31 मार्च 2026 को देश के कई शहरों में वायु गुणवत्ता का हाल खराब रहा।
245 शहरों के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला कि महज 15.5 फीसदी शहरों में हवा साफ थी, 58.4 फीसदी में स्थिति संतोषजनक रही, जबकि 26 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। हरियाणा के बल्लभगढ़ में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 264 दर्ज किया गया, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 4.5 गुणा अधिक है, और इसे देश का सबसे प्रदूषित शहर बना देता है।
हरियाणा के अन्य तीन शहर, गुरुग्राम, भिवानी और फरीदाबाद भी शीर्ष दस प्रदूषित शहरों में शामिल हैं।
दिल्ली और फरीदाबाद में हालात में मामूली सुधार देखा गया, जबकि मंडी गोबिंदगढ़, ग्रेटर नोएडा और सिंगरौली भी शीर्ष प्रदूषित शहरों में बने हुए हैं।
देश के अधिकांश शहरों में पीएम10 और पीएम2.5 हावी है, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है, जबकि पंपोर, कोहिमा और गंगटोक जैसे कुछ शहरों में हवा साफ बनी हुई है। कुल मिलाकर, राष्ट्रीय स्तर पर प्रदूषण में उतार-चढ़ाव जारी है, और अधिकांश शहरों की वायु गुणवत्ता संतोषजनक या मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
विश्लेषण के मुताबिक 31 मार्च 2026 को देश में बल्लभगढ़ सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 264 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि कल हरियाणा के इस शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 234 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 30 अंकों का उछाल आया है।
रुझानों में सामने आया है कि बल्लभगढ़ की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। बल्लभगढ़ में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 450 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में पंपोर की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 15 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर बल्लभगढ़ की तुलना गंगटोक से करें तो वहां स्थिति 17.6 गुणा खराब है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 180 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 171 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 9 अंकों का सुधार हुआ है। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 179 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 176 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 31 मार्च 2026 को 245 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 15.5 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 58.4 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 26.1 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 11.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 3.6 फीसदी का इजाफा हुआ है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में भी कल से 5.4 फीसदी का उछाल आया है। दूसरी तरह खराब हवा वाले शहरों में कल से 37.5 फीसदी की गिरावट आई है, जोकि राहत की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में मंडी गोबिंदगढ़ (263) दूसरे जबकि गुरुग्राम (234) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह ग्रेटर नोएडा (218) चौथे स्थान पर है। सिंगरौली-भिवानी में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 212 और 184 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
टोंक (181) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में गाजियाबाद (178), फरीदाबाद (176) और दिल्ली (171) भी शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के चार शहर (बल्लभगढ़, गुरुग्राम, भिवानी, फरीदाबाद) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि मंडी गोबिंदगढ़, भिवानी, दिल्ली, मानेसर, चरखी दादरी, उज्जैन, यमुना नगर, मंडीदीप, पंचगांव, प्रतापगढ़, कैथल, रोहतक, लुधियाना, हाजीपुर, बर्नीहाट (मेघालय), चंद्रपुर, जयपुर, गुम्मिडीपूंडी आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं बल्लभगढ़, गुरुग्राम, ग्रेटर नोएडा, सिंगरौली, गाजियाबाद, फरीदाबाद, भिवाड़ी, नोएडा, सोनीपत, बद्दी, बुलंदशहर, सिरसा, बागपत, पीथमपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, लखनऊ, मिलुपारा, बीकानेर, पानीपत, बिलीपाड़ा, श्री गंगानगर, खुर्जा, कुरुक्षेत्र, पाली, अलवर, ग्वालियर, हिसार, रतलाम, पटियाला, नयागढ़, गया, सीकर, गांधीनगर, नासिक, बारबिल, पटना, चूरू, देवास, पलवल, प्रयागराज, विशाखापत्तनम आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 15.5 फीसदी यानी महज 38 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में भिलाई, बोइसर, चामराजनगर, छपरा, डिंडीगुल, एलुरु, गंगटोक, गुवाहाटी, कलबुर्गी, किशनगंज, कोहिमा, कोप्पल, मदिकेरी, मुंबई, नागांव, नलबाड़ी, नवी मुंबई, पंपोर, परभनी, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, ऋषिकेश, रूपनगर, शिलांग, सिलचर, शिवसागर, श्रीनगर, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, तिरुपति, उडुपी आदि शामिल हैं।
आज देश के जिन 143 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें बूंदी, बक्सर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कोयंबटूर, कटक, दमोह, दौसा, देहरादून, धनबाद, धौलपुर, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फिरोजाबाद, गोरखपुर, गुंटूर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कानपुर, करौली, करनाल, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, मछलीपट्टनम, महाड, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मंगुराहा, मेहसाणा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नारनौल, नेल्लोर, पंचकुला, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, राउरकेला आदि शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 59 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में अलवर, औरंगाबाद (बिहार), बद्दी, बागपत, बारबिल, भिवाड़ी, भिवानी, बीकानेर, बिलीपाड़ा, बुलंदशहर, बर्नीहाट (मेघालय), चंद्रपुर, चरखी दादरी, चूरू, दिल्ली, देवास, फरीदाबाद, गांधीनगर, गया, गाजियाबाद, गुम्मिडीपूंडी, ग्वालियर, हाजीपुर, हिसार, जयपुर, कैथल, कल्याण, खुर्जा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मंडीदीप, मानेसर, मेरठ, मिलुपारा, मुजफ्फरनगर, नासिक, नयागढ़, नोएडा, पाली, पलवल, पंचगांव, पानीपत, पटियाला, पटना, पीथमपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, रतलाम, रोहतक, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरसा, सोनीपत, श्री गंगानगर, टोंक, उज्जैन, विशाखापत्तनम, यमुना नगर शामिल हैं।
इसी तरह बल्लभगढ़, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, मंडी गोबिंदगढ़, सिंगरौली में वायु गुणवत्ता ‘खराब’ है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 245 में से महज 38 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 143 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 30 मार्च को यह आंकड़ा 138 दर्ज किया गया था।
59 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज बल्लभगढ़ में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 264 दर्ज किया गया। वहीं कल बल्लभगढ़ में सूचकांक 234 रिकॉर्ड किया गया। मतलब कि कल से प्रदूषण के स्तर में 30 अंकों का इजाफा हुआ है।
इससे पहले कल देश में (30 मार्च) को रोहतक में वायु गुणवत्ता सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 271 दर्ज किया गया था। हालांकि आज वहां वायु गुणवत्ता में 146 अंकों का सुधार आया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 180 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 171 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 9 अंकों का सुधार हुआ है। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 179 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 176 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 31 मार्च को ग्रेटर नोएडा चौथे स्थान पर है, वहीं मंडी गोबिंदगढ़ (263) दूसरे, जबकि गुरुग्राम (234) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 110, गाजियाबाद में 178, गुवाहाटी में 44, गुरूग्राम में 234, नोएडा में 166, ग्रेटर नोएडा में 218 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 42 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 136, चेन्नई में 66, चंडीगढ़ में 84, हैदराबाद में 71, जयपुर में 109 और पटना में 103 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 38 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बागलकोट, बेतिया, भिलाई, बोइसर, चामराजनगर, छपरा, डिंडीगुल, एलुरु, गंगटोक, गुवाहाटी, कलबुर्गी, किशनगंज, कोहिमा, कोप्पल, मदिकेरी, मुंबई, नागांव, नलबाड़ी, नवी मुंबई, पंपोर, परभनी, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, ऋषिकेश, रूपनगर, शिलांग, सिलचर, शिवसागर, श्रीनगर, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, तिरुपति, उडुपी, विजयपुरा, विरार शामिल हैं।
वहीं अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, आइजोल, अजमेर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमृतसर, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, आसनसोल, बदलापुर, बालासोर, बांसवाड़ा, बारां, बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, ब्रजराजनगर, बूंदी, बक्सर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कोयंबटूर, कटक, दमोह, दौसा, देहरादून, धनबाद, धौलपुर, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फिरोजाबाद, गोरखपुर, गुंटूर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कानपुर, करौली, करनाल, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, मछलीपट्टनम, महाड, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मंगुराहा, मेहसाणा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नारनौल, नेल्लोर, पंचकुला, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, राउरकेला, सागर, सहरसा, समस्तीपुर, सांगली, सतना, सिलीगुड़ी, सिरोही, सोलापुर, सुआकाती, सूरत, तालचेर, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तुमडीह, उदयपुर, उल्हासनगर, वडोदरा, वाराणसी, वातवा, विजयवाड़ा, वृंदावन, यादगीर आदि 143 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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