28 अप्रैल 2026 को 237 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 8.9 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 48.9 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 42.2 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 22.2 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 11.5 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से करीब 17.4 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरफ खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से करीब 100 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया, जोकि चिंता का विषय है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में भिवानी (314) दूसरे जबकि फतेहाबाद (313) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह भिवाड़ी (296) चौथे स्थान पर है। मेरठ-मानेसर में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 287 और 282 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
पंचगांव (277) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में पानीपत (275), मुजफ्फरनगर (274) और ग्रेटर नोएडा (258) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के छह शहर (कैथल, भिवानी, फतेहाबाद, मानेसर, पंचगांव, पानीपत) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि कैथल, भिवानी, फतेहाबाद, मेरठ, मानेसर, पंचगांव, जींद, वातवा, गाजियाबाद, करनाल, नारनौल, बहादुरगढ़, गुरुग्राम, सोनीपत, मंडी गोबिंदगढ़, कल्याण, धारूहेड़ा, रोहतक, जयपुर, लखनऊ, आगरा, कोटा, छपरा, खन्ना, फरीदाबाद, अहमदाबाद, अंबाला, सोलापुर, कानपुर, नागपुर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं भिवाड़ी, पानीपत, मुजफ्फरनगर, ग्रेटर नोएडा, कुरुक्षेत्र, बागपत, नोएडा, हापुड़, बल्लभगढ़, झुंझुनू, श्री गंगानगर, बीकानेर, चूरू, बुलंदशहर, सिंगरौली, बद्दी, हनुमानगढ़, नागौर, बारां, सवाई माधोपुर, परभनी, पटियाला, जालंधर, टोंक, अलवर, मेहसाणा, खुर्जा, चरखी दादरी, भीलवाड़ा, मुरादाबाद, मंडीदीप, झालावाड़, फिरोजाबाद, राउरकेला, नांदेड़, करौली, जोरापोखर, बूंदी, प्रतापगढ़, गुम्मिडीपूंडी, दौसा, विशाखापत्तनम, चंडीगढ़, सिरोही, अंकलेश्वर, गांधीनगर, वृंदावन, भरतपुर, पाली, सिरसा, बांसवाड़ा, बाड़मेर, बिलीपाड़ा, बेलापुर, सीकर, बठिंडा, चिक्काबल्लापुर, वडोदरा आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 8.9 फीसदी यानी महज 21 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में चेन्नई, गंगटोक, किशनगंज, कोहिमा, मदिकेरी, मंगुराहा, नाहरलागुन, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, रामनाथपुरम, रूपनगर, सहरसा, सांगली, सिलचर, तिरुवनंतपुरम, विजयपुरा शामिल हैं।
इसी तरह देश के 116 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, ब्रजराजनगर, बक्सर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चित्तौड़गढ़, कोयंबटूर, कटक, दमोह, देहरादून, देवास, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गया, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जैसलमेर, जलगांव, जलना, जालोर, झांसी, जोधपुर, कडप्पा, कलबुर्गी, कटिहार, कटनी, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मदुरै, महाद, मैहर, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नलबाड़ी, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, पलवल, पटना, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, सागर, समस्तीपुर, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सिलीगुड़ी, शिवसागर, सिवान, श्रीनगर, सुआकाती, सूरत, तालचेर, टेन्सा, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 71 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अलवर, अंबाला, अंगुल, अंकलेश्वर, बद्दी, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बाड़मेर, बठिंडा, बेलापुर, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भोपाल, बिलीपाड़ा, बूंदी, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चरखी दादरी, छपरा, चिक्काबल्लापुर, दौसा, धारूहेड़ा, फरीदाबाद, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गुम्मिडीपूंडी, ग्वालियर, हनुमानगढ़, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, झालावाड़, जोरापोखर, कल्याण, कानपुर, करौली, खन्ना, खुर्जा, कोटा, लखनऊ, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मेहसाणा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मैसूर, नागौर, नागपुर, नांदेड़, पाली, परभनी, पटियाला, प्रतापगढ़, रोहतक, राउरकेला, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरोही, सिरसा, सोलापुर, सोनीपत, टोंक, वडोदरा, विशाखापत्तनम, वृंदावन आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश में बागपत, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, भिवाड़ी, बीकानेर, बुलंदशहर, चूरू, दिल्ली, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, हापुड़, झुंझुनू, जींद, करनाल, कुरुक्षेत्र, मानेसर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नारनौल, नोएडा, पंचगांव, पानीपत, सिंगरौली, श्री गंगानगर, वातवा में स्थिति ‘खराब’ है। वहीं देश में कैथल (370), भिवानी (314) और फतेहाबाद (313) में स्थिति बेहद खराब है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 237 में से महज 21 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 116 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 27 अप्रैल को यह आंकड़ा 104 दर्ज किया गया था।
71 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज कैथल में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 370 दर्ज किया गया। गौरतलब है कि कल कैथल में वायु गुणवत्ता सूचकांक 121 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 240 अंकों का भारी इजाफा हुआ है। इसके साथ ही वायु गुणवत्ता ‘खराब’ से बेहद खराब हो गई है।
इससे पहले कल (27 अप्रैल 2026) देश में मेरठ की स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 282 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज मेरठ में वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़कर 287 पर पहुंच गया है। मतलब कि मेरठ में वायु गुणवत्ता आज भी खराब बनी हुई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 197 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 239 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 42 अंकों का इजाफा दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज एक बार फिर मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 145 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 123 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 28 अप्रैल को भिवाड़ी चौथे स्थान पर है, वहीं भिवानी (314) दूसरे, जबकि फतेहाबाद (313) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 126, गाजियाबाद में 254, गुवाहाटी में 56, गुरूग्राम में 208, नोएडा में 240, ग्रेटर नोएडा में 258 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 76 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 146, चेन्नई में 50, चंडीगढ़ में 110, हैदराबाद में 72, जयपुर में 155 और पटना में 81 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 21 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, अररिया, बेतिया, भिलाई, चामराजनगर, चेन्नई, गंगटोक, किशनगंज, कोहिमा, मदिकेरी, मंगुराहा, नाहरलागुन, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, रामनाथपुरम, रूपनगर, सहरसा, सांगली, सिलचर, तिरुवनंतपुरम, विजयपुरा शामिल हैं।
वहीं अगरतला, अहमदनगर, अकोला, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बागलकोट, बालासोर, बरेली, बारीपदा, बैरकपुर, बेगूसराय, बेलगाम, भागलपुर, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, ब्रजराजनगर, बक्सर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चित्तौड़गढ़, कोयंबटूर, कटक, दमोह, देहरादून, देवास, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गया, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जैसलमेर, जलगांव, जलना, जालोर, झांसी, जोधपुर, कडप्पा, कलबुर्गी, कटिहार, कटनी, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मदुरै, महाद, मैहर, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नलबाड़ी, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, पलवल, पटना, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, सागर, समस्तीपुर, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सिलीगुड़ी, शिवसागर, सिवान, श्रीनगर, सुआकाती, सूरत, तालचेर, टेन्सा, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, उदयपुर, उल्हासनगर, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार, यादगीर आदि 116 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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