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कृषि

जनवरी 2026: वैश्विक बाजार में लगातार पांचवें महीने गिरी खाद्य कीमतें, दूध-चीनी हुए सस्ते

दुनिया में दूध और चीनी के दाम घटने से महंगाई का दबाव कुछ कम हुआ है, हालांकि तेल और चावल की बढ़ती कीमतें चुनौती बनी हुई हैं

Lalit Maurya

  • संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2026 में वैश्विक खाद्य कीमतों में लगातार पांचवें महीने गिरावट दर्ज की गई।

  • इस दौरान दूध, चीनी और मांस जैसे जरूरी उत्पादों के दाम घटने से महंगाई का दबाव कुछ कम हुआ है। हालांकि चावल और वनस्पति तेल की कीमतों में बढ़ोतरी चिंता का कारण बनी हुई है।

  • अनाज के दाम लगभग स्थिर रहे, जबकि खुशबूदार चावल की बढ़ती मांग से चावल महंगा हुआ। वहीं पाम ऑयल, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल की कीमतों में तेजी देखी गई। कुल मिलाकर वैश्विक बाजार में राहत के संकेत हैं, लेकिन कुछ जरूरी वस्तुओं की महंगाई आने वाले महीनों में चुनौती बनी रह सकती है।

भारत सहित दुनिया भर में महंगाई की मार झेल रहे करोड़ों लोगों के लिए जनवरी का महीना कुछ राहत लेकर आया है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर खाद्य कीमतों में लगातार पांचवें महीने गिरावट दर्ज की गई।

इस दौरान दूध, चीनी और मांस जैसे जरूरी उत्पादों के दाम कम होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में थोड़ी नरमी आई है, हालांकि चावल और वनस्पति तेल की बढ़ती कीमतें अब भी चिंता का कारण बनी हुई हैं।

गौरतलब है कि एफएओ का फूड प्राइस इंडेक्स, जो वैश्विक स्तर पर कारोबार होने वाली खाद्य उत्पादों की कीमतों में मासिक बदलाव को दर्शाता है, जनवरी में औसतन 123.9 अंक पर रहा। यह दिसंबर 2025 की तुलना में 0.4 फीसदी कम और पिछले साल की इसी अवधि से 0.6 फीसदी नीचे है।

अनाज के दाम लगभग स्थिर, चावल महंगा

रिपोर्ट के मुताबिक अनाज की कीमतों में दिसंबर 2025 की तुलना में मामूली 0.2 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया। हालांकि दूसरी तरफ गेहूं और मक्के की वैश्विक कीमतों में हल्की गिरावट देखी गई। बता दें कि जनवरी में अनाज मूल्य सूचकांक औसतन 107.5 अंक रिकॉर्ड किया गया।

खाद्य संगठन ने जानकारी दी है कि दुनिया में गेहूं का पर्याप्त भंडार होने के कारण रूस और अमेरिका में मौसम से जुड़ी चिंताओं का असर सीमित रहा। अर्जेंटीना और ऑस्ट्रेलिया में अच्छी फसल की उम्मीद और दुनिया में ऊंचे भंडार भी कीमतों को नीचे रखने में मदद कर रहे हैं। इसके उलट, जनवरी में चावल की कीमतों में 1.8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। खासकर खुशबूदार किस्मों की मांग बढ़ने से बाजार में मजबूती आई है।

अन्य मोटे अनाजों में जौ की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी हुई, क्योंकि अर्जेंटीना से आपूर्ति की मांग मजबूत रही। वहीं ज्वार की कीमतें गेहूं की तरह ही थोड़ी नरम हुईं।

महंगा हुआ तेल

रिपोर्ट दर्शाती है कि जनवरी में वनस्पति तेल सूचकांक में 2.1 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया, जो दिसंबर में 165.2 से जनवरी 2026 में बढ़कर 168.6 अंकों पर पहुंच गया।

इसके कारणों पर नजर डालें तो दक्षिण-पूर्व एशिया में उत्पादन की मौसमी सुस्ती और आयात मांग बढ़ने से पाम ऑयल महंगा हुआ। इस दौरान सोयाबीन तेल की कीमतों में भी उछाल देखा गया, क्योंकि दक्षिण अमेरिका में निर्यात आपूर्ति घट रही है और अमेरिका में बायोफ्यूल की मांग मजबूत रहने की उम्मीद है।

इसी तरह ब्लैक सी क्षेत्र में आपूर्ति की कमी के चलते सूरजमुखी तेल के दाम भी बढ़ते देखे गए।

चीनी-मांस सस्ते, डेयरी उत्पादों में बड़ी राहत

एफएओ द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2026 में मांस मूल्य सूचकांक में 0.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।

इसके साथ ही यह सूचकांक 124.2 से घटकर 123.8 पर पहुंच गया। हालांकि ब्राजील से बढ़ते निर्यात के कारण पोल्ट्री (मुर्गी) की कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई।

जनवरी में सबसे ज्यादा गिरावट डेयरी उत्पादों में देखी गई, जब डेयरी मूल्य सूचकांक में करीब पांच फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक बाजार में मक्खन और चीज की पर्याप्त उपलब्धता के कारण दामों में नरमी देखी गई। हालांकि स्किम्ड मिल्क पाउडर की कीमतों में मजबूती रही, क्योंकि पश्चिम एशिया, उत्तरी अफ्रीका और एशिया के कुछ हिस्सों से मांग फिर बढ़ रही है।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि जनवरी 2026 के दौरान चीनी की कीमतों में भी गिरावट रही। आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान चीनी मूल्य सूचकांक में एक फीसदी की गिरावट रिकॉर्ड की गई।

आंकड़ों से पता चला है कि चीनी मूल्य सूचकांक जो दिसंबर 2025 में 90.7 था, वो जनवरी 2026 में घटकर 89.8 पर पहुंच गया। इसके कारणों पर नजर डालें तो भारत में उत्पादन में बड़ी बढ़ोतरी, थाईलैंड से अच्छे संकेत और ब्राजील में सकारात्मक उत्पादन के अनुमान के चलते आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद है। इसका सीधा असर कीमतों में देखा गया।

कुल मिलाकर देखें वैश्विक खाद्य बाजार में फिलहाल राहत के संकेत हैं, लेकिन तेल और चावल जैसी कुछ जरूरी वस्तुओं की बढ़ती कीमतें चिंता बढ़ा सकती हैं। हालांकि आने वाले महीनों में मौसम, उत्पादन और अंतरराष्ट्रीय मांग खाद्य कीमतों की दिशा तय करेंगे।